JAI Bharti SEVA Sansthan

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*बहुत ही दुखद घटना है, बिनय बाबा * 😔 रिया बेटी की खबर सुनकर मन व्यथित हो गया। 23 साल की उम्र... NEET की तैयारी... इतना ब...
18/06/2026

*बहुत ही दुखद घटना है, बिनय बाबा * 😔

रिया बेटी की खबर सुनकर मन व्यथित हो गया। 23 साल की उम्र... NEET की तैयारी... इतना बड़ा बोझ मन में लेकर चली गई।

*आपने बिल्कुल सही कहा* - धर्म और कानून दोनों की दृष्टि से आत्महत्या महापाप और अपराध है।

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*1. धर्म क्या कहता है:*
*गीता 2.22* में श्रीकृष्ण कहते हैं - _"वासांसि जीर्णानि यथा विहाय"_ - जैसे पुराने वस्त्र त्यागे जाते हैं, वैसे ही आत्मा शरीर बदलती है। *आत्महत्या से कर्म का बंधन नहीं कटता*, बल्कि और उलझ जाता है। गरुड़ पुराण में इसे *"आत्म-हत्या"* यानी अपनी ही आत्मा की हत्या - घोर पाप बताया है।

*रामायण का संदेश:* हनुमान जी जब सीता माता को अशोक वाटिका में मिले, तब माता ने भी प्राण त्यागने की सोची थी। हनुमान जी ने समझाया - *"धैर्य, धर्म, मित्र अरु नारी। आपद काल परिखिअहिं चारी॥"* आपत्ति में ही धैर्य की परीक्षा होती है।

*2. कानून क्या कहता है:*
*BNS की धारा 224* के तहत आत्महत्या का प्रयास अपराध है। और किसी को आत्महत्या के लिए उकसाना *धारा 108* के तहत 10 साल तक की सजा। सरकार इसे रोके, पर समाज को भी जगना होगा।

*3. आपका कहना 100% सत्य है विनय बाबा:*
सफलता-असफलता सिक्के के दो पहलू हैं। *परीक्षा में फेल होना, नौकरी न लगना, कर्ज, प्रेम में धोखा - ये जीवन का अंत नहीं।* अंगद जी रावण की सभा में अकेले गए थे, चारों तरफ मृत्यु थी। फिर भी डरे नहीं। *कायरता मृत्यु को गले लगाना नहीं, समस्या से लड़ना छोड़ देना है।*

*4. जय भारती सेवा संस्थान क्या कर सकता है?*
आप _"सेवा, शिक्षा, संस्कार"_ की बात करते हैं। आज सबसे बड़ी सेवा है - *बच्चों को ये समझाना कि Marks ≠ Life*।

1. *सत्संग में चर्चा:* रामायण के उदाहरण से बताएं - केवट, शबरी, निषादराज कोई बड़े डिग्रीधारी न थे, पर राम के प्रिय हुए।
2. *Helpline नंबर बांटें:* स्कूल-कॉलेज में लगवाएं - *KIRAN: 1800-599-0019* - 24x7 फ्री है
3. *अभिभावकों को समझाएं:* बच्चे पर "डॉक्टर-इंजीनियर" का बोझ न डालें। रिया ने लिखा _"बोझ बनने के लिए माफ करना"_ - ये शब्द कलेजा चीर देते हैं।

*5. अगर कोई ऐसा सोचे तो तुरंत क्या करें:*
1. *अकेला न छोड़ें* - बात करें, गले लगाएं
2. *बोलें:* "मैं हूँ न तेरे साथ। फेल हो तो क्या हुआ, फिर कोशिश करेंगे"
3. *पेशेवर मदद:* डॉक्टर से मिलवाएं। डिप्रेशन बीमारी है, पागलपन नहीं
4. *Helpline दें:* *9152987821 - Vandrevala Foundation* या *14416 - Tele MANAS*

