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sewagatha संघ के स्वयंसेवकों द्वारा सेवा की प्रेरक कहानियां www.sewagatha.org
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17/08/2026

प्रतिभाओं को निखरने के लिए न छत की जरूरत है न दीवारों की। 15 अगस्त पर
6 वर्षीय कृष विश्वकर्मा से ये भारत मां को समर्पित गीत सुनिए।

#स्वतंत्रतादिवस 🇮🇳









17/08/2026

इन बच्चों को देखिए तो जरा बिना किसी म्यूजिक सिस्टम बिना कार्यक्रम स्थल कैसे ये 15 अगस्त मना रहे हैं।इस बाल संस्कार केंद्र के लिए दिल्ली सेवा भारती को कोई जगह नहीं मिली पेड़ की छाया चबूतरा तक भी नहीं मिला। दिल्ली में यमुना खादर में चल रहे इस बाल संस्कार केंद्र में फिर भी नियमित कक्षाएं चल रही है।

#स्वतंत्रतादिवस 🇮🇳









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स्वयंसेवक न होते, हमारे घर में कोई भी जीवित नहीं होता- कृष्णा कालियानारोवाल पाकिस्तान- १९४७( भारत - विभाजन)सन 1947 का वह...
16/08/2026

स्वयंसेवक न होते, हमारे घर में कोई भी जीवित नहीं होता- कृष्णा कालिया
नारोवाल पाकिस्तान- १९४७( भारत - विभाजन)
सन 1947 का वह स्याह दौर, जब नारोवाल की शांत गलियाँ अचानक खौफनाक चीखों और आगजनी की लपटों से घिर गई थीं। ग्यारह वर्ष की मासूम कृष्णा के लिए दुनिया पल भर में बदल चुकी थी। कल तक जो पड़ोसी दुख सुख की बातें साझा करते थे आज वही हाथों में हथियार लिए गलियों में घूम रहे थे। 11 वर्ष की बहन को पड़ोस के कुछ मुस्लिम युवक उठाकर लेकर जा चुके थे।
बची हुई बेटियों की आबरू पर मंडराते खतरे को देख कर पिता ने कृष्णा उसकी नौ साल की छोटी बहन और माँ को लोहे की एक पुरानी गाड़ी में छिपा दिया। बाहर तलवारों की आवाज़ थी और अंदर खौफ से थराती तीन सांसें। तभी माँ ने कृष्णा की काँपती हथेलियों में एक छोटी सी कृपाण थमाई और आँखों में आँसू भरकर भारी आवाज़ में कहा "कृष्णा, अगर कोई पकड़े तो अपनी जान दे देना लेकिन किसी दरिंदे के हाथ मत लगना" मासूम कृष्णा का कलेजा काँप उठा वह समझ नहीं पा रही थी कि ज़िंदगी से बड़ी लाज की रक्षा का यह बोझ क्या होता है। पूरी रात मौत के साए में कट गई लग रहा था कि शायद अब नया सवेरा कभी नसीब नहीं होगा।
​तभी अगली सुबह उस सन्नाटे को चीरती हुई एक जानी पहचानी हुंकार गूंजी "यहाँ कोई हिंदू भाई बचा है? कोई है यहाँ?" संघ के स्वयंसेवक अपनी जान हथेली पर रखकर सेना के जवानों के साथ एक- एक घर तलाश रहे थे। उन्होंने तुरंत उस परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला और भारत की सीमा की ओर रवाना किया। भूख प्यास और रास्तों में बिखरी लाशों के मंज़र से गुजरते हुए परिवार किसी तरह दिल्ली के पुराना किला राहत शिविर पहुँचा। लेकिन दुख की आंधी अभी थमी नहीं थी। शिविर के भीषण माहौल में कृष्णा के छोटे मासूम भाई ने दम तोड़ दिया। बेघर और पूरी तरह से टूट चुके परिवार के पास न तो एक पैसा था और न ही अपने ही बच्चे का कफ़न खरीदने का सामर्थ्य।
​ऐसे घने अंधेरे में एक बार फिर वही संघ के स्वयंसेवक देवदूत बनकर सामने आए। उन्होंने स्वयं कफ़न का प्रबंध किया और उस मासूम का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करवाया। महीनों बाद बिछड़े पिता भी ढूँढते हुए शिविर पहुँच गए पर मासूम दिलों पर लगे विभाजन के वे ज़ख्म कभी नहीं भरे। आज नब्बे साल की उम्र में भी कृष्णा जी की आँखें उस दौर को याद कर भर आती हैं। विभाजन की वह विभीषिका जहाँ इंसानियत पर एक गहरा दाग है वहीं उस भयानक आपदा में स्वयंसेवकों का वह निष्काम सेवा -भाव आज भी यह याद दिलाता है कि अपनों की रक्षा और सम्मान के लिए भारत माँ के बेटों ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था।