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🔴 जनगणना 2026–27: आदिवासी सांस्कृतिक पहचान पर संवैधानिक अन्याय7 जनवरी 2026 की अधिसूचना के अनुसार आने वाली जनगणना 2026–27...
11/01/2026

🔴 जनगणना 2026–27: आदिवासी सांस्कृतिक पहचान पर संवैधानिक अन्याय

7 जनवरी 2026 की अधिसूचना के अनुसार आने वाली जनगणना 2026–27 में
✅ जैन, सिख, बौद्ध जो हिंदू है,उन्हें अलग जनगणना कलम,OBC की जातिगत गणना होगी।
❌ लेकिन जो स्वयं की ट्राइबल धार्मिक सांस्कृतिक पहचान रखता है उन आदिवासियों को अलग सांस्कृतिक पहचान (Religion/cultural Code) नहीं दी जाएगी,जनगणना में अलग कलम प्रदान नहीं की जाएगी।

यह सीधा-सीधा संवैधानिक भेदभाव है।

👉 जैन, सिख, बौद्ध
•Hindu Marriage Act के तहत आते हैं
•फिर भी जनगणना में अलग धर्म कोड मिलता है

👉 आदिवासी (ST)

•Hindu Marriage Act की धारा 2(2) के तहत स्पष्ट रूप से बाहर हैं
•अपने कस्टमरी कानून और प्रकृति-आधारित धर्म (Sarna, Gondi, Donyi-Polo आदि) मानते हैं

फिर भी जनगणना में “हिंदू” या “Other” में जबरन जोड़े जाते हैं

📌 यह अनुच्छेद 14 (समानता), 25 (धर्म की स्वतंत्रता), 29 (संस्कृति संरक्षण) का उल्लंघन है।
📌 यह UNDRIP (संयुक्त राष्ट्र आदिवासी अधिकार घोषणा) के खिलाफ है।
📌 इससे आदिवासी आबादी कागज़ों में घटेगी, और Fifth Schedule, PESA, FRA जैसे अधिकार कमजोर होंगे।
📌 यह जबरन सांस्कृतिक विलय (Forced Assimilation) की प्रक्रिया है।

📊 2011 में 79 लाख से अधिक लोगों ने “Other Religion” चुना — जिनमें अधिकांश आदिवासी धर्मावलंबी थे।
आज अनुमान है कि 6 करोड़ से अधिक लोग आदिवासी धर्म/सांस्कृतिक मानते हैं।

❗ सवाल साफ है:
जो कानूनी रूप से हिंदू नहीं हैं, उन्हें धर्म कोड क्यों नहीं?
और जो हिंदू कानूनों में आते हैं, उन्हें अलग कोड क्यों?

✊ मांग स्पष्ट है
➡️ जनगणना 2026–27 में
“आदिवासी / Indigenous Religion Code” जोड़ा जाए
➡️ Sarna, Gondi, Donyi-Polo जैसे धर्मों को स्व-पहचान के आधार पर दर्ज करने का अधिकार मिले

यह सिर्फ धर्म का सवाल नहीं,
👉 अस्तित्व, अधिकार और संविधान की आत्मा का सवाल है।

आदिवासी समुदाय की पहचान= भारत की मूल आत्मा है,
इसे मिटने नहीं देंगे।
✊🔥

— गोंड देवरावेन भलावी
जिला अध्यक्ष
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी जिला-छिंदवाड़ा
संस्थापक - राष्ट्रीय क्रांति मोर्चा । जेबीडी ग्रुप
पूर्व विधायक प्रत्याशी - अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र क्र. 123
पूर्व लोकसभा प्रत्याशी - छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र क्र. 16

DrAnand Rai sir

5 जनवरी 2011 – जब सुप्रीम कोर्ट ने मोहर लगाई कि "आदिवासी ही भारत के मूल मालिक हैं"आज दिनांक: 05 जनवरी, 2025विषय: कैलाश व...
05/01/2026

5 जनवरी 2011 – जब सुप्रीम कोर्ट ने मोहर लगाई कि "आदिवासी ही भारत के मूल मालिक हैं"

