Eklavya Foundation

Eklavya Foundation Eklavya is a non-profit, non-government organisation that develops and field tests innovative educational programmes.

TeMIL आवासीय कार्यशाला: साझा सीख, डिजिटल नागरिकता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहलTeMIL के सहयोग से...
31/08/2026

TeMIL आवासीय कार्यशाला: साझा सीख, डिजिटल नागरिकता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल
TeMIL के सहयोग से खुलताबाद, छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र) में LESS परियोजना के अंतर्गत पाँचों लोकेशनों, धारणी, खुलताबाद, केसला, बीजाडांडी और शाहपुर के टीम सदस्यों की एक आवासीय कार्यशाला आयोजित की गई। दीपक भाई एवं शिवानी दीदी के संयोजन में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में संचालित कार्यों की साझा समीक्षा, कार्य की एकरूपता सुनिश्चित करना तथा अनुभवों के आदान-प्रदान के माध्यम से कार्यक्रम की गुणवत्ता को सुदृढ़ करना था।

कार्यशाला की शुरुआत सभी लोकेशनों पर संचालित TeMIL कार्यक्रम की समीक्षा से हुई। पिछले दो वर्षों के अनुभवों, चुनौतियों और सीख पर सामूहिक चिंतन करते हुए प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को अधिक प्रभावी, संदर्भानुकूल और दीर्घकालिक बनाने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया। साथ ही, विभिन्न लोकेशनों के बीच बेहतर समन्वय, साझा सीख और सतत सहयोग को मजबूत करने के लिए एक साझा मंच विकसित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों में डिजिटल सिटिजनशिप (Digital Citizenship) की अवधारणा की गहन समझ विकसित करना था, ताकि वे डिजिटल तकनीक के सुरक्षित, जिम्मेदार, नैतिक और रचनात्मक उपयोग से जुड़े विभिन्न आयामों को अपने शैक्षिक कार्यों में समाहित कर सकें। साथ ही, आगामी एक्शन रिसर्च की योजनाओं में डिजिटल सिटिजनशिप के सिद्धांतों और व्यवहारिक पहलुओं को स्थानीय संदर्भों के अनुरूप प्रभावी ढंग से शामिल करने की साझा तैयारी भी इस कार्यशाला का महत्वपूर्ण उद्देश्य रही।
कार्यशाला में करिकुलम मैपिंग पर विशेष रूप से कार्य किया गया, जिसमें अंकगणित से बीजगणित तक सीखने की निरंतरता को बच्चों के सीखने के स्तर से जोड़ने पर चर्चा हुई। अंग्रेजी भाषा सत्र में The Village with Five Poles मॉड्यूल के माध्यम से कहानी आधारित शिक्षण, सामूहिक लेखन और प्रस्तुतीकरण जैसी गतिविधियों का अभ्यास किया गया। इन गतिविधियों ने प्रतिभागियों में भाषा विकास, कल्पनाशीलता, विश्लेषण, अनुमान लगाने तथा अनुभवों को सीखने से जोड़ने जैसी महत्वपूर्ण दक्षताओं को समझने का अवसर प्रदान किया।

कार्यशाला के दौरान आश्रम शाला, ब्राम्हनी के शिक्षक प्रशांत मोरे के साथ आयोजित संवाद ने विद्यालयी शिक्षा की वास्तविक चुनौतियों और संभावित समाधानों पर सार्थक चर्चा का अवसर दिया।

अरविंद गुप्ता: एचएसटीपी की विरासत का सृजनात्मक विस्तारहोशंगाबाद विज्ञान शिक्षण कार्यक्रम (HSTP) वर्ष 1972 में एक ऐसे शैक...
30/08/2026

अरविंद गुप्ता: एचएसटीपी की विरासत का सृजनात्मक विस्तार
होशंगाबाद विज्ञान शिक्षण कार्यक्रम (HSTP) वर्ष 1972 में एक ऐसे शैक्षिक आंदोलन के रूप में शुरू हुआ, जिसने रटकर सीखने की परंपरा के स्थान पर खोज, प्रयोग, अवलोकन और स्थानीय परिवेश से सीखने को विज्ञान शिक्षा का आधार बनाया। वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और शिक्षकों के इस साझा प्रयास ने यह विश्वास स्थापित किया कि बच्चे विज्ञान को सबसे अच्छी तरह अपने हाथों से प्रयोग करते हुए सीखते हैं।

