19/05/2024
सती माता राणक दे
सती माता राणक दे, क्षत्रिय खंगार राजपूत वंश की पहली सती देवी हैं!
माँ राणक दे पर महान कवि मैथिलीशरण गुप्त नेअपनी पुस्तक सिद्धराज में
विस्तृत रूप से वर्णन करते हुए उनका पूरा
जीवन चरित्र मूल रूप से काव्य शैली में लिखा है! अभी तक सिद्धराज का सरल हिन्दी में अनुवाद कर हम एक कदम आगे बढे हैं!
सिद्धराज में मैथिलीशरण गुप्त ने माँ राणक दे के बारे में लिखा है कि वे सिन्धुराज की
पुत्री थी जो एक महाराजा थे!
सिंधुराज के ज्योतिषियों एवं संतों ने माँ राणक की कुंडली देख कर कहा था कि यदि
यह कन्या राज्य में रही तो बहुत सारे संकटों का कारण बनेगी, इसलिए सिन्धु राज ने राणक दे को जंगल में छुडवा दिया था!
वन में राणक दे,, एक कुम्हार दंपति को प्राप्त हुई थी! उन्हें कोई संतान नहीं थी, ईश्वर का वरदान मान कुम्हार दंपति ने राणक दे
का पालन पोषण बहुत जतन से किया था,
राणक नाम भी उन्होंने ही रखा था!
सिन्धु राज कहां के राजा थे, यह क्षत्रिय खंगार राजपूत वंश के लोगों/समाज बंधुओं
को भी अभी तक मालूम नहीं था! सैकड़ों
वर्षों से अभी तक हम सिर्फ सिन्धु राज ही
पढ रहे थे! सिन्धु राज,,
राजा भोज के पिता थे,, इस प्रकार राजा
भोज सती माँ राणक दे के भाई हुए!
भारतीय इतिहास का प्रवाह
पुस्तक में इसका विस्तार से वर्णन किया गया है!
अब सती माता राणक दे के जीवन चरित्र पर एक और पुस्तक एक दिव्य और उनके शक्ति
सती माता राणक दे
लिखी गई है, इसे पढ़ने के लिए
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