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दोस्तों नंगी अवस्था में ये जो फ्रिज में पैक मोहतरमा है डनकनाम "काजल" है, इन मोहतरमा को लोग "काजल दीदी" केनाम से जानतेमहा...
25/12/2025

दोस्तों नंगी अवस्था में ये जो फ्रिज में पैक मोहतरमा है डनक
नाम "काजल" है, इन मोहतरमा को लोग "काजल दीदी" के
नाम से जानते
महान "काजल दीदी"
आज के माडर्न यूग की नारी
सशक्तिकरण की बडी ही प्रचंड समर्थक और सेकलरिज्म की
"देवी" "काजल दीदी", सेकुलरिज्म इन मोहतरमा के खून मे
बसता 2
तो महान काजल दीदी अपने मां बाप और घर परिवार को
छोड़कर सेकुलरिज्म के ब्रांड शब्बीर मियां के साथ रहने लगी,.
डन मोहतरमा को मां बाप के साथ रहने वाली जिंदगी एक जेल
मे बंद कैदी के जिंदगी के समान लगने लगी,.
तो एक दिन ये मोहतरमा सेकलरिज्म के ब्रांड एम्बेस्डर शब्बीर
मियां के साथ फरार हो गई, द्निया को मोहब्बत, आजादी और
सेक्युलरिज्म का संदेश देने,
कुछ समय तक तो सब क्छ नार्मल रहा,
लोकन कछ समय बाद अचानक
शब्बीर मियां का मजहबी
ईमान जग गया,तो शब्बीर मियां अपने दीन के 7-8 मोमिनों को घर बलाया और
महान समाज सुधारक काजल दीदी का रेप करवा दिया,
पहले तो शब्बीर मियां अपने दोस्तों के साथ मिलकर काजल
को पागल कत्तों की तरह तब तक नोचते रहे जब तक वो बेहोश
नही ह़ई,
फिर बेहोशी के हालत में ही उठाकर जिंदा फ्रीज में पैक कर
दिया ताकि बाद मे फिर काम आ सके,.
लेकिन फ्रीज मे ठंड की वजह से काजल की मौत हो गइे,
और काजल की मौत के साथ उनके अन्दर मौजूद सक्युलारेज्म
कीडे की भी मौत हो गई,.
नामक
उसके बाद शब्बीर एंड पार्टी दसरे भी वहां पहुंची टाइम पास
करने
लेकिन फ्रिज खोलकर देखा तो ये मोहतरमा तो मर चुकी थी,
अब क्या करें
लेकिन इस्लामिक हैवानियत की हद तो तब पार हो गई जब उन
आठों दरिंदों ने उस लाश के साथ ही टाइम पास करना शूरु कर
दिया,
और यही नही अभी और आगे सूनिए,,.
टाइम पास करने के बाद फिर से उठाकर लाश को फ्रीज मे डाल
दिया, और लगभग एक हप्ते तक टाइम पास करते रहे,
एक लाश के साथ चार-पांच घंटे तक लगातार टाइम पास करते
और फिर से उठाकर फ्रिज मे पैक कर देते,
यह करूर और दिल दहला देने वाली घटना असम राज्य की है,वैसे ज्यादा भावनाओं मे बहने की जरूरत नही है, क्योंकि
आपकी भावनाओं की मां बहन करने के लिए- काला कोट
पहनकर कोर्ट के दलाल तैयार बैठे हैं,,जो मानवता की दुहाई
देते हए सब्तों और गवाहों के अभाव में इन्हें बा-इज्जत बरो कर
देते हैं ताकि फिर से ये किसी के साथ टाइम पास कर
सकें,
जय हो सुप्रीम कोर्ट और संविधान की,
वैसे आप सभी ये पोष्ट पढिए उसके बाद मंदिर जाइए, मन्दिर में

🛣️ जब सिस्टम सो रहा था, तब एक युवा जागा 🇮🇳दो महीने से सड़क अधूरी थी, गड्ढा जानलेवा बन चुका था।कई हादसे हो चुके थे, लोग र...
18/12/2025

🛣️ जब सिस्टम सो रहा था, तब एक युवा जागा 🇮🇳

दो महीने से सड़क अधूरी थी, गड्ढा जानलेवा बन चुका था।
कई हादसे हो चुके थे, लोग रोज़ परेशान हो रहे थे।
PWD को बार-बार बताया गया… लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

