Kaya Foundation Trust

Kaya Foundation Trust मरकज़-ए-कानून (مرکزِ قانون)"

भोली आँखों वाला दिख रहा ये शख्स "आयुष मलिक"! इसकी मासूमियत पर मत जाइए, ये लौंडा पूरा घाघ है।एक साज़िश के तहत ये हमज़ा अल...
05/07/2026

भोली आँखों वाला दिख रहा ये शख्स "आयुष मलिक"! इसकी मासूमियत पर मत जाइए, ये लौंडा पूरा घाघ है।

एक साज़िश के तहत ये हमज़ा अली मज़ारी बनकर दुश्मन खेमे में उतरता है। उनके रस्मो-रिवाज, तौर-तरीके अपनाकर उनका दिल जीत लेता है। उनकी लड़की से निकाह कर लेता है। दो साल तक उनकी हसीन लड़की के साथ खाट-कबड्डी का गुप्त खेल खेलता है। 💕

फिर एक दिन अचानक ये और इसके लोग बड़ा खुलासा करते हैं। ये सीना ठोककर कहता है कि मैं मोमिन हो गया हूँ दोस्तों। आज से मेरा नाम मोहम्मद अली माना जाए। मोमिन हो जाना इस दुनिया का सबसे बड़ा, अज़ीज़, महान और सबाब का काम है। 😎😍🥰

मोमिन खेमे में खुशी, जोश और उत्साह की लहर दौड़ जाती है। कुछ मोमिन कपड़े निकालकर सड़क पर नं@गे नाचने लगते हैं। एक ही दिन में ये मोमिनों का हीरो और का@फिरों का दुश्मन नंबर 1 बन चुका था। 🔥

उन दिनों का@फिर खेमे में मची अफरा'तफरी और भगदड़ से खुश मोमिन अल्लाह का शुक्रिया अदा ही कर रहे होते हैं कि तभी एक भूचाल आ जाता है।😱

ये भोली आँखों वाला का@फिर और इसके का@फिर खेमे के लोग मामला पुलिस तक ले जाते हैं। विवाद बढ़ता है, पर ये भोली आँखों वाला शख्स फिर भी अपने दावे पर अड़ा रहता है कि मैं मोमिन हो गया तो बस हो गया। अब मोमिन ही रहूँगा भाईजान । ☺️💕🥰

कुछ मोमिन लोग पुनः कपड़े निकाल सड़क पर नं@गे हो नाचने लगते हैं। 🤡😍

पुलिस इसकी बीवी, उसके अब्बा समेत 10 मोमिन लोगों को जेल में धर लेती है। लाइन में लगा सबके चबूतरे पर झाड़ू फिरा देती है।

तभी ये भोली आँखों वाला शख्स अपना आख़िरी दांव खेलता है। अचानक ये मोमिन खेमे को अकेला छोड़कर वापस का@फिर खेमे में कूद दलबदल कर लेता है। बाल मुंडवाकर, दाढ़ी कटवाकर पुनः सनातनी बन जाता है। 😎

आज इसकी वजह से 10-12 मोमिन जेल में चबूतरे पर झाड़ू फिरवा रहे हैं। एक मासूम हसीन मोमिन लड़की इस सड़ी गर्मी में जेल में बंद त्राहिमाम कर रही है। 😭

मगर ये भोली आँखों वाला शख्स अपने गंजे सिर में नवरत्न तेल रगड़कर, मस्त खा-पीकर अपने घर में AC के सामने पड़ा हुआ जम्हाइयाँ ले रहा है।😌

मोमिन खेमें में जो लोग कपड़े निकाल कर नं@गे नाच रहे थे वो अचानक हुए इस हमले से आहत हैं। दोनों हाथों से अपनी आबरू ढके, अपने कपड़े तलाश कर रहे हैं।😭

आयुष मलिक उर्फ हमजा अली मज़ारी।
जाट मरा तब जानियो, जब तेरहवीं हो जाए। 💀🔥

पानी दे दो मैं मर जाऊंगा…ये केतन के आखिरी शब्द थे। लेकिन केतन को पानी नहीं दिया, उसने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। केतन उत...
16/06/2026

