Nirogdham Yog Naturopathy Wellness

Nirogdham Yog Naturopathy Wellness योगासन- प्राणायाम, नेचुरोपैथी, डाईट- थेरेपी , जीरो वोल्ट थैरेपी, फास्टिंग-थैरेपी द्वारा उपचार

दही खाने के फायदे
21/01/2026

दही खाने के फायदे

12/01/2026
16/10/2025

🕉️प्रिय साथियों,जिस तरह फोर- व्हीलर एवं टू- व्हीलर को नियमित अंतराल पर एजेंसी में ले जाकर सर्विसिंग कराते हैं, अपने घरों में भी नियमित अंतराल पर सफाई करते रहते हैं, किन्तु दीपावली के समय डीप -क्लीनिंग करते हैं, इसी तरह शरीर- रूपी मशीन की नियमित अंतराल पर प्राकृतिक चिकित्सा( नेचुरोपैथी ) द्वारा शरीर- शोधन ( बॉडी डिटॉक्सिफिकेशन) व प्रत्येक 6 माह में डीप- क्लीनिंग( शंख- प्रच्छालन क्रिया) करवाते रहने से शरीर आजीवन निरोग रहता है, क्योंकि "प्रथम सुख निरोगी काया" ही हैI नेचुरोपैथी संबंधी जागरूकता के अभाव में अस्वस्थ रहकर कष्ट भोगते रहते हैं, विषैले सिंथेटिक औषधियों से कोई भी व्यक्ति कभी भी स्वस्थ नहीं हो सकता, अपितु उसके साइड- इफेक्ट से लगातार अस्वस्थ बना रहना नियति बन गया हैI किन्तु प्राकृतिक चिकित्सा ही एकमात्र ऐसी चिकित्सा पद्धति है, जो पूर्ण स्वास्थ्य लाभ करा सकती है, कृपया एक बार "निरोगधाम योग नेचुरोपैथी वैलनेस" बिलासपुर तथा ग्राम व पोस्ट- बी.के. बाहरा, तहसील- बागबाहरा, जिला- महासमुंद (छत्तीसगढ़) में आकर शरीर -शोधन ( बॉडी- डिटॉक्सिफिकेशन) करवाकर स्वयं अनुभव कीजिये 🙏 संपर्क मोबाइल-9826458761/9425530055

13/10/2025

एंटीबायोटिक एलोपैथिक औषधियां:-- 🕉️पेट के लिए लाभदायक गुड -बैक्टीरिया "लैक्टोवेसिलस" आदि पाचन का काम करते हैं I एंटीबायोटिक एलोपैथिक औषधियों से ये गुड- बैक्टीरिया लैक्टोवेसिलस नष्ट हो जाते हैं, जिससे पाचन बिगड़ता है I अतः ऐसी दवाओं से बचें I (एंटीबायोटिक औषधीयां देने का मुख्य उद्देश्य शरीर के अंदर विद्यमान बेड- बैक्टीरिया को नष्ट करना होता है) किंतु ये औषधीयां बेड- बैक्टीरिया के साथ ही गुड -बैक्टीरिया "लैक्टोवेसिलस" को भी नष्ट कर देता हैं, जिससे पाचन -तंत्र बिगड़ जाता है, जिसके कारण खाया हुआ भोजन पच नहीं पाता, नहीं पचने के कारण भोजन सड़ता है, सड़ने से गैस और विष बनता है जो खून को विषाक्त कर देता हैऔर यह विषाक्त खून नाड़ीयों के माध्यम से समस्त शरीर में सर्कुलेट होते रहता है इसलिए शरीर बीमार हो जाता है I अतः कृपया सावधान रहें I🙏

09/10/2025

🕉️ रोगों के कारण-- कीड़े : जिस शरीर में विकार (टॉक्सिंन) है, वह तो कीड़ों का खास अड्डा बनेगा ही पर जिसका शरीर अंदर बाहर से साफ है उसके खून में वह शक्ति है कि न तो उसके अंदर कीड़े पैदा होंगे और न बाहर से आने वाले कीड़े उसमें जी सकेंगें I वे वही जमते और जा बसते हैं जहां उनके टिकने लायक गंदे विकार(toxin) मौजूद है यदि शरीर के अंदर विकार नहीं है तो किसी प्रकार से आया हुआ कीड़ा वहां टिक नहीं सकता I इसलिए जर्म्स (कीड़े) के भ्रम में न पड़कर शरीर को विकार- रहित रखना हमारा परम कर्तव्य है और यह तभी हो सकता है जब कि हम प्रकृति के नियमों के अनुसार खायें और रहें I भोजन से इस विषय का बहुत बड़ा संबंध है, क्योंकि भोजन पचकर सबसे पहले "रस" बनता है रस से "खून(रक्त)" बनता है और खून पर ही शरीर की तंदुरुस्ती निर्भर है I खून से ही शरीर के समस्त अंगों को नाड़ी- संस्थान के माध्यम से पोषण मिलता है🙏

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