👉 तब गांव के युवा विकास कुमार जाखड़ ने इंतज़ार नहीं किया।
👉 अपने 50,000 रुपये खर्च कर सड़क की मरम्मत करवा दी।

यह कोई छोटा काम नहीं,
यह सिस्टम को आईना दिखाने वाला साहसिक कदम है।
यह बताता है कि देश अभी भी जिम्मेदार नागरिकों से जिंदा है।

🙏 विकास कुमार जैसे लोग ही समाज की असली पूंजी हैं।
🚨 सवाल ये है — जब नागरिक अपनी जेब से सड़क बनवाएंगे,
तो जिम्मेदार विभाग कब जागेगा?

👏 विकास कुमार जाखड़ को सलाम
👏 ऐसे युवाओं पर हमें गर्व है

#जनहित #जिम्मेदारनागरिक
#विकासकुमारजाखड़
ाब_दो


प्राचीन भारतीय राजाओं के दरबारों में वास्तु शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र दोनों के विशेषज्ञ सलाहकार (आचार्य या राजपुरोहित) ...
04/11/2025

प्राचीन भारतीय राजाओं के दरबारों में वास्तु शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र दोनों के विशेषज्ञ सलाहकार (आचार्य या राजपुरोहित) हुआ करते थे। इसे आप आज के “वैज्ञानिक और रणनीतिक सलाहकार मंत्रालयों” के समान समझ सकते हैं, बस उनका दृष्टिकोण आध्यात्मिक और प्राकृतिक नियमों पर आधारित था।

आइए विस्तार से देखें 👇

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🏛️ 1. वास्तु शास्त्र के विशेषज्ञ

भूमि, भवन और नगर नियोजन के लिए राजा अपने वास्तु आचार्यों से परामर्श लेते थे।
उद्देश्य:

राजधानी और महल का निर्माण शुभ दिशाओं में हो।

सैन्य छावनियाँ, जलाशय, मंदिर, राजमार्ग आदि ऊर्जा और सुरक्षा दोनों दृष्टियों से संतुलित हों।

प्रसिद्ध उदाहरण:

हस्तिनापुर, द्वारका, उज्जैन, कांचीपुरम् आदि नगर वास्तु सिद्धांतों से बनाए गए माने जाते हैं।

सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक के दरबार में वास्तु शास्त्रज्ञ शामिल थे।

मायामुनि, जिन्हें वास्तुशास्त्र का पिता माना जाता है, राजा द्वारा नियोजित नगरों के परामर्शदाता थे।

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🔭 2. ज्योतिष आचार्य (राज ज्योतिषी)

हर राज्य में एक राज ज्योतिषी होता था, जो राजा को ग्रह-नक्षत्रों के अनुसार शुभ-अशुभ समय बताता था।

उनकी भूमिका:

युद्ध या राजतिलक का शुभ मुहूर्त तय करना।

नवरत्नों और रत्नधारण संबंधी सलाह देना।

राज्य की दिशा और नीति निर्धारण में ग्रह स्थिति का विश्लेषण।

उदाहरण:

चाणक्य (कौटिल्य) न केवल राजनीतिज्ञ थे, बल्कि ज्योतिष शास्त्र के भी ज्ञाता थे।

विक्रमादित्य के नवरत्नों में वराहमिहिर सबसे प्रसिद्ध राज ज्योतिषी थे।

सम्राट भोज और राजा जनक ने भी अपने दरबार में विद्वान ज्योतिषाचार्य रखे थे।

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🕉️ 3. इनके पीछे का तर्क

राजा का मानना था कि:

> "राज्य तभी फलता-फूलता है जब प्रकृति, दिशा और ग्रहों के साथ सामंजस्य हो।"

इसलिए शासन व्यवस्था में:

वास्तु शास्त्र → भौतिक-संरचनात्मक समृद्धि

ज्योतिष शास्त्र → काल और कर्म का संतुलन
दोनों का समन्वय होता था।

राजस्थान में बड़े सरकारी भवनों जैसे सचिवालय,अस्पताल का IPD tower,पार्टी कार्यालय आदि के निर्माण में वास्तु दोषों को नजरअ...
04/11/2025

राजस्थान में बड़े सरकारी भवनों जैसे सचिवालय,अस्पताल का IPD tower,पार्टी कार्यालय आदि के निर्माण में वास्तु दोषों को नजरअंदाज किया जा रहा है,महिनों पहले कई बड़े वास्तुविद भयंकर दुष्परिणामों के बारे में बता चुके,पूर्वजो के ज्ञान को नकार देना विज्ञान नहीं मूर्खता कहलाती हैं,बेहतर होगा हिन्दुत्ववादी सरकार हिन्दुत्व पर चले,नारों और चुनावों का हिन्दुत्व किसी काम का नहीं है.