आज दिनांक: 05 जनवरी, 2025
विषय: कैलाश व अन्य बनाम महाराष्ट्र राज्य (2011) फैसले की 14वीं वर्षगांठ पर विशेष विश्लेषण
आज से ठीक 14 साल पहले, 5 जनवरी 2011 का दिन भारतीय न्यायिक इतिहास और आदिवासी अस्मिता के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ था। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने न केवल एक पीड़ित आदिवासी महिला को न्याय दिया, बल्कि देश के इतिहास और समाजशास्त्र को लेकर एक ऐसी टिप्पणी की, जो आज भी "मूलनिवासी" विमर्श का आधार है।

1. मामले की पृष्ठभूमि: नंदाबाई भील का संघर्ष
यह मामला महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले का है, जहां भील जनजाति की एक 25 वर्षीय महिला, नंदाबाई, के साथ अमानवीय क्रूरता की गई थी। सवर्ण जाति के आरोपियों ने उसे नग्न करके पीटा और गांव में घुमाया था। यह केवल एक महिला का अपमान नहीं था, बल्कि यह उस सामंती मानसिकता का प्रदर्शन था जो आदिवासियों को इंसान नहीं समझती।

2. सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला (The Historic Verdict)
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मार्कंडेय काटजू और जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा की पीठ ने इस मामले (Criminal Appeal No. 11/2011) में फैसला सुनाते हुए दो टूक कहा था कि यह अपराध "सभ्य समाज के माथे पर कलंक" है।
कोर्ट ने अपने फैसले में जो ऐतिहासिक टिप्पणियां कीं, वे आज भी प्रासंगिक हैं:
* आदिवासी ही मूलनिवासी हैं: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि भारत के 8% आदिवासी ही इस देश के असली मूलनिवासी (Original Inhabitants) हैं। शेष 92% लोग बाहर से आए हुए (आप्रवासी/Immigrants) लोगों के वंशज हैं।
* ऐतिहासिक अन्याय: कोर्ट ने कहा कि पिछले हजारों सालों से आदिवासियों के साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने महाभारत काल का उदाहरण देते हुए कहा कि "गुरु द्रोणाचार्य द्वारा एकलव्य का अंगूठा मांग लेना, आदिवासियों के साथ सदियों से चले आ रहे अत्याचार का शास्त्रीय उदाहरण है"।
* सम्पदा के रक्षक: जल, जंगल और जमीन को बचाने का श्रेय आदिवासियों को देते हुए कोर्ट ने कहा कि इन्हीं की वजह से आज नदियां और जंगल बचे हुए हैं।

3. 'इमीग्रेशन नेशन' (Immigration Nation) का सिद्धांत
इस फैसले में जस्टिस काटजू ने भारत को एक "इमीग्रेशन कंट्री" (जैसे अमेरिका या कनाडा) बताया। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति विविध है क्योंकि यहाँ बाहर से लोग आते गए और बसते गए, लेकिन इस प्रक्रिया में मूल निवासियों (आदिवासियों) को जंगलों में धकेल दिया गया और उन्हें हाशिए पर ला खड़ा किया गया।
4. आज के परिदृश्य में मायने (2025)
फैसले के 14 साल बाद, आज 2025 में हमें यह आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है:
* संविधान बनाम वास्तविकता: क्या हम संविधान के अनुच्छेद 15, 16 और 46 (जो सामाजिक न्याय की बात करते हैं) को जमीनी स्तर पर लागू कर पाए हैं?
* न्याय की गति: नंदाबाई को न्याय मिलने में सालों लग गए। आज भी एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Atrocities Act) के बावजूद मामले लंबित क्यों हैं?
* सामाजिक समरसता: सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह देश सबका है, लेकिन आदिवासियों के प्रति सम्मान और बराबरी का भाव लाना बहुसंख्यक समाज की जिम्मेदारी है।
5. निष्कर्ष और संकल्प
यह फैसला (Kailas & Ors vs State of Maharashtra) केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि आदिवासियों के "जल-जंगल-जमीन" पर प्राकृतिक अधिकार का प्रमाण पत्र है। आज के दिन हमें संकल्प लेना होगा कि हम अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करेंगे और संविधान को केवल किताब नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका बनाएंगे।
> "जवाबदेही तय करो — वरना संविधान केवल किताब रह जाएगा।"
>
जारीकर्ता:
गोंड देवरावेन भलावी
जिला अध्यक्ष, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (छिंदवाड़ा)
संस्थापक – राष्ट्रीय क्रांति मोर्चा, JBD GROUP INDIA
सोशल मीडिया:

#5जनवरी_2011

📢 सूचना 🪶 JBD GROUP INDIA(Jay Bada Dev Group India)गोंडवाना समग्र विकास क्रांति आंदोलन – युवा शाखा               #दीवार_...
31/12/2025

📢 सूचना 🪶 JBD GROUP INDIA
(Jay Bada Dev Group India)
गोंडवाना समग्र विकास क्रांति आंदोलन – युवा शाखा

#दीवार_लेखन_अभियान

संगठन के सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं साथियों से निवेदन किया जाता है कि—

संगठन के वैचारिक प्रचार-प्रसार एवं सामाजिक जागरूकता को सशक्त करने हेतु अपने-अपने घरों की दीवारों पर महापुरुषों के विचार/नारे इस प्रकार लिखें, जैसा संगठन द्वारा निर्देशित किया गया है।

📝 निर्देश:

1. दीवार पर महापुरुषों के विचार या नारे साफ़ व स्पष्ट अक्षरों में लिखें।
2. विचार/नारे के नीचे अनिवार्य रूप से “JBD GROUP INDIA” लिखें।
3. लेखन पूरा होने के बाद उसकी स्पष्ट फोटो लें।
4. उक्त फोटो को अपने-अपने ग्राम/ब्लॉक/जिला संचालक अथवा संगठन के मुख्य पदाधिकारियों तक साझा करें।

🎯 उद्देश्य:

•संगठन की विचारधारा का निरंतर प्रचार-प्रसार
•युवाओं में वैचारिक चेतना और आत्मसम्मान
•गाँव-गाँव JBD GROUP INDIA की पहचान को मजबूत करना

यह कार्य सभी सदस्यों एवं पदाधिकारियों के लिए अनिवार्य है।
निर्देशों का पालन संगठनात्मक अनुशासन का हिस्सा माना जाएगा।

---

आदेशानुसार,
JBD GROUP INDIA – मार्गदर्शक मंडल

🔊 “जय बड़ा देव – जंगोम करने चलो”
— गोंड देवरावेन भलावी
जिला अध्यक्ष
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी जिला-छिंदवाड़ा
संस्थापक - राष्ट्रीय क्रांति मोर्चा । जेबीडी ग्रुप
पूर्व विधायक प्रत्याशी - अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र क्र. 123
पूर्व लोकसभा प्रत्याशी - छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र क्र. 16

30 दिसंबर भारतीय इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण दिन है, खासकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के संदर्भ में, क्योंकि इसी दिन, 30 दिसं...
30/12/2025

30 दिसंबर भारतीय इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण दिन है, खासकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के संदर्भ में, क्योंकि इसी दिन, 30 दिसंबर 1943 को उन्होंने पोर्ट ब्लेयर (अंडमान) में भारतीय स्वतंत्रता का झंडा फहराया था।

— गोंड देवरावेन भलावी
जिला अध्यक्ष
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी जिला-छिंदवाड़ा
संस्थापक - राष्ट्रीय क्रांति मोर्चा । जेबीडी ग्रुप
पूर्व विधायक प्रत्याशी - अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र क्र. 123
पूर्व लोकसभा प्रत्याशी - छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र क्र. 16

जब सुप्रीम कोर्ट ने यह माना किहाईकोर्ट का आदेश टिकाऊ नहीं था,तो फिर उस हाईकोर्ट जज पर क्या कार्रवाई हुईजिसने यह वाहियात ...
30/12/2025

जब सुप्रीम कोर्ट ने यह माना कि
हाईकोर्ट का आदेश टिकाऊ नहीं था,
तो फिर उस हाईकोर्ट जज पर क्या कार्रवाई हुई
जिसने यह वाहियात और असंवेदनशील फैसला दिया?
#उन्नाव_रेप_केस

— गोंड देवरावेन भलावी
जिला अध्यक्ष
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी जिला-छिंदवाड़ा
संस्थापक - राष्ट्रीय क्रांति मोर्चा । जेबीडी ग्रुप
पूर्व विधायक प्रत्याशी - अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र क्र. 123
पूर्व लोकसभा प्रत्याशी - छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र क्र. 16

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