इसी विचारधारा को अरविंद गुप्ता जी ने नए आयाम दिए। एकलव्य के शुरुआती साथियों में रहे अरविंद गुप्ता ने रोज़मर्रा और कबाड़ की सामग्री से सैकड़ों विज्ञान खिलौने और गतिविधियाँ विकसित कर Hands-on Learning को हर बच्चे तक पहुँचाने का कार्य किया। उनका प्रयास एचएसटीपी की उसी वैज्ञानिक, लोकतांत्रिक और सहभागितापूर्ण शिक्षा दृष्टि का विस्तार है, जिसमें जिज्ञासा, रचनात्मकता और सीखने का आनंद केंद्र में हैं। प्रस्तुत चार वीडियो एकलव्य के 40 वर्ष और एचएसटीपी के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित व्याख्यान श्रृंखला का हिस्सा हैं।

ये व्याख्यान उस समृद्ध शैक्षिक विरासत को याद करने के साथ-साथ आज के समय में उसके महत्व और प्रासंगिकता को भी रेखांकित करते हैं। इनके माध्यम से शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक सरल संसाधनों के साथ विज्ञान को अनुभवात्मक, रोचक और सार्थक बना सकते हैं। अरविंद गुप्ता जी के विज्ञान खिलौनों और गतिविधियों का विस्तृत संग्रह www.arvindguptatoys.com पर उपलब्ध है।

मेलघाट जैसे बहुभाषीय सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ में भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि सीखने, सोचने और ज्ञान के ...
29/08/2026

मेलघाट जैसे बहुभाषीय सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ में भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि सीखने, सोचने और ज्ञान के निर्माण का महत्वपूर्ण आधार है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) तथा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) भी मातृभाषा-आधारित शिक्षा, बहुभाषिकता और बच्चों की भाषाई विविधता को सीखने की प्रक्रिया का अभिन्न अंग मानती हैं। इसी दृष्टिकोण को व्यवहार में उतारते हुए शिक्षा प्रोत्साहन केंद्रों (SPKs) की 18 जून 2026 की पाक्षिक बैठक में भाषा सत्र का आयोजन किया गया।

बैठक में संचालकों को समूह आधारित गतिविधि के अंतर्गत कहानी को कविता में रूपांतरित करने का कार्य दिया गया। इस गतिविधि का उद्देश्य केवल रचनात्मक लेखन नहीं था, बल्कि भाषाई अंतरण (Language Transfer), अनुवाद कौशल (Translation Skills), बहुभाषिक दक्षता (Multilingual Competency) और सृजनात्मक अभिव्यक्ति को विकसित करना भी था।

दो समूहों ने उल्लेखनीय कार्य प्रस्तुत किया। एक समूह ने "मेरी जोया चले गई" कहानी को अपनी स्थानीय भाषा में कविता के रूप में रूपांतरित किया, जबकि दूसरे समूह ने "नीलोफर की मुस्कान" पर आधारित एक हिंदी कविता तैयार की। इस प्रक्रिया में प्रतिभागियों ने स्थानीय भाषाई अनुभवों को बच्चों के सीखने के संदर्भ से जोड़ते हुए सामग्री को अधिक अर्थपूर्ण और सुलभ बनाने का प्रयास किया।

यह अभ्यास इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक संदर्भों को शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में शामिल करने से बच्चों के लिए सीखने का वातावरण अधिक समावेशी, सहभागितापूर्ण और संदर्भानुकूल बनता है। साथ ही, यह संचालकों के क्षमता निर्माण, शिक्षण सामग्री के स्थानीयकरण (Contextualization) और सीखने के नवाचारों को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मेलघाट जैसे बहुभाषीय क्षेत्रों में ऐसी पहलें यह विश्वास मजबूत करती हैं कि बच्चों की मातृभाषा और स्थानीय अनुभवों को सम्मान देकर ही गुणवत्तापूर्ण, समानतामूलक और लोकतांत्रिक शिक्षा का निर्माण संभव है। यही दृष्टि एकलव्य की सामुदायिक शिक्षा और बच्चों के सीखने के अधिकार के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी सशक्त बनाती है।

