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BIKANER ** साहित्यिक संस्था ** उद्देश्य गुरू जांभोजी की शिक्षाओं व जांभाणी साहित्य का प्रचार-प्रसार

15/08/2026
बिश्नोई समाज के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि। बिश्नोई समाज के साधु अब विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बनकर विद्यार्थियों को पढ़ाएंगे।...
12/08/2026

बिश्नोई समाज के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि। बिश्नोई समाज के साधु अब विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बनकर विद्यार्थियों को पढ़ाएंगे। अकादमी के लिए एक गौरव और सम्मान का क्षण है कि हमारे उपाध्यक्ष डॉ सच्चिदानंदजी आचार्य अब प्रोफेसर बन गये है। अकादमी परिवार की ओर से बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं 🙏

*स्मृतिशेष डॉ. सरस्वती बिश्नोई स्मृति ग्रंथ हेतु आलेख आमंत्रण*सादर नमन प्रणाम 🙏      निवेदन यह है कि जांभाणी साहित्य अका...
07/08/2026

*स्मृतिशेष डॉ. सरस्वती बिश्नोई स्मृति ग्रंथ हेतु आलेख आमंत्रण*
सादर नमन प्रणाम 🙏
निवेदन यह है कि जांभाणी साहित्य अकादमी द्वारा स्मृतिशेष डॉ. सरस्वती बिश्नोई के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित स्मृति ग्रंथ प्रकाशित किया जा रहा है । आपसे विनम्र अनुरोध है कि डॉ. सरस्वती बिश्नोई के व्यक्तित्व, कृतित्व, सामाजिक , शैक्षिक एवं साहित्यिक योगदान तथा उनसे जुड़े संस्मरणों पर मौलिक एवं शोधपरक आलेख प्रेषित कर इस ग्रंथ को समृद्ध बनाने में सहयोग प्रदान करें।

आलेख भेजने की अंतिम तिथि: 30 सितंबर, 2026
भाषा: हिंदी/अंग्रेज़ी
ई-मेल:
[email protected]

निवेदक
संपादक मंडल
डॉ. सुरेंद्र कुमार | श्रीमती मीना बिश्नोई
संपर्क: 7988116985

संत संदेश
19/07/2026

संत संदेश

12/07/2026
12/07/2026

जाम्भाणी साहित्य अकादमी के 14वें स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

मुक्तिधाम मुक़ाम में जाँभानी साहित्य सदन  का कार्य प्रगति पर है । इस समय चारों ही मंज़िल पर छत, फर्श , बिजली , प्लम्बर ,...
08/07/2026

मुक्तिधाम मुक़ाम में जाँभानी साहित्य सदन का कार्य प्रगति पर है । इस समय चारों ही मंज़िल पर छत, फर्श , बिजली , प्लम्बर , फर्नीचर आदि का कार्य जारी है । शीघ्र ही कांफ्रेंस + एक्ज़ीबिशन हॉल का कार्य प्रारंभ होगा । इस साहित्य मंदिर हेतु जाँभानी साहित्य अकादमी आपसे सहयोग की अपील करती है ताकि शीघ्र अति शीघ्र इस पवित्र कार्य को पूर्ण करके समाज को लोकार्पित किया जा सके ।

:: अधिसूचना ::(जाम्भाणी साहित्य ज्ञान परीक्षा-2026)जाम्भाणी साहित्य ज्ञान परीक्षा-2026 ऑनलाइन एवं ऑफलाइन होगी। इस परीक्ष...
06/07/2026

:: अधिसूचना ::
(जाम्भाणी साहित्य ज्ञान परीक्षा-2026)

जाम्भाणी साहित्य ज्ञान परीक्षा-2026 ऑनलाइन एवं ऑफलाइन होगी। इस परीक्षा संबंधित समस्त जानकारी हमारी
अधिकारिक वेबसाइट www.jambhani.com एवं
WhatsApp चैनल https://whatsapp.com/channel/0029VaeQ1km5a23uBKJfJQ15 पर उपलब्ध रहेगी l
इच्छुक अभ्यर्थी एवं अभिभावक इस whatsApp चैनल से जुड़े।

*गुरु जम्भेश्वरजी ने विश्व को जीने और प्रकृति संरक्षण की राह दिखाई : प्रो. मनोज दीक्षित**महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय ...
05/07/2026

*गुरु जम्भेश्वरजी ने विश्व को जीने और प्रकृति संरक्षण की राह दिखाई : प्रो. मनोज दीक्षित*

*महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के परीक्षा भवन का ‘गुरु जम्भेश्वर भवन’ हुआ नामकरण, 29 नियमों की पट्टिका का किया अनावरण*

बीकानेर, 4 जुलाई। महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय में महापुरुषों के सम्मान एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए परीक्षा भवन का नामकरण ‘गुरु जम्भेश्वर भवन’ किया गया। इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. मनोज दीक्षित ने गुरु जम्भेश्वरजी के चित्र, उनके संक्षिप्त जीवन परिचय तथा 29 नियमों की पट्टिका का अनावरण किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलगुरु प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि गुरु जम्भेश्वरजी ने विश्व को पर्यावरण संरक्षण, जीव दया और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की विलक्षण राह दिखाई। आज प्रकृति और उसमें निवास करने वाली असंख्य प्रजातियों के संरक्षण के लिए उनके सिद्धांत पहले से अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने कहा कि गुरु जम्भेश्वरजी का उपदेश स्थल, निर्वाण स्थल तथा समाधि स्थल तीनों बीकानेर जिले में स्थित हैं, जो जिले के लिए गौरव का विषय है।

उन्होंने कहा कि मरुस्थलीय प्रदेश में, जहां वर्षा मेहमान की तरह आती है, वहां हरियाली बढ़ाने के लिए माता अमृतादेवी बिश्नोई तथा 363 बिश्नोई बलिदानियों के त्याग को सदैव स्मरण रखना होगा। उनकी स्मृति में अधिकाधिक पौधरोपण करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में अमृतादेवी बिश्नोई उद्यान की स्थापना की गई है तथा भविष्य में विश्वविद्यालय में गुरु जम्भेश्वरजी की शिक्षाओं एवं दर्शन पर शोध कार्यों को विशेष रूप से बढ़ावा दिया जाएगा।

जाम्भाणी साहित्य अकादमी के महासचिव श्री विनोद जम्भदास ने इस ऐतिहासिक पहल का श्रेय कुलगुरु प्रो. मनोज दीक्षित को देते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों में इस प्रकार के नवाचार विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति तथा महापुरुषों के जीवन चरित्र से परिचित कराने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि आज विश्व के अनेक विश्वविद्यालयों में गुरु जम्भेश्वरजी के सिद्धांतों पर शोध कार्य हो रहे हैं और अब महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय का नाम भी इस दिशा में अग्रणी संस्थानों में लिया जाएगा।

अकादमी के कोषाध्यक्ष डॉ. बी.एल. बिश्नोई ने कहा कि वर्तमान भौतिकवादी युग और एक-दूसरे से आगे निकलने की अंधी दौड़ में गुरु जम्भेश्वरजी के सिद्धांतों का पालन अत्यंत आवश्यक है। उनके विचार मानव जीवन को नैतिक, संतुलित और प्रकृति के अनुकूल बनाने की प्रेरणा देते हैं।

राजस्थानी मोट्यार परिषद के श्री रामावतार शर्मा ने कहा कि गुरु जम्भेश्वरजी किसी एक समाज या पंथ के नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के पथप्रदर्शक थे। उनके द्वारा प्रतिपादित 29 नियम आज भी प्रत्येक व्यक्ति को सरल, अनुशासित और सदाचारपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।

इस अवसर पर जाम्भाणी साहित्य अकादमी की ओर से कुलगुरु प्रो. मनोज दीक्षित का साफा पहनाकर एवं लोई ओढ़ाकर सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में राजकीय विधि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. भगवानाराम बिश्नोई, डॉ. बी.एल. बिश्नोई, डॉ. एल.सी. बिश्नोई, डॉ. रामेश्वरलाल बिश्नोई, जीवरक्षा अध्यक्ष श्री मोखराम धारणियां, श्री शिवराज खीचड़, श्री हरिश्चंद्र लेघा, श्री हरिराम खीचड़, श्री दूलीचंद गोदारा, श्री देवदत्त, श्री सुभाष खीचड़, श्री सुखराम भाम्भू, श्री राजेश चौधरी, श्री प्रशांत जैन, श्री सुनील बिश्नोई, श्री हरिराम गोदारा, श्री मोहित बिश्नोई, श्री योगेंद्र सिंह, श्री नखतूचंद सहित जाम्भाणी साहित्य अकादमी, राजस्थानी मोट्यार परिषद के पदाधिकारी, सदस्य तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

मुक्तिधाम मुक़ाम में जाँभानी साहित्य सदन का कार्य प्रगति पर
27/06/2026

मुक्तिधाम मुक़ाम में जाँभानी साहित्य सदन का कार्य प्रगति पर

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