18/02/2026
✨ Mission Billion Summit में NKEF की आवाज़ | बिहार के अंतिम पायदान तक बदलाव
Neev Ki Eent Foundation को गर्व है कि हमारे संस्थापक अंशु कुमार जायसवाल ने Mission Billion Summit में भारत की ईंट भट्ठा बस्तियों की जमीनी सच्चाइयों और बिहार के रोहतास/सासाराम क्षेत्र में किए जा रहे हमारे कार्यों को साझा किया।
इस मंच पर हमने बताया कि कैसे NKEF ईंट भट्ठा मजदूर परिवारों, प्रवासी समुदायों और बच्चों के साथ मिलकर—
📚 बच्चों के लिए बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक समझ (FLN)
⚖️ परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा और अधिकारों तक पहुँच
🧑🤝🧑 युवाओं के लिए नेतृत्व विकास
जैसे क्षेत्रों में समुदाय-नेतृत्व आधारित मॉडल के माध्यम से काम कर रहा है, ताकि पीढ़ियों से चली आ रही गरीबी और शोषण के चक्र को तोड़ा जा सके।
समिट में एक महत्वपूर्ण मुद्दा सामने रखा गया: बिहार जैसे राज्यों को CSR और परोपकारी सहयोग में लगातार नज़रअंदाज़ किया जाता है। देश की 10% से अधिक आबादी बिहार में रहती है, फिर भी CSR फंडिंग का बहुत छोटा हिस्सा यहाँ तक पहुँचता है। यदि हम सच में “अंतिम पायदान” तक प्रभाव चाहते हैं, तो ज़रूरी है कि CSR लीडर्स और संस्थान मेट्रो शहरों से बाहर निकलकर सासाराम जैसे ज़िलों में निवेश करें—जहाँ हर रुपये का प्रभाव कहीं अधिक दिखाई देता है।
Mission Billion Summit जैसे मंच इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं—जहाँ सामाजिक संगठनों, CSR लीडर्स, परोपकारी संस्थाओं और नीति-निर्माताओं को एक साथ लाकर दीर्घकालिक, सिस्टम-लेवल बदलाव पर संवाद होता है।
🙏 हम Change Engine की टीम और Mission Billion Summit के आयोजकों का आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने जमीनी स्तर पर काम करने वाले संगठनों को यह मंच दिया। साथ ही उन सभी साथियों और संगठनों का धन्यवाद, जिन्होंने ध्यान से सुना, संवाद किया और अंतिम पायदान तक प्रभाव पहुँचाने की प्रतिबद्धता दिखाई।
👉 हम CSR लीडर्स, फाउंडेशन्स, परोपकारी संस्थाओं और सामाजिक क्षेत्र के साझेदारों को आमंत्रित करते हैं कि वे सासाराम (रोहतास, बिहार) में हमारे कार्यस्थलों का दौरा करें और जमीनी स्तर पर हो रहे बदलाव को स्वयं देखें—बच्चों की शिक्षा की वापसी, परिवारों का अधिकारों से जुड़ना और युवाओं का नेतृत्व में आगे आना।
ईंटों से किताबों तक—यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक साझा यात्रा है।
आइए, मिलकर बिहार के अंतिम पायदान तक सम्मान, अधिकार और अवसर पहुँचाएँ।
Anshu Kumar Jaiswal