साझेदारी आधारित क्षमता निर्माण एकलव्य धारणी और सदया फाउंडेशन की साझा सीख✨️ जून 2026 में एकलव्य फाउंडेशन धारणी, महाराष्ट्...
28/08/2026

साझेदारी आधारित क्षमता निर्माण एकलव्य धारणी और सदया फाउंडेशन की साझा सीख✨️
जून 2026 में एकलव्य फाउंडेशन धारणी, महाराष्ट्र ने साझेदारी आधारित क्षमता निर्माण (Capacity Building) और अंतर-संस्थागत सीख (Cross-learning) को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की। इस क्रम में सदया फाउंडेशन, तरुबांदा द्वारा आयोजित दस दिवसीय आवासीय कार्यशाला में एकलव्य भाषा शिक्षण सत्रों में सहभागी बना। कार्यशाला में प्रारंभिक साक्षरता (Early Literacy), गतिविधि-आधारित शिक्षण, बाल-केंद्रित अधिगम, सीखने के आकलन तथा सहभागितापूर्ण शिक्षण रणनीतियों पर व्यावहारिक अभ्यास किया गया। इस प्रक्रिया ने स्थानीय संदर्भों में नवाचारी शिक्षण पद्धतियों के उपयोग और शैक्षिक गुणवत्ता को सुदृढ़ करने की दिशा में नई समझ विकसित की।

12 जून 2026 को सदया फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मास्टर ट्रेनर एवं टीम सदस्यों ने एकलव्य द्वारा संचालित मांडवा, बिजुधावड़ी, नंदगांव और टेंबली स्थित शिक्षा प्रोत्साहन केंद्रों (SPKs) का एक्सपोज़र विज़िट किया। इस दौरान उन्होंने केंद्रों की शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं, सामुदायिक सहभागिता, सीखने के वातावरण तथा बच्चों की सक्रिय भागीदारी को निकट से समझा। यह भ्रमण दोनों संस्थाओं के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान (Knowledge Exchange) और साझा सीख (Peer Learning) का प्रभावी अवसर बना।
13 जून को एकलव्य की ओर से युवा साथी सुश्री शिखा और प्रवीण जी ने स्रोत व्यक्ति के रूप में कार्यशाला का संचालन किया। कार्यशाला में भाषा एवं गणित शिक्षण में उपयोग होने वाली शिक्षण-अधिगम सामग्री (Teaching Learning Materials - TLMs), गतिविधि-आधारित शिक्षण, अवधारणात्मक अधिगम (Conceptual Learning) तथा बच्चों की सक्रिय सहभागिता बढ़ाने की रणनीतियों पर संवाद और अभ्यास कराया गया। प्रतिभागियों ने स्थानीय संसाधनों के उपयोग से प्रभावी सीखने के अनुभव विकसित करने के व्यावहारिक तरीकों को भी समझा।

यह पहल दर्शाती है कि सतत व्यावसायिक विकास (Continuous Professional Development), संस्थागत साझेदारी, सामुदायिक सहभागिता और अनुभव-आधारित सीख, गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा की आधारशिला हैं। ऐसे सहयोगात्मक प्रयास स्थानीय शैक्षिक प्रणालियों को मजबूत करने के साथ-साथ बच्चों के लिए अधिक प्रभावी, संदर्भानुकूल और आनंददायक सीखने के वातावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Gender in Classroom' Course brochure and application form are out now!The course is designed for teachers, educators, pr...
28/08/2026

Gender in Classroom' Course brochure and application form are out now!

The course is designed for teachers, educators, practitioners, and anyone interested in building a deeper understanding of gender and reimagining more inclusive educational spaces.

It is an attempt to create a participatory learning space where dialogue, reflection, and collective inquiry are at the heart of the process. It draws on literature, films, theatre, stories, art, creative writing, play, read-alouds, and other experiential methods that encourage participants to engage with ideas in ways that feel meaningful to them.