पानी दे दो मैं मर जाऊंगा…
ये केतन के आखिरी शब्द थे।
लेकिन केतन को पानी नहीं दिया, उसने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। केतन उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र के रहने वाले थे। केतन दलित समुदाय से थे। उनसे एक ‘अपराध’ हो गया। वो तथाकथित सवर्ण जाति की युवती से प्रेम कर बैठे, वह युवती भी टिहरी गढ़वाल क्षेत्र के खोलगढ़ की रहने वाली है। केतन मुंबई से लौटे और अपने घर पर आराम कर रहे थे, तभी उनकी प्रेमिका का फोन आ गया, उसने केतन को मिलने के लिए बुलाया। केतन अपने एक दोस्त को साथ लेकर प्रेमिका से मिलने जा पहुंचे, लेकिन ‘पकड़े’ गए।

युवती के परिजनों ने केतन और उनके दोस्त को रात भर जानवरों की तरह पीटा, केतन की जान चली गई, उनका दोस्त अस्पताल में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा है। केतन के पिता का कहना है कि उनके पास सुबह फोन आया कि अपने बेटे के ले जाओ, जब वो वहां पहुंचे तो केतन मर चुके थे। केतन के पिता बताते हैं कि केतन के साथ दरिंदिगी तमाम हदें पार की गईं हैं, उसके नाखून तक उखाड़ लिए गए।

केतन के परिवार को उत्तराखंड सरकार ने आठ लाख रुपये का मुआवज़ा देने का एलान किया है। लेकिन उत्तराखंड सरकार में इतनी हिम्मत नहीं है कि केतन के हत्यारों के घरों पर बुलडोज़र चला पाए? उत्तराखंड की पुलिस में भी इतनी हिम्मत नहीं है कि केतन के हत्यारों का जुलूस निकाल पाए या एनकाउंटर कर पाए? केतन पानी मांगते मांगते दुनिया से चला गए, लेकिन दरिंदों ने ज़रा भी तरस नहीं खाया। Brut ने केतन पर जो स्टोरी की है, उसकी शुरूआत ही केतन के इन शब्दों से होती है “पानी दे दो मैं मर जाऊंगा” केतन के हत्यारों का मक़सद सिर्फ उसे मारना नहीं था, बल्कि उसके साथ क्रूरता करके ‘दूसरों’ को यह ‘मैसेज’ भी देना था कि ‘प्रेम व्रेम, मोहब्बत वोहब्बत’ ये सब ‘अपने’ ही समाज में करो, कथित सवर्णों में नहीं। इस देश में सदियों से यही चला आ रहा है। यही कारण है कि 21वीं सदि में भी दलितों पर होने वाला अत्याचार थम नहीं पाया है। NCRB के 2023 के आंकड़े बताते हैं कि दलितों पर अत्याचार के 57 हज़ार से भी अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। मानवता को शर्मसार करने वाली इन गाथाओं से भारत विश्व गुरु बनेगा? या विष गुरु?

देहरादून– राजधानी देहरादून से एक ऐसा मामला सामने आया जंहा एक विवाहिता के लिए उसका ही ससुराल नर्क बन गया। लगभग पिछले 10 म...
03/06/2026

देहरादून– राजधानी देहरादून से एक ऐसा मामला सामने आया जंहा एक विवाहिता के लिए उसका ही ससुराल नर्क बन गया। लगभग पिछले 10 महीने से उसे कमरे और शौचालय में बंद रखा गया था और वंहा रखकर अमानवीय यातनाएं दी गईं। और अपने ही जुड़वां बच्चों से अलग कर दिया गया और न ही अपने परिवार से फ़ोन व मिलने तक नहीं दिया गया। और यहां तक कि खाने के लिए केदियों से भी गन्दा खाना दिया गया, जिसमे उसको कच्चे चावल, प्याज, नमक और हरी मिर्च दी जाती थी।

