Katiya Welfare Society

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08/08/2026

मंडला-डिंडौरी पत्रिका प्राइम में बड़ी खबर | चित्रकार पीएल डोंगरे आज भी सहेज रहे हैं आदिवासी संस्कृति की विरासत | Patrika Jabalpur 07 Aug 2026

गर्व का क्षण! 🙏🎨

आज दिनांक 07 अगस्त 2026, शुक्रवार को दैनिक मंडला-डिंडौरी पत्रिका (प्राइम) ने मेरी चित्रकला यात्रा को प्रमुखता से प्रकाशित किया।

हेडलाइन है - "चित्रकला के माध्यम से जनजातीय जीवन, परंपराओं और पूर्वजों के संस्कारों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया, युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत - चित्रकार पीएल डोंगरे आज भी सहेज रहे आदिवासी संस्कृति की विरासत"

आदिवासी जीवन के रंगों, गोंड चित्रकला, और हमारे पूर्वजों की परंपराओं को कागज पर उतारने का मेरा छोटा सा प्रयास है। पत्रिका परिवार का हृदय से आभार जिन्होंने मेरी कला को सम्मान दिया।

यह सम्मान सिर्फ मेरा नहीं, हमारे पूरे आदिवासी समाज और मंडला-डिंडौरी की संस्कृति का है।

पूरा लेख पढ़ें और अपना आशीर्वाद बनाए रखें।

धन्यवाद - चित्रकार पीएल डोंगरे


31/07/2026

🌿 श्रद्धांजलि एवं पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणादायी संकल्प 🌿
स्वर्गीय श्री राकेश ग्वालवंशी जी की तेरहवीं के अवसर पर अखिल भारतीय कतिया समाज महासंघ के राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने उनके निवास पर उपस्थित होकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि एवं पुष्पांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर दिवंगत आत्मा की पुण्य स्मृति को चिरस्थायी बनाने हेतु उनके नाम से शमी का एक पौधा श्रद्धांजलि स्वरूप परिवार को भेंट किया गया। सभी उपस्थितजनों ने इस पौधे का संरक्षण एवं संवर्धन करने का संकल्प लिया।
महासंघ का मानना है कि "किसी दिवंगत आत्मा की स्मृति में वृक्षारोपण सबसे श्रेष्ठ श्रद्धांजलि है।" इससे दिवंगत के प्रति सम्मान व्यक्त होने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी समाज तक पहुँचता है।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः। 🌿

10/07/2026

नागपुर–शहडोल एक्सप्रेस (11201/11202) का नाम "संत शिरोमणि भूरा भगत एक्सप्रेस" रखने की मांग | नितिन गडकरी का समर्थन | अखिल भारतीय कतिया समाज महासंघ

नागपुर–शहडोल एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 11201/11202) का नाम "संत शिरोमणि भूरा भगत एक्सप्रेस" रखने की मांग को लेकर अखिल भारतीय कतिया समाज महासंघ द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने रेल राज्य मंत्री वी. सोमान्ना को पत्र लिखकर आवश्यक दिशा-निर्देशों एवं सत्यापन के अनुसार कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। जानिए इस पहल का उद्देश्य, समाज की भावना और इस ऐतिहासिक मांग से जुड़ी पूरी जानकारी।

29/06/2026

संत शिरोमणि भूरा भगत एक्सप्रेस: नागपुर–शहडोल एक्सप्रेस का नाम संत शिरोमणि भूरा भगत जी के नाम पर रखने की ऐतिहासिक मांग 📄

🚆 अखिल भारतीय कतिया समाज महासंघ (भारत) द्वारा भारत सरकार से नागपुर–शहडोल एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 11201/11202) का नाम "संत शिरोमणि भूरा भगत एक्सप्रेस" किए जाने की मांग की गई है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष एच.एस. महले "राजकुमार" के नेतृत्व में यह ज्ञापन केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री तथा नागपुर सांसद माननीय श्री नितिन गडकरी जी के माध्यम से रेल मंत्री माननीय श्री अश्विनी वैष्णव जी को प्रेषित किया गया।

