03/08/2026
*नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय ।*
*भस्मांग रागाय महेश्वराय।*
*नित्याय शुद्धाय दिगंबराय ।*
*तस्मै न काराय नमः शिवायः॥*
✍ भारत मे अधिकांश मनुष्य शिव/शकर/महेश को पूजता/अपना आराध्य मानता है ।
✍किसी को पूजने/मानने का अंतर्निहित अर्थ/आशय है कि वह उसके जैसा बनना चाहता है ।
✍ भगवान शिव सांपों का कण्ठहार पहनते हैं यानि उनके भक्त को भी अप्रिय व्यक्ति को अपनाने/सहन करने की क्षमता होनी चाहिए ।
✍ चंद्राकार तीसरा नेत्र शांत, शीतल, अनर्गल क्रोधरहित होने को प्रेरित करता है ।
✍ पूरे शरीर पर लगी चिताभस्म, जीवन के अन्तिम सत्य मृत्यु को हमेशा ध्यान में रखते हुए श्रेष्ठ कर्म करने को प्रेरित करती है ।
✍ *यथा पिंडे तत ब्रह्माण्डे* यानि हमारे स्थूल शरीर का आचरण ब्रह्माण्ड/प्रकृति के अनुरूप ही होना चाहिए ।
*आज दिनाँक 3 अगस्त, 2026, श्रावण/सावन मास के प्रथम सोमवार की पावन मंगल बेला में, दिगम्बर रूपी भगवान शिव प्रेरित जीवन के संकल्प के साथ, नित्य की भाँति, आपको मेरा "राम-राम" ।*
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*व्यस्त रहेंगे -तो मस्त रहेंगे*
*मस्त रहेंगे -तो स्वस्थ रहेंगे*