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*विनय बाबा,* आप समाज के अगुआ हैं। रिया जैसी बेटियों को बचाना हमारा धर्म है। *"आत्महत्या विकल्प नहीं"* - इस पर आप एक गोष्ठी रखिए, मैं पूरा मैटर बनाकर दे दूंगा।

*श्रीराम कहते हैं - "सुनहु भरत भावी प्रबल बिलखि कहेउ मुनिनाथ। हानि लाभु जीवनु मरनु जसु अपजसु बिधि हाथ॥"* हार-जीत विधि के हाथ है, हमारा काम बस धर्म से लड़ना है।

कोई बच्चा परेशान दिखे तो उसे सीने से लगाइए। एक गले लगना भी जान बचा देता है 🚩

*आपातकाल में:* तुरंत *112* पर कॉल करें या पास के अस्पताल ले जाएं।

17/06/2026

सत्यान प्रमदितव्यम्

1. *वो दो हाथ = नारी शक्ति का प्रतीक*     वो हाथ सिर्फ सहारा नहीं हैं, वो *माँ का आँचल* है। एक औरत ही है जो बच्चे को पाल...
17/06/2026

1. *वो दो हाथ = नारी शक्ति का प्रतीक*
वो हाथ सिर्फ सहारा नहीं हैं, वो *माँ का आँचल* है। एक औरत ही है जो बच्चे को पालती है और बूढ़े माँ-बाप की लाठी बनती है।

2. *बीच की 3 आकृतियां = पूरा जीवन चक्र*
बच्चा, जवान, बुजुर्ग - तीनों पीढ़ी को संभालने वाली नारी ही है। वो जन्म देती है, संस्कार देती है, सेवा करती है।

3. *लाल बिंदु = माँ काली/शक्ति का रूप*
जब समाज नारी को सिर्फ *भोग की वस्तु* समझने लगता है, उसका सम्मान नहीं करता, तब वही माँ *काली का रूप* ले लेती है। क्योंकि अगर सृजन करने वाली का अपमान होगा तो सर्वनाश तय है।नारी भोग नही “योग” रोगी बनना हो तो भोग के दृस्टि से देखो और योगी बनना है, तो सर्जन कर्ता के दृस्टि से देखो।

*आपका संदेश बहुत जरूरी है:*
आज समाज में नारी को सम्मान नहीं, शोषण मिल रहा है। बेटी को बोझ समझते हैं, बहू को नौकरानी, माँ को वृद्धाश्रम भेज देते हैं। क्या यही मातृ शक्ति का सम्मान है।

*जय भारती सेवा संस्थान* का ये लोगो एक चेतावनी भी है -
> _"जिस हाथ ने पालना झुलाया, उसी हाथ ने तलवार भी उठाई है। अगर नारी का सहयोग नहीं किया, सम्मान नहीं दिया, तो ये समाज खुद अपने विनाश का कारण बनेगा।"_

पंडित जी की संस्था इसलिए *"सेवा, शिक्षा, संस्कार"* की बात करती है। क्योंकि संस्कार ही नारी का सम्मान सिखाते हैं।

जय भारती सेवा संस्थान*

*शीर्षक:*
_नारी: सृजन भी, संहार भी_

*मुख्य संदेश:*
वो हाथ जो बच्चे को पालता है,
वो हाथ जो बुजुर्गों की लाठी बनता है,
वो हाथ एक _औरत_ का है।

परन्तु आज समाज ने उसे
केवल _भोग की वस्तु_ समझ लिया है।

याद रखो -
जब सृजन करने वाली का अपमान होता है,
तो वही _माँ काली_ का रूप ले लेती है।

*नारी का सहयोग करो, सम्मान करो*
*अन्यथा यह समाज अपने सर्वनाश को खुद न्योता देगा।*