संत शिरोमणि भूरा भगत जी कतिया समाज के आराध्य संत हैं। मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ सहित अनेक राज्यों में करोड़ों श्रद्धालुओं की उनके प्रति गहरी आस्था है। नागपुर–शहडोल रेलमार्ग पर प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं समाजजन यात्रा करते हैं। इसलिए इस ट्रेन का नाम "संत शिरोमणि भूरा भगत एक्सप्रेस" रखा जाना जनभावनाओं का सम्मान होगा।

महासंघ को पूर्ण विश्वास है कि माननीय प्रधानमंत्री एवं रेल मंत्रालय इस ऐतिहासिक मांग पर सकारात्मक निर्णय लेकर समाज की वर्षों पुरानी भावना का सम्मान करेंगे।

🙏 आप सभी समाजबंधुओं से अनुरोध है कि इस जनहित एवं समाजहित की मांग को अधिक से अधिक शेयर करें और अपना समर्थन दें। 📰

28/06/2026

🙏 सामाजिक एकता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति | एक छत – एक जाजम – एक समाज | सकल कतिया समाज

🌺 "एकता में ही समाज की वास्तविक शक्ति निहित है।"
जब पूरा समाज एक छत के नीचे, एक जाजम पर बैठकर सर्वसम्मति से निर्णय लेता है, तभी समाज का विकास, सम्मान और उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित होता है।
सकल कतिया समाज के सभी वरिष्ठजन, पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवियों द्वारा वर्षों से सामाजिक एकता का संदेश दिया जा रहा है। अब समय आ गया है कि हम मतभेद भुलाकर समन्वय, सहयोग और सद्भाव के साथ आगे बढ़ें।
✨ आइए संकल्प लें— ✔️ एक राष्ट्र ✔️ एक समाज ✔️ एक अध्यक्ष ✔️ एक ध्वज ✔️ एकजुट समाज
संत शिरोमणि श्री भूरा भगत महाराज जी एवं ईश्वर से प्रार्थना है कि हम सभी को सद्बुद्धि प्रदान करें और सामाजिक एकता का स्वर्णिम युग शीघ्र स्थापित हो।
🙏 सामाजिक एकता – समाज की प्रगति, सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है।

#सामाजिकएकता #सकलकतियासमाज #कतियासमाज #एकसमाजएकजाजम #एकताहीशक्ति #भूराभगतमहाराज #समाजहित #समाजसेवा #सामाजिकजागरूकता #समन्वय #सद्भाव #एकराष्ट्रएकसमाज

15/06/2026

📢 समाज में बढ़ती देर से शादियाँ: क्या हम सही समय पर सही निर्णय ले रहे हैं? | युवाओं और माता-पिता के लिए महत्वपूर्ण संदेश
Description:
आज के समाज की एक कड़वी लेकिन वास्तविक तस्वीर सामने आ रही है। बेहतर रिश्ते, ऊँची अपेक्षाएँ, सरकारी नौकरी की चाह और "परफेक्ट" जीवनसाथी की तलाश में कई युवक-युवतियाँ शादी की सही उम्र पार कर रहे हैं। परिणामस्वरूप मानसिक तनाव, पारिवारिक चिंता और सामाजिक समस्याएँ बढ़ रही हैं।
यह संदेश किसी एक व्यक्ति या समाज के लिए नहीं, बल्कि हम सभी के लिए एक आत्ममंथन है। समय पर लिए गए निर्णय जीवन को सरल और सुखद बना सकते हैं। आइए दहेज, दिखावे और अवास्तविक अपेक्षाओं से ऊपर उठकर अच्छे संस्कार, ईमानदारी और समझदारी को प्राथमिकता दें।
🙏 इस पोस्ट को पढ़ें, सोचें और समाज में सकारात्मक जागरूकता फैलाने के लिए शेयर करें।
#समाज_की_सच्चाई
#शादी_की_सही_उम्र
#विवाह_जागरूकता
#समाजिक_विचार
#युवा_पीढ़ी
#माता_पिता_के_लिए
#रिश्तों_की_अहमियत
#दहेज_मुक्त_समाज
#सामूहिक_विवाह
#जीवनसाथी
#हिंदी_विचार








23/05/2026

यह पुस्तिका सिवनी सब-डिविजन की काठिया क्षत्रिय महासभा (1946) का ऐति...

