25/01/2026
"शहीद श्रीतिज दिवस"
यह घटना 18 जनवरी, 1982 को हुए चंदनकियारी हत्याकांड की है, जिसमें सियालजोरी गाँव के तीन बहादुर व्यक्तियों—श्रीप्रसाद महतो, तिलकधारी महतो और जयलाल महतो—ने महाजनी प्रथा के खिलाफ लड़ते हुए अपनी जान दे दी।
घटना की पृष्ठभूमि और कारण:
उस समय चंदनकियारी इलाके में सूदखोरों और महाजनों का भारी आतंक था। वे गरीब ग्रामीणों को कर्ज के जाल में फँसाकर उनका शोषण करते थे। श्रीप्रसाद, तिलकधारी और जयलाल (जिनकी उम्र 30-32 साल के बीच थी) ने इस अन्याय के खिलाफ मोर्चा खोला और ग्रामीणों को जागरूक करना शुरू किया। तिलकधारी और श्रीप्रसाद सगे भाई थे और समाज सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। उनके इस विरोध से महाजन बौखला गए और उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रचने लगे।
हत्याकांड की रात:
महाजनों ने एक साजिश के तहत सियालजोरी में पुआल के एक मकान में आग लगा दी, जहाँ ग्रामीण रात को पहरेदारी करते थे। जब ग्रामीण और ये तीनों नायक आग बुझाने में जुटे थे, तब अंधेरे का फायदा उठाकर महाजनों ने उन पर हमला कर दिया। श्रीप्रसाद और तिलकधारी पर फरसा से वार कर उनके सिर धड़ से अलग कर दिए गए, और खेत की मेड़ पर गिरे जयलाल की भी हत्या कर दी गई।
परिणाम और वर्तमान स्थिति:
इस जघन्य हत्याकांड के आरोप में चार लोग गिरफ्तार हुए, लेकिन वे सभी 2005 में रिहा हो गए। आज तिलकधारी और जयलाल के बेटे रेलवे में कार्यरत थे, अब सेवानिवृत्त हो गए है, जबकि श्रीप्रसाद की दो बेटियाँ हैं जिनका विवाह हो चुका है। समाज के लिए बलिदान देने वाले इन तीनों शहीदों की प्रतिमा 44 वर्ष बाद 2026 में स्थापित की गई ।
यह कहानी शोषण के विरुद्ध साहस और बलिदान की एक मार्मिक गाथा है।
शहीद श्रीतिज अमर रहे 🙏🙏🙏