10/10/2026
"माँ कहती है गंगा मैय्या
सबकी मैय्या होती हो.."
भाई अमन अक्षर की ये कविता चरितार्थ सी लगी जब मुम्बई भारत में बोतलबन्द हुई हमारे पहाड से निकलने वाली माँ गंगा के 100 ग्राम पानी को जकार्ता इण्डोनेशिया में भारत के करीब 135 रूपये में खरीदा।
यूँ तो मैं अक्सर गंगाजल साथ लाता हूँ और मुझे तो हरिद्वार में माँ गंगा के किनारे गैलन में गंगा का पानी बेचने वालों पर भी ये भरोसा नही होता कि सही में वो माँ गंगा का ही बैच रहे हैं तो मुम्बईमें पैक हुए और जाकार्ता में बिक रहे माँ गंगा के नाम से हो रहे इस व्यापार पर कैसे भरोसा करू, पर ये बोटल खरीदना मेरे लिए ये एक आत्मियता है मेरी,हम सब की माँ गंगा के प्रति।
अब बात ये भी है कि हम पहाडी, हमारे यहां से माँ गंगा का उद्गम पर व्यापार व्यापारी है कर रहा है पहाडी नही। और तब गिर्दा की लाईन याद आती है " कि बोल व्यापारी तब क्या होगा.."