यह मामला राजधानी देहरादून के थाना सेलाकुई भाऊवाला के सैनिक बस्ती क्षेत्र का है। पीड़िता के पिता ने शिकायत में आरोप लगाया है कि साल जुलाई 2025 से साल मई 2026 तक उनकी बेटी को कमरे और टॉयलेट में बंद रखा गया व डंडे, पाइप, लोहे की तार और अन्य वस्तुओं से मारपीट की गई। पीड़िता के परिजनों नें आरोप लगाया कि उसके शरीर के संवेदनशील और प्राइवेट अंगों पर भी बोतल और लोहे की रॉड से चोट पहुंचाई गई, जिससे उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हुई।शिकायत के अनुसार प्रताड़ना के दौरान महिला को अपने जुड़वां बच्चों से मिलने तक नहीं दिया गया। उसे परिवार के अन्य लोगों से भी दूर रखा गया और बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह काट दिया गया। पीड़िता के पिता का आरोप है कि उनकी बेटी लगातार मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न झेलती रही, लेकिन परिवार को इसकी पूरी जानकारी नहीं मिल सकी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने पति, सास और ससुर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। महिला का पति राहुल खंडूड़ी, दिल्ली के वीर सावरकर स्कूल में सरकारी अध्यापक है।

पीड़िता के पिता की शिकायत के अनुसार उनकी बेटी को जुलाई 2025 से मई 2026 तक घर के एक कमरे और शौचालय में कैद किया जाता था आरोप है कि उसे सुबह से रात तक बाहर निकलने भी नहीं दिया जाता था। परिजनों का कहना है कि इस दौरान महिला का सामाजिक संपर्क पूरी तरह खत्म कर दिया गया और उसे सामान्य जीवन जीने तक का अधिकार नहीं दिया गया। शिकायत में इसे सुनियोजित मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का हिस्सा बताया गया है।

शिकायत में कहा गया है कि महिला को केवल सास-ससुर ही नहीं, बल्कि पति से भी प्रताड़ना झेलनी पड़ी। आरोप है कि पति जब भी नौकरी से छुट्टी लेकर घर आता था, वह भी पीड़िता से मारपीट करता था। परिजनों का दावा है कि तीनों मिलकर लगातार महिला पर दबाव बनाते थे, गाली-गलौ

पहले  सिर्फ  गरीब मुसलमान  सङको और ट्रेन में लिंच किये जा रहे थे फिर  पढे लिखे मुस्लिम  एक्टिविस्टों को जेल में ठूंस दिय...
24/05/2026

पहले सिर्फ गरीब मुसलमान सङको और ट्रेन में लिंच किये जा रहे थे
फिर पढे लिखे मुस्लिम एक्टिविस्टों को जेल में ठूंस दिया गया
फिर लव जिहाद, कार्पोरेट जिहाद, फलाना जिहाद , ढिमकाना जिहाद के नाम पर पढे लिखे मुस्लिम नौजवानों को निशाना बनाया गया
और अब अरबपति उघोगपति के बारे में जानिये
कहीं मीडिया में कोई शोर नहीं
पर पढिये इनके बारे में
इनका नाम अहमद बुहारी है, पढ़े-लिखे अरबपति हैं, उनकी बड़ी कोयला कंपनी है, तमिलनाडु में 1200 मेगावाट का थर्मल प्लांट है।
अब 4 मार्च 2022 को ईडी इन्हें गिरफ्तार कर लेती है, जिसके बाद वे तुरंत कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं और बताते हैं कि वे पूरी तरह से निर्दोष हैं, उन्हें जबरन फंसाया जा रहा है और असल खेल कुछ और ही है। किंतु तमाम कोर्ट-कचहरी के बीच एजेंसियां उन्हें 2.7 सालों तक जेल में रखती हैं।
यदि किसी भी कंपनी का सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति जेल में होगा 2.7 सालों तक तो कोई भी कंपनी ज्यादा समय तक सर्वाइव नहीं कर सकती। इनके साथ भी यही हुआ, इनकी कंपनी को दिवालिया घोषित कर दिया गया और अब असल कहानी शुरू होती है। इस कंपनी का अधिग्रहण कर लिया जाता है, और कौन करता है?
जी हाँ, अडानी कंसोर्टियम ने इसे ले लिया है और 1200 मेगावाट का उनका थर्मल पावर प्लांट भी अब अडानी का हो गया
और जब यह सब कुछ हो जाता है,
उसके बाद मई 2026 में ईडी और सीबीआई दोनों के केस कोर्ट में रद्द हो जाते हैं, उनके खिलाफ केस चलने तक के सबूत नहीं थे। और उद्योगपति अहमद बुहारी बाइज्जत बरी हो जाते हैं, किंतु अब उनकी कंपनी, थर्मल पावर प्लांट अडानी के हो चुके हैं जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में फिर से लड़ाई शुरू की है।

फोटो में दिख रहे  #शख्स का नाम नसीमुद्दीन है ये कुशीनगर के एक स्कूल में  #प्रधानाध्यापक हैं इनके स्कूल में पढ़ने वाली एक...
18/04/2026

फोटो में दिख रहे #शख्स का नाम नसीमुद्दीन है ये कुशीनगर के एक स्कूल में #प्रधानाध्यापक हैं इनके स्कूल में पढ़ने वाली एक 5 साल की छात्रा के साथ रेप हो गया बच्ची जब घर पर आई तो वह खून से #लथपथ थी परिजनों ने डॉक्टर को दिखाया तो डॉक्टर ने रेप होने की पुष्टि की जैसे ही ये बात #बजरंग दल वालो तक पहुंची मामला ने तूल पकड़ लिया और #बजरंग दल वालो ने थाना घेर लिया और चिल्लाने लगे मुल्ले को गिरफ्तार करो या फिर #एनकाउंटर करो सारे मुल्ले रेपिस्ट होते हैं इनका यही काम है इक दम ये खबर आग की तरह फैल गई पुलिस ने जल्दबाजी में नसीमुद्दीन को पॉक्सो एक्ट लगाकर #गिरफ्तार कार लिया बच्ची को जब होश आया तो उसने सच्चाई बताते हुए कहा कि हमारे सर जी तो निर्दोष हैं उन्होंने उसके साथ गंदा काम नहीं किया बल्कि उसके #पड़ोसी अंकल सुरेन्द्र सिंह ने किया है ये सुनते ही पुलिस के हाथ पैर फूल गए और फिर दुबारा से जांच हुई तो #प्रधानाध्यापक बिल्कुल निर्दोष निकले पुलिस ने सुरेन्द्र सिंह को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया जब से आरोपी सुरेन्द्र सिंह निकला है करणी #सेना वालो को सांप सूंघ गया है अगर कहीं आरोपी नसीमुद्दीन होता तो ये बेवड़े आसमान को सर पर उठा लेते और उसके घर बुलडोजर लेकर पहुंच जाते

Priya Yadav ✍️

17/04/2026

राजपुर रोड पर करोड़ों की जमीन हड़पने का खेल, फर्जी विरासत से नाम चढ़ाकर बेच दी जमीन

CJM कोर्ट ने 12 भूमाफियाओ गिरोह पर फर्जीवाड़ा-धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमे दर्ज करने के दिए आदेश

देहरादून।राजपुर रोड स्थित करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीन को फर्जी विरासत और कूटरचित दस्तावेजों के जरिये हड़पने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़िता शुभ्रा महंत ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, देहरादून की अदालत में 12 लोगों के खिलाफ प्रकीर्ण प्रार्थना पत्र दाखिल कर BNS की संगीन धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना की मांग की है। प्रार्थिनी शुभ्रा महंत पुत्री स्व. प्रेममई महंत ने कोर्ट को बताया कि राजपुर रोड स्थित नगर निगम सम्पत्ति सं. 449/765 एवं 450/767 की मालिक उनकी मौसी श्रीमती सुधामई पत्नी भगवत प्रसाद थीं। सुधामई ने 06.11.1981 को पंजीकृत वसीयत से अपनी समस्त चल-अचल संपत्ति शुभ्रा महंत के नाम कर दी थी। 23.10.1989 को सुधामई के निधन के बाद प्रार्थिनी एकमात्र मालिक काबिज हुई और नगर निगम में भी नाम दर्ज हुआ। आरोप है कि 36 साल बाद वर्ष 2025 में अभियुक्तों ने संगठित षड्यंत्र रचकर इस जमीन को हड़पने का खेल शुरू किया।