Form link: https://forms.gle/AmyknXLbjXmCzJr6A
Brochure link: https://drive.google.com/file/d/1N3e9dqHtfflhaUjtqfGcNVSiNGzJnRTk/view?usp=sharing

Last day to apply 2nd September!

प्रो. ज्योति दलाल का एकलव्य शाहपुर भ्रमण संवाद, आत्मचिंतन और समानतामूलक समाज की दिशा में सीख✨️ 7 जुलाई 2026 को प्रो. ज्य...
27/08/2026

प्रो. ज्योति दलाल का एकलव्य शाहपुर भ्रमण संवाद, आत्मचिंतन और समानतामूलक समाज की दिशा में सीख✨️

7 जुलाई 2026 को प्रो. ज्योति दलाल, प्रोफेसर, इंस्टीट्यूट ऑफ होम इकोनॉमिक्स, दिल्ली विश्वविद्यालय एवं Comparative Education Society of India (CESI) की उपाध्यक्ष, ने एकलव्य शाहपुर के फील्ड क्षेत्रों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने शिक्षा प्रोत्साहन केंद्र (SPK) नवरंगढाना एवं सोनादेह तथा TeMIL CRPi केंद्र, चिरमाटेकरी का अवलोकन किया। पालक बैठकों में समुदाय, अभिभावकों और केंद्र संचालकों के साथ संवाद करते हुए उन्होंने कार्यक्रम की कार्यप्रणाली, सामुदायिक सहभागिता और स्थानीय संदर्भों में विकसित सीखने के वातावरण को समझा।

भ्रमण के दौरान आयोजित टीम बैठक में प्रो. दलाल ने उच्च शिक्षा, शोध और अकादमिक लेखन पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने Comparative Education Society of India (CESI) के 16वें वार्षिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शोध-पत्र प्रस्तुत करने के लिए एकलव्य के साथियों को प्रेरित किया तथा प्रभावी शैक्षणिक लेखन, शोध प्रक्रिया और उच्च शिक्षा के अवसरों पर उपयोगी मार्गदर्शन दिया। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय एवं उससे संबद्ध महाविद्यालयों में प्रवेश, छात्रवृत्ति और आगे की शैक्षणिक संभावनाओं की जानकारी भी साझा की।

इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा फिल्म "थप्पड़" की स्क्रीनिंग के बाद आयोजित संवाद सत्र रहा, जिसमें प्रो. दलाल ने पहचान (Identity), सहमति (Consent), महिलाओं की पहचान, पितृसत्ता और समानतापूर्ण संबंधों जैसे विषयों पर चर्चा का संचालन किया। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और इस बात पर विचार किया कि परस्पर सम्मान, सहमति और "ना" कहने का अधिकार किसी भी स्वस्थ संबंध की आधारशिला है।
चर्चा में यह भी उभरकर आया कि पितृसत्तात्मक सोच केवल महिलाओं को ही नहीं, बल्कि पुरुषों को भी कठोर सामाजिक भूमिकाओं में बाँध देती है और उनकी भावनात्मक अभिव्यक्ति को सीमित करती है।
इसके बाद प्रतिभागियों ने इमैनुएल कांट, मिशेल फूको, फ़्योदोर दोस्तोयेव्स्की और रवीन्द्रनाथ ठाकुर के विचारों पर आधारित चिंतन सत्र में भाग लिया। स्वतंत्र चिंतन, व्यक्तिगत उत्तरदायित्व, सामाजिक संरचनाओं की समीक्षा और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में व्यक्ति की भूमिका जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। LESS परियोजना के 47 प्रतिभागियों के लिए यह सत्र आत्मचिंतन, वैचारिक संवाद और सामाजिक संवेदनशीलता को विकसित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हुआ।

सरकारी विद्यालयों का बंद होना सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था के समक्ष उभरती चुनौतियाँ !लोकमत टाइम्स में प्रकाशित वरिष्ठ पत्रक...
26/08/2026