11/05/2026

*💐 मातृशक्ति वंदन: हृदयतल से आभार एवं कृतज्ञता 💐*

*"घुटनों से रेंगते-रेंगते जब पैरों पर खड़ा हुआ,*
*तेरी ममता की छांव में जाने कब बड़ा हुआ!*
*काला टीका, दूध मलाई, आज भी सब कुछ वैसी है,*
*माँ! सच तो ये है कि तेरे जैसी कोई नहीं, तू ही ईश्वर जैसी है!"*

*।। जय शम्भो, जय मात भवानी ।।*

आज 10 मई, **अन्तर्राष्ट्रीय मातृ दिवस** के अलौकिक अवसर पर *कतिया समाज युवा ब्रिगेड परिवार* द्वारा आयोजित *'मातृशक्ति सम्मान समारोह'* केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, अपितु हमारी जड़ों, हमारी गौरवशाली संस्कृति और साक्षात् ममता की मूरत 'जननी' के चरणों में कृतज्ञता के पुष्प अर्पित करने का एक लघु प्रयास था।

इस पुण्यमयी समारोह की भावपूर्ण शुरुआत **आदरणीय भाई श्री जगदीश धर्मक जी** ने अपनी सुरीली और मर्मस्पर्शी वाणी से की। मातृत्व की महिमा पर उनके गीतों ने कार्यक्रम में वह प्राण फूंके कि संपूर्ण वातावरण माँ की ममतामयी सुगंध से सराबोर हो गया।

_*जब आँखें नम हुई और दिल भर आया...*_

यह आयोजन भावुकता की उन पराकाष्ठाओं का साक्षी बना, जहाँ 'माँ' शब्द का उच्चारण मात्र होते ही वक्ताओं के स्वर रुंध गए और उपस्थित स्वजातीय बंधुओं की आँखें छलक उठीं। माँ की निस्वार्थ तपस्या और बलिदान की कहानियों ने हर हृदय को झकझोर कर रख दिया।

*"खैरियत पूछने वाले तो बहुत मिल जाएंगे दुनिया में,*
**मगर जो आँखों से दर्द पढ़ ले, वो बस माँ होती है।"**

*बाल प्रतिभा और मातृशक्ति का ओज*

कार्यक्रम में उस समय ऊर्जा का अद्भुत संचार हुआ जब **श्री दिनेश एवं श्रीमती मनीषा नाग जी की दो नन्ही सुपुत्रियों** ने अपनी मनमोहक नृत्य प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी मासूमियत ने समाज के उज्ज्वल भविष्य की तस्वीर पेश की।

हमें गर्व है कि तपती दोपहर और चिलचिलाती धूप की परवाह किए बिना हमारी मातृशक्ति—**माननीया शांति बैलवंशी जी, माननीया उषा मुस्ताजर जी, माननीया अर्चना सिसोदिया जी, माननीया सीता आरसे जी, माननीया अनामिका नागेश जी, माननीया मनीषा नाग जी, एवं माननीया अभिलाषा सोनगोतिया जी** ने अपनी उपस्थिति से मंच को कृतार्थ किया।

विशेष रूप से उन माताओं का साहस वंदनीय रहा, जिन्होंने पहली बार मंच संभाला। उनकी शुरुआती झिझक जब 'मातृशक्ति की गूँज' में बदली, तो संपूर्ण परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। सच ही कहा गया है:

**"रुकी तो चांद जैसी थी, चली तो हवाओं जैसी थी..."*ये माँ है जो खुद दुआओं जैसी है*...

**सहयोग के लिए कोटि-कोटि धन्यवाद**

इस आयोजन की सफलता हमारे सामाजिक स्तंभों के मार्गदर्शन के बिना संभव न थी। हम हृदय से आभारी हैं:

