Chamba Van Adhikar Manch

Chamba Van Adhikar Manch चंबा जिला में वन अधिकार अधिनियम 2006 को लागू करने के लिए कार्यरत जन संगठन।

01/09/2025

हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों के 20 से अधिक सामुदायिक संगठन और ग्राम सभाओं ने हाल ही में आए उच्च न्यायालय के बेदखली...

13/08/2025

साथियों,

साल 2002 से हिमाचल प्रदेश में सरकारी भूमि पर कब्जों से जुड़ा मामला माननीय उच्च न्यायालय में लंबित था। वर्तमान बेंच ने हाल ही में आदेश जारी करते हुए सरकारी भूमि पर काबिज लोगों को हटाने का निर्देश दिया है और हिमाचल प्रदेश भूमि राजस्व अधिनियम की धारा 163A को असंवैधानिक घोषित कर दिया है।

इस फैसले के बाद पूरे राज्य में वर्षों से काबिज लोगों को बेदखल करने की कार्रवाई तेज़ हो सकती है।

इस संदर्भ में *वन अधिकार अधिनियम, 2006 (FRA)* की स्थिति और प्रावधानों को समझने के लिए हम 13 अगस्त 2025 को शाम 6 बजे से एक ऑनलाइन बैठक आयोजित कर रहे हैं, जिसमें क़ानूनी जटिलताओं और सवालों पर चर्चा होगी।

बैठक का लिंक – 13 अगस्त को शाम 5 बजे साझा किया जाएगा।
📌 बैठक का लिंक प्राप्त करने व अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए नंबर पर संपर्क करें।

9882704177
9459021415

धन्यवाद 🙏

23/06/2025
28/05/2025

वन अधिकार कानून, 2006: अब समय है अपने हक को जानने और पाने का!

हम, हिमधरा पर्यावरण समूह, पिछले एक दशक से हिमाचल प्रदेश में वन अधिकार कानून (FRA) के क्रियान्वयन को लेकर सक्रिय हैं।

प्रदेश के कई संगठनों की मांगों को हाल ही में राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है।
इसी दिशा में हम FRA सूचना केंद्र शुरू कर रहे हैं, जहाँ से आप
◆ वन अधिकार कानून, 2006 के बारे में समग्र जानकारी प्राप्त कर सकते हैं
◆ अपने अधिकारों को समझ कर दावा करने की प्रक्रिया जान सकते हैं
◆ ज़मीनी अनुभवों के माध्यम से मार्गदर्शन पा सकते हैं

यह केंद्र विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश के वनाश्रित समुदायों के लिए है।
जानकारी के लिये हमसे संपर्क करें:
9882704177
9459021415
आभार 🙏🏾
हिमधरा पर्यावरण समूह

26/05/2025

वन अधिकार कानून 2006 (FRA) से जुड़े 5 बड़े भ्रम – सच्चाई क्या है?हिमाचल प्रदेश में FRA को लेकर कई भ्रांतियां फैली हुई हैं – क्...

वन अधिकार कानून के अंतर्गत दो श्रेणियों– अनुसूचित जनजातियां और अन्य परंपरागत वन निवासी (ओटीएफडी) – को अधिकार दिए गए हैं।...
15/04/2025

वन अधिकार कानून के अंतर्गत दो श्रेणियों– अनुसूचित जनजातियां और अन्य परंपरागत वन निवासी (ओटीएफडी) – को अधिकार दिए गए हैं। वन विभाग का यह दावा कि कौन पात्र है और कौन नहीं, पूरी तरह भ्रामक और कानून की परिभाषाओं के विपरीत है। अन्य परंपरागत वन निवासियों को लेकर वन विभाग भ्रामक व असत्य व्याख्या परोसने का प्रयास कर रहा है, जबकि कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि अनुसूचित जनजातियों के अतिरिक्त अन्य सभी पात्र व्यक्तियों को केवल यह प्रमाणित करता है कि वह 13 दिसंबर 2005 से पहले की तीन पीढ़ियों से संबंधित क्षेत्र में निवास कर रहे हैं और वन भूमि पर निर्भर हैं। इस के अलावा दोनों श्रेणियों के लिए सभी प्रावधान समान हैं।

हिमाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में भूमिहीन व सीमांत किसान रहते हैं इस में लगभग 26% जनसंख्या अनुसूचित जातियों की है, जो सभी अन्य परंपरागत वन निवासी श्रेणी में आती हैं। वन विभाग की यह चिंता कि अन्य परंपरागत वन निवासी श्रेणी में बड़ी संख्या में लोग आ सकते हैं जो ‘खतरनाक’ हो सकता है। यह बात न सिर्फ कानून के विरुध है बल्कि ऐसा कहना लोगों को उनके वैध वन अधिकारों से वंचित रखने की कोशिश भी है, जो इस कानून के तहत उन्हें मिल सकते हैं।

14 अप्रैल 2025 को अंबेडकर दिवस तथा हिमाचल दिवस के एक दिन पहले राज्य के पर्यावरण एवं सामाजिक संगठन तथा वन अधिकार कार्यक.....

11/04/2025
11/04/2025

पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में अब वन भूमि के अधिकार तय समय पर मिलेंगे। इसके लिए प्रदेश सरकार ने वन अधिकार अधिनियम-20...

चंबा वन अधिकार मंच, हिमधरा पर्यावरण समूह व एसआरडीए की पहल व एसडीएम चंबा की अगुवाई में उप मंडल चंबा के राजस्व व वन विभाग ...
11/04/2025

चंबा वन अधिकार मंच, हिमधरा पर्यावरण समूह व एसआरडीए की पहल व एसडीएम चंबा की अगुवाई में उप मंडल चंबा के राजस्व व वन विभाग के अधिकारियों को वन अधिकार कानून 2006 के बारे प्रशिक्षित किया गया।

A training workshop on the Forest Rights Act (FRA), 2006, was organised on Thursday in Chamba for officials from the revenue and forest departments. The event aimed to enhance the understanding and implementation of the Act among frontline officials. Chamba Sub-Divisional Magistrate (SDM) Priyanshu....

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