सरकारी विद्यालयों का बंद होना सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था के समक्ष उभरती चुनौतियाँ !
लोकमत टाइम्स में प्रकाशित वरिष्ठ पत्रकार अभिलाष खांडेकर का यह विचार लेख भारत में सरकारी विद्यालयों की घटती संख्या और सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था के समक्ष उभरती चुनौतियों पर गंभीर विमर्श प्रस्तुत करता है। लेखक का तर्क है कि पिछले एक दशक में सरकारी विद्यालयों के बंद होने और उनमें नामांकन में आई गिरावट को केवल प्रशासनिक या जनसंख्या संबंधी परिवर्तन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे शिक्षा की समानता, पहुँच और गुणवत्ता से जुड़े व्यापक प्रश्नों के संदर्भ में समझने की आवश्यकता है।

लेख में इस बात पर बल दिया गया है कि सरकारी विद्यालय लंबे समय तक सामाजिक गतिशीलता, समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के महत्वपूर्ण माध्यम रहे हैं। इसके विपरीत, निजी विद्यालयों का बढ़ता विस्तार शिक्षा के क्रमिक निजीकरण की ओर संकेत करता है, जिसके सामाजिक और शैक्षिक प्रभावों पर गंभीर विचार अपेक्षित है। लेखक शिक्षकों की कमी, घटते सार्वजनिक निवेश और विद्यालयी अवसंरचना से जुड़ी चुनौतियों का भी उल्लेख करते हैं तथा इन मुद्दों को शिक्षा की गुणवत्ता से जोड़कर देखते हैं।

लेख का निष्कर्ष है कि सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ किए बिना समावेशी और न्यायपूर्ण समाज की कल्पना संभव नहीं है। विद्यालयों के बंद होने के कारणों का गहन विश्लेषण, पर्याप्त सार्वजनिक निवेश, शिक्षक उपलब्धता तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं को सुनिश्चित करना शिक्षा नीति की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए। यह लेख सार्वजनिक शिक्षा के भविष्य पर गंभीर और सार्थक संवाद की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
भारत की सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था के सामने उभरती चुनौतियों पर एकलव्य की युवा साथी एवं सक्रिय शिक्षा कार्यकर्ता सुश्री सुमय्या जी का यह Reflection Note प्रस्तुत है। Lokmat Times में प्रकाशित एक विचार लेख से प्रेरित यह चिंतन सरकारी विद्यालयों, प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा और समान एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रश्नों पर गंभीर संवाद की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

Eklavya at Azim Premji University Strengthening Early Childhood Education through Dialogue and Collaboration✨️ 15–17 Jul...
25/08/2026

Eklavya at Azim Premji University Strengthening Early Childhood Education through Dialogue and Collaboration✨️
15–17 July 2026 | Azim Premji University, Bengaluru
Eklavya Foundation participated in the Field Internship Consultative Workshop
organised by the School of Education, Azim Premji University, bringing together
15 organisations working in the areas of Early Childhood Care and Education
(ECCE) and Foundational Learning. The workshop provided a valuable platform
for sharing field experiences, reflecting on diverse pedagogical approaches, and
strengthening partnerships committed to improving the quality of early
childhood education.

Representing Eklavya, Sumayya Farvi shared the organisation's work on
strengthening Anganwadis through play-based learning, learning corners,
multilingual education, and community engagement.

The discussions highlighted the importance of contextualised learning
environments, children's active participation, and collaborative efforts between
educators, communities, and institutions in creating meaningful learning
experiences.

A key component of the workshop focused on Azim Premji University's Field
Internship Programme, outlining its objectives, internship process, and
expectations from partner organisations. Scheduled from October to December
2026, the ten-week internship programme is expected to deepen engagement
between academic institutions and field organisations, creating opportunities for
mutual learning and capacity building.
The consultation also offered opportunities to reconnect with faculty members,
interact with practitioners and students, and exchange experiences with
organisations from different parts of the country. These conversations generated
new perspectives on strengthening ECCE practices and reinforced the value of
sustained collaboration across the education sector.

The workshop reaffirmed Eklavya's commitment to community-based education,
democratic learning, and children's right to quality early childhood education. The
insights and partnerships developed during the consultation will contribute to
strengthening Eklavya's ongoing ECCE initiatives and fostering more inclusive,
context-responsive, and meaningful learning opportunities for young children and
their communities.

