31/08/2026
TeMIL आवासीय कार्यशाला: साझा सीख, डिजिटल नागरिकता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल
TeMIL के सहयोग से खुलताबाद, छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र) में LESS परियोजना के अंतर्गत पाँचों लोकेशनों, धारणी, खुलताबाद, केसला, बीजाडांडी और शाहपुर के टीम सदस्यों की एक आवासीय कार्यशाला आयोजित की गई। दीपक भाई एवं शिवानी दीदी के संयोजन में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में संचालित कार्यों की साझा समीक्षा, कार्य की एकरूपता सुनिश्चित करना तथा अनुभवों के आदान-प्रदान के माध्यम से कार्यक्रम की गुणवत्ता को सुदृढ़ करना था।
कार्यशाला की शुरुआत सभी लोकेशनों पर संचालित TeMIL कार्यक्रम की समीक्षा से हुई। पिछले दो वर्षों के अनुभवों, चुनौतियों और सीख पर सामूहिक चिंतन करते हुए प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को अधिक प्रभावी, संदर्भानुकूल और दीर्घकालिक बनाने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया। साथ ही, विभिन्न लोकेशनों के बीच बेहतर समन्वय, साझा सीख और सतत सहयोग को मजबूत करने के लिए एक साझा मंच विकसित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों में डिजिटल सिटिजनशिप (Digital Citizenship) की अवधारणा की गहन समझ विकसित करना था, ताकि वे डिजिटल तकनीक के सुरक्षित, जिम्मेदार, नैतिक और रचनात्मक उपयोग से जुड़े विभिन्न आयामों को अपने शैक्षिक कार्यों में समाहित कर सकें। साथ ही, आगामी एक्शन रिसर्च की योजनाओं में डिजिटल सिटिजनशिप के सिद्धांतों और व्यवहारिक पहलुओं को स्थानीय संदर्भों के अनुरूप प्रभावी ढंग से शामिल करने की साझा तैयारी भी इस कार्यशाला का महत्वपूर्ण उद्देश्य रही।
कार्यशाला में करिकुलम मैपिंग पर विशेष रूप से कार्य किया गया, जिसमें अंकगणित से बीजगणित तक सीखने की निरंतरता को बच्चों के सीखने के स्तर से जोड़ने पर चर्चा हुई। अंग्रेजी भाषा सत्र में The Village with Five Poles मॉड्यूल के माध्यम से कहानी आधारित शिक्षण, सामूहिक लेखन और प्रस्तुतीकरण जैसी गतिविधियों का अभ्यास किया गया। इन गतिविधियों ने प्रतिभागियों में भाषा विकास, कल्पनाशीलता, विश्लेषण, अनुमान लगाने तथा अनुभवों को सीखने से जोड़ने जैसी महत्वपूर्ण दक्षताओं को समझने का अवसर प्रदान किया।
कार्यशाला के दौरान आश्रम शाला, ब्राम्हनी के शिक्षक प्रशांत मोरे के साथ आयोजित संवाद ने विद्यालयी शिक्षा की वास्तविक चुनौतियों और संभावित समाधानों पर सार्थक चर्चा का अवसर दिया।