29/07/2026
"न गुरोरधिकं तत्त्वं, न गुरोरधिकं तपः।"
अर्थात् - गुरु से बढ़कर कोई तत्त्व नहीं है और गुरु की सेवा एवं आज्ञा का पालन करने से बढ़कर कोई तप नहीं है।
गुरु ज्ञान, संस्कार और सदाचार के प्रेरणास्रोत हैं, जिनके सान्निध्य से जीवन को सही दिशा और उद्देश्य प्राप्त होता है। जिनके मार्गदर्शन और आशीर्वाद ने हमारे व्यक्तित्व, विचार एवं चरित्र का निर्माण किया। गुरु न केवल शिक्षा प्रदान करते हैं, बल्कि जीवन के प्रत्येक चरण में सत्य, कर्तव्य और नैतिक मूल्यों का बोध भी कराते हैं।
भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। गुरु ही वह प्रकाश हैं, जो अज्ञानरूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का दीप प्रज्वलित करते हैं। उनके द्वारा दिए गए संस्कार, आदर्श एवं जीवनोपयोगी शिक्षाएँ हमें जीवन के प्रत्येक चरण में प्रेरणा प्रदान करती हैं और सतत् आगे बढ़ने का मार्ग दिखाती हैं।
तूर्यनाद समिति की ओर से समस्त गुरुजनों को सादर प्रणाम एवं गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ।