16/09/2024
संसार के समस्त दरख़्त(पेड़) से #काग़ज़ बना कर औऱ सात समुंदर के पानी को #रौशनाई बना कर भी हुज़ूर साहब (Prophat Muhammad (PBUH) के व्यक्तित्व के बारे में लिखने की कोशिश किया जाए तो हम अपनी कोशिश में अपने इल्म की तरह ही अधूरे रह जाएंगे ।
"मजदूर का पसीना सूखने से पहले उसकी मजदूरी मिल जानी चाहिए":- पैग़म्बर मुहम्मद ।
इससे बेहतर ईमानदारी और इंसाफ क्या हो सकता है ?
पूरी दुनिया को संदेश देने वाले पैगम्बर मुहम्मद के #जन्म_दिन पर उनकी केवल एक सीख भी हम अपने अंदर ले आएं तो शायद हम उन्हें सही अर्थों में याद करके पूरी दुनिया के लिए एक सकारात्मक संदेश दे सकेंगे ।
और हां, जो लोग उन्हें याद करने के नाम पर उनकी सीख से इतर (अलग हो कर)इस्लाम मे अपना Innovation (नयापन) लाने का प्रयास करते हैं, उनके लिए ये संदेश है मेरी तरफ़ से:-
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दुनिया के हर खेल का एक नियम होता है । फुटबाल हाथ से नही खेल सकते, क्रिकेट में पैर से गेंदबाजी नही कर सकते । टेनिस के खेल में क्रिकेट के बैट प्रयोग नही कर सकते और boxing में लोहे का दस्ताना नही पहन सकते हैं ।
उसी तरह जीवन का भी नियम होता है और हर धर्म का भी एक नियम होता है, जो उस धर्म के प्रमाणिक ग्रन्थ में लिखा होता है।
आपको खेल के नियम पसंद नही है तो वो खेल मत खेलिए, उसी तरह आपको किसी धर्म के नियम पसंद नही है तो आप उस धर्म से अलग होने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है.(कोई ज़बरदस्ती नही)
परंतु, जिस धर्म मे जन्म_दिन को उत्सव की तरह मनाने को प्रोत्साहित नही किया गया है , उस धर्म मे जन्म दिन को उत्सव के तरह नही मनाया जाएगा । चाहे वो जन्म_दिन किसी का भी क्यों न हो , क्योंकि नियम सबके लिए एक होता है, इस्लाम सबके लिए एक है।
इस्लाम मे जन्म_दिन क्या है ?
:- हम अल्लाह की तरफ़ से आएं है, और बेशक अल्लाह की तरफ़ ही लौट जाएंगे और इस सफ़र में हमने एक वर्ष खो दिया । हम जिस काम से इस दुनिया मे आये हैं उसको पूरा करने में अब एक वर्ष कम हो गया, पिछले एक वर्ष में हमें जो करना था उसको हम कितना कर पाए ये आप और हम अपने-अपने बारे में बेहतर जानते हैं ।
इस आधार पर आप खुद तय कर सकतें है कि -इस्लाम जन्म_दिन को किस तरह परिभाषित करता है.
आपको अगर नियम पसंद नही है तो आप धर्म से अलग होने के लिए स्वतंत्र है। (कोई ज़बरदस्ती नही)
एक और बात :- 'आज ये धर्म मुकम्मल हो गया है, इसमे राई के दाने के बराबर भी अपने मन से जोड़ना या घटाना नही चलेगा.
इसके अनुसार सभी समान है , सभी बराबर है और किसी पर किसी को फोकियात (superiority) नही है" :- पैगम्बर मुहम्मद ।
(ये जरूरी नही की आप मेरी सभी बात स्वीकार कर ले पर आप यदि सच मे पैगम्बर मुहम्मद का सम्मान करते हैं तो उनकी बात जरूर मानते होंगे )
किसी को याद करने का अर्थ है -उनका जिक्र करें, उन्हें याद कर दुआएं पढ़े, उनकी अच्छाइयों को ज़ाहिर करें, और यह किसी एक खास रोज़ नही, हर रोज़ करें , जब दिल करे, करते रहें ।
डॉ० मोहम्मद अली