18/01/2026
प्रेस विज्ञप्ति/श्रद्धांजलि सभा
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आज दिनांक 18 जनवरी 2026 को दरभंगा स्थित कल्याणी निवास में ''महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन'' के न्यासियों द्वारा दरभंगा राज की अंतिम महारानी एवं फाउण्डेशन की दाता न्यासी महारानी कामसुन्दरी साहिबा को एक अत्यंत गरिमामय और भावपूर्ण श्रद्धांजलि प्रदान किया गया। अंतिम महारानी, काम सुन्दरी साहिबा का जीवन स्वयं में राज दरभंगा के इतिहास का एक ऐसा शांत और गहन अध्याय रहा, जो शोर, नारे और प्रदर्शन से दूर रहते हुए भी अपने प्रभाव में अत्यंत दूरगामी था। राज दरभंगा, जो कभी मिथिला की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में जाना जाता था—जहाँ से शिक्षा, संस्कृत, शास्त्र, धर्म, संस्कृति और समाज-सेवा की सशक्त धाराएँ प्रवाहित हुईं—उस गौरवशाली परंपरा की अंतिम जीवित कड़ी महारानी जी थीं। महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह के साथ जुड़ा उनका जीवन उस ऐतिहासिक कालखंड का साक्षी रहा, जब राजसत्ता केवल वैभव का प्रतीक नहीं, बल्कि लोक कल्याण, सामाजिक उत्तरदायित्व और नैतिक मर्यादा का माध्यम हुआ करती थी। श्रद्धांजलि अर्पण के उपरांत वक्ताओं ने महारानी साहिबा के ऐतिहासिक, बौद्धिक और सामाजिक योगदान पर गहरी संवेदनशीलता, गंभीरता और आदर भाव के साथ प्रकाश डाला। यह अवसर केवल स्मरण का नहीं था, बल्कि महारानी साहिबा की वैचारिक विरासत को समझने, सहेजने और उसे समकालीन समाज से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास भी था।
इस अवसर पर संस्था के न्यासी पद्मश्री डॉ. जितेन्द्र कुमार सिंह का वक्तव्य विशेष रूप से उल्लेखनीय, विचारोत्तेजक और दूरदर्शी रहा। उन्होंने महारानी जी को अपने समय से कहीं आगे की सोच रखने वाली एक असाधारण बौद्धिक व्यक्तित्व के रूप में रेखांकित करते हुए कहा कि, महारानी साहिबा केवल राजपरिवार की प्रतिनिधि भर नहीं थीं, बल्कि ज्ञान, विवेक, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व से संपन्न एक सजग चिंतक थीं। डॉ. सिंह ने कहा कि शिक्षा, संस्कृति, परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन स्थापित करने की जो दृष्टि महारानी जी में थी, वही उन्हें इतिहास में एक विशिष्ट और सम्मानित स्थान प्रदान करती है। अपने वक्तव्य में उन्होंने विशेष रूप से यह महत्वपूर्ण बात कही कि “महारानी साहिबा के नाम को केवल स्मृतियों तक सीमित नहीं रहने देना चाहिए, बल्कि उनके नाम, विचार और योगदान को जीवित रखने की आज सबसे अधिक आवश्यकता है। उनका नाम जीवित रहेगा, तभी उनकी विरासत भी जीवित रहेगी।” डॉ. सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि महारानी साहिबा का योगदान किसी बीते युग की निष्क्रिय स्मृति नहीं, बल्कि आज के समाज के लिए भी एक सक्रिय और जीवंत मार्गदर्शन है, जिसे आत्मसात करना और आगे बढ़ाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
फाउंडेशन के न्यासी प्रोफेसर शिरीश चंद्र चौधरी आवासीय पटल से अपने विस्तृत वक्तव्य में महारानी साहिबा के व्यक्तित्व और कृतित्व को मिथिला की सांस्कृतिक आत्मा से जोड़ते हुए कहा कि वे मिथिला की बौद्धिक परंपरा की सशक्त संवाहिका थीं। प्रो. चौधरी ने कहा कि महारानी जी ने शिक्षा, साहित्य, कला और समाजसेवा के क्षेत्रों में जिस निष्ठा, धैर्य और प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया, वह आज भी शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है। उनके विचारों और आचरण में मानवीय मूल्यों की गहरी समझ, सामाजिक समरसता की स्पष्ट चेतना और लोककल्याण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता सहज रूप से दिखाई देती है, जो उन्हें एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व के रूप में स्थापित करती है।
इस अवसर पर न्यासी पंडित श्री रामचन्द्र झा ने कहा कि महारानी साहिबा का संपूर्ण जीवन त्याग, सेवा और जन कल्याण की उस परंपरा का प्रतीक रहा है, जिसने मिथिला की सांस्कृतिक पहचान को न केवल सुरक्षित रखा, बल्कि उसे और अधिक समृद्ध भी किया। उन्होंने कहा कि महारानी जी का योगदान मिथिला के सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है और आने वाली पीढ़ियाँ उनके जीवन और मूल्यों से निरंतर प्रेरणा ग्रहण करती रहेंगी।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान श्री विशाल जीत सिंह ‘राठौर’ एवं श्री वरुण कुमार सिंह की भी गरिमामय उपस्थिति रही। सभी वक्ताओं और उपस्थितजनों ने एक स्वर में कहा कि महारानी जी की ऐतिहासिक बौद्धिक विरासत, उनके विचार और उनके सामाजिक योगदान को संरक्षित करना तथा भावी पीढ़ियों तक जीवंत रूप में पहुँचाना महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन का प्रमुख उद्देश्य है, जिसके लिए न्यास निरंतर सक्रिय, सजग और प्रतिबद्ध रहेगा। साथ ही श्रद्धांजलि सभा के दौरान सभी उपस्थितजनों ने महारानी जी के तैलचित्र पर श्रद्धा-सुमन अर्पित कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। सभी आगन्तुकों ने एकमत से कहा कि महारानी साहिबा की ऐतिहासिक बौद्धिक विरासत, उनके विचार और उनके सामाजिक योगदान को संरक्षित करना तथा भावी पीढ़ियों तक जीवंत रूप में पहुँचाना महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन का प्रमुख उद्देश्य है, जिसके लिए न्यास निरंतर सक्रिय और प्रतिबद्ध रहेगा। मौके पर उपस्थित प्रमुख लोग—
दरभंगा राजपरिवार के रत्नेश्वर सिंह,
पद्मश्री डॉ. जितेन्द्र कुमार सिंह,
प्रोफेसर शिरीश चंद्र चौधरी,
पंडित श्री रामचन्द्र झा,
उदय नाथ झा,
श्री श्रुतिकर झा,
श्री पारस नाथ सिंह ठाकुर,
श्री विशाल जीत सिंह ‘राठौर’,
श्री वरुण कुमार सिंह,
श्री अजयधारी सिंह,
डॉ. मंजर सुलैमान,
डॉ. सुशान्त कुमार,
डॉ. मो. जमील हसन अंसारी,
श्री संतोष कुमार झा एवं अन्य।
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महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन
दरभंगा, बिहार