12/06/2026
मेसालिना बिश्नोई — एक ऐसी खोज जो रेगिस्तान की रेत से निकलकर विज्ञान के इतिहास तक पहुंच गई
अगस्त 2025 में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) और वन्यजीव शोधकर्ताओं की टीम राजस्थान के बीकानेर क्षेत्र में फील्ड सर्वे कर रही थी। सर्वे के दौरान टीम एक स्थान पर चाय के लिए रुकी। उसी दौरान आसपास के खुले अर्द्ध-रेगिस्तानी इलाके में वैज्ञानिकों की नजर एक बेहद छोटी और असामान्य दिखने वाली छिपकली पर गई। पहली नजर में यह सामान्य रेगिस्तानी छिपकली जैसी लगी, लेकिन अनुभवी नजरों ने कुछ अलग महसूस किया।
अध्ययन के सह-लेखक धर्मेंद्र खंडाल ने बताया, 'हम लोग बीकानेर के गजनेर वन क्षेत्र की ओर जा रहे थे। रास्ते में सड़क किनारे एक चाय की दुकान पर हम कुछ देर चाय पीने के लिए रुके। तभी अचानक जमीन पर दौड़ती एक बेहद छोटी छिपकली पर हमारी नजर पड़ी। उसकी अनूठी बनावट ने हमारा ध्यान तुरंत अपनी ओर खींच लिया।'
वैज्ञानिकों ने उस अवलोकन को नजरअंदाज नहीं किया। नमूने एकत्र किए गए और फिर महीनों तक उनका विस्तृत अध्ययन किया गया । शरीर की संरचना, स्केल पैटर्न, अन्य ज्ञात प्रजातियों से तुलना और आनुवंशिक विश्लेषण किया गया। आखिरकार निष्कर्ष सामने आया कि यह कोई ज्ञात प्रजाति नहीं, बल्कि विज्ञान के लिए पूरी तरह नई प्रजाति है।
इस नई प्रजाति का नाम रखा गया — मेसालिना बिश्नोई
शोधकर्ताओं ने यह नाम राजस्थान के बिश्नोई समाज को समर्पित किया — उस समाज को जिसने सदियों से वन्यजीवों, पेड़ों और प्रकृति की रक्षा को जीवन का हिस्सा बनाया।
यह भारत में ‘Mesalina’ वंश का पहला प्रमाणित और नमूना-आधारित रिकॉर्ड बना। लगभग 90 वर्ष पहले इसका उल्लेख तो हुआ था, लेकिन वैज्ञानिक प्रमाण नहीं थे। अब यह कमी पूरी हो गई।
मेसालिना बिश्नोई की खास बातें:
• लंबाई मात्र 39.2 मिलीमीटर
• रंग — धूसर से ऑलिव ब्राउन
• गर्दन से पूंछ तक धारियां
• दिन में सक्रिय और तेज गति से चलने वाली
• थार के कठोर, पथरीले और विरल वनस्पति वाले क्षेत्रों में रहने वाली प्रजाति
The Bishnoiism