Lets Inspire Bihar "Buxar Chapter"

Lets Inspire Bihar "Buxar Chapter" शिक्षा, समता, उद्यमिता के साथ नए बिहार का संकल्प! आइए मिलकर प्रेरित करें बिहार!

19/02/2026
गूंजेगी बिहार की आवाज़.…22 फरवरी, 2026 को  #दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में Let's Inspire Bihar के द्वारा आयोजित हो रहे ...
06/02/2026

गूंजेगी बिहार की आवाज़.…

22 फरवरी, 2026 को #दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में Let's Inspire Bihar के द्वारा आयोजित हो रहे 'बिहार डेवलपमेंट समिट 2026' का भव्य और ऐतिहासिक कार्यक्रम दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में रह रहे मूल बिहारवासियों के लिए 2047 तक विकसित भारत में एक विकसित बिहार के निर्माण की यात्रा में साथ जुड़ने का यह एक महत्वपूर्ण अवसर है !
दिल्ली-NCR में रहे रहे सभी प्रिय बिहार के साथियों से विन्रम निवेदन है कि आइए इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बन कार्यक्रम को सफ़ल बनाने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें मिलते है 22 को दिल्ली में...
अधिक जानकारी हेतु मेरे नंबर पर फोन या व्हाट्सएप्प मैसेज कर सकते है... 9386370691

रजिस्ट्रेशन लिंक निम्नांकित है..! 👇
https://forms.gle/gLxMJW1Eh4py56yb6

Vikas Vaibhav, IPS


8 फरवरी, 2026 को  #पटना के विद्यापति भवन में 10 बजे पूर्वाह्न से निर्धारित 'लेट्स इंस्पायर बिहार लिटरेचर फेस्टिवल 2026' ...
29/01/2026

8 फरवरी, 2026 को #पटना के विद्यापति भवन में 10 बजे पूर्वाह्न से निर्धारित 'लेट्स इंस्पायर बिहार लिटरेचर फेस्टिवल 2026' भारत के अनेक प्रमुख साहित्यविदों एवं कवियों को सुनने के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है ! रजिस्ट्रेशन लिंक निम्नांकित है 👇

https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSdZqw_l0BBMA6tVMNd-9ZCzD5pp5y4Sin5tkCVCA5i1JjJv3g/viewform

Let's Inspire Bihar
Vikas Vaibhav, IPS

बक्सर चैप्टर के तरफ़ से हम सभी युवाओं के प्रेरणापुंज अभिभावक आदरणीय Vikas Vaibhav, IPS सर को उनके 46वें जन्मदिन पर उन्हे...
20/11/2025

बक्सर चैप्टर के तरफ़ से हम सभी युवाओं के प्रेरणापुंज अभिभावक आदरणीय Vikas Vaibhav, IPS सर को उनके 46वें जन्मदिन पर उन्हें हार्दिक बधाई एवं बहुत बहुत शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं!

इस सनातन यात्री के, इस अस्तित्व में 21 नवंबर, 1979 से प्रारंभ, जीवन रूपी यात्रा के आज #46वर्ष पूर्ण हो चुके हैं । यह #जन्मदिवस कुछ विशेष प्रतीत हो रहा है चूंकि इसके पूर्व के वार्षिक दिवसों पर ऐसी अनुभूति होती थी कि मानो अभी आगे अनेकानेक वर्षों की यात्रा शेष है, और बाल्यकाल से वांछित लक्ष्यों तक पहुंचने हेतु पर्याप्त समय भी; परंतु इस बार यह अनुभूति हो रही है कि आगामी शेष वर्षों की संख्या अब शनैः शनैः निरंतर कम ही होनी है और इसीलिए यात्रा जिन संकल्पों के साथ यहाँ तक क्रमवार पहुंची है, उससे आगे जाने के निमित्त बृहत आकलन करते हुए अब शीघ्र ही अग्रतर रणनीति पर चिंतन सहित हर शेष दुष्कर कार्य को सिद्ध करना होगा । मन में इस भौतिक अस्तित्व के निमित्त यदि कोई स्वार्थ है तो यही है कि यह अस्तित्व सार्थक सिद्ध हो । मन यह भी जानता है कि स्वत्व का वास्तविक बोध ही अस्तित्व की पूर्ण सार्थकता है और ऐसे में निश्चित ही यह मानता है कि स्वत्व बोध के साथ निःस्वार्थ सकारात्मक योगदान सर्वथा अपेक्षित है । मन में यह विश्वास दृढ़ है कि कोई भी वांछित बृहत लक्ष्य यदि पवित्र हो और उसमें सर्वकल्याण की भावना अंतर्निहित हो, तो वह निश्चित ही संभव है और उद्यम के योग्य है ।

अभी तक 46 वर्षों की इस यात्रा में कभी-कभी ऐसा प्रतीत होता रहा है कि वांछित एवं संकल्पित लक्ष्य अब संभवतः बहुत दूर नहीं है और प्राप्ति हेतु निरंतर चिंतन द्वारा स्थापित क्रम के अनुसार निर्धारित प्रयास करते रहना ही अब शेष रह गया है; परंतु मन हर परिस्थिति में निश्चित ही यह सदैव स्मरण कराता रहा है कि जब तक वास्तविक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए, तब तक हर यत्न पूर्ण उर्जा सहित ही करते रहना होगा, चूंकि लक्ष्य के समीप पहुंचने भर से भी सतुष्टि भला कहाँ प्राप्त होगी । संतुष्टि तो लक्ष्य से ही प्राप्त हो सकेगी और संतुष्टि ही तो इस अस्तित्व में इस गतिमान यात्रा का लक्ष्य भी है । अतः मन आज इस जन्मदिवस पर कह रहा है कि अभी लक्ष्यों की प्राप्ति होने तक सभी अवश्यंभावी परिवर्तनों के अनुरूप नित्य निर्धारित एवं सुनिश्चित क्रमवार पूर्ण उर्जा सहित अहर्निश चलते जाना है और सुनिश्चित अंत के पूर्व में एक अल्प विराम भी निश्चित ही लेना है, जहाँ अनंत के साथ पुनर्मिलन के पूर्व इस अस्तित्व की समीक्षा भी हो । मन में भाव यही है कि जब वह समय समीप हो, तब मन यह कहे कि इस अस्तित्व में वांछित लक्ष्यों के प्रति किसी भी यत्न में कोई कमी न रह गई थी और जब कभी भी अंतर्मन ने मार्ग प्रशस्त किया था, तब निर्णय लेने में कदापि संशय भी नहीं रहा था । आखिर अस्तित्वमान व्यक्तित्व का लक्ष्य भले ही भौतिक प्रतीत होता हो परंतु अस्तित्व के मूल का लक्ष्य तो केवल अस्तित्व की सार्थकता ही है और अंततः जाना भी तो वहीं है जहाँ से आना हुआ था । #यात्री_मन चिंतनरत है !

"अनन्यविषयं कृत्वा मनोबुद्धिस्मृतिन्द्रियम्।
ध्येय आत्मा स्थितो योऽसौ हृदये दीपवत्प्रभुः ।।"

(याज्ञवल्क्यस्मृतिः प्रायश्चिताध्यायः 111)

अर्थात - "मन, बुद्धि, स्मृति एव इन्द्रियों को आत्मतत्त्व से भिन्न विषयों से हटाकर एकाग्रचित होकर आत्मा का ध्यान करना चाहिए, जो हृदय में दीपक के समान स्वामी भाव में स्थित है ।"

"मृद्दण्डचक्रसंयोगात्कुरूम्भकारो यथा घटम् ।
करोति तृणमृत्काष्ठैगृहं वा गृहकारकः ।।
हेममात्रमुपादाय रूपं वा हेमकारकः।
निजलालासमायोगात्कोशं वा कोशकारकः।।
कारणान्येवमादाय तासु तास्विह योनिषु।
सृज्यात्मानमात्मा च संभूय करणानि च ।।"

(याज्ञवल्क्यस्मृतिः प्रायश्चिताध्यायः 146-48)

अर्थात - "जिस प्रकार कुम्भकार मिट्टी, चक्र तथा दण्ड के संयोग से घट का निर्माण करता है तथा घर का निर्माता मिट्टी, तृण तथा काष्ठ के संयोग से गृह का निर्माण करता है तथा जिस प्रकार स्वर्णकार स्वर्णमात्र ग्रहण कर विभिन्न स्वरूपों के आभूषणों को बनाता है; अथवा मकड़ी अपनी ही लार द्वारा जिस प्रकार जाल बना लेती है, उसी प्रकार आत्मा भी पृथिवी आदि साधनों तथा श्रोत्रादि इन्द्रियों को ग्रहण कर स्वयं ही इस संसार में विभिन्न योनियों में शरीरी के रूप में अपनी सृष्टि कर लेती है ।।"

सत्य ब्रह्म ही है, कर्म ही ध्येय है, शेष सब माया ही है । यात्रा गतिमान है !

आइए मिलकर प्रेरित करें बिहार.!
16/11/2025

आइए मिलकर प्रेरित करें बिहार.!

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