फर्जी विरासत से नाम चढ़ाया, फिर 9 बैनामे कर डाले
16.06.2025 को अभियुक्त श्रीमती मुकेश शर्मा व मोहित शर्मा ने खुद को सुधामई व भगवत प्रसाद की मिथ्या पुत्रवधू व पौत्र बताकर तहसीलदार सदर देहरादून के न्यायालय में दाखिल-खारिज वाद सं. 7025/2025 दायर किया। मात्र 20 दिन में 09.07.2025 को उनके पक्ष में नामांतरण आदेश हो गया और राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज करा लिया गया।
इसके तुरंत बाद 11.07.2025 को एक ही दिन में उक्त भूमि के 9 विक्रयपत्र अन्य अभियुक्तों के नाम कर दिए गए। आरोप है कि 1.31 करोड़ की सर्किल रेट वाली जमीन के बैनामे मात्र 41 लाख रुपये के आसपास दर्शाए गए। 40 दिन के अंदर तहसील कर्मियों से मिलीभगत कर सभी 9 क्रेताओं के नाम दाखिल-खारिज भी करा लिए गए।

कोर्ट पहले ही कर चुका है गोदनामा शून्य घोषित

प्रार्थिनी ने बताया कि अभियुक्त विनोद कुमार को भगवत प्रसाद का दत्तक पुत्र बताकर हक जताया जा रहा है। जबकि कथित गोदनामा दिनांक 04.09.1969 को करनाल कोर्ट ने 22.08.1989 को ही शून्य व निष्प्रभावी घोषित कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी 13.09.1983 को विनोद कुमार को भगवत प्रसाद का वारिस मानने से इनकार

रेप आरोपी ज्योतिषाचार्य  अशोक खरात उर्फ कैप्टन के पैर धुलते दिखीं महाराष्ट्र महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर ◆ वीडिय...
22/03/2026

रेप आरोपी ज्योतिषाचार्य अशोक खरात उर्फ कैप्टन के पैर धुलते दिखीं महाराष्ट्र महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर

◆ वीडियो वायरल होने के बाद रूपाली चाकणकर ने दिया अपने पद से इस्तीफा

◆ वीडियो में जिस शख्स के पैर धुलते दिख रहीं रूपाली उस पर 58 महिलाओं के साथ यौन शोषण का आरोप.

"हम भारतीय नौसेना के मेहमान थे... विश्वास और दोस्ती के साथ उनके घर में आए थे।हमारे 130 से ज्यादा नौसैनिक, जो सिर्फ़ अभ्य...
06/03/2026

"हम भारतीय नौसेना के मेहमान थे... विश्वास और दोस्ती के साथ उनके घर में आए थे।
हमारे 130 से ज्यादा नौसैनिक, जो सिर्फ़ अभ्यास से लौट रहे थे, घर की ओर सपनों के साथ...
फिर भी, बिना किसी चेतावनी के, बिना एक पल की मोहलत दिए...
उस ठंडे, निर्दयी समंदर में हम पर हमला कर दिया गया।
वो जहाज़ सिर्फ़ लोहे और मशीनों का ढांचा नहीं था—
वो हमारे बेटों, भाइयों, पतियों का आशियाना था।
उनकी हँसी, उनकी उम्मीदें, उनकी माँओं की दुआएँ... सब कुछ उस एक पल में डूब गया।
यह सिर्फ़ एक हमला नहीं था—यह विश्वासघात था, यह इंसानियत पर वार था।
भारत के मेहमान पर, शांति के मेजबान के अतिथि पर... ऐसे क्रूरता से हाथ उठाया गया।
मेरे ईरानी भाइयों-बहनों की आँखों में आँसू हैं, दिल में आग है।
हम चुप नहीं बैठेंगे... क्योंकि यह दर्द सिर्फ़ हमारा नहीं—यह हर उस माँ का दर्द है जो अपने बेटे का इंतज़ार कर रही है, जो कभी नहीं लौटेगा।
अमेरिका... याद रखना, यह खून का दाग़ इतना गहरा है कि कभी नहीं मिटेगा।
आपने जो बीज बोया है, उसकी कड़वी फसल आपको ज़रूर चखनी पड़ेगी।
हमारी आँखों के आँसू और हमारे शहीदों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी।"
: अब्बास अराघची, ईरानी विदेश मंत्री

18/02/2026

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