Maharajadhiraja Kameshwar Singh Kalyani Foundation

Maharajadhiraja Kameshwar Singh Kalyani Foundation Maharajadhiraja Kameshwar Singh Kalyani Foundation (A Public Trust) by a deed of trust (No 5699 of 1

दिनांक 15.04.2026 को जिलाधिकारी, दरभंगा, श्री कौशल कुमार जी द्वारा महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाऊँडेशन, दरभंगा क...
16/04/2026

दिनांक 15.04.2026 को जिलाधिकारी, दरभंगा, श्री कौशल कुमार जी द्वारा महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाऊँडेशन, दरभंगा का औपचारिक दौरा किया गया।
फाऊँडेशन के कार्यपालक पदाधिकारी श्री श्रुतिकर झा और पुस्तकालयाध्यक्ष एवं कार्यालय प्रभारी श्री पारस नाथ सिंह ठाकुर ने जिलाधिकारी महोदय का स्वागत किया तथा उन्हें फाऊँडेशन में संरक्षित विभिन्न महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक अभिलेखों का अवलोकन कराया। इस दौरान जिलाधिकारी महोदय को पुराने दुर्लभ दस्तावेज, महत्वपूर्ण पुस्तकें एवं पाण्डुलिपियों का विस्तारपूर्वक निरीक्षण करवाया गया।
निरीक्षण के क्रम में जिलाधिकारी महोदय ने फाऊँडेशन द्वारा किए जा रहे संरक्षण एवं शोध संबंधी कार्यों की सराहना की। उन्होंने इन ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए फाऊँडेशन के प्रयासों की प्रशंसा की।
दौरे के अंत में जिलाधिकारी महोदय ने विजिटर्स बुक में अपने विचार अंकित करते हुए फाऊँडेशन के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

आज 15.04.26 को भारत सरकार के संस्कृति विभाग मंत्रालय द्वारा संचालित ''ज्ञान भारतम मिशन'' के अन्तर्गत  दरभंगा जिला के पाण...
15/04/2026

आज 15.04.26 को भारत सरकार के संस्कृति विभाग मंत्रालय द्वारा संचालित ''ज्ञान भारतम मिशन'' के अन्तर्गत दरभंगा जिला के पाण्डुलिपियों के संरक्षण, दस्तावेजीकरण एवं डिजीटाइजेटन के संदर्भ में आज विभाग के प्रमुख अधिकारी श्री चंदन कुमार जी और डि.डि.सी., दरभंगा श्री स्वपनिल कुमार जी ने महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाऊँडेशन का दौरा किया और महत्वपूर्ण दस्तावेजों का भी निरिक्षण किया। श्री पारस नाथ सिंह ठाकुर, पुस्तकालयाध्यक्ष एवं कार्यालय प्रभारी साथ ही संस्थान के कार्यपालक पदाधिकारी श्रुतिकर झा ने अधिकारियों को संस्था में संरक्षित पाण्डुलिपियों की विस्तृत जानकारी प्रदान कि।

26/01/2026

भारत वर्ष के 77 वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

18/01/2026
प्रेस विज्ञप्ति/श्रद्धांजलि सभा -------------------------------------आज दिनांक 18 जनवरी 2026 को दरभंगा स्थित कल्याणी निव...
18/01/2026

