ITIHASA

ITIHASA It aims at rediscovering the true chronology and history of ancient India.

International True Indian History Association with Scientific Approach (A Forum under Eternal Hindu for rediscovering the true chronology and history of ancient India).

04/04/2026
04/04/2026
हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ आज पवनपुत्र हनुमान की जयंती है। शास्त्रों के अनुसार भगवान हनुमान का जन्म त्रेता य...
02/04/2026

हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ

आज पवनपुत्र हनुमान की जयंती है। शास्त्रों के अनुसार भगवान हनुमान का जन्म त्रेता युग में चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को माना जाता है, जिसे आज हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार उनका जन्म माता अंजना और वानरराज केसरी के यहाँ हुआ तथा उन्हें पवनदेव का पुत्र भी माना जाता है, इसलिए वे “पवनपुत्र” कहलाते हैं। हालांकि भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग समय पर भी श्री हनुमान जी का जन्मदिन मनाया जाता है - जैसे दक्षिण भारत के कुछ भागों में अन्य तिथियों पर भी जन्मोत्सव मनाया जाता है—लेकिन सामान्यतः चैत्र पूर्णिमा को ही उनका जन्मदिन स्वीकार किया जाता है।

भगवान हनुमान सनातन परंपरा और हिंदू जातीय अस्मिता में भक्ति, शक्ति, साहस और सेवा के आदर्श प्रतीक हैं। श्री हनुमान, रामायण में भगवान राम के परम भक्त के रूप में दिखाई देते हैं, जिन्होंने निःस्वार्थ भाव से उनकी सेवा की और हर संकट में उनका साथ दिया।

समुद्र लांघना, लंका दहन करना और संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण के प्राण बचाना उनके साहस और पराक्रम के उदाहरण हैं। वे अत्यंत बलशाली होने के साथ-साथ विद्वान और विनम्र भी थे, इसलिए उन्हें भक्ति और बुद्धि का संगम माना जाता है। हनुमान जी को “संकट मोचन” कहा जाता है और लोग उनसे साहस, आत्मविश्वास तथा कठिनाइयों से मुक्ति की प्रेरणा प्राप्त करते हैं।

श्रीराममय राष्ट्र, हनुमान को अपने सबसे करीब पाता है जब वह किसी भी संकट में स्वयं को पाता है, जब वह असहाय महसूस करता है, जब वह शक्ति से हीन महसूस करता है अथवा जब वह भूत प्रेत और आततायी शक्तियों से घिर जाता है।

आप सबने एक वायरल हुई श्री हनुमान की तस्वीर ज़रूर देखी होगी जिसमें उनकी छवि में एक आक्रोश दिखाई पड़ता है। मानो बरसों बरस टेंट में विराजमान रामलला को देखकर अब श्री हनुमान आक्रोशित हो गए थे। यह ध्यातव्य है कि उन्हीं दिनों श्रीराम मंदिर की भूमिका, वैधानिक दृष्टि से स्थापित हुई थी। एक प्रकार से देश की जनता ने अपने आक्रोश को श्री हनुमान की उस छवि में अभिव्यक्ति दी थी। श्री हनुमान की एक अन्य छवि ध्यान में लाइए जिसमें वे श्रीराम के प्रति अपनी एकनिष्ठ और अगाध भक्ति में लीन हैं, औसत सनातनियों ने उस छवि में अपनी भक्ति को साकार रूप में अनुभूत किया.

हनुमान चालीसा कंठस्थ कर, उसे गाकर, उसे सुनकर करोड़ों सनातनी स्वयं को उस शक्ति से जोड़ लेते हैं जो उन्हें अपने अराध्य से एकाकार कर देते हैं और हरेक मुसीबत में उबर जाने का इत्मिनान प्रदान करते हैं। कहना न होगा कि हनुमान हरेक सनातनी के लिए शक्ति और भक्ति का प्रतीक बनकर उसके मन-मंदिर में विराजित हैं।

वास्तव में, हनुमान जयंती भारत का एक पूर्ण महत्त्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व है, जो भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व हिंदू धर्म में विशेष आस्था और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। भक्तजन इस दिन भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना करते हैं और उनसे शक्ति, साहस, बुद्धि तथा संकटों से मुक्ति की कामना करते हैं। हनुमान जयंती के दिन भक्त प्रातः स्नान कर मंदिर जाते हैं और हनुमान जी की पूजा करते हैं। उन्हें सिंदूर, चोला, चमेली का तेल और लड्डू अर्पित किए जाते हैं। हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और रामायण का पाठ किया जाता है। कई स्थानों पर शोभायात्राएँ निकाली जाती हैं और भंडारे आयोजित किए जाते हैं।कुछ भक्त इस दिन उपवास रखते हैं और शाम को पूजा के बाद फलाहार करते हैं। मंदिरों में विशेष सजावट होती है और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है।

