10/06/2026
Loyalty points and membership cards are designed to move beyond simple transactions, fostering emotional and financial bonds between brands, Bhartiya civilizational value and customers. While traditional systems relied on physical cards, modern programs emphasize digital integration and personalized value.
ब्रह्मांड की ध्वनि ॐ है, जीवनदाता सूर्य की ध्वनि ॐ ही है। निज शांति से विश्व शांति का मार्ग है और हम इसके लिए संकल्पित हैं। मन, बुद्धि और चित्त को स्थिर करने की ध्वनि ॐ और शान्ति का मार्ग ॐ। भारतीय समाज अनन्तकाल से ही विश्व कल्याण और शान्ति की कामना करता आया है। शान्ति कार्ड विश्व को एक नया मार्ग और नई दिशा देगा; यही “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का मार्ग होगा।
ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः
पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः।
वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः
सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
मेरी शांति, आपकी शांति, समाज शांति, राष्ट्र शांति से विश्व शांति का मार्ग, शांति कार्ड आपका आर्थिक बोझ कम करने का मार्ग। क्योंकि सनातन, 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का पालन करता है। विश्व एक परिवार का मतलब ही है कोई युद्ध नहीं, कोई षड्यंत्र नहीं, कोई अपना-पराया नहीं - सब अपने है, इसलिए विश्वास शांति स्वाभाविक और प्राकृतिक है।
प्राचीन कल से भारत में सेवाओं का आदान-प्रदान होता था, आज वही पॉइंट में... आप मंदिर सेवा का 80% तक और वस्तुओं का 20% तक का भुगतान पॉइंट्स से कर सकते हैं। शांति कार्ड एक रिवार्ड प्रोग्राम कार्ड है, जिसमें प्रत्येक खरीददारी पर पॉइंट्, शाश्वत प्रांगण में आशीर्वाद से साथ पॉइंट् भी, शाश्वत प्रांगण में सेवा शुल्क भुगतान भी पॉइंट् से। खरीदी, सेवा, सुविधा, संरक्षण और लाभ भी, शांति कार्ड द्वारा। नियुंतम एवं अधिकतम सीमा रेखा शांति।
समृद्धि पॉइंट्स संचय का मार्ग: शाश्वत कार्ड से शांति कार्ड नेटवर्क हेतु
• शाश्वत कार्ड में पैसे डालते ही: उतना ही समृद्धि पॉइंट्स
• शाश्वत प्रांगण दान: दान का दोगुना समृद्धि पॉइंट्स
• शाश्वत प्रांगण में समयदान: 50 से 500 समृद्धि पॉइंट्स
• शाश्वत प्रांगण आरती या अनुष्ठान में सहभागिता: 5 से 50 समृद्धि पॉइंट्स
• शाश्वत हिन्दू सेवक: 50 से 500 समृद्धि पॉइंट्स
• सनातनी संस्था सेवक: 50 से 500 समृद्धि पॉइंट्स
समृद्धि पॉइंट्स द्वारा भुगतान किये जाने पर सीमा रेखा:
• शाश्वत बाजार में: 5% से 20%
• प्रांगण में वस्तुओं पर: 5% से 20%
• शाश्वत प्रांगण सेवा पर: 20% से 80%
• लाखो दुकानों में: 5% से 20%
• लाखों सनातनी और समर्थित अनलाइन ख़रीद पर: 2% से 50%
शांति कार्ड की श्रेणी प्रकृति निर्माण सिद्धांत अनुसरण;
• भूमि तत्त्व में शब्द, स्पर्श, रूप, रस एवं गन्ध
• वायु तत्त्व में शब्द, स्पर्श, रूप और रस
• अग्नि तत्त्व में शब्द, स्पर्श और रूप
• जल तत्त्व में शब्द और स्पर्श
• आकाश तत्त्व में केवल शब्द है
जैसे-जैसे तन्मात्रा का समावेश होता जाता है, तामसिक अहंकार बढ़ता जाता है और निम्नतर कोटि के चीजों का निर्माण होता जाता है। मनुष्य के ब्रह्मलीन होने के विभिन्न क्रम भी यही हैं, जो योगी भोजन करते हैं, आगे बढ़ने पर फिर सिर्फ़ जल ग्रहण, फिर तैजस या अग्नि के विभिन्न रूप का ग्रहण फिर, सिर्फ़ हवा पर निर्भर। अंत में श्वास का त्याग और शब्द का भोजन। फिर वो भी छोड़ कर आकाश में ब्रह्मलीन हो जाते हैं, सब कुछ शांत...
निज शांति से विश्व शांति को समर्पित
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