प्रेस विज्ञप्ति/श्रद्धांजलि सभा
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आज दिनांक 18 जनवरी 2026 को दरभंगा स्थित कल्याणी निवास में ''महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन'' के न्यासियों द्वारा दरभंगा राज की अंतिम महारानी एवं फाउण्डेशन की दाता न्यासी महारानी कामसुन्दरी साहिबा को एक अत्यंत गरिमामय और भावपूर्ण श्रद्धांजलि प्रदान किया गया। अंतिम महारानी, काम सुन्दरी साहिबा का जीवन स्वयं में राज दरभंगा के इतिहास का एक ऐसा शांत और गहन अध्याय रहा, जो शोर, नारे और प्रदर्शन से दूर रहते हुए भी अपने प्रभाव में अत्यंत दूरगामी था। राज दरभंगा, जो कभी मिथिला की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में जाना जाता था—जहाँ से शिक्षा, संस्कृत, शास्त्र, धर्म, संस्कृति और समाज-सेवा की सशक्त धाराएँ प्रवाहित हुईं—उस गौरवशाली परंपरा की अंतिम जीवित कड़ी महारानी जी थीं। महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह के साथ जुड़ा उनका जीवन उस ऐतिहासिक कालखंड का साक्षी रहा, जब राजसत्ता केवल वैभव का प्रतीक नहीं, बल्कि लोक कल्याण, सामाजिक उत्तरदायित्व और नैतिक मर्यादा का माध्यम हुआ करती थी। श्रद्धांजलि अर्पण के उपरांत वक्ताओं ने महारानी साहिबा के ऐतिहासिक, बौद्धिक और सामाजिक योगदान पर गहरी संवेदनशीलता, गंभीरता और आदर भाव के साथ प्रकाश डाला। यह अवसर केवल स्मरण का नहीं था, बल्कि महारानी साहिबा की वैचारिक विरासत को समझने, सहेजने और उसे समकालीन समाज से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास भी था।

इस अवसर पर संस्था के न्यासी पद्मश्री डॉ. जितेन्द्र कुमार सिंह का वक्तव्य विशेष रूप से उल्लेखनीय, विचारोत्तेजक और दूरदर्शी रहा। उन्होंने महारानी जी को अपने समय से कहीं आगे की सोच रखने वाली एक असाधारण बौद्धिक व्यक्तित्व के रूप में रेखांकित करते हुए कहा कि, महारानी साहिबा केवल राजपरिवार की प्रतिनिधि भर नहीं थीं, बल्कि ज्ञान, विवेक, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व से संपन्न एक सजग चिंतक थीं। डॉ. सिंह ने कहा कि शिक्षा, संस्कृति, परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन स्थापित करने की जो दृष्टि महारानी जी में थी, वही उन्हें इतिहास में एक विशिष्ट और सम्मानित स्थान प्रदान करती है। अपने वक्तव्य में उन्होंने विशेष रूप से यह महत्वपूर्ण बात कही कि “महारानी साहिबा के नाम को केवल स्मृतियों तक सीमित नहीं रहने देना चाहिए, बल्कि उनके नाम, विचार और योगदान को जीवित रखने की आज सबसे अधिक आवश्यकता है। उनका नाम जीवित रहेगा, तभी उनकी विरासत भी जीवित रहेगी।” डॉ. सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि महारानी साहिबा का योगदान किसी बीते युग की निष्क्रिय स्मृति नहीं, बल्कि आज के समाज के लिए भी एक सक्रिय और जीवंत मार्गदर्शन है, जिसे आत्मसात करना और आगे बढ़ाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

फाउंडेशन के न्यासी प्रोफेसर शिरीश चंद्र चौधरी आवासीय पटल से अपने विस्तृत वक्तव्य में महारानी साहिबा के व्यक्तित्व और कृतित्व को मिथिला की सांस्कृतिक आत्मा से जोड़ते हुए कहा कि वे मिथिला की बौद्धिक परंपरा की सशक्त संवाहिका थीं। प्रो. चौधरी ने कहा कि महारानी जी ने शिक्षा, साहित्य, कला और समाजसेवा के क्षेत्रों में जिस निष्ठा, धैर्य और प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया, वह आज भी शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है। उनके विचारों और आचरण में मानवीय मूल्यों की गहरी समझ, सामाजिक समरसता की स्पष्ट चेतना और लोककल्याण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता सहज रूप से दिखाई देती है, जो उन्हें एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व के रूप में स्थापित करती है।

