29/03/2024
जीवन एक अद्वितीय यात्रा है, जिसमें हर व्यक्ति को विभिन्न चरणों से गुजरना पड़ता है। पहला चक्र है बचपन, जब हम खेलते हैं, पढ़ते हैं, लड़ते हैं और सीखते हैं। इस समय में हमारे विचार सरल होते हैं और हम जीवन के हर पल का आनंद लेते हैं।
दूसरा चक्र है युवावस्था, जब हम सीखते हैं, लड़ते हैं और जीवन के अनुभवों से बढ़ते हैं। इस अवधि में उन्हीं परिस्थिति में हमारे विचार और धारणाएं बदलती हैं।
तीसरा चक्र है वृद्धावस्था, जब हम अपने अनुभवों से समझदारी और संतोष से जीवन का आनंद लेते हैं। हम समझते हैं कि सभी समस्याओं का समाधान होता है और हमें धैर्य की आवश्यकता होती है ताकि हम सभी परिस्थितियों का सामना कर सकें।
इन सभी स्थितियों में, हमारे विचार अलग-अलग होते हैं, लेकिन एक ही संदर्भ में हमें अक्सर पुनरावृत्ति का सामना करना पड़ता है। उदाहरण के रूप में, अगर आप बचपन में अपने भाई-बहनों के साथ खिलौनों के लिए जबरदस्त तरीके से लड़ते थे, तो वयस्क होने पर आपकी भावनाएं बदल जाती हैं और आप अपने बच्चों को उनके खिलौनों के लिए लड़ते हुए देखते हैं तो आप उन्हें समझाने की कोशिश करते साथ ही उनके बालपन का आनंद लेने की कोशिश करते है क्योंकि वही समय आपका अपने जीवन यापन को सुचारू रूप से चलते रहने के लिए कार्य करना आवश्यक होता है और इस पल अपना बचपन भी याद करते है। परन्तु इस समय आपके विचारों में अंतर होता है। परन्तु आप अपनी व्यस्तता के चलते उनके बचपन का उतना अधिक आनंद नहीं ले पाते और समय के साथ जब आप बुजुर्ग होते हैं, तो आप अपने पोतों के बाल गतिविधि का लुफ्त ले पाते हैं उनकी लड़ाई भी आपके चेहरे पर मुस्कान लाती है और अपने बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार चिंतित और तनावग्रस्त देखते हैं, लेकिन आप उनके अनुभवों से अधिक समझदार होते हुए अंतर को महसूस करते हैं। आप अब समझते हैं कि समस्याओं को स्थायी नहीं मानना चाहिए, क्योंकि कुछ भी स्थायी नहीं होता है, और इसलिए हमें सभी संदर्भों का सामना धैर्य से करना चाहिए। PLEASE CLICK ON THE LINK
जीवन एक अद्वितीय यात्रा है, जिसमें हर व्यक्ति को विभिन्न चरणों से गुजरना पड़ता है। पहला चक्र है बचपन, जब हम खेलते है...