08/05/2026
इस बात पर हमें गर्व होना चाहिए कि उत्तराखंड की राजनीति सादगी, जवाबदेही और लोकतंत्र की असली पहचान है। बंगाल केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु जैसे भारत के अलग-अलग राज्यों की हत्या, गुण्डागर्दी, घूसखोरी की राजनीति को अगर ध्यान से देखा जाए, तो हर राज्य की अपनी एक अलग राजनीतिक संस्कृति बहुत ही अपराधिक दिखाई देती है। कहीं जातिवाद हावी है, कहीं परिवारवाद, कहीं हिंसा और राजनीतिक गुंडागर्दी। लेकिन उत्तराखंड की राजनीति इन सबसे अलग दिखाई देती है। यह परफेक्ट नहीं है, इसमें कमियां बहुत हैं, लेकिन फिर भी यह कई बड़े राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और अन्य राज्यों की राजनीति से अधिक शांत, सरल और लोकतांत्रिक लगती है।
उत्तराखंड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां की जनता अपने नेताओं को आंख बंद करके सत्ता नहीं सौंपती। लगभग हर चुनाव में सरकार बदल जाती है। इसका मतलब यह नहीं कि जनता अस्थिर है, बल्कि इसका अर्थ है कि उत्तराखंड की जनता अपने नेताओं के काम का मूल्यांकन करती है। जब लोगों को लगता है कि सरकार उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी, तो वे उसे बदल देते हैं। जनता हर बार इस उम्मीद से नया विकल्प चुनती है कि शायद अगली सरकार बेहतर काम करेगी। यह लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है कि जनता सीधी होने के बाद भी जागरूक है।
सच यह भी है कि हर बार उम्मीदें पूरी नहीं होतीं। विकास के बड़े-बड़े वादे अक्सर अधूरे रह जाते हैं। लेकिन उत्तराखंड की राजनीति की खूबसूरती यह है कि यहां नेताओं ने कभी राजनीति को हिंसा का माध्यम नहीं बनाया। यहां राजनीतिक मतभेद हैं, अहंकार भी है, लेकिन बंगाल जैसी राजनीतिक हिंसा या कुछ अन्य राज्यों जैसी गुंडागर्दी की संस्कृति नहीं है। उत्तराखंड के नेता शायद बहुत चालाक राजनीतिक खिलाड़ी नहीं हैं, लेकिन वे आम तौर पर अपराधी मानसिकता वाले भी नहीं हैं।उत्तराखंड के नेता आज भी अपेक्षाकृत सरल दिखाई देते हैं। वे दिल्ली की बड़ी राजनीतिक चालों में भले कमजोर हों, लेकिन जमीन से जुड़े हुए लगते हैं। यही कारण है कि यहां की राजनीति में व्यक्तिगत दुश्मनी कम और सामाजिक संबंध अधिक दिखाई देते हैं। अगर उत्तराखंड की राजनीति में किसी ऐसे नेता का नाम लिया जाए जो हर परिस्थिति में खुद को ढालने की क्षमता रखता हो, तो वह मेरे लिए नाम हरक सिंह रावत का है। वे उत्तराखंड की राजनीति के सबसे अनुभवी नेता है। अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों में खुद को फिट करना, संगठन और सत्ता दोनों में अपनी जगह बनाए रखना, यह उनकी राजनीतिक चापलूसी या यूँ कहूँ समझ को दिखाता है।
जहां तक कांग्रेस और बीजेपी की बात है, तो मुझे लगता है कि कांग्रेस के पास राज्य स्तर पर बेहतर और अनुभवी नेता हैं। लेकिन इसके बावजूद बीजेपी की सरकारें अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करती दिखाई देती हैं। इसका सबसे बड़ा कारण केंद्र का समर्थन है। बीजेपी के राज्य नेताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का पूरा सहयोग मिलता है, जबकि कांग्रेस के नेताओं को सोनिया गांधी या राहुल गांधी के नेतृत्व से वैसा मजबूत समर्थन या सहयोग नहीं मिल पाता। असल समस्या यह है कि दोनों ही पार्टियों के अधिकांश नेताओं के पास उत्तराखंड के दीर्घकालिक विकास का स्पष्ट विजन नहीं दिखता। राज्य की राजनीति आज भी “रेत-बजरी, शराब और चारधाम” जैसे मुद्दों के आसपास घूमती रहती है। उद्योग, शिक्षा, पलायन, पहाड़ी अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार जैसे असली मुद्दे अक्सर पीछे छूट जाते हैं।उत्तराखंड में यदि किसी नेता ने कभी अलग सोच दिखाने की कोशिश की, तो उनमें हरीश रावत का नाम जरूर लूँगा। उन्होंने “काफल पार्टी” जैसे स्थानीय संस्कृति और पहाड़ी पहचान से जुड़े विचारों को सामने लाने की कोशिश की। हालांकि वे भी राज्य की राजनीति को पूरी तरह नई दिशा नहीं दे सके, लेकिन कम से कम उन्होंने पारंपरिक राजनीति से अलग सोचने का प्रयास किया। उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के संस्थापकों के पास भी राज्य के लिए स्पष्ट विजन था। उन्होंने अलग उत्तराखंड राज्य का सपना देखा और उसे पूरा करने के लिए संघर्ष किया। लेकिन समय के साथ व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और आपसी संघर्षों ने इस पार्टी को कमजोर कर दिया। आज नई पीढ़ी के युवा नेताओं के पास शब्द तो हैं, भाषण भी हैं, लेकिन अब भी एक ठोस विजन की कमी महसूस होती है। फिर भी, उत्तराखंड की राजनीति की सबसे बड़ी अच्छाई यही है कि यहां राजनीति अभी पूरी तरह अपराध और भय के हाथों में नहीं गई है। यहां के नेता साधारण हैं, कई बार राजनीतिक रूप से बहुत चतुर भी नहीं लगते, लेकिन शायद यही उनकी सबसे बड़ी अच्छाई है। वे “पॉलिटिक्स” कम जानते हैं, लेकिन इंसानियत अभी भी बाकी है।
उत्तराखंड की राजनीति में कमियां बहुत हैं, लेकिन लोकतंत्र की आत्मा आज भी जिंदा है। यहां जनता सवाल पूछती है, सरकार बदलती है, लेकिन समाज को तोड़ने वाली हिंसा को स्वीकार नहीं करती। और शायद यही कारण है कि मुझे उत्तराखंड की राजनीति, अपनी सादगी कई बड़े राज्यों से बेहतर महसूस होती है। और बाकि हम अपने पहाडी नेताओं से सबाल पूछते रहैं किसी दिन कोई नेता समझ, राजनैतिक ज्ञान और राजनैतिक स्मार्टनेस भी लेकर आयेगा।