इस अवसर पर न्यासी पंडित श्री रामचन्द्र झा ने कहा कि महारानी साहिबा का संपूर्ण जीवन त्याग, सेवा और जन कल्याण की उस परंपरा का प्रतीक रहा है, जिसने मिथिला की सांस्कृतिक पहचान को न केवल सुरक्षित रखा, बल्कि उसे और अधिक समृद्ध भी किया। उन्होंने कहा कि महारानी जी का योगदान मिथिला के सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है और आने वाली पीढ़ियाँ उनके जीवन और मूल्यों से निरंतर प्रेरणा ग्रहण करती रहेंगी।

श्रद्धांजलि सभा के दौरान श्री विशाल जीत सिंह ‘राठौर’ एवं श्री वरुण कुमार सिंह की भी गरिमामय उपस्थिति रही। सभी वक्ताओं और उपस्थितजनों ने एक स्वर में कहा कि महारानी जी की ऐतिहासिक बौद्धिक विरासत, उनके विचार और उनके सामाजिक योगदान को संरक्षित करना तथा भावी पीढ़ियों तक जीवंत रूप में पहुँचाना महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन का प्रमुख उद्देश्य है, जिसके लिए न्यास निरंतर सक्रिय, सजग और प्रतिबद्ध रहेगा। साथ ही श्रद्धांजलि सभा के दौरान सभी उपस्थितजनों ने महारानी जी के तैलचित्र पर श्रद्धा-सुमन अर्पित कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। सभी आगन्तुकों ने एकमत से कहा कि महारानी साहिबा की ऐतिहासिक बौद्धिक विरासत, उनके विचार और उनके सामाजिक योगदान को संरक्षित करना तथा भावी पीढ़ियों तक जीवंत रूप में पहुँचाना महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन का प्रमुख उद्देश्य है, जिसके लिए न्यास निरंतर सक्रिय और प्रतिबद्ध रहेगा। मौके पर उपस्थित प्रमुख लोग—
दरभंगा राजपरिवार के रत्नेश्वर सिंह,
पद्मश्री डॉ. जितेन्द्र कुमार सिंह,
प्रोफेसर शिरीश चंद्र चौधरी,
पंडित श्री रामचन्द्र झा,
उदय नाथ झा,
श्री श्रुतिकर झा,
श्री पारस नाथ सिंह ठाकुर,
श्री विशाल जीत सिंह ‘राठौर’,
श्री वरुण कुमार सिंह,
श्री अजयधारी सिंह,
डॉ. मंजर सुलैमान,
डॉ. सुशान्त कुमार,
डॉ. मो. जमील हसन अंसारी,
श्री संतोष कुमार झा एवं अन्य।
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महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन
दरभंगा, बिहार

15/01/2026

सूचना
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सूचित किया जाता है की, महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाऊँडेशन की दाता न्यासी महारानीअधिरानी कामसुन्दरी साहिबा के देहावसान और उनके श्राद्ध कर्म के मद्देनजर आगामी 24 जनवरी, 2026 तक कार्यालय और लाइब्रेरी बन्द रहेगा।

म.का.सिं.कल्याणी फाऊँडेशन
दरभंगा

प्रेस विज्ञप्ति / शोक समाचार------------------------------------दरभंगा की अंतिम महारानी श्रीमती कामसुन्दरी देवी के निधन ...
12/01/2026

प्रेस विज्ञप्ति / शोक समाचार
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दरभंगा की अंतिम महारानी श्रीमती कामसुन्दरी देवी के निधन पर गहन शोक और भावपूर्ण श्रद्धांजलि

