20/07/2026
माननीय मुख्यमंत्री जी, आपकी सरकार स्वयं को दलित और आदिवासी हितों की सबसे बड़ी हितैषी बताती है, लेकिन वन विभाग में वर्षों से लंबित पदोन्नतियाँ आपके इन दावों की सच्चाई पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
रेंज ऑफिसर से सहायक वन संरक्षक (ACF) के लगभग 200 पदों में से करीब 150 पद, तथा डिप्टी रेंजर से रेंजर के लगभग 400 पदों में से करीब 200 पद, वरिष्ठता और लागू पदोन्नति नियमों के अनुसार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के अधिकारियों से भरे जाने हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आपके निर्देशों के बाद 36 से अधिक विभागों में पदोन्नति प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन वन विभाग में आज तक Departmental Promotion Committee (DPC) की बैठक तक नहीं हुई। आखिर ऐसा क्यों?
क्या यह केवल प्रशासनिक लापरवाही है, या फिर उच्च पदों पर SC/ST अधिकारियों की बढ़ती भागीदारी कुछ प्रभावशाली लोगों को स्वीकार नहीं है?
मुख्यमंत्री जी, प्रदेश जवाब चाहता है
- वन विभाग की DPC अब तक क्यों नहीं कराई गई?
- पदोन्नति प्रक्रिया रोकने के लिए जिम्मेदार अधिकारी कौन हैं?
- पात्र SC/ST अधिकारियों को उनके वैधानिक अधिकार से आखिर कब तक वंचित रखा जाएगा?
- क्या आपकी सरकार सामाजिक न्याय के अपने दावों को निर्णयों में बदलेगी या उन्हें केवल भाषणों तक सीमित रखेगी?
सामाजिक न्याय का असली पैमाना भाषण नहीं, बल्कि निर्णय और उनका ईमानदार क्रियान्वयन होता है।
यदि दलित और आदिवासी अधिकारियों को उनका संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकार भी समय पर नहीं मिल पा रहा है, तो सरकार के दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
मुख्यमंत्री जी, अब जवाब दीजिए, मध्यप्रदेश जवाब चाहता है।
Dr Mohan Yadav Narendra Modi Umang Singhar Rahul Gandhi