04/08/2024
ठीक 11 साल पहले जब साधारण से पारिवारिक पृष्ठभूमि वाले मेरे जैसे औसत छात्र ने कठिन मेहनत करके AIPMT (अब NEET) की परीक्षा पास करके डॉक्टर के सपने को पूरा करने के लिए एमबीबीएस में एडमिशन लिया तब सबसे पहली बात मेरे दिमाग में यह थी कि अगर आपके होंसले बुलंद हो और आपने कुछ करके दिखाने का जज्बा दिल में जगा लिया हो तो यकीनन आपको अपने सपने को पूरा करने से कोई नहीं रोक सकता।
उस समय कोई 2–4% छात्र ऐसे होते थे जो अपने पहले प्रयास में AIPMT की परीक्षा पास कर पाते थे और उनमें से एक में था।
उस समय तक हमारे क्षेत्र में विज्ञान गणित जैसे विषय सिर्फ दसवीं कक्षा तक ही होते थे और बच्चे जैसे जैसे दसवीं कक्षा के नजदीक पहुंचता उसके मन में एक प्रकार से खुशी के हिलोरे उठने लगते कि दसवीं के बाद विज्ञान गणित से मेरा पीछा छूट जायेगा।
लेकिन मैंने विज्ञान चुना और उसमें जब कैरियर स्थापित भी कर लिया तब मेरे मन में सबसे पहली बात ये आई कि शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े अपने क्षेत्र में सबसे कठिन माने जाने वाले इन संकायों से बच्चों को कैसे जोड़ा जाए।
हौंसले तो मेरे पहले से बुलंद थे ही साथ ही ये संकल्प भी कर लिया कि आज जिस क्षेत्र के बच्चे और अभिभावक अपने बच्चों को विज्ञान गणित संकाय दिलाने से कतराते हैं और NEET/IIT जैसी तैयारी को अपने लिए असंभव मानते हैं में उसे संभव करके दिखाऊंगा और ऐसी शिक्षा की ऐसी ज्वाला हम सब मिलकर जगाएँगे कि आने वाले समय में हर घर से डॉक्टर ,इंजीनियर निकलेगा।
अपने इस संकल्प को पूरा करने के लिए हमने DESERT 80 नाम से संघटन बनाया और सबसे पहले गांवों में डिजिटल लाइब्रेरी और सरकारी विद्यालयों में स्मार्ट क्लास रूम बनाने शुरू किए ताकि बच्चा 10वी क्लास तक सही ढंग से पढ़ाई कर सके और उसमें पढ़ाई के प्रति जूनून पैदा हो सके।
इस समय तक कई निजी विद्यालयों में विज्ञान संकाय प्रारंभ हो चुका था ,बड़े भावुक मन से कह रहा हूँ लेकिन कुछ अपने निहित स्वार्थों के लिए होनहार बच्चो को NEET /IIT की तैयारी में भेजने की बजाय अपने स्कूल का बेहतर रिजल्ट रखने के लिए विज्ञान संकाय का ढिंढोरा पीट कर बच्चे को कला संकाय वाली लाइन पर ही रख रहे थे।में धन्यवाद देना चाहता हूँ उन स्कूल का जिन्होंने इतने नेगेटिव माहोल के बाद विज्ञान विषय को स्कूल में लेके आये ,आपकी मेहनत को में बहुत अच्छे से महसूस कर पा रहा हूँ ,एक बेहतर संस्थान की यही पहचान होती है कि उसकी स्कूल में बच्चा बोर्ड में टॉप भी करे और उसके बाद लक्ष्य के अनुरूप अच्छे मार्गदर्शन से देश के बड़े से बड़े पद पर पहुँचे ,
जब डिजिटल क्लास रूम और लाइब्रेरी की वजह से बच्चों में शिक्षा के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ी तब हमने DESERT 80 के बैनर तले गांव गांव घर घर घूमकर 80 प्रतिभाशाली बच्चों को निशुल्क NEET की तैयारी के लिए चुना।