* **आदरणीय श्री लखन लाल आम्रवंशी जी** (अध्यक्ष, भूरा भगत धाम)
* **आदरणीय श्री वीरेंद्र गौतम जी** (सचिव, अखिल कतिया समाज महासंघ)
* **श्री दिनेश नाग जी** (जिला अध्यक्ष, जबलपुर)
* **संस्थापक कामेश सूर्यवंशी जी**, **श्री कमलेश कतिया जी**, एवं **एड. प्रतीक पठारिया जी** (अध्यक्ष, कतिया समाज निस्वार्थ सेवा समिति)
* **डॉ. राकेश वागेंद्र जी**, **एड. नितेंद्र नागेश जी**, **अनुज प्रशांत नागेश जी**, **सुनील कतिया जी**, **एड. जितेन्द्र सिंह पठारिया जी**, **अनुज अरविन्द बैलवंशी जी**, और सिवनी से पधारे **श्री अमीरचन्द भारद्वाज जी** *आकाश कतिया* जी, *खुशीराम जी* सहित समस्त स्वजातीय बंधुओं का।

समारोह के समापन पर आभार प्रदर्शन का जो गुरुतर दायित्व मुझ **कुंजबिहारी सोनगोतिया** को सौंपा गया, उसे मैं अपना परम सौभाग्य और जीवन का अनमोल क्षण मानता हूँ।

*"दवा जब काम नहीं आती, तो माँ की नजर उतारना काम आता है,*
**भले ही दुनिया साथ छोड़ दे, पर माँ का आँचल हमेशा साथ निभाता है।"**

