गायत्री परिवार Bhurkhunda

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क्या एक अमरूद की कीमत एक मासूम की चीखों से ज्यादा हो सकती है?हिमाचल प्रदेश के ऊना से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने हर क...
07/04/2026

क्या एक अमरूद की कीमत एक मासूम की चीखों से ज्यादा हो सकती है?

हिमाचल प्रदेश के ऊना से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया। एक 4 साल की बच्ची ने पेड़ से अमरूद तोड़ लिया, लेकिन इसके बदले उसे जो सजा मिली, वह बेहद चौंकाने वाली है।

आरोप है कि एक रिटायर्ड फौजी ने बच्ची को घर के अंदर ले जाकर बांध दिया और उसके साथ मारपीट की। वीडियो में बच्ची रोते हुए मदद मांगती नजर आती है, जो दिल को झकझोर देती है।

यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि हमारी सोच पर सवाल है।
क्या एक छोटी सी गलती पर इतनी सख्ती जरूरी है?

बच्चों को समझाने की जरूरत होती है, डराने की नहीं।
अब समय है कि हम इंसानियत को फिर से याद करें।

Disclaimer: यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर है, जांच जारी है।

❗'वसुधैव कुटुम्बकम्' की -         उदात्त भावना विकसित हो❗     'आत्मवत् सर्वभूतानि यः पश्यति सः पंडितः'- के एक सूत्र में ...
29/03/2026

❗'वसुधैव कुटुम्बकम्' की -
उदात्त भावना विकसित हो❗
'आत्मवत् सर्वभूतानि यः पश्यति सः पंडितः'- के एक सूत्र में मानव-कल्याण की समग्र भावना सन्निहित है। यह सारा विश्व एक सूत्र में बँध सकता है। यदि सभी लोग इसके अनुसार संसार को एक कुटुंब के रूप में देखें और प्रत्येक मनुष्य से वैसे ही प्रेम करें, जैसे अपने परिवार के सदस्यों के साथ करते हैं। व्यवहार की सहृदयता हृदय की विशाल भावनाओं से समुन्नत होती है। जितने उच्च विचार और उदार भावनाएँ होंगी, उतनी ही औरों को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता भी होगी। चिरस्थायी ममत्व-अपनत्व मनुष्य की आंतरिक उत्कृष्टता से ही प्राप्त होता है। वाचालता और कपटपूर्ण व्यवहार से किसी को थोड़ी देर तक अपनी ओर लुभाया जा सकता है, पर स्थिरता का सूत्र तो प्रेम ही है। हमारे अंतःकरण में दूसरों के लिए जितनी अधिक मैत्री की भावना होगी, उतना ही अपना व्यक्तित्व विकसित होगा, उतनी ही आत्मशक्तियाँ विस्तरित होंगी।

अपने हित की साधना का भाव तो पशु-पक्षियों तक में पाया जाता है, परंतु अन्य जीवधारियों की तुलना में मनुष्य जीवन में दिव्यता की, दिव्य विकास की सारी संभावनाएँ विद्यमान हैं। अतः इसमें कोई बुद्धिमानी नहीं हो सकती कि मनुष्य संपूर्ण जीवन केवल अपनी ही स्वार्थपूर्ण प्रवंचनाओं में बिता दे। इससे अंत तक मानवीय, दिव्यशक्तियाँ प्रसुप्त बनी रहती हैं। प्रेम और आत्मीयता की भावनाओं का विकास नहीं हो पाता। स्वार्थपरता एवं संकीर्णता के कारण मनुष्य का जीवन कितना दुःखमय, कितना कठोर हो सकता है, यह सर्वविदित है। वस्तुतः सज्जन तथा सराहनीय वह है, जो केवल स्वहित तक सीमित नहीं है। जो उदारतापूर्वक सबके हित की बात सोचता है, वही व्यक्ति श्रेय का अधिकारी है।

'दि राइट्स ऑफ मैन' नामक अपनी कृति में सुप्रसिद्ध मनीषी टामस पेन ने कहा है, "यह समूचा विश्व मेरा देश है और भलाई करना मेरा धर्म।" विश्वप्रेम की इस भावना में जो रमणीयता, सौंदर्य-दर्शन तथा मोहकता सन्निहित है, यथार्थ में यही मनुष्य की सच्ची धार्मिक संपत्ति हो सकती है। इसी से पुण्यपथ प्रशस्त होता है, इसी से प्रसुप्त क्षमताएँ जाग्रत होती हैं। घृणा और क्रोध, बैर और बदले की भावना से आज हमारा जीवन स्तर गिरता चला जाता है। इससे सामूहिक तौर पर व्यक्ति और समाज दोनों का पतन होता है। समाज में सात्त्विकता का प्रकाश जिन सद्‌गुणों से फैलता है, उनकी ओर संकेत करते हुए भगवान कृष्ण ने गीता में कहा है-

"अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च।
निर्ममो निरहंकारः समदुःखसुखः क्षमी ॥"

अर्थात जो संपूर्ण प्राणियों को अद्वैत भावना से देखता है, सबके साथ मैत्री, करुणा, माया मोह से रहित और नम्रतापूर्ण व्यवहार करता है, जो संपूर्ण प्राणियों के प्रति क्षमाभाव रखता है, उनके साथ सुख और दुःखों में समान रहता है, वही पूर्ण पुरुष है अर्थात महानता का लाभ मनुष्य इन्हीं सद्‌गुणों के आधार पर पाता है।

स्वामी रामतीर्थ ने विशाल संसार को अपना घर बताते हुए कहा है कि सर्वत्र प्रेम का साम्राज्य है। इसके बिना मानव जीवन में सरसता नहीं आती। हम जितने अधिक अंशों में समाज के प्रति आत्मविस्तार करते हैं, उसी अनुपात में प्रेम की अंतर्ज्योति हमारे जीवन में मधुरता भरती जाती है। भावनाओं का यह विस्तार मनुष्य को अपने आप से करना होता है। व्यक्तिगत चरित्र निर्माण से यह प्रक्रिया प्रारंभ होती है। धीरे-धीरे परिवार, गाँव, समाज, राष्ट्र और विश्व के साथ उसका सामंजस्य बढ़ता जाता है। इसी क्रम में व्यक्ति को निज का ज्ञान, बौद्धिक विकास और ईश्वरानुभूति की सिद्धि प्राप्त होती है। यह आत्मयोग ही ब्रह्मज्ञान का सबसे सीधा और सरल रास्ता है।

'आत्मवत् सर्वभूतेषु' की उदात्त भावना ही आत्मा के पूर्ण विस्तार की प्रतीक है। ऐसे व्यक्तियों के सहृदयता, उदारता, कष्टसहिष्णुता आदि सद्‌गुण पराकाष्ठा तक जा पहुँचते हैं। उनके लिए अपने-पराए का भेद मिट जाता है। वह परमात्मा के प्रकाश में ऐसे असीमत्व का अनुभव करते हैं, जिससे उनके संपूर्ण दुःख, अभाव आदि नष्ट हो जाते हैं और प्राणिमात्र की सेवा में सर्वस्व बलिदान करने की महानता जाग्रत होकर धरती को कृतार्थ कर देती है। उदारचेताओं की भाँति हमें भी 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की यह भावना विकसित कर पूर्णता के लक्ष्य को पाना चाहिए।
--युगऋषि पं.श्रीराम शर्मा आचार्य
--'मनुष्य में देवत्व का उदय' - 4.25 से साभार 🌺

🌺 चैत्र नवरात्रि पूजा सफलतापूर्वक सम्पन्न 🌺माँ दुर्गा की असीम कृपा से🙏 गायत्री परिवार, भुरकुंडा द्वारा आयोजितनवरात्रि पू...
27/03/2026

🌺 चैत्र नवरात्रि पूजा सफलतापूर्वक सम्पन्न 🌺

माँ दुर्गा की असीम कृपा से
🙏 गायत्री परिवार, भुरकुंडा द्वारा आयोजित
नवरात्रि पूजा एवं हवन कार्यक्रम
भक्ति, श्रद्धा और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ।

✨ माँ की कृपा से सभी के जीवन में
सुख, शांति, समृद्धि और सद्बुद्धि बनी रहे।

🌼 इस पावन अवसर पर जुड़े सभी श्रद्धालुओं का
हृदय से आभार 🙏

🚩 जय माता दी | जय माँ गायत्री 🚩










27/03/2026
23/01/2026











22/01/2026

जब अमित शाह जी ने गायत्री परिवार पर अपनी बात रखी 🌼🇮🇳







दुनिया बदल सकती है, रिश्ते बदल सकते हैं, लेकिन मां का प्रेम कभी नहीं बदलता। ❤️साधना का बल ही साधक की असली ताकत है। जब बा...
15/01/2026

दुनिया बदल सकती है, रिश्ते बदल सकते हैं, लेकिन मां का प्रेम कभी नहीं बदलता। ❤️

साधना का बल ही साधक की असली ताकत है। जब बाहर शोर हो और कोई साथ न हो, तो अंतर्मन में बैठी मां गायत्री ही हाथ थामती हैं।

विश्वास रखें, मां का आशीर्वाद आपके साथ है। ✨🙏

13/01/2026




























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