दरभंगा (बिहार), दिनांक : 12 जनवरी, 2026

अत्यंत दुःख, वेदना और हृदयविदारक शोक के साथ यह सूचना दी जाती है, कि दरभंगा राज की अंतिम महारानी, स्वर्गीय महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह की धर्मपत्नी, महारानी श्रीमती कामसुन्दरी देवी का आज दिनांक 12 जनवरी 2026, प्रातः तीन बजे स्वर्गवास हो गया। महारानी साहिबा का जन्म 22.10. 1932 में मंगरौनी में हुआ था और 93 वर्ष की आयु में उनके आकस्मिक निधन के समाचार से हम सभी शोकाकुल हैं। ऐसा प्रतीत होता है, जैसे मिथिला की एक मौन, किंतु सशक्त चेतना आज हमारे बीच से विदा हो गई हो। उनके देहावसान से न केवल दरभंगा, बल्कि संपूर्ण मिथिलान्चल तथा देश के सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक जीवन में एक ऐसी रिक्तता उत्पन्न हुई है, जिसकी पूर्ति संभव नहीं है।
महारानी श्रीमती कामसुन्दरी देवी सादगी, सौम्यता, करुणा और गरिमा की जीवंत प्रतिमूर्ति थीं। उन्होंने जीवन भर राजपरंपरा की मर्यादाओं का निर्वाह करते हुए स्वयं को सदैव लोकजीवन से जोड़े रखा। वैभव और ऐश्वर्य के मध्य रहते हुए भी उनका व्यक्तित्व अत्यंत सरल, संयमी और संवेदनशील रहा। उनका संपूर्ण जीवन मौन साधना, त्याग, अनुशासन और मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा के लिए समर्पित रहा, जिसने समाज को दिशा और मर्यादा दोनों प्रदान की।
इस दुःख की घड़ी में शब्द भी जैसे मौन हो गए हैं। मिथिला की धरती ने आज अपनी एक ऐसी विभूति को खो दिया है, जिनकी उपस्थिति मात्र से ही परंपरा, संस्कार और संवेदना का बोध होता था। यह केवल एक व्यक्तित्व का अंत नहीं, बल्कि एक युग का अवसान है।
महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन, दरभंगा (बिहार) परिवार की ओर से इस अत्यंत शोकाकुल अवसर पर दिवंगत महारानी के चरणों में कोटि-कोटि नमन अर्पित करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि दी जाती है। फाउंडेशन परिवार इस अपार दुःख की घड़ी में शोकसंतप्त राजपरिवार, परिजनों तथा समस्त मिथिलावासियों के साथ गहरी संवेदना और आत्मिक एकजुटता प्रकट करता है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि, दिवंगत आत्मा को चिरशांति प्रदान करें तथा उनके परिवारजनों और सभी शोकाकुल हृदयों को इस असहनीय पीड़ा को सहन करने की शक्ति दें।
महारानी श्रीमती कामसुन्दरी देवी आज हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित न हों, किंतु उनके आदर्श, संस्कार, सादगी और करुणा सदा हमारी स्मृतियों और समाज के नैतिक चेतना में जीवित रहेंगे। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत बना रहेगा।

भावपूर्ण श्रद्धांजलि।


महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन
दरभंगा, बिहार

Newspaper cutting
29/11/2025

Newspaper cutting

महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाऊँडेशन, दरभंगा द्वारा नया प्रकाशित पुस्तक  'इन्डिया: माइग्रेशन, माउंटेन एंड मोरैलिट...
29/11/2025

महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाऊँडेशन, दरभंगा द्वारा नया प्रकाशित पुस्तक 'इन्डिया: माइग्रेशन, माउंटेन एंड मोरैलिटी'।

आज दिनांक 28 नवम्बर 2025 को कल्याणी निवास में महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह की 118वीं जयंती के अवसर पर कामेश्वर सिंह स्मृति...
28/11/2025

