खंगार क्षत्रिय समाज सेवा विकास संघ दमोह मध्यप्रदेश

  • Home
  • India
  • Damoh
  • खंगार क्षत्रिय समाज सेवा विकास संघ दमोह मध्यप्रदेश

खंगार क्षत्रिय समाज सेवा विकास संघ दमोह मध्यप्रदेश क्षत्रिय खंगार राजपूत समाज की एकता और अखंडता PGDCA, MBA, MSW
आईटी सेल प्रभारी मध्यप्रदेश
क्षत्रिय अस्तित्व न्याय मोर्चा

10/12/2025
Maharaja Khet Singh Khangar
01/06/2025

Maharaja Khet Singh Khangar

महाराजा खेतसिंह खंगार जयंती समारोह गढ़कुंडार महोत्सव 🚩⚔️पधारो सा🙏 #महाराजा_श्री_खेत_सिंह_खंगार_जी  #क्षत्रिय_खंगार  ानी ...
23/12/2024

महाराजा खेतसिंह खंगार जयंती समारोह
गढ़कुंडार महोत्सव 🚩⚔️
पधारो सा🙏
#महाराजा_श्री_खेत_सिंह_खंगार_जी
#क्षत्रिय_खंगार ानी #क्षत्रिय_धर्म

सूचना / निवेदन◆ भदौरिया वंशीय क्षत्रिय बन्धुओ / ◆ खंगार वंशीय क्षत्रिय बन्धुओ भदौरिया वंश के कुलदीपक महाराजा रजूराव भदौर...
16/06/2024

सूचना / निवेदन

◆ भदौरिया वंशीय क्षत्रिय बन्धुओ /
◆ खंगार वंशीय क्षत्रिय बन्धुओ

भदौरिया वंश के कुलदीपक महाराजा रजूराव भदौरिया की 816 की जयंती एवं अटेरी दुर्ग रक्षक प्रधान सेनापति शूरवीर भूपति सिंह खंगार जी का शौर्य दिवस ( भूपतिमहोत्सव ) दिनांक 16 जून 2024 दिन रविवार को समय शाम को प्रातः 7 बजे स्थान - रेडिएशन चौराहा मालवीय पेट्रोल पंप के पीछे इन्दौर में मनाई जा रही है

◆ खंगार एवं भदौरिया क्षत्रियों के मधुर संबंधों का व गौरवशाली इतिहास का संदेश पूरे भारतदेश के क्षत्रिय समाज में बहुत ही अच्छा जायेगा।।

सती माता राणक देसती माता राणक दे, क्षत्रिय खंगार राजपूत वंश की पहली सती देवी हैं!माँ राणक दे पर  महान कवि मैथिलीशरण गुप्...
19/05/2024

सती माता राणक दे
सती माता राणक दे, क्षत्रिय खंगार राजपूत वंश की पहली सती देवी हैं!
माँ राणक दे पर महान कवि मैथिलीशरण गुप्त नेअपनी पुस्तक सिद्धराज में
विस्तृत रूप से वर्णन करते हुए उनका पूरा
जीवन चरित्र मूल रूप से काव्य शैली में लिखा है! अभी तक सिद्धराज का सरल हिन्दी में अनुवाद कर हम एक कदम आगे बढे हैं!
सिद्धराज में मैथिलीशरण गुप्त ने माँ राणक दे के बारे में लिखा है कि वे सिन्धुराज की
पुत्री थी जो एक महाराजा थे!
सिंधुराज के ज्योतिषियों एवं संतों ने माँ राणक की कुंडली देख कर कहा था कि यदि
यह कन्या राज्य में रही तो बहुत सारे संकटों का कारण बनेगी, इसलिए सिन्धु राज ने राणक दे को जंगल में छुडवा दिया था!
वन में राणक दे,, एक कुम्हार दंपति को प्राप्त हुई थी! उन्हें कोई संतान नहीं थी, ईश्वर का वरदान मान कुम्हार दंपति ने राणक दे
का पालन पोषण बहुत जतन से किया था,
राणक नाम भी उन्होंने ही रखा था!
सिन्धु राज कहां के राजा थे, यह क्षत्रिय खंगार राजपूत वंश के लोगों/समाज बंधुओं
को भी अभी तक मालूम नहीं था! सैकड़ों
वर्षों से अभी तक हम सिर्फ सिन्धु राज ही
पढ रहे थे! सिन्धु राज,,
राजा भोज के पिता थे,, इस प्रकार राजा
भोज सती माँ राणक दे के भाई हुए!
भारतीय इतिहास का प्रवाह
पुस्तक में इसका विस्तार से वर्णन किया गया है!
अब सती माता राणक दे के जीवन चरित्र पर एक और पुस्तक एक दिव्य और उनके शक्ति
सती माता राणक दे
लिखी गई है, इसे पढ़ने के लिए
मूल्य 100/-₹
डाक खर्च ₹ 40 ₹
Phone pay 9826812179@ibl
What's app 9826812179
9926576889

महाराज नवलशाह सिंह खागर की गढ़ी
17/05/2024

महाराज नवलशाह सिंह खागर की गढ़ी

चेतक पर चढ़ जिसने , भाला से दुश्मन संघारे थे… मातृ भूमि के खातिर , जंगल में कई साल गुजारे थे… वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप...
09/05/2024

चेतक पर चढ़ जिसने , भाला से दुश्मन संघारे थे…
मातृ भूमि के खातिर , जंगल में कई साल गुजारे थे…
वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी की जन्म जयंती पर शत शत नमन। 🙏

