21/08/2023
देश प्रदेश में सभी लोगों का नागों से संबंध रहा है वैसे ही कई जगह कुल देवता के रूप में नाग देवता को पूजा जाता है। बिलासपुर जिले में भी नाग देवता के कई कुलदेवता मंदिर है। गुगा देव की गाथाएं भी इसी महीने गाई जाती हैं। जो कि नाग से ही संबंधित है। वैसे ही देहरा में एक प्राचीनतम भव्य मंदिर है। वैसे ही जिला की देव भूमि का नागों के साथ अटूट सम्बन्ध रहा है। यहाँ ऐसा कोई क्षेत्र नहीं, या नाग सम्बन्धी कोई स्थान न हो और जहां उनकी पूजा न की जाती हो। यहाँ के निवासी नाग को अपना संरक्षक, अन्नदाता और ईष्ट मानते हैं। यहाँ कई पर्वत शिखरों, झीलों, नदियाँ और जल स्रोतों का सम्बन्ध नागों के सम्बन्धित माना जाता है। पश्चिमी हिमालय के अन्तर्गत नाग संस्कृति का सर्वाधिक प्रमाण चम्बा में देखने को मिलता है। यहाँ जम्मू-कश्मीर की सीमा पर महल नाग के नामानुसार एक झील का नाम मैहलवर डल, तीसा के पूर्व में गडासरू महादेव धार, पांगी में एक जल स्रोत का नाम नागनी झरना, जटरौण (भटियात) में नागनू नाला, पनियाली के समीप नागनी झरना, खजियार झील के पास खज्जीनाग, जुम्हारनाग, लिल्ह-बेल्ज़ क्षेत्र में वासुकि नाग, हिमगरी परगने के अन्तर्गत एक झील का नाम अंजनी झील, सरार नाग के कारण सरार झील (परगना जून्ड) आदि नाम नाग संस्कृति के स्वर्णिम प्रमाण हैं। यहाँ प्रमुख पर्वत श्रेणियों में पांगी या पीर पांचाल पर्वत श्रेणी नागाकार में पूर्व से पश्चिम की और विस्तृत है। इस पर्वत श्रेणों के पूर्व में कुगतों के समीप कैलंग नाग का मन्दिर तथा पश्चिम में मेहलवार नाग डल है। कुगती के समीप इस श्रेणी का सर्वाधिक प्रसार है तथा कई उपशाखाएं शेष नाग के फनों को तरह लौहल, कुल्लू, कांगडा और चम्बा क्षेत्र में विस्तृत हैं। मूल रूप में चम्बा जिला में नाग देवता को वर्षा और अन्न-धन का देवता माना जाता है।
चम्बा जिला में नाग-नागनियों की पूजा की प्राचीन रीति है। यहाँ अनेक स्थानों पर नाग मन्दिर स्थित हैं। इसी कडी पर आज नागो की गौरव गाथा को याद रखने के लिए नाग पंचमी मनाई जाती हैं
सभी मित्रों को नाग पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं। ..🙏🙏🙏