पुनः, इस गरिमामयी उपस्थिति के लिए आप सभी का हार्दिक आभार।

**विनीत:**
**कुंजबिहारी सोनगोतिया**
एवं समस्त **कतिया समाज युवा ब्रिगेड परिवार**

25/04/2026

यहाँ कतिया समाज की समृद्ध विरासत और संत श्री भूरा भगत जी की महिमा को समेटती हुई एक कथात्मक प्रस्तुति है:
# 🔱 विरासत की गूँज: कतिया समाज की गौरवगाथा 🔱
यह कहानी केवल ईंट-पत्थरों से बने भवनों की नहीं है, बल्कि यह कहानी है **काठियावाड़ क्षत्रिय (कतिया समाज)** के उस अटूट विश्वास और समर्पण की, जिसने अपनी सामाजिक धरोहरों को मध्य प्रदेश के वनों से लेकर महाराष्ट्र की सीमाओं तक जीवंत रखा है।
# # # अध्याय १: जहाँ से भक्ति की धारा निकली
इस यात्रा की शुरुआत **सांगाखेड़ा** (छिंदवाड़ा) की उस पावन धरा से होती है, जहाँ **संत श्री भूरा भगत** का मूल स्थान आज भी मानवता को प्रेम का संदेश दे रहा है। यहाँ से निकली भक्ति की लहर परासिया रोड के 'भूरा भगत चौक' से होते हुए प्रियदर्शिनी कॉलोनी के उस विशाल ३२०० वर्गफीट में निर्माणाधीन 'कल्याण भवन' तक पहुँचती है, जो समाज की एकता का प्रतीक बनने जा रहा है।
जैसे-जैसे हम छिंदवाड़ा की गहराइयों में उतरते हैं, अमरवाड़ा और हर्रई के **कोटरा** और **बटकाखापा** जैसे गाँवों में संत जी की उपस्थिति हर मंदिर और बाज़ार चौक में महसूस होती है।
# # # अध्याय २: वैनगंगा की लहरों और सिवनी की माटी में
सफर आगे बढ़ता है **सिवनी** की ओर, जहाँ वैनगंगा का उद्गम स्थल (मुंडारा) अपनी पवित्रता बिखेरता है। यहाँ के **परतापुर रजोला** में संत जी का मंदिर शांति का केंद्र है। सिवनी की गलियों में कहीं **द्वारका नगर** में २६०० वर्गफीट का भवन आकार ले रहा है, तो कहीं **घंसौर** के तालाब मोहल्ले में २४०० वर्गफीट का 'मंगल भवन' समाज के उत्सवों की गवाही दे रहा है।
छीतापार और रुपदौन की भूमि पर भी आज निर्माण की पदचाप सुनाई दे रही है, जहाँ पंचायत द्वारा दी गई भूमि पर भक्ति के नए शिखर तैयार हो रहे हैं।
# # # अध्याय ३: नर्मदा के तट से संस्कारधानी तक
नर्मदा के किनारे **जबलपुर (ग्वारीघाट)** में, रेलवे पंप हाउस के पास एक एकड़ में फैला 'संत श्री भूरा भगत धाम' न केवल एक ट्रस्ट है, बल्कि ललपुर की पुरानी बस्ती के लिए एक वरदान है। ग्वारीघाट तीर्थक्षेत्र का प्रवेश द्वार तो स्वयं संत जी के नाम का **'रेत नाका चौक'** ही है।
यही धारा आगे बढ़कर **नर्मदापुरम** पहुँचती है। **पिपरिया** के आदर्श कॉलोनी का निर्मित भवन हो या **पचमढ़ी** की ऐतिहासिक 'प्यारेलाल कतिया धर्मशाला', यह समाज की सेवा का प्रमाण हैं। यहाँ साडिया घाट पर माँ रेवा के तट पर १ एकड़ से अधिक भूमि भविष्य के बड़े संकल्पों की प्रतीक्षा कर रही है।
# # # अध्याय ४: शौर्य और दान की गाथा (बालाघाट और बैतूल)
**बालाघाट** की धरती पर कदम रखते ही वारासिवनी, लालबर्रा और बालाघाट मुख्य शहर के 'संत भूरा भगत चौक' और वहाँ स्थापित मूर्तियाँ समाज के गौरव को दर्शाती हैं। **अमेड़ा** और **भंडारपुर** जैसे गाँवों में मंदिर और भवन समाज की एकजुटता की कहानी कहते हैं।
परंतु, इस समाज की असली शक्ति इसके लोग हैं। **बैतूल (घोड़ाडोंगरी)** में जब भोरवंशी परिवार के पुत्रों ने अपने पिता स्व. श्री हरलाल भोरवंशी की स्मृति में १८०० वर्गफीट का कीमती भूखंड दान किया, तो समाज की नींव और मजबूत हो गई। वहीं, **नरसिंहपुर** के चीचली में **शहीद गौरादेवी** की समाधि हमें याद दिलाती है कि यह समाज केवल धर्म ही नहीं, बल्कि स्वतंत्रता के संग्राम में भी अग्रणी रहा है।
# # # अध्याय ५: सीमाओं के पार: छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र
कतिया समाज की यह विरासत सीमाओं में नहीं बंधी। **छत्तीसगढ़** के राजनांदगांव के **मगरकुंड** से लेकर **बिलासपुर** के 'कतिया पारा मार्ग' और **लोखंडी** के निर्माणाधीन भवनों तक यह गूंज सुनाई देती है।
वहीं **महाराष्ट्र** के **नागपुर (रामनगर चौक)** और **अमरावती (वरुड)** में भी संत श्री भूरा भगत जी के मंदिर और धाम मराठी माटी में कतिया समाज की खुशबू बिखेर रहे हैं।
# # # 🔱 गौरव के कुछ अनमोल मोती:
* **मंडला:** महाराजपुर के संगम घाट पर कुशलता से संचालित सामाजिक भवन।
* **खंडवा:** श्री शिव पगारे जी द्वारा दान किए गए भूखंड पर निर्मित पवित्र धाम।
* **त्याग की मिसाल:** श्रीमती सुमंत्रा नाग और श्री विजय कुमार शिव जी जैसे दानदाताओं ने अपनी भूमि समाज के चरणों में समर्पित कर दी।
**उपसंहार:**
आज छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, बैतूल, जबलपुर और अन्य जिलों में फैला यह विशाल नेटवर्क केवल निर्माण कार्य नहीं है, बल्कि यह **चेतराम नागेश जी** जैसे समाजसेवियों द्वारा संकलित एक ऐसी माला है, जिसमें हर मनका (स्थान) अपनी एक अलग चमक रखता है। ये ४९-५२ स्थान केवल स्थान नहीं, कतिया समाज की आत्मा के पड़ाव हैं।
"बालाघाट की पुण्य धरा पर किरनापुर के गोदरी ग्राम में भी अब समाज ने अपनी जड़ों को विस्तार दिया है, जहाँ खरीदी गई भूमि पर जल्द ही संत जी की प्रतिमा और सामाजिक भवन अपनी आभा बिखेरेंगे।"

**इति शुभम।**
*संकलन कर्ता: चेतराम नागेश*
*मार्गदर्शक एवं सहयोगी: कतिया समाज के समस्त निष्ठावान सदस्य*

Address

J-421/422, Opp. Old Police Station, Kotra Sultanabad
Bhopal
462003

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