DESERT 80 के स्कॉलरशिप पेपर में बच्चों की भागीदारी से मुझे यह अहसास हुआ कि वास्तव में बच्चे मेडिकल की पढ़ाई में जाना चाहते हैं लेकिन उन्हें वो संसाधन उपलब्ध नहीं हो पा रहे थे।
DESERT 80 के साथ जब हम प्रत्येक बच्चे तक पहुंचे और उसकी मंशा जानी तब हकीकत सामने आई कि वास्तव में बच्चे प्रतिभाशाली हैं और पहले प्रयास में NEET पास कर सकते हैं लेकिन परिजनों की अज्ञानता के कारण ,कुछ से निजी संस्था वाले उन्हें वहां से निकलने नहीं देते क्योंकि अगर ये प्रतिभाशाली बच्चे वहां से निकल गए तो उन्हे आर्थिक रूप से तो नुकसान होगा ही होगा लेकिन मुख्य नुकसान उन्हें रिजल्ट के रूप में होगा इसलिए उन बच्चों को सिर्फ पोस्टर बॉय बनाए रखने के लिए कुछ निजी संस्थान उन्हें बेहतर अपने लक्ष्य के अनुरूप पढ़ाई के लिए जाने नहीं देते।मेरे हिसाब से एक अच्छा संस्थान और शिक्षक वही होता हैं जो उस बच्चे को उसकी प्रतिभा के अनुसार आगे बड़े राष्ट्र पद के लिए मार्गदर्शित करे
हमने अपने प्रयास नहीं छोड़े और रेगिस्तान ,मारवाड़ के हर गांव देहात में स्कॉलरशिप टेस्ट सेमिनार इत्यादि की सहायता से बच्चों में मेडिकल की पढ़ाई के लिए जागरूकता लाने का काम करते रहे और आज नतीजे सामने हैं कि दो साल पहले पूरे बज्जू ब्लॉक की बात करूँ तो 40-50बच्चे विज्ञान संकाय चुनते थे और उनमें से कोई हर साल 4-5 बच्चे NEET /IIT की तैयारी करता था वहीं आज 300 से अधिक बच्चे इस साल विज्ञान संकाय में प्रवेश ले चुके हैं और सैंकड़ों NEET की तैयारी में जुटे हुए हैं।
हमारी इस मुहिम के दौरान हमारे ऊपर कई आरोप इन कुछ निजी संस्थाओं के लोगों और अन्य लोगों ने लगाए लेकिन हम विचलित नहीं हुए क्योंकि हमारा मकसद साफ था और जब हम नेकी के रास्ते पर चल रहे थे तो हमे पूरा यकीन था कि ये झूठे आरोप आलोचना ज्यादा दिन नहीं टिकेगी और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और घर घर डॉक्टर इंजीनियर बनाने के मकसद में हम लोगों में चेतना का दीप जलाकर जरूर कामयाब होंगे।
अभी भी हमें आंशिक सफलता मिली हैं और वास्तविक कामयाबी तब मिलेगी जब हमारे बच्चे डॉक्टर बनकर घर आएंगे इसलिए हम अभी भी दिन रात अनवरत सामाजिक सरोकार के इस कार्य में तन मन धन से लगे हुए हैं।
इस दौरान DESERT 80 फाउंडेशन के साथ साथ मिठडिया युवा संगठन, बज्जू स्पोर्ट्स, एकता क्लब गोडू, मोडायत युवा संगठन ने भी महती भूमिका निभाई इसलिए में इनका भी शुक्रगुजार हूं और बस यहीं कहना चाहता हूं कि ये सपना सबसे पहले मैने देखा जरूर था लेकिन इसे पूरा हम सब मिलकर करेंगे।
आप सबका स्नेह प्रेम यूं ही बना रहे जिससे कि में अपनी इसी ऊर्जा के साथ बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए प्रयास करता रहूं।
धन्यवाद