क्षत्रिय राजवंश वंशावलीलेखक - बलदेव सिंह ठाकुर जी इंदौर
09/05/2024

क्षत्रिय राजवंश वंशावली
लेखक - बलदेव सिंह ठाकुर जी इंदौर

  मेवाड़ के महान योद्धा राणा सांगा पुण्य तिथि 30 जनवरी 1528राणा सांगा का पूरा नाम महाराणा संग्रामसिंह था. उनका जन्म 12 अ...
30/01/2024


मेवाड़ के महान योद्धा राणा सांगा
पुण्य तिथि 30 जनवरी 1528

राणा सांगा का पूरा नाम महाराणा संग्रामसिंह था. उनका जन्म 12 अप्रैल, 1484 को मालवा, राजस्थान मे हुआ था. राणा सांगा सिसोदिया राजवंशी थे. राणा सांगा ने विदेशी आक्रमणकारियों के विरुद्ध सभी राजपूतों को एकजुट किया। राणा सांगा अपनी वीरता और उदारता के लिये प्रसिद्ध हुये। एक विश्वासघाती के कारण वह बाबर से युद्ध हारे लेकिन उन्होंने अपने शौर्य से दूसरों को प्रेरित किया। राणा रायमल के बाद सन 1509 में राणा सांगा मेवाड़ के उत्तराधिकारी बने। इन्होंने दिल्ली, गुजरात, व मालवा मुगल बादशाहों के आक्रमणों से अपने राज्य की बहादुरी से ऱक्षा की। उस समय के वह सबसे शक्तिशाली हिन्दू राजा थे। इनके शासनकाल मे मेवाड़ अपनी समृद्धि की सर्वोच्च ऊँचाई पर था। एक आदर्श राजा की तरह इन्होंने अपने राज्य की रक्षा तथा उन्नति की। (शासनकाल 1509 से 1528 ई.) राणा सांगा अदम्य साहसी थे। एक भुजा, एक आँख खोने व अनगिनत ज़ख्मों के बावजूद उन्होंने अपना महान पराक्रम नहीं खोया, सुलतान मोहम्मद शासक माण्डु को युद्ध मे हराने व बन्दी बनाने के बाद उन्हें उनका राज्य पुनः उदारता के साथ सौंप दिया.

बाबर ने पानीपत के युद्ध को तो जीत लिया परन्तु हिन्दू समाज ने उसे केवल एक विदेशी, आक्रमणकारी तथा लुटेरे से अधिक स्वीकार न किया। बाबर के आगरा पहुंचने पर उसके अधिकारियों तथा सेना को तीन दिन तक भोजन नहीं मिला। घोड़ों को चारा भी उपलब्ध नहीं हुआ। अबुल फजल ने स्वीकार किया है कि हिन्दुस्थानी बाबर से घृणा करते थे। इस विदेशी लुटेरे बाबर का अपने जीवन का महानतम संघर्ष खानवा के मैदान में मेवाड़ के शक्तिशाली शासक राणा संग्राम सिंह (राणा सांगा) से हुआ। राणा सांगा महाराणा कुंभा के पौत्र तथा महाराणा रायमल के पुत्र थे। वे अपने समय के महानतम विजेता तथा "हिन्दूपति" के नाम से विख्यात थे। वे भारत में हिन्दू-साम्राज्य की स्थापना के लिए प्रयत्नशील थे। उन्होंने मालवा तथा गुजरात पर अपना आधिपत्य स्थापित किया था। बाबर के साथ इस संघर्ष के बारे में इतिहासकार लेनपूल ने लिखा है, "अब बाबर को ऐसे उच्च कोटि के कुछ योद्धाओं का सामना करना पड़ा जिनसे इससे पहले कभी टक्कर न हुई थी।"

इस भीषण युद्ध के प्रारंम्भ में ही बाबर की करारी हार हुई तथा उसकी विशाल सेना भाग खड़ी हुई। वास्तव में इस युद्ध में ऐसा कोई राजपूत कुल नहीं था जिसके श्रेष्ठ नायक का रक्त न बहा हो। परन्तु बाबर भागती हुई अपनी सेना को पुन: एकत्रित करने में सफल हुआ। उसने अपने सैनिकों में मजहबी उन्माद तथा भविष्य के सुन्दर सपने देकर जोश भरा तथा लड़ने के लिए तैयार किया, जिसमें उसे सफलता मिली। चन्देरी दुर्ग के रक्षक, राणा सांगा द्वारा नियुक्त मेदिनी राय ने 4,000 राजपूत सैनिकों के साथ संघर्ष किया। संख्या अत्यधिक कम होने पर भी केसरिया वस्त्र धारण कर सैनिकों ने अंतिम सांस तक संघर्ष किया। परन्तु इस युद्ध में राजपूतो की हार और बाबर की जीत हुई।कुछ समय पश्चात वि.स्. 1584(30 जनवरी 1528) को कालपी नामक स्थान पर 46 वर्ष की आयु में महाराणा का स्वर्गवास हो गया। महाराणा की मृत्यु के समय उनके शरीर पर कम से कम 80 घाव तीर और भालों के लगे हुए थे।

मेवाड़ के महान योद्धा मेदनी राय जी के परम मित्र राणा संग्राम सिंह 'राणा सांगा' जी की पुण्यतिथि पर शत शत नमन।



Address

Damoh

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when खंगार क्षत्रिय समाज सेवा विकास संघ दमोह मध्यप्रदेश posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to खंगार क्षत्रिय समाज सेवा विकास संघ दमोह मध्यप्रदेश:

Share