LESS परियोजना के अंतर्गत शिक्षा प्रोत्साहन केंद्र (SPK) संचालकों के लिए आवासीय प्रशिक्षण कार्यशालाएँ संपन्न जून–जुलाई 20...
24/08/2026

LESS परियोजना के अंतर्गत शिक्षा प्रोत्साहन केंद्र (SPK) संचालकों के लिए आवासीय प्रशिक्षण कार्यशालाएँ संपन्न जून–जुलाई 2026 | एकलव्य परिसर, नर्मदापुरम
कलव्य फाउंडेशन द्वारा LESS (Learning Enhancement and Support for Schools) परियोजना के अंतर्गत, ओरेकल के सहयोग से संचालित शिक्षा प्रोत्साहन केंद्र (SPK) के संचालकों के लिए नर्मदापुरम स्थित एकलव्य परिसर में तीन चरणों में पाँच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। 4 जून से 3 जुलाई 2026 के बीच आयोजित इन कार्यशालाओं में मध्यप्रदेश के शाहपुर, केसला और बीजाडांडी तथा महाराष्ट्र के धारणी और खुलताबाद से कुल 143 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।

कार्यशालाओं का उद्देश्य संचालकों की विषयगत समझ और शिक्षण कौशल को सुदृढ़ करना, बच्चों के लिए आनंददायक, अनुभव-आधारित और समावेशी सीखने का वातावरण विकसित करना तथा शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए उनकी क्षमता का विकास करना था। एकलव्य के सामुदायिक शिक्षा, लोकतांत्रिक सीखने, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और बच्चों के सीखने के अधिकार जैसे मूल्यों को केंद्र में रखते हुए प्रशिक्षण की रूपरेखा तैयार की गई।
भाषा सत्रों में कहानी, कविता, चित्र-आधारित संवाद, रचनात्मक लेखन तथा ERAC (Experience-Reflection-Application-Consolidation) एवं Foundational Literacy and Numeracy (FLN) आधारित शिक्षण रणनीतियों पर अभ्यास किया गया। प्रतिभागियों ने बच्चों में भाषा विकास, पढ़ने, लिखने, अभिव्यक्ति और समझ विकसित करने के विविध व्यावहारिक तरीकों पर कार्य किया।

गणित सत्रों में Cognitively Guided Instruction (CGI) दृष्टिकोण के माध्यम से बच्चों की गणितीय सोच को समझने तथा गतिविधि-आधारित तरीकों से भिन्न (Fractions) जैसी अवधारणाओं के शिक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया। अंग्रेज़ी सत्रों में कहानी, गीत, खेल और समूह गतिविधियों के माध्यम से भयमुक्त एवं सहभागितापूर्ण भाषा शिक्षण की रणनीतियों पर अभ्यास कराया गया।

इसके साथ ही बाल संरक्षण, POCSO Act तथा एकलव्य की CASH (Committee Against Sexual Harassment) समिति पर आयोजित सत्रों ने सुरक्षित, संवेदनशील और लैंगिक समानता पर आधारित शिक्षण वातावरण के महत्व को रेखांकित किया।
ओरिगामी सत्रों ने यह रेखांकित किया कि स्थानीय एवं सरल संसाधनों के माध्यम से भी प्रभावी शिक्षण-अधिगम अनुभव निर्मित किए जा सकते हैं। प्रतिभागियों ने ओरिगामी को भाषा और गणित की अवधारणाओं से जोड़कर बच्चों की सक्रिय सहभागिता बढ़ाने के व्यावहारिक तरीके सीखे।
कार्यशाला के अंतिम चरण में अस्सी, मर्दानी 3, धड़क 2 और A Thursday जैसी फिल्मों की स्क्रीनिंग एवं संवाद सत्र आयोजित किए गए। इन चर्चाओं ने प्रतिभागियों को बाल अधिकार, लैंगिक समानता, संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और व्यक्तिगत उत्तरदायित्व जैसे विषयों पर गंभीर चिंतन का अवसर प्रदान किया।

Address

Jamnalal Bajaj Parisar, Near Fortune Kasturi, Jatkhedi
Bhopal
462016

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Monday 10:30am - 6:30pm
Tuesday 10:30am - 6:30pm
Wednesday 10:30am - 6:30pm
Thursday 10:30am - 6:30pm
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