*जय भारती सेवा संस्थान*
_शिक्षा • सेवा • संस्कार_

सत्यान प्रमदितव्यम्

भक्तो का प्रश्न आज के परिपेक्ष्य जो आपने प्रश्न किया है। वह शाश्वत सत्य है। परन्तु क्या?इसे हम समझने के लिए तैयार हैं?  ...
17/06/2026

भक्तो का प्रश्न आज के परिपेक्ष्य जो आपने प्रश्न किया है। वह शाश्वत सत्य है। परन्तु क्या?इसे हम समझने के लिए तैयार हैं? क्या इस पर दो कदम चलने के लिए तैयार हैं। वर्तमान समय में जो भी हो रही है इसकी भविष्यवाणी पूर्व में की जा चुकी है। हमारे ऋषि मुनि और संतों ने विभिन्न ग्रंथो के माध्यम से समाज को संदेश दिया है। पर समाज इसे समझना नहीं चाहता है। आज समाज में दो विचारधारा की प्रवाह बहुत तीव्र गति से समाज मे प्रवाहित हो रही है, एक वह वर्ग है, जो संत,ऋषि,साधु, महात्मा, पूजा, धर्म और यज्ञ के प्रति पूर्ण आस्थावान है। और वह समर्पित है। एक दूसरा वर्ग है जो उनकी आलोचना और निंदा करता है। यह सब ढोंग है,बकवास है। ऐसा कभी कुछ नहीं था। कपोल कल्पित यह कहानी गढ़ी गई है। किसी को गुलाम बनाने के लिए। किसी विशेष वर्ग द्वारा, जबकि वह भी किसी न किसी की महिमा मंडल और पूजन अवश्य करता है। भौतिक जीवन की विभिन्न वस्तुओं पर हम अनुसंधान करते हैं, फिर आध्यात्मिक यज्ञ पूजा संतों पर क्यों नहीं? दोनों वर्ग दिशा विहीन लक्ष्य के प्रति अग्रसारित है। और इसका लाभ कोई तीसरा वर्ग उठा रहा है। जगने की जरूरत है और जागने की जरूरत है। हमारे शब्दों से अगर किसी को ठेस लगी हो तो क्षमा करेंगे। हमने धर्म शास्त्रों के आधार पर ही यह बातें कही है, परंतु यह मेरा व्यक्तिगत अभिव्यक्ति है 👏

दो० - कलिमल ग्रसे धर्म सब लुप्त भए सदग्रंथ।
दंभिन्ह निज मति कल्पि करि प्रगट किए बहु पंथ॥

भावार्थ:- कलियुग के पापों ने सब धर्मों को ग्रस लिया, सद्ग्रंथ लुप्त हो गए, दंभियों ने अपनी बुद्धि से कल्पना कर-करके बहुत-से पंथ प्रकट कर दिए॥

मारग सोइ जा कहुँ जोइ भावा। पंडित सोइ जो गाल बजावा॥
मिथ्यारंभ दंभ रत जोई। ता कहुँ संत कहइ सब कोई॥

भावार्थ:-जिसको जो अच्छा लग जाए, वही मार्ग है। जो डींग मारता है, वही पंडित है। जो मिथ्या आरंभ करता (आडंबर रचता) है और जो दंभ में रत है, उसी को सब कोई संत कहते हैं।
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सोइ सयान जो परधन हारी। जो कर दंभ सो बड़ आचारी॥
जो कह झूँठ मसखरी जाना। कलिजुग सोइ गुनवंत बखाना॥

भावार्थ:- जो (जिस किसी प्रकार से) दूसरे का धन हरण कर ले, वही बुद्धिमान है। जो दंभ करता है, वही बड़ा आचारी है। जो झूठ बोलता है और हँसी-दिल्लगी करना जानता है, कलियुग में वही गुणवान कहा जाता है।

निराचार जो श्रुति पथ त्यागी। कलिजुग सोइ ग्यानी सो बिरागी॥
जाकें नख अरु जटा बिसाला। सोइ तापस प्रसिद्ध कलिकाला॥

