12/05/2026
श्री कला मंजरी कथक संस्थान और अरपा रेडियो की अनूठी पहल: वर्कशॉप के जरिए 'नन्हें आरजे' को तराशने का अभियान
बच्चों की कलात्मक प्रतिभा को नई उड़ान देने और उन्हें संचार कौशल में माहिर बनाने के उद्देश्य से श्री कला मंजरी कथक संस्थान और अरपा रेडियो (90.8 FM) के संयुक्त तत्वाधान में एक विशेष 'रेडियो जॉकी (RJ) वर्कशॉप' का आयोजन किया गया। संस्थान के सरकंडा और विद्यानगर स्थित केंद्रों पर आयोजित इस कार्यशाला में बच्चों ने रेडियो की दुनिया की बारीकियों को बड़े ही उत्साह के साथ सीखा।
वॉइस मॉड्यूलेशन और खेलों के जरिए सीखा आरजे बनना:
कार्यशाला में अरपा रेडियो की अनुभवी आरजे मातृका और अलंकृता ने मुख्य प्रशिक्षक की भूमिका निभाई। उन्होंने बच्चों को माइक के सामने बोलने के तरीके, शब्दों के चयन और सबसे महत्वपूर्ण 'वॉइस मॉड्यूलेशन' (आवाज का उतार-चढ़ाव) के बारे में विस्तार से बताया। प्रशिक्षण को रोचक बनाने के लिए कई मनोरंजक खेलों का सहारा लिया गया, जिससे बच्चे सहजता के साथ अपनी आवाज को नियंत्रित करना सीख सके।
कथक और आवाज का गहरा संबंध
संस्थान के सचिव और कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज के शिष्य पंडित रितेश शर्मा ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा: "कथक केवल पैरों की थाप या भाव-भंगिमाओं का खेल नहीं है, इसमें 'पढ़त' और लय-ताल का विशेष महत्व है। इस वर्कशॉप से बच्चों की आवाज में जो स्पष्टता और उतार-चढ़ाव आएगा, उसका सीधा लाभ उन्हें उनके कथक प्रदर्शन में मिलेगा। यह उनकी कलात्मक प्रतिभा के सर्वांगीण विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।"
कला मंजरी कथक संस्थान और अरपा रेडियो के साझा प्रयास से आयोजित आरजे वर्कशॉप अब अगले पड़ाव की ओर बढ़ रही है। इस कार्यशाला का उद्देश्य न केवल बच्चों को हुनर सिखाना है, बल्कि उन्हें एक वास्तविक मंच प्रदान करना भी है।
ऑडिशन और प्रोफेशनल ट्रेनिंग
संस्थान के सरकंडा और विद्यानगर केंद्रों पर आयोजित इस वर्कशॉप के बाद अब 'नन्हे आरजे' के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अरपा रेडियो की ओर से बच्चों से ऑडियो क्लिप्स मंगवाई गई हैं। इन ऑडिशन के माध्यम से जिन बच्चों का चयन किया जाएगा, उन्हें अरपा रेडियो की टीम द्वारा विशेष प्रोफेशनल ट्रेनिंग दी जाएगी।
रेडियो पर प्रस्तुति का सुनहरा मौका
प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद, ये नन्हे कलाकार अरपा रेडियो (90.8 FM) पर बाकायदा कार्यक्रमों की प्रस्तुति देंगे। रेडियो की संस्थापक संज्ञा टंडन ने बताया कि ट्रेनिंग के बाद बच्चों को रेडियो के विभिन्न शो का हिस्सा बनाया जाएगा, जहाँ वे सामाजिक सरोकारों, कला और संस्कृति जैसे विषयों पर अपनी बात रखेंगे।
यह पहल बच्चों के भीतर के संकोच को दूर कर उन्हें एक आत्मविश्वास से भरा संचारक (Communicator) बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस खबर से अभिभावकों और बच्चों में भारी उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि अब उनकी आवाज पूरे शहर में गूंजने वाली है।
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