वर्तमान समय में हनुमान जयंती का स्वरूप अधिक व्यापक हो गया है। शहरों और गाँवों में सामूहिक पूजा, भंडारा और सेवा कार्य आयोजित किए जाते हैं। कुछ स्थानों पर हनुमान जयंती पर रक्तदान शिविर, गरीबों को भोजन वितरण और सामाजिक सेवा कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। इस प्रकार यह पर्व सेवा और सनातन के मूल्यों को भी बढ़ावा देता है।

आइये हम सब अपने अराध्य श्री हनुमान की जयंती को पूरी आत्मीयता और उल्लास के साथ मनाएँ। इसके लिए हम निजी और सामूहिक तौर पर कई कार्य कर सकते हैं:

- अपने घर पर श्री हनुमान पताका लगाएँ / फहराएँ।

- स्नान ध्यान के पश्चात मंदिर अवश्य जाएँ।

- अपने मंदिरों में हनुमान चालीसा पाठ करें

- मंदिरों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करें।

डॉ गुंजन कुमार झा
राष्ट्रीय मंत्री (कला और संस्कृति)

27/03/2026

रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएँ

क्या आप जानते है?

श्री राम जी का जन्म 3 फरवरी 5674 BCE में हुआ था, 7700 वर्ष पूर्व (5674 + 2026 = 7700 वर्ष पूर्व)

डॉ. वेदवीर आर्य के शोध पर आधारित

27/03/2026

श्री राम जी का जन्म 3 फरवरी 5674 BCE में हुआ था, 7700 वर्ष पूर्व (5674 + 2026 = 7700 वर्ष पूर्व)

डॉ. वेदवीर आर्य

19/03/2026

🚩।। नूतन संवत्सर की मंगलमय शुभकामनाएँ ।। 🚩

आज अत्यंत हर्ष और गर्व का विषय है कि हम विक्रम संवत २०८१ (वर्तमान संवत) के पावन आगमन के साक्षी बन रहे हैं। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का यह पावन दिन केवल कैलेंडर बदलने की तिथि नहीं है, बल्कि यह हमारी सनातन संस्कृति की जीवंतता, प्रकृति के पुनर्जन्म और ब्रह्मांड की रचना का उत्सव है।

हमारा नववर्ष, प्रकृति का नववर्ष:
जहाँ पाश्चात्य नववर्ष कड़कड़ाती ठंड और अंधेरे में आता है, वहीं हमारा हिंदू नववर्ष तब आता है जब प्रकृति स्वयं दुल्हन की तरह सजती है। पेड़ों पर नई कोंपलें फूटती हैं, चारों ओर फूलों की सुगंध होती है और फसलें लहलहाती हैं। इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी और प्रभु श्री राम का राज्याभिषेक हुआ था।

विशेष आग्रह:
एक संगठन के रूप में हमारा लक्ष्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ना है। मेरा आप सभी सनातनी भाई-बहनों से विनम्र निवेदन है कि इस नववर्ष को पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मनाएं:

ध्वजारोहण:
अपने घरों की छतों पर 'धर्म ध्वज' (भगवा झंडा) अवश्य लगाएं। यह हमारी एकता और विजय का प्रतीक है।

पूजा और संकल्प:
सुबह स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और अपने घर में सुख-समृद्धि के लिए पूजन करें। इस वर्ष राष्ट्र और धर्म की सेवा का एक 'संकल्प' अवश्य लें।

पारंपरिक खान-पान:
नीम की पत्तियों और मिश्री का सेवन कर अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की परंपरा को निभाएं।

संस्कारों का हस्तांतरण:
अपने बच्चों को बताएं कि क्यों हमारा नववर्ष वैज्ञानिक और आध्यात्मिक रूप से श्रेष्ठ है। उन्हें अपनी गौरवशाली परंपराओं से परिचित कराएं।

एकता का संदेश:
हिंदू समाज का संगठित होना अत्यंत आवश्यक है। यह नववर्ष हमें अवसर देता है कि हम आपसी भेदभाव भुलाकर 'वसुधैव कुटुंबकम' और 'स्वधर्मे निधनं श्रेयः' के भाव को आत्मसात करें। आइए, हम सब मिलकर शपथ लें कि हम अपनी संस्कृति का संरक्षण करेंगे और समाज के अंतिम व्यक्ति तक धर्म का प्रकाश पहुंचाएंगे।

माँ दुर्गा के आशीर्वाद से यह नूतन वर्ष आपके और आपके परिवार के जीवन में सुख, शांति, यश और आरोग्य लेकर आए।

एक बार पुनः आप सभी को हिंदू नववर्ष की अनंत बधाइयां!

डॉ गुंजन झा
राष्ट्रीय मंत्री (संस्कृति)

Address

1st Floor, House/49, Street No/1, Vaishali, Palam-Dabri, New Delhi/
Delhi
110045

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