17/06/2026
Workshops & Trainings
मुंबई में करिकुलम वर्कशॉपः साझा विमर्श से समावेशी शिक्षा को समृद्ध बनाने की एक पहल
हमारा यह विश्वास है कि शिक्षा को समावेशी, आनंदमयी और बच्चों के स्थानीय संदर्भों से जुड़ा होना चाहिए। इस उद्देश्य को व्यापक स्तर पर ले जाने के लिए अन्य सामाजिक संस्थाओं के साथ अनुभवों का आदान-प्रदान और आपसी सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है। इसी कड़ी में, मालाबार चैरिटेबल ट्रस्ट एवं थनल फाउंडेशन द्वारा 20 और 21 मई को मुंबई में दो दिवसीय करिकुलम वेटिंग वर्कशॉप का आयोजन किया गया, जिसमें एकलव्य फाउंडेशन की ओर से निदेश सोनी एवं खेमप्रकाश यादव ने सहभागिता की। इस कार्यशाला में प्रथम फाउंडेशन, संस्कृत केंद्रीय विश्वविद्यालय और अपनालय जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथी भी शामिल हुए।
मालाबार एवं थनल फाउंडेशन द्वारा देश के 19 राज्यों में लगभग 2500 केंद्रों का संचालन किया जा रहा है, जहाँ पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल और शिक्षा जैसे बुनियादी विषयों पर काम होता है। वर्तमान में इन केंद्रों पर बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी व व्यावहारिक बनाने के लिए एक नए पाठ्यक्रम (करिकुलम) का विकास किया जा रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में एकलव्य के ज़मीनी अनुभवों को साझा करने के लिए ही संस्था को यहाँ विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था।
पाठ्यक्रम के तकनीकी पक्ष और विमर्श: इस कार्यशाला का मुख्य तकनीकी पक्ष एक ऐसे 'करिकुलम' को संरेखित (Align) करना था जो बिबिध राज्यों की स्थानीय आवश्यकताओं और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) के मानकों को पूरा कर सके। तकनीकी सत्रों के दौरान बच्चों के सीखने के स्तर (Learning Levels) का सटीक आकलन करने, गतिविधि-आधारित शिक्षण (Activity-Based Learning) को रोज़मर्रा की कक्षाओं का हिस्सा बनाने और अमूर्त अवधारणाओं को सरल शिक्षण सामग्रियों (TLM) में बदलने पर गंभीर विमर्श हुआ।
कार्यशाला का एक मुख्य तकनीकी दृष्टिकोण यह था कि पाठ्यक्रम केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहे, बल्कि उसमें 'स्थानीय संदभों को जोड़ा जाए, यानी किसी क्षेत्र का बच्चा अपने भूगोल, भाषा और संस्कृति के माध्यम से ही विज्ञान या गणित के सिद्धांतों को सीखे। इसके अलावा, सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहभागी (Interactive) और आनंददायक बनाने के लिए तकनीकी रूप से 'लर्निंग इंडिकेटर्स (सीखने के सूचक) तय करने पर भी चर्चा हुई। विभिन्न संस्थाओं के बीच हुए इस तकनीकी संवाद और अनुभव साझाकरण ने भविष्य में सार्वजनिक शिक्षा को और अधिक मानबीय, सुदृढ़ और प्रासंगिक बनाने की दिशा में सहयोग के नए रास्ते खोले हैं।