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MESA Foundation Mission for Education and Social Awareness

हमारी झोपड़ी तक शिक्षा नहीं पहुंचती लेकिनचुनाव के समय शराब जरूर पहुंच जाती है। तो आप खुद समझ लें हमारे बच्चों को बर्बाद ...
11/12/2023

हमारी झोपड़ी तक शिक्षा नहीं पहुंचती लेकिन
चुनाव के समय शराब जरूर पहुंच जाती है। तो आप खुद समझ लें हमारे बच्चों को बर्बाद कौन कर रहा है..?

ये पुस्तकें गांव नीमड़ी निवासी छतर सिंह चहल ने लाइब्रेरी के लिए अपनी तरफ से भेंट दी हैं ताऊजी का बहुत ही दिल से धन्यवाद ...
23/10/2023

ये पुस्तकें गांव नीमड़ी निवासी छतर सिंह चहल ने लाइब्रेरी के लिए अपनी तरफ से भेंट दी हैं
ताऊजी का बहुत ही दिल से धन्यवाद 🙏🏻🙏🏻

11/02/2023

प्रेम s/o रामचंद्र बरालू का सलेक्शन रेलवे में हो गया है इस मुकाम के लिए प्रेम को बहुत बहुत बधाई
हमनें लगभग 1वर्ष पहले निशुल्क भगतसिंह लाईब्रेरी बरालू के रुप में जो पोधा लगाया था उसने फल देना प्रारंभ कर दिया है बहुत खुशी होती है जब इस तरह से लगाए गए सार्वजनिक पोधे फल देने लगते हैं!

डिजिटल दुनिया में स्मार्ट फोन के फायदे भी हैं,लेकिन इसके दुरुपयोग भी बहुत ज्यादा हो रहे हैं,शातिर लोग इसे दिमागी नसबंदी ...
12/12/2022

डिजिटल दुनिया में स्मार्ट फोन के फायदे भी हैं,लेकिन इसके दुरुपयोग भी बहुत ज्यादा हो रहे हैं,शातिर लोग इसे दिमागी नसबंदी का हथियार बना चुके हैं,
स्मार्ट फोन का सीमित प्रयोग करके किताबों को समय दें।
किताबें ही बदलाव का रास्ता हैं।
Mission for Education and Social Awareness

"एक चीज जो आपको बिल्कुल सही-सही पता होनी चाहिए वह है लाइब्रेरी का एड्रेस।" –अल्बर्ट आइंसटाइनMission for Education & Soci...
12/12/2022

"एक चीज जो आपको बिल्कुल सही-सही पता होनी चाहिए वह है लाइब्रेरी का एड्रेस।"
–अल्बर्ट आइंसटाइन
Mission for Education & Social Awareness

अपने दिन भर के क्रियाकलाप में से 2 घण्टे लाइब्रेरी को जरुर दें।यह आपके लिये बहुत जरुरी है।Mission for Education & Social...
12/12/2022

अपने दिन भर के क्रियाकलाप में से 2 घण्टे लाइब्रेरी को जरुर दें।यह आपके लिये बहुत जरुरी है।
Mission for Education & Social Awareness

तुम्हारे पैरों में जूते भले न हो, लेकिन तुम्हारे हाँथों में किताबें होनी चाहिए।भीमराव अम्बेडकर
06/12/2022

तुम्हारे पैरों में जूते भले न हो, लेकिन तुम्हारे हाँथों में किताबें होनी चाहिए।
भीमराव अम्बेडकर

बराहलू लाइब्रेरी ज़िला भिवानी में पढ़ने वाले बच्चों ने साफ़ सफ़ाई की और अपने आँगन को बैठने योग्य किया...इस लाइब्रेरी में...
30/11/2022

बराहलू लाइब्रेरी ज़िला भिवानी में पढ़ने वाले बच्चों ने साफ़ सफ़ाई की और अपने आँगन को बैठने योग्य किया...
इस लाइब्रेरी में बहुत ज़्यादा जगह है...
बाहर बैठकर भी पढ़ सकते हैं....
और हॉल के अन्दर भी...
यह सहभागिता ही हमारी असली ताक़त है!

जब अंग्रेज सरकार जीवित भगतसिंह, राजगुरु व सुखदेव को न बाँट सकी और न ही उनके सम्बन्ध में भ्रम पैदा कर सकी तो आखिरी चाल चल...
30/11/2022

जब अंग्रेज सरकार जीवित भगतसिंह, राजगुरु व सुखदेव को न बाँट सकी और न ही उनके सम्बन्ध में भ्रम पैदा कर सकी तो आखिरी चाल चली गयी। 23 मार्च, 1931 को शाम सात बजे उन्हें फाँसी देकर उनकी लाशों के टुकड़े-टुकड़े किये गये । फिर फिरोज़पुर, सतलुज के किनारे उन्हें जलाने की कोशिश की गयी और अधजली हालत में सतलुज नदी में बहाया गया। यह सब बहुत जल्दबाजी में किया गया। टुकड़े करने और अधजली हालत का प्रमाण 24 मार्च, 1931 को शहीद भगतसिंह की बहिन बीबी अमरकौर व अन्य देशवासियों द्वारा खून सने पत्थर, रेत और तेजधार हथियार से कटी अधजली हड्डियाँ हैं,
जिन्हें आजकल खटकड़कलाँ गाँव में प्रदर्शित किया गया है। 23 मार्च की रात में ही अंग्रेज सरकार ने एक विज्ञापन लगाया था, जिसमें भगतसिंह का अन्तिम संस्कार सिख परम्परा से, राजगुरु का सनातनी परम्परा से और सुखदेव का आर्यसमाजी परम्परा से करने की बात कही गयी थी।
इसकी गवाही कसूर के ग्रन्थी व पण्डितों से दिलायी गयी थी। यह चाल अंग्रेजों ने भारत की साम्प्रदायिकता की कमज़ोरी से लाभ उठाने के लिए खेली।

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