तूर्यनाद

तूर्यनाद राजभाषा हिन्दी को विश्वपटल पर स्थापित करने का अद्वितीय अवसर।
तूर्यनाद'25
12-13-14 सितंबर 2025
(344)

'तूर्यनाद' एक अखिल भारतीय हिंदी महोत्सव है, जिसका उद्देश्य राजभाषा हिंदी व भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार द्वारा देशवासियों में राष्ट्रगौरव व आत्मगौरव की भावना का विकास करना है। इसके अंतर्गत सितम्बर को हिंदी माह के रूप में मनाते हुए महाविद्यालयीन विद्यार्थियों हेतु अनेक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएँ, कार्यशालाएँ, कवि सम्मेलन आदि कार्यक्रम आयोजित होते हैं। तूर्यनाद, हिंदी का औपचारिकता से परे जी

वन में सम्मान के साथ उपयोग व प्रचार-प्रसार करने का सन्देश देता है। देश भर से विभिन्न महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने गत 8 वर्षों से तूर्यनाद में आशातीत प्रतिभागिता दर्ज करा आयोजकों को सबल किया है।

"न गुरोरधिकं तत्त्वं, न गुरोरधिकं तपः।"अर्थात् -  गुरु से बढ़कर कोई तत्त्व  नहीं है और गुरु की सेवा एवं आज्ञा का पालन कर...
29/07/2026

"न गुरोरधिकं तत्त्वं, न गुरोरधिकं तपः।"
अर्थात् - गुरु से बढ़कर कोई तत्त्व नहीं है और गुरु की सेवा एवं आज्ञा का पालन करने से बढ़कर कोई तप नहीं है।

गुरु ज्ञान, संस्कार और सदाचार के प्रेरणास्रोत हैं, जिनके सान्निध्य से जीवन को सही दिशा और उद्देश्य प्राप्त होता है। जिनके मार्गदर्शन और आशीर्वाद ने हमारे व्यक्तित्व, विचार एवं चरित्र का निर्माण किया। गुरु न केवल शिक्षा प्रदान करते हैं, बल्कि जीवन के प्रत्येक चरण में सत्य, कर्तव्य और नैतिक मूल्यों का बोध भी कराते हैं।
भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। गुरु ही वह प्रकाश हैं, जो अज्ञानरूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का दीप प्रज्वलित करते हैं। उनके द्वारा दिए गए संस्कार, आदर्श एवं जीवनोपयोगी शिक्षाएँ हमें जीवन के प्रत्येक चरण में प्रेरणा प्रदान करती हैं और सतत् आगे बढ़ने का मार्ग दिखाती हैं।

तूर्यनाद समिति की ओर से समस्त गुरुजनों को सादर प्रणाम एवं गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ।

"शौर्यं तेजो धृतिर्दाक्ष्यं"अर्थात् शौर्य, तेज, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा ही एक सच्चे वीर की पहचान है।प्रतिवर्ष 26 जुलाई को...
26/07/2026

"शौर्यं तेजो धृतिर्दाक्ष्यं"
अर्थात् शौर्य, तेज, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा ही एक सच्चे वीर की पहचान है।
प्रतिवर्ष 26 जुलाई को भारत कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाता है। यह दिवस वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध में भारतीय सेना द्वारा प्राप्त ऐतिहासिक विजय तथा देश की रक्षा में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों की स्मृति को समर्पित है।
कारगिल की दुर्गम एवं विषम परिस्थितियों में भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस, अटूट संकल्प और अद्वितीय वीरता का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा की। उनका बलिदान हमें राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और देश के प्रति समर्पण का संदेश देता है।
कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य विजय का प्रतीक नहीं, बल्कि यह प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व, सम्मान और राष्ट्रभक्ति का प्रेरणास्रोत है। यह दिवस हमें उन अमर वीरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है, जिनके त्याग के कारण हमारा राष्ट्र सुरक्षित और गौरवान्वित है।
तूर्यनाद समिति की ओर से वीर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि।
जय हिन्द!

25/07/2026

"कुछ व्यक्तित्व अपने पद या परिचय से नहीं, बल्कि अपने विचारों और प्रभावशाली व्यक्तित्व से पहचाने जाते हैं।"

तूर्यनाद की यात्रा में ऐसे अनेक प्रेरणादायक क्षण जुड़े हैं, जिन्होंने इसे केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि विचारों और अभिव्यक्तियों का उत्सव बनाया है। इन्हीं यादगार क्षणों में से एक था छात्र संसद प्रतियोगिता, जहाँ पिछले वर्ष श्री यतिन भास्कर दुग्गल जी ने निर्णायक के रूप में अपनी गरिमामयी उपस्थिति से मंच को गौरवान्वित किया।
उनकी सूक्ष्म दृष्टि, सारगर्भित टिप्पणियाँ और प्रतिभागियों के प्रति उत्साहवर्धक मार्गदर्शन ने प्रतियोगिता को एक नई ऊँचाई प्रदान की। उन्होंने केवल प्रस्तुतियों का मूल्यांकन ही नहीं किया, बल्कि युवाओं को तर्क, नेतृत्व, संवाद और जिम्मेदार नागरिकता के महत्व से भी परिचित कराया।
आज जब हम तूर्यनाद'25 की स्वर्णिम स्मृतियों के पन्ने पलटते हैं, तो छात्र संसद के उस अविस्मरणीय अध्याय को आदरपूर्वक स्मरण करते हैं और श्री यतिन भास्कर दुग्गल जी के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

21/07/2026

"कुछ क्षण समय के साथ पीछे नहीं छूटते,
वे स्मृतियों में अपना एक स्थायी स्थान बना लेते हैं।"

तूर्यनाद'25 की स्मृतियों में भी एक ऐसा ही गौरवपूर्ण और आत्मीय अध्याय सदा अंकित रहेगा, जब मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री माननीय श्री शिवराज सिंह चौहान जी की गरिमामयी उपस्थिति से तूर्यनाद का मंच गौरवान्वित हुआ।

उस दिन मंच से उच्चारित वे शब्द तालियों की गूँज के बीच समाप्त अवश्य हुए, किंतु उनकी प्रतिध्वनि आज भी तूर्यनाद की स्मृतियों में उतनी ही जीवंत है।

समय आगे बढ़ता रहा, तूर्यनाद भी अपनी यात्रा में नए अध्याय जोड़ता रहा...
पर कुछ पृष्ठ ऐसे होते हैं, जिन्हें पलटते ही बीता हुआ समय फिर से आँखों के सामने जीवंत हो उठता है।
आज स्मृतियों के उसी स्वर्णिम पृष्ठ को पुनः स्पर्श करते हुए
तूर्यनाद'25 के उस अविस्मरणीय संवाद की कुछ अनमोल झलकियाँ...
क्योंकि कुछ शब्द केवल कहे नहीं जाते,
वे अपनी भाषा, अपनी संस्कृति और अपनी स्मृतियों में सदैव जीवित रह जाते हैं।

प्रतिनिधित्व केवल एक दायित्व नहीं, अपितु विश्वास, उत्तरदायित्व और नेतृत्व का प्रतीक है।यदि आपके भीतर अपने संस्थान का गौर...
15/07/2026

प्रतिनिधित्व केवल एक दायित्व नहीं, अपितु विश्वास, उत्तरदायित्व और नेतृत्व का प्रतीक है।

यदि आपके भीतर अपने संस्थान का गौरव बढ़ाने का संकल्प, नेतृत्व करने का साहस और संस्कृति के प्रति समर्पण है, तो यह अवसर आपके लिए है।

तूर्यनाद आपको संस्थान प्रतिनिधि बनने हेतु सादर आमंत्रित करता है।

एक संस्थान प्रतिनिधि केवल अपने संस्थान का प्रतिनिधित्व नहीं करता, बल्कि अपने साथियों की आकांक्षाओं का स्वर, उनके विश्वास का आधार और अपने संस्थान की पहचान का वाहक भी बनता है। आपके विचार, आपकी ऊर्जा और आपका नेतृत्व अनेक नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।

आइए, अपनी प्रतिभा, सृजनशीलता और नेतृत्व क्षमता से संस्कृति और सहयोग की इस यात्रा का हिस्सा बनें तथा अपने संस्थान की पहचान को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में सहभागी बनें।

आज ही आवेदन करें और तूर्यनाद परिवार का अभिन्न अंग बनें।

तूर्यनाद के साथ, संस्कृति के स्वर को नई दिशा दें। 🎭✨

फॉर्म लिंक - https://forms.gle/YxK6Jk8PQx83mcLi6

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11/07/2026

"कुछ तिथियाँ केवल कैलेंडर में अंकित नहीं होतीं,
वे प्रतीक्षा को उत्सव और उत्सव को इतिहास बना देती हैं।"

एक बार फिर उत्सव का स्वर देने आ रहा है तूर्यनाद '26'
12 से 14 सितंबर

तीन दिवस...
एक महोत्सव...
अनगिनत अनुभूतियाँ...