आज दिनांक 28 नवम्बर 2025 को कल्याणी निवास में महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह की 118वीं जयंती के अवसर पर कामेश्वर सिंह स्मृति व्याख्यान कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर देवनारायण झा के द्वारा "मिथिला की साहित्यशास्त्रीय परम्परा" पर दिया गया। अपने उद्बोधन में मुख्य वक्ता प्रोफेसर देवनारायण झा ने कहा कि "महाराजा कामेश्वर सिंह उदारवीर थे और इन्होंने देश भर में अनेकों शैक्षणिक संस्थानों को भरपूर दान दिया। " आगे उन्होंने ने कहा कि "आत्मा के होने का भाव वाला विषय ही साहित्य है। रस विशिष्ट शब्द और अर्थ से सन्निहित विषय ही साहित्य है। मिथिला में कुल अट्ठारह प्रकार की विद्या की परिकल्पना की गयी है, और लगभग ज्ञान की सभी शाखाओं का विकास मिथिला में हुआ है। जीवन के द्वंद्व से निरपेक्ष होकर मैथिल आत्म ज्ञान में लीन रहते आए हैं।आत्म ज्ञान में रत रहने के कारण मैथिलों ने अलौकिक सत्ता को समझने के लिए दर्शन को विकसित किया। दर्शन के साथ विद्या के विभिन्न शाखाओं को भी विकसित किया। शिक्षा,कल्प, निरूक्त, ज्योतिष आदि सभी वेदांगों में मिथिला की देन अभूतपूर्व है। ज्ञान के क्षेत्र में खण्डन मंडन की परम्परा के कारण मिथिला में विद्या के सभी क्षेत्रों में काफी विकास हुआ है।पूरे सनातन क्षेत्र में मिथिला की सामान्य व्यवहार को शास्त्रीय मानकर अनुकरण किया जाता है। मिथिला केवल धर्म और कर्म की भूमि नहीं है, अपितु मोक्ष की भी भूमि है। यहां भोग के साथ ही साधना, तंत्र, मंत्र, कर्म और धर्म सभी क्षेत्रों में काफी कार्य हुए हैं। मौलिक रचनाओं के साथ ही टीका और व्याख्याएं भी लिखीं गईं।"
स्मृति व्याख्यान की अध्यक्षता प्रोफेसर धर्मेंद्र कुमर ने किया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रोफेसर कुमर ने मिथिला की साहित्य परम्परा में लोकसाहित्य की भूमिका पर प्रकाश डाला। प्रोफेसर कुमर ने कहा कि " मिथिला का प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास पूर्णतः अभिजन इतिहास है। आधुनिक काल में जातीय और वर्गीय चेतना का प्रवल प्रवाह इतिहास लेखन की मुख्य धारा में अभिजन और सामान्य जन सभी समाहित हो गये हैं। मिथिला की लोकगाथाओं से स्पष्ट होता है कि पूर्व मध्य काल से ही निम्न वर्ग में वर्गीय चेतना उभरने लगी थी। ये लोकगाथाएं जन इतिहास के मजबूत स्रोत हैं। ये लोकगाथाएं वैश्य और शूद्र वर्ण की अधिकांश जातियों की बहुमूल्य विरासत हैं। मैथिली लोकसाहित्य यहां की लोक संस्कृति की वाहक हैं। मैथिली लोकसाहित्य में विद्यमान भौगोलिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर मिथिला का वास्तविक इतिहास उभर कर सामने आता है।
इटली के मार्क्सवादी इतिहासकार अंतोनियो ग्राम्शी के अनुसार लोकसाहित्य से ही जन इतिहास को समझा जा सकता है। ग्राम्शी के अनुसार अभिजन वर्ग की वर्चस्ववादी संस्कृति के सामानांतर निम्न वर्ग की एक स्वायत्त दुनिया होती है, जिसमें अभिजन संस्कृति की स्वतंत्र सांस्कृतिक अभिव्यक्ति होती है। मैथिली लोकसाहित्य वा जन साहित्य के सांगोपांग अध्ययन से ही मिथिला का वास्तविक इतिहास लिखा जा सकता है "।
कार्यक्रम की शुरुआत"जय जय भैरवि" भगवती वंदना से हुई, तत्पश्चात महाराजा कामेश्वर सिंह के तैल चित्र पर आगत अतिथियों के द्वारा माल्यार्पण किया गया। मिथिला की परंपरा के अनुसार अतिथियों का स्वागत पाग चादर से हुआ। फाउंडेशन की ओर से स्वागत भाषण श्री श्रुतिकर झा ने दिया। इस अवसर पर महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह मेमोरियल लेक्चर सीरीज के तहत पांचवीं और फाउंडेशन की 29वीं पुस्तक "इंडिया: माइग्रेशन, माउंटेन्स एंड मोरालिटी" का लोकार्पण हुआ। इस पुस्तक को लोकार्पण के लिए प्रोफेसर पंडित रामचंद्र झा जी, जो इसके संपादक भी हैं, ने प्रस्तुत किया।
फाउंडेशन के ट्रस्टी प्रोफेसर श्रीश चौधरी ने अपने उद्बोधन में कहा कि " साहित्य ज्ञान की सभी विधाओं की जननी है। विज्ञान सभी जंतुओं में होती है और मनुष्य को महत्वपूर्ण उसका साहित्य सृजन ही बनाता है। जो है और जो नहीं है, इन दोनों कल्पनाओं का प्रत्यक्ष अनुभव साहित्य ही कराता है। साहित्य शाश्वत सत्य को संजोगता है।"
ट्रस्टी पद्मश्री डॉ जे० के ० सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि "मिथिला साहित्य और ज्ञान की भूमि रही है और महाराजा कामेश्वर सिंह ने इस परम्परा को कायम रखने का भरसक प्रयास किया। केवल शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र ही नहीं अपितु कृषि, उद्योग आधुनिक शिक्षा सभी को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। इस सारस्वत कार्यक्रम में शामिल सभी आगत अतिथियों एवं विद्वानों को बहुत बहुत धन्यवाद और आभार।"
धन्यवाद ज्ञापन ट्रस्टी प्रोफेसर डॉ रामचंद्र झा ने किया और अपने उद्बोधन में इस कार्यक्रम में आए विविध विषयों के विद्वान वक्ताओं के प्रति फाउंडेशन आभारी है। साथ ही इस स्मृति व्याख्यान में पधारे सभी श्रोताओं को भी धन्यवाद कि आपने अपना बहुमूल्य समय दिया।