भावार्थ:- जो आचारहीन है और वेदमार्ग को छोड़े हुए है, कलियुग में वही ज्ञानी और वही वैराग्यवान है। जिसके बड़े-बड़े नख और लंबी-लंबी जटाएँ हैं, वही कलियुग में प्रसिद्ध तपस्वी हैं।
सो० - जे अपकारी चार तिन्ह कर गौरव मान्य तेइ।
मन क्रम बचन लबार तेइ बकता कलिकाल महुँ॥

भावार्थ:- जिनके आचरण दूसरों का अपकार (अहित) करनेवाले हैं, उन्हीं का बड़ा गौरव होता है और वे ही सम्मान के योग्य होते हैं। जो मन, वचन और कर्म से लबार (झूठ बकनेवाले) हैं, वे ही कलियुग में वक्ता माने जाते हैं॥

छं० - बहु दाम सँवारहिं धाम जती। बिषया हरि लीन्हि न रहि बिरती॥
तपसी धनवंत दरिद्र गृही। कलि कौतुक तात न जात कही॥

भावार्थ:- संन्यासी बहुत धन लगाकर घर सजाते हैं। उनमें वैराग्य नहीं रहा, उसे विषयों ने हर लिया। तपस्वी धनवान हो गए और गृहस्थ दरिद्र। हे तात! कलियुग की लीला कुछ कही नहीं जाती।
नर पीड़ित रोग न भोग कहीं। अभिमान बिरोध अकारन हीं॥
लघु जीवन संबदु पंच दसा। कलपांत न नास गुमानु असा॥

भावार्थ:- मनुष्य रोगों से पीड़ित हैं, भोग (सुख) कहीं नहीं है। बिना
जो कह झूँठ मसखरी जाना। कलिजुग सोइ गुनवंत बखाना॥
पंडित सोई जो गाल बजावा का

कलिमल ग्रसे धर्म सब लुप्त भए सदग्रंथ। ... भए लोग सब मोहबस लोभ ग्रसे सुभ कर्म। सुनु हरिजान …

कलिमल ग्रसे धर्म सब लुप्त भए सदग्रंथ। दंभिन्ह निज मति कल्पि करि प्रगट किए बहु पंथ॥ भावार्थ:-कलियुग के पापों ने वर्तमान में सब …

वर्तमान का सच जिसकी भविष्यवाणी पूर्व में की जा चुकी है। यथा
कलयुग के पांच लक्षण
बरन धर्म नहिं आश्रम चारी श्रुति बिरोध रत सब नर नारी
रामचरितमानस में कलयुग का उल्लेख किस कांड में किया गया है
भए बरन संकर कलि भिन्नसेतु सब लोग करहिं पाप पावहिं दुख भय रुज सोक बियोग
नारी विवश नर सकल गोसाईं, नाचत नर मर्कट की नाइ।
आचार्य विनय बाबा

15/06/2026

#जापानी शोध कर रहे है।
यहां वाले श्राद्ध पर बकैती कर रहे हैं, दोगले इसको ब्राह्मणवाद,मनुवाद बोलकर अपने इतिहास और पूर्वज को गाली देते हैं ,खुद तो देश को कुछ दे ना पाये ,ना कोई दर्शन ना उपनिषद्,जो पूर्वज दे गये उसको सिर्फ 24 घंटे गाली देकर खुद को निकम्मा बेकूफ़ साबित करने में लगे है।
जय श्री राम 🚩

13/06/2026

संस्थान द्वारा आयोजित वैदिक संस्कृति संस्कार तथा नशा मुक्ति,वालविवाह,अंधविश्वास उन्मूलन पूजन कार्यशाला 15 जुन 2026 प्रातः 09:00 बजे से।
स्थान-हनुमतशिव मंदिर डालमियानगर

12/06/2026
11/06/2026

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Hnuman Mandir Sabji Bajar Dalmianagr Rohtas
Dehri
821305

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