सांस्कृतिक मूल्यों, धरोहरों एवं संस्कृति को सहेजता बदायूं क्लब
Badaun Club
सांस्कृतिक मूल्यों, धरोहरों एवं संस्कृति को सहेजता जनपद का महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केन्द्र बदायँू क्लब, बदायँू
डॉ. अक्षत ‘उर्मिलेश’
बदायँू जनपद में प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं एवं सांस्कृतिक/साहित्यिक केन्द्र के रुप में बदायँू क्लब का स्थान सबसे महत्वपूर्ण है। बदायूँ क्लब, बदायूँ (रजि.) जो कभी ऐलन ;।स्स्म्छद्ध क्लब के नाम से जाना
जाता था, अपने गर्भ में स्वाधीनता आन्दोलन का विस्तृत और विस्मृत इतिहास छिपाये हुए है। बदायूँ के प्रसिद्ध स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी एवं पूर्व सांसद स्व. रघुवीर सहाय ने अपनी पुस्तक ‘बदायूँ जिले के स्वतन्त्रता संग्राम का इतिहास’ में बदायूँ क्लब का परिचय देते हुए लिखा है – “शहर के पूरब की ओर रेलवे स्टेशन जाने वाले दोनों रास्तों के बीच एक बड़े लम्बे-चौड़े मैदान में कम्पनी बाग (विक्टोरिया पार्क) के नाम से था। इसी में महारानी विक्टोरिया की मूर्ति 1906 में स्थापित की गई थी, जो अब यहाँ से हटाकर लखनऊ म्यूज़ियम को भेज दी गई है। इसमें ही एक तरफ को एक क्लब ‘ऐलन क्लब’ के नाम से चलाया जाता था, जिसमें अंग्रेज अधिकारी, वकील व रईस लोग आकर टेनिस इत्यादि खेलते थेे। अंग्रेज कलैक्टर ऐलन के नाम से चल रहे ‘ऐलन क्लब’ का विधिवत् उद्घाटन सन् 1907 ई. में किया गया। सन् 1947 में आजादी मिलने पर इसी को ‘बदायूँ क्लब’ नाम दिया गया। कम्पनी बाग की जगह आजकल बस स्टैण्ड और वाटरवर्क्स रोड है।
प्रमुख घटनायें –
सन् 1920 में स्व. बाबू अमीर चन्द्र जौहरी, राज कुमार, बाबू, कृष्ण मुरारी, रघुवीर सहाय, को तत्कालीन अंग्रेज़ कलैक्टर जी. के. डारलिंग और डिस्ट्रिक्ट जज ओ. एफ. जैन्किस ने इसलिए क्लब से निकाल दिया कि चारों वकील क्लब में धोती, कुर्ता और गाँधी टोपी पहनकर आये थे। इन वकीलों पर असहयोग आन्दोलन के ज़रिए अंग्रेज़ी हुकूमत को पलटने वालों का साथ देने का आरोप भी था। विरोध स्वरुप कुछ वकीलों ने उक्त वकीलों और शहर के स्वतन्त्रता प्रेमी नागरिकों के साथ वर्तमान यूनियन क्लब के पास खड़े एक पेड़ के नीचे दरी डालकर ‘दरी क्लब’ के नाम से एक क्लब खोला जहाँ हर शाम को कुछ घन्टे यह लोग नियम से बैठते थे। उसी समय उझानी निवासी स्व. ब्रज लाल भदवार से स्थान प्राप्त कर इन लोगों ने ‘यूनियन क्लब’ की स्थापना की। सन् 1944 में तत्कालीन कलैक्टर निवलेट ;छम्ॅस्म्ज्ज्म्द्ध का कार्यकाल ऐलन क्लब के सांस्कृतिक विकास की दृष्टि से काफी सुखद रहा। क्लब के पूर्व सदस्य स्व. रघुवीर प्रसाद टण्डन के सहयोग से क्लब परिसर में एक भव्य प्रदर्शनी लगायी गई जिसमें प्रसिद्ध संगीतकार ओमकार नाथ ठाकुर, प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री मनोरमा, तबला वादक स्व. मुन्ने खाँ, अहमद जान थिरकवा, विनायक राव पटवर्धन, उस्ताद फैयाज़ हसन, नारायण राव व्यास, नसीम बानो, फिल्म अभिनेत्री बीना, पुरुषोत्तम दास टण्डन आदि हस्तियाँ पधारी थीं। इस क्लब के मुख्य सभागार में सन् 1951 में प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन ने स्वयं चंग बजाकर मधुशाला का पाठ किया है। पद्म विभूषण उस्ताद निसार हुसैन खाँ, स्व. सूर्य कान्त त्रिपाठी ‘निराला’, पण्डित श्याम नारायण पाण्डेय, सोहन लाल द्विवेदी, राम नरेश त्रिपाठी, स्व. बलवीर सिंह ‘रंग’, श्रीमती लक्ष्मी शंकर, शौकत अली खान, नुसरत अली खाँ, सन्तोष आनन्द, पद्म विभूषण डॉ. विद्या निवास मिश्र, स्व. काका हाथरसी, स्व. निर्भय हाथरसी, पद्श्री गोपालदास नीरज, पद्श्री डॉ. बशीर बद्र, पद्मश्री गुलज़ार दहेलवी, मुनव्वर राणा, डॉ. राहत इन्दौरी, डॉ. नवाज़ देबवन्दी, उदयप्रताप सिंह, डॉ. अशोक चक्रधर, डॉ. सुरेन्द्र शर्मा, डॉ. कंुवर बेचैन, डॉ. कुमार विश्वास, पद्मश्री डॉ. सुनील जोगी, सुप्रसिद्ध पाण्डवानी कथा गायिका तीजनवाई, प्रख्यात लोकगायिका मालिनी अवस्थी, राजस्थानी लोक नृत्य कलाकार गुलाबो देवी, कब्बाल एहसान भारती घुंघरु कब्बाल, तस्लीम एवं आरिफ, पंजाबी पाप सिंगर दलेर मेंहदी, जसविंदर जस्सी, अशोक मस्ती, लॉफटर फेम हास्य कलाकार प्रताप फौजदार, सुनील पॉल आदि साहित्यकार और संगीतकार बदायूँ क्लब को अपनी उपस्थिति देकर गौरवान्वित कर चुके हैं। राजनैतिक हस्तियों में प्रमुख रुप से राज्यपाल डॉ. विष्णुकान्त शास्त्री, मुख्यमंत्री श्री मुलायम सिंह यादव एवं श्री राजनाथ सिंह, उ. प्र. विधानसभा अध्यक्ष श्री केशरी नाथ त्रिपाठी, उ. प्र. शासन के प्रमुख सचिव, केन्द्रीय पैट्रोलियम मंत्री श्री संतोष गंगवार, संसद सदस्य श्री धर्मेन्द्र यादव, उ. प्र. शासन के मंत्री श्री रामकरन आर्य, संस्कृति श्री अवनीश कुमार अवस्थी अपनी उपस्थिति से क्लब को गौरवान्वित कर चुके हैं। क्लब में लान टेनिस विलियर्ड आदि खेल भी होते रहे। सन् 1949, 50, 51 में आयोजित कुश्ती में गामा पहलवान सरीखे दिग्गज पहलवान भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। लान टेनिस में इस क्लब के खिलाड़ियों ने प्रदेश एवं देश स्तर पर स्थान भी प्राप्त किये हैं। सन् 1947 में 15 अगस्त को राष्ट्रीय ध्वज ऐलन क्लब में फहराया गया। सन् 1948 में कलैक्टर श्री जय किशन दत्त व तत्कालीन मुन्सिफ मजिस्ट्रेट स्व. कौशल पाल गुप्ता ने जब क्लब का क्रमशः अध्यक्ष और सचिव पद संभाला तब ऐलन क्लब के स्थान पर क्लब का नाम ‘बदायूँ क्लब’ रखा गया। बदायूँ क्लब की विकास यात्रा बीच-बीच में काफी रुकावटों और व्यवधानों से गुजरती रही किन्तु 1997 से बदायूँ क्लब ने आशातीत उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। क्लब के पूर्व सचिव एवं प्रख्यात कवि डॉ. उर्मिलेश शंखधार के कार्यकाल क्लब ने प्रमुख उपलब्धियां प्राप्त की। डॉ. उर्मिलेश के प्रयास से जनपद प्रशासन एवं बदायॅंू क्लब के संयुक्त तत्वावधान में बदायँू महोत्सव की स्थापना हुई एवं प्रति वर्ष आयोजित होने वाले इस प्रमुख सांस्कृतिक उत्सव ने देश विदेश में बदायँू जनपद एवं बदायँू क्लब के नाम को रौशन किया। वर्तमान में बदायँू क्लब अपने अध्यक्ष व संस्कृित/साहित्यप्रेमी जिलाधिकारी श्री पवन कुमार के संरक्षण में आज भी उसी वैभव, शान एवं विविधता के साथ उन्नति की ओर अग्रसर है।