16/11/2025

आगामी 28 नवम्बर, 2025 (शुक्रवार) को प्रात: 11.00 बजे से महाराजाधिराज डा. सर कामेश्वर सिंह जी का 118 वाँ जन्म दिवस समारोह महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन द्वारा कल्याणी निवास (पी.टी.सी. गेट नं.1 के सामने), दरभंगा में संकल्पित है। इस अवसर पर पिछले वर्षों की भाँति 'महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह स्मृति व्याख्यान' आयोजित किया जायेगा। इस वर्ष का स्मृति व्याख्यान भारतीय संस्कृति और परम्परा के विशेषज्ञ श्री जे. नन्दकुमार (अखिल भारतीय संयोजक, प्रज्ञा प्रवाह) देंगे। समारोह की अध्यक्षता प्रो. धर्मेंद्र कुमर (पूर्व प्राचार्य एवं विभागाध्यक्ष वि.स्नातकोत्तर इतिहास विभाग, एल.एन.एम.यू, दरभंगा) करेंगे।

इस समारोह में महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाऊँडेशन द्वारा प्रकाशित कामेश्वर सिंह स्मृति व्याख्यान माला का 5वां खण्ड, "इंडिया: माइग्रेशन, माउंटेन एंड मोरालिटी," नामक पुस्तक का लोकार्पण भी होना है।

Address

Maharadhiraja Kameshwar Singh Kalyani Foundation, Kalyani Niwas, Opp. Postal Training Center, (Gate No. 1), Kameshwar Nagar
Darbhanga
846008

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Tuesday 10am - 6am
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