अधिक जानकारी हेतु हमारे विभिन्न सोशल मीडिया माध्यमों से जुड़े रहें।

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"जहाँ शब्द केवल पढ़े नहीं जाते,अपितु संस्कृति बनकर जिए जाते हैं।जहाँ परंपराएँ केवल स्मृतियाँ नहीं,अपितु भविष्य की दिशा ब...
09/07/2026

"जहाँ शब्द केवल पढ़े नहीं जाते,
अपितु संस्कृति बनकर जिए जाते हैं।
जहाँ परंपराएँ केवल स्मृतियाँ नहीं,
अपितु भविष्य की दिशा बनती हैं।"

गूँजेगी हिन्दी, सजेगा विचार और थमेगा शब्दों का कारवाँ!
आ रहा है भारतीय संस्कृति, साहित्य और युवा अभिव्यक्ति का सबसे बड़ा महापर्व—तूर्यनाद '26।

शीघ्र ही...

आगामी कार्यक्रमों के विवरण तथा अधिक जानकारी हेतु, हमारे सभी सोशल मीडिया माध्यमों से जुड़े रहें।

03/07/2026

समय की धारा बदलती रहती है, किन्तु संस्कृति की जड़ें सदैव अडिग रहती हैं।
भारतीय ज्ञान, साहित्य, भाषा और सांस्कृतिक चेतना की उसी अमूल्य विरासत को नई ऊर्जा प्रदान करने आ रहा है — तूर्यनाद'26।
जहाँ शब्दों में संस्कार होंगे, विचारों में गहराई होगी और अभिव्यक्ति में भारतीयता का स्वाभिमान होगा।

वेदों की ऋचाओं से लेकर आधुनिकता के शिखर तक, जिस धरती ने केवल स्वाभिमान सीखा। उसी महागाथा को समेटे जल्दी ही आ रहा है भारत का सबसे बड़ा अंतर महाविद्यालयीन हिंदी महोत्सव *तूर्यनाद'26*, अपने नए उद्घोष के साथ
*"भारत: आर्य, अध्यात्म, अभ्युदय"*
आइए हमारी इस गौरवशाली यात्रा का साक्षात दर्शन करिए!
भारत के सबसे भव्य अंतर-महाविद्यालयीन हिन्दी महोत्सव — तूर्यनाद'26 की प्रत्येक जानकारी हेतु हमारे सभी सोशल मीडिया माध्यमों से जुड़े रहें।

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22/06/2026

"इतिहास के पृष्ठ प्रतीक्षा में हैं,
संस्कृति के स्वर जागरण में हैं,
ज्ञान की ज्योति प्रज्वलन में है,
और समय स्वयं साक्षी बनने को तत्पर है।"

क्योंकि फिर एक बार भारत अपनी गौरवगाथा दोहराएगा, और तूर्यनाद गूँजेगा।

भारत के सनातन ज्ञान, आर्य मूल्यों एवं अध्यात्म की अमर परंपरा को पुनः स्वर देने हेतु तूर्यनाद समिति लेकर आ रही है भारत का सबसे भव्य अंतर-महाविद्यालयीन हिन्दी महोत्सव - तूर्यनाद'26... शीघ्र ही।

अधिक जानकारी हेतु तूर्यनाद के समस्त सोशल मीडिया माध्यमों से जुड़े रहें।

"समत्वं योग उच्यते"अर्थात् — जीवन के प्रत्येक उतार-चढ़ाव में मन की समता बनाए रखना ही योग है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस प्र...
21/06/2026

"समत्वं योग उच्यते"
अर्थात् — जीवन के प्रत्येक उतार-चढ़ाव में मन की समता बनाए रखना ही योग है।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस
प्रतिवर्ष 21 जून को विश्वभर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। यह दिवस केवल योगाभ्यास का अवसर नहीं, बल्कि मानव जीवन में संतुलन, संयम और सजगता के महत्व को स्मरण कराने का माध्यम भी है। योग भारत की प्राचीन ज्ञान-परंपरा की ऐसी अमूल्य धरोहर है, जिसने सम्पूर्ण विश्व को स्वस्थ एवं सार्थक जीवन का मार्ग दिखाया है।

योग शरीर को सुदृढ़ता, मन को स्थिरता तथा आत्मा को शांति प्रदान करता है। यह व्यक्ति में आत्मविश्वास, अनुशासन, धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण का विकास करता है। महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित योग दर्शन आज भी मानवता को मानसिक तनाव, असंतुलन और व्यस्त जीवनशैली से उबरने की प्रेरणा देता है।

वर्तमान समय में, जब जीवन तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है, योग हमें स्वयं से जुड़ने, अपने भीतर झाँकने और आंतरिक चेतना को जागृत करने का अवसर देता है। यही कारण है कि योग आज सीमाओं से परे एक वैश्विक जीवन-पद्धति के रूप में स्थापित हो चुका है।

तूर्यनाद समिति की ओर से आप सभी को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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