03/11/2025
उत्तर प्रदेश की एक लोकसभा सीट है हमीरपुर-महोबा, जिसे अक्सर लोधलैंड कहा जाता है। लेकिन यह नामकरण असलियत से ज्यादा एक राजनीतिक मिथक है।
अब तक इस सीट से लोधी समाज के 6, ब्राह्मण समाज के 5 और ठाकुर (क्षत्रिय) समाज के 4 सांसद बन चुके हैं। (जिनमें तेज प्रताप सिंह, अशोक सिंह चंदेल, बहादुर सिंह और पुष्पेन्द्र सिंह चंदेल जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।)
यहां के जातीय समीकरण की बात करें तो लोधी 12.8 प्रतिशत, ब्राह्मण 12 प्रतिशत और क्षत्रिय 13 प्रतिशत।
यानि इस क्षेत्र में लोधलैंड का जो फर्जी नैरेटिव गढ़ा गया है, वह वास्तविक आंकड़ों से मेल नहीं खाता। असल में यहां क्षत्रिय सबसे अधिक हैं, उसके बाद लोधी और ब्राह्मण।
इस सीट पर एक पैटर्न हमेशा से देखने को मिलता है कि जब भी ब्राह्मण और क्षत्रिय उम्मीदवार आमने-सामने होते हैं, तो लोधी प्रत्याशी को फायदा मिल जाता है।
जैसे 2024 के चुनाव में हुआ — सपा के अजेंद सिंह लोधी जीत गए और भाजपा के पुष्पेन्द्र सिंह चंदेल हार गए क्योंकि बसपा ने ब्राह्मण उम्मीदवार उतार दिया था।
अगर इस सीट का सबसे बड़ा नेता कोई रहा है तो वह हैं तेज प्रताप सिंह, जिन्होंने BLD पार्टी से चुनाव जीतकर इतिहास रचा था। बाद में उनकी पार्टी का विलय चौधरी चरण सिंह की जनता पार्टी में हुआ।
1977 के लोकसभा चुनाव में तेज प्रताप सिंह को 55 प्रतिशत वोट मिले थे — जो आज तक किसी भी हमीरपुर-महोबा उम्मीदवार को नहीं मिले।
उन्होंने उस चुनाव में दो बार के सीटिंग सांसद स्वामी ब्रह्मानंद को हराया था, जो लोधी समाज से थे और पहली बार जनसंघ से सांसद बने थे।
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इस क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण विधानसभा सीट तिंदवारी मानी जाती है, जहां करीब 70 हजार ठाकुर मतदाता हैं।
जब वी.पी. सिंह मुख्यमंत्री बने थे, तो उन्होंने उपचुनाव में यहीं से जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया था। पहले यह सीट फतेहपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती थी।
बाद में प्रधानमंत्री बनने पर भी उन्होंने फतेहपुर लोकसभा से चुनाव लड़ा, जिसमें पहले तिंदवारी आती थी।
तिंदवारी को बुंदेलखंड का मिनी चित्तौड़गढ़ कहा जाता है, क्योंकि यहां ठाकुरों का प्रभाव रहा है। मगर आज वहां से निषाद विधायक चुने जा रहे हैं।
निष्कर्ष यही है कि जहां भी संघ (RSS) मजबूत होता है, वहां ठाकुरों की राजनीतिक शक्ति धीरे-धीरे कमजोर कर दी जाती है।
हमीरपुर-महोबा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है — सांसदी देकर विधानसभा में ठाकुरों को हाशिये पर कर दिया गया और अब सांसदी भी चली गई।
सपा जातीय हिस्सेदारी की बात तो करती है, लेकिन इस क्षेत्र में आज तक ठाकुरों को उनका हक नहीं मिला।
साभार :- भदौरिया साहब