11/05/2026
*💐 मातृशक्ति वंदन: हृदयतल से आभार एवं कृतज्ञता 💐*
*"घुटनों से रेंगते-रेंगते जब पैरों पर खड़ा हुआ,*
*तेरी ममता की छांव में जाने कब बड़ा हुआ!*
*काला टीका, दूध मलाई, आज भी सब कुछ वैसी है,*
*माँ! सच तो ये है कि तेरे जैसी कोई नहीं, तू ही ईश्वर जैसी है!"*
*।। जय शम्भो, जय मात भवानी ।।*
आज 10 मई, **अन्तर्राष्ट्रीय मातृ दिवस** के अलौकिक अवसर पर *कतिया समाज युवा ब्रिगेड परिवार* द्वारा आयोजित *'मातृशक्ति सम्मान समारोह'* केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, अपितु हमारी जड़ों, हमारी गौरवशाली संस्कृति और साक्षात् ममता की मूरत 'जननी' के चरणों में कृतज्ञता के पुष्प अर्पित करने का एक लघु प्रयास था।
इस पुण्यमयी समारोह की भावपूर्ण शुरुआत **आदरणीय भाई श्री जगदीश धर्मक जी** ने अपनी सुरीली और मर्मस्पर्शी वाणी से की। मातृत्व की महिमा पर उनके गीतों ने कार्यक्रम में वह प्राण फूंके कि संपूर्ण वातावरण माँ की ममतामयी सुगंध से सराबोर हो गया।
_*जब आँखें नम हुई और दिल भर आया...*_
यह आयोजन भावुकता की उन पराकाष्ठाओं का साक्षी बना, जहाँ 'माँ' शब्द का उच्चारण मात्र होते ही वक्ताओं के स्वर रुंध गए और उपस्थित स्वजातीय बंधुओं की आँखें छलक उठीं। माँ की निस्वार्थ तपस्या और बलिदान की कहानियों ने हर हृदय को झकझोर कर रख दिया।
*"खैरियत पूछने वाले तो बहुत मिल जाएंगे दुनिया में,*
**मगर जो आँखों से दर्द पढ़ ले, वो बस माँ होती है।"**
*बाल प्रतिभा और मातृशक्ति का ओज*
कार्यक्रम में उस समय ऊर्जा का अद्भुत संचार हुआ जब **श्री दिनेश एवं श्रीमती मनीषा नाग जी की दो नन्ही सुपुत्रियों** ने अपनी मनमोहक नृत्य प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी मासूमियत ने समाज के उज्ज्वल भविष्य की तस्वीर पेश की।
हमें गर्व है कि तपती दोपहर और चिलचिलाती धूप की परवाह किए बिना हमारी मातृशक्ति—**माननीया शांति बैलवंशी जी, माननीया उषा मुस्ताजर जी, माननीया अर्चना सिसोदिया जी, माननीया सीता आरसे जी, माननीया अनामिका नागेश जी, माननीया मनीषा नाग जी, एवं माननीया अभिलाषा सोनगोतिया जी** ने अपनी उपस्थिति से मंच को कृतार्थ किया।
विशेष रूप से उन माताओं का साहस वंदनीय रहा, जिन्होंने पहली बार मंच संभाला। उनकी शुरुआती झिझक जब 'मातृशक्ति की गूँज' में बदली, तो संपूर्ण परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। सच ही कहा गया है:
**"रुकी तो चांद जैसी थी, चली तो हवाओं जैसी थी..."*ये माँ है जो खुद दुआओं जैसी है*...
**सहयोग के लिए कोटि-कोटि धन्यवाद**
इस आयोजन की सफलता हमारे सामाजिक स्तंभों के मार्गदर्शन के बिना संभव न थी। हम हृदय से आभारी हैं:
* **आदरणीय श्री लखन लाल आम्रवंशी जी** (अध्यक्ष, भूरा भगत धाम)
* **आदरणीय श्री वीरेंद्र गौतम जी** (सचिव, अखिल कतिया समाज महासंघ)
* **श्री दिनेश नाग जी** (जिला अध्यक्ष, जबलपुर)
* **संस्थापक कामेश सूर्यवंशी जी**, **श्री कमलेश कतिया जी**, एवं **एड. प्रतीक पठारिया जी** (अध्यक्ष, कतिया समाज निस्वार्थ सेवा समिति)
* **डॉ. राकेश वागेंद्र जी**, **एड. नितेंद्र नागेश जी**, **अनुज प्रशांत नागेश जी**, **सुनील कतिया जी**, **एड. जितेन्द्र सिंह पठारिया जी**, **अनुज अरविन्द बैलवंशी जी**, और सिवनी से पधारे **श्री अमीरचन्द भारद्वाज जी** *आकाश कतिया* जी, *खुशीराम जी* सहित समस्त स्वजातीय बंधुओं का।
समारोह के समापन पर आभार प्रदर्शन का जो गुरुतर दायित्व मुझ **कुंजबिहारी सोनगोतिया** को सौंपा गया, उसे मैं अपना परम सौभाग्य और जीवन का अनमोल क्षण मानता हूँ।
*"दवा जब काम नहीं आती, तो माँ की नजर उतारना काम आता है,*
**भले ही दुनिया साथ छोड़ दे, पर माँ का आँचल हमेशा साथ निभाता है।"**
पुनः, इस गरिमामयी उपस्थिति के लिए आप सभी का हार्दिक आभार।
**विनीत:**
**कुंजबिहारी सोनगोतिया**
एवं समस्त **कतिया समाज युवा ब्रिगेड परिवार**