19/10/2025

जिस महान व्यक्ति कि वज़ह से ये देखने को मिला,उसका कर्ज नहीं उतार सकते

19/10/2025
हर भारतवासी अपना है सीमा के प्रहरी बंधुओं से आत्मीयता को सुदृढ़ करने का संकल्प
14/10/2025

हर भारतवासी अपना है सीमा के प्रहरी बंधुओं से आत्मीयता को सुदृढ़ करने का संकल्प

ग्रामीण व अर्द्ध शहरी क्षेत्रों में  ........ इतिहास और किसान नाम पर घोर जातीय पिस्सू बौखलाए हुए है , आखिर घृणा वैमनस्य ...
12/10/2025

ग्रामीण व अर्द्ध शहरी क्षेत्रों में ........ इतिहास और किसान नाम पर घोर जातीय पिस्सू बौखलाए हुए है , आखिर घृणा वैमनस्य फैला कर जातीय लामबंदी से राजनैतिक उल्लू सीधा करने का अवसर में संघ ही इनके कुत्सित इरादों में बाधक जो है , परोक्ष रूप से ये सभी सेक्युलर कहलाने वाले राजनैतिक दलों द्वारा समर्थित सहयोग से संचालित है ,
नियोजित षडयंत्रों से चलाए जा रहे समाज घातक इन कृत्यों में उनके साथ है पढ़े लिखे उन मूर्खों की जमात जो केवल जाति रट्टा और भेड़ चाल जानती है ......... उनकी क्षमता, योग्यता, बुद्धि, तर्क,अध्ययन, केवल और केवल जाति पर टिकी है , आखिर उन बेचारों का ज्ञान इतना सतही है कि वे जाति को ही समाज....... और बाकी से स्वयं को श्रेष्ठ माने बैठे हैं

संतोष है कि #संघ शक्ति समस्त बाधाओं और रूकावटों को पार कर , स्थान स्थान पर , जन सहभाग, स्नेह, जन प्रतिसाद, से सभी सज्जन शक्ति के साथ अपने संगठन सेवा संस्कार की इस समाज साधना के अपने कार्य सहित ,लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ रहा है 🙏

ातन

✅ GST आने से पहले का टैक्स सिस्टम (Pre-2017)भारत में Excise Duty + VAT + Service Tax + Entry Tax + Luxury Tax आदि मिलाकर...
04/09/2025

✅ GST आने से पहले का टैक्स सिस्टम (Pre-2017)

भारत में Excise Duty + VAT + Service Tax + Entry Tax + Luxury Tax आदि मिलाकर multi-layered indirect tax system था।

अलग-अलग राज्य में अलग VAT दरें थीं (12.5%, 14.5%, 15% तक)।

इसके अलावा Excise duty (सेंटर द्वारा) + CST (Central Sales Tax) भी जुड़ जाता था।

इस वजह से किसी भी प्रोडक्ट पर Effective Tax 25%–40% तक पहुँच जाता था।

उदाहरण (GST से पहले):

1. शैम्पू, साबुन, टूथपेस्ट – Excise (12.5%) + VAT (12.5–14.5%) → करीब 25–28%

2. इलेक्ट्रॉनिक सामान (AC, TV, फ्रिज) – Excise (12.5%) + VAT (14.5%) + Entry Tax → करीब 30–40%

3. कार/बाइक – Excise (12.5%) + VAT (12.5–14.5%) + Road/Entry Tax → 35–40% तक

4. हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स (टेस्ट स्ट्रिप्स, थर्मामीटर आदि) – कई Zero-rated थे लेकिन कुछ पर 12.5–14.5% VAT लगता था।

👉 GST आने के बाद इन सबको एक ही टैक्स में समाहित कर दिया गया और दरें स्पष्ट (Nil, 5%, 12%, 18%, 28%) कर दी गईं।

मतलब पहले टैक्स छुपा हुआ और जटिल था, अब एक ही स्लैब में आसान हो गया।

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