पर्यावरण संरक्षण गतिविधि,झारखण्ड

पर्यावरण संरक्षण गतिविधि,झारखण्ड Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from पर्यावरण संरक्षण गतिविधि,झारखण्ड, Environmental conservation organisation, Sector 03B, Bokaro Steel City.

This page has been created in order to create awareness on climate change by bringing all the people living in Jharkhand under one umbrella for bringing a change in individual behaviour towards climate change in our state

07/11/2025
07/11/2025

'वन्दे मातरम्' के भाव से 'हरित जीवनशैली' की ओर
"सुजलाम् सुफलाम् मलयज शीतलाम्, शस्य-श्यामलाम् मातरम्" यह वंदन केवल एक राष्ट्रगीत नहीं है, बल्कि यह हमारी मातृभूमि को जल से परिपूर्ण, फलों से समृद्ध, मलय पर्वत की शीतल हवा से आच्छादित और हरी-भरी फसलों से ढकी हुई देवी के रूप में देखने का एक दार्शनिक दृष्टिकोण है। यह भाव हमें सिखाता है कि माँ के इस समृद्ध रूप को बनाए रखना हमारी सांस्कृतिक और नैतिक जिम्मेदारी है।
#वन्देमातरम्
पंक्ति में दिया गया सार— #पर्यावरणसंरक्षण के इसी भाव से जल, पेड़ और भूमि का संरक्षण करके जीवनशैली का प्रचार करती हैं—इसी दार्शनिक प्रेम को क्रियात्मक रूप देता है। यह प्रेम, अब #हरितजीवनशैली के रूप में एक दैनिक प्रतिज्ञा बन जाता है।

हम पर्यावरण युक्त जीवन जीएं इसके लिए हमारे पूर्वजों ने क्या कुछ उपाय नहीं किए,परन्तु हम सभी इस भौतिकवादी संसार में आकर व...
24/07/2025

हम पर्यावरण युक्त जीवन जीएं इसके लिए हमारे पूर्वजों ने क्या कुछ उपाय नहीं किए,परन्तु हम सभी इस भौतिकवादी संसार में आकर वैश्वीकरण के इस दौर में तथाकथित आधुनिकता के नाम पर अपने चिर पुरातन के साथ ही नित्य नूतन सभ्यता का पतन कर पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव में आकर स्वार्थी बन चुके हैं,तब भी पर्यावरण शुभचिंतकों ने स्पष्ट कहा है कि किसे के लिए न सही तो अपने स्वार्थ के लिए ही कुछ पौधों का रोपण करें ताकि इसका लाभ आपके साथ साथ अन्य जीवों का आश्रय बन सकें,कई पक्षियों को भोजन मिल सके,मधुमक्खियों को मधु मिल सके, पथिकों को छांव मिल सके के साथ ही पर्यावरण प्रदूषण को अपने में समाहित कर मानव जीवन के लिए प्राणवायु का निर्माण कर सके जिससे मानव जीवन श्रृष्टि पर सकुशल जीवन निर्वाह कर सके।
अपने अपने ग्रहों अनुसार एक पौधे का रोपण अवश्य ही करें।

14/06/2025

अनायास ही आए अनेक विचारों में से एक:-
इस पुण्यभूमि भारत में लगभग सभी स्थानों पर प्राकृतिक छटा का अद्भुत स्वरूप है यह मात्र एक संयोग नहीं यह एक ईश्वरीय कृपा भी है।
प्राकृतिक ने पूरे श्रृष्टि को अनेकों रूप से अलंकृत किया है,उनमें से एक है फलों का उपहार,जी बिल्कुल प्राकृतिक का द्वारा दिए गए अनमोल उपहार में से एक है फल।
कुछ पेड़/वृक्ष तो प्राकृतिकी रूप से उग आते है,कुछ पक्षियों के द्वारा तथा कुछ मानवों के द्वारा।
क्या हमने कभी सोचा है कि ये फल जिसका रसास्वादन हम कर रहे है इसे किस ने लगाया होगा,क्या लगाने वाले ने भी इसका अद्भुत स्वाद लिया होगा,या फिर वो हमारे हिस्से के फलों के वृक्ष लगा कर चलें गए ताकि उनके बाद की पीढ़ी प्राकृतिकों फलों का आनंद ले सके।
हम फलों का रसास्वादन करने के पश्चात उनके बीजों को जैसे तैसे इधर उधर ही फेक देते हैं,हम फलों के द्वारा मिले आनंद के प्रति अपनी कृतज्ञता तक अर्पित नहीं करते,क्या यह हमारा उचित व्यवहार है?
क्या सभी को उन बीजों को पौधे/पेड़/वृक्ष बनने का पर्याप्त अवसर नहीं देना चाहिए?
ताकि जैसे हम अपने पूर्व की पीढ़ियों द्वारा लगाए गए वृक्षों के फलों का आनंद ले रहें है वैसे हमारी बाद वालीं पीढ़ी भी ले पाए,इस ओर गंभीरतापूर्वक विचार करने का प्रयास करें,निश्चय ही सकारात्मक दिशा में कदम उठ पड़ेंगे।
#पर्यावरणसंरक्षण
#बीजारोपण




Ministry of Environment, Forest & Climate Change, Government of India

14/06/2025
14/06/2025

इस आवश्यक वीडियो को सुने साथ ही दिए गए लिंक क्लिक कर इकोमित्रम ऐप डाउनलोड कर सहभागी बनें।
https://play.google.com/store/apps/details?id=org.ecomitram

इसकी निर्मलता को बनाएं रखने में हम सभी की सहभागिता अतिआवश्यक है।
11/06/2025

इसकी निर्मलता को बनाएं रखने में हम सभी की सहभागिता अतिआवश्यक है।

11/06/2025

इस पेज को बनाएं पांच वर्ष पूर्ण हुए,आप सभी का आभार।
🙏

पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष दिवस की आवश्यकता क्यों ही पड़ी क्या कभी हमने सोचा?प्रकृति के द्वारा दिए गए प्राण वायु हमार...
05/06/2025

पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष दिवस की आवश्यकता क्यों ही पड़ी क्या कभी हमने सोचा?
प्रकृति के द्वारा दिए गए प्राण वायु हमारे जीवन अस्तित्व के लिए अनिवार्य है,प्रकृति तब भी थी जब हम नहीं थे,प्रकृति तब भी रहेगी जब हम नहीं रहेंगे,तो क्यों न जिस प्रकृति में हमारा अवतरण हुआ उसे उसी रूप में रहने दें,हमारे द्वारा प्रकृति का दोहन अपनी भौतिक सुखों के लिए करना उचित तो है परन्तु एक सीमा में ताकि प्रकृति उस दोहन की भरपाई कर सके,दोहन इतना भी न हो कि प्रकृति हमारे प्रति प्रतिशोध का भाव अपना लें और प्राकृतिक आपदाएं को जन्म दें हमारे विनाश की ओर बढ़ चले।
समय शेष रहते यह समझना अति आवश्यक है कि जिस प्रकृति के साथ हमारे संबंध अस्तित्व को खतरा हो सकता है उसकी संरक्षण की नैतिक जिम्मेवारी भी हमारी ही है।
एक नन्हे से पौधे को 20 लोग मिल कर लगा लेने मात्र से पर्यावरण का संरक्षण नहीं संभव है, हमें सम्यक दृष्टिकोण की आवश्यकता है ताकि पर्यावरण का दोहन रुके,उसकी समग्र संरक्षण में हमारा भी एक छोटा योगदान अवश्य हो।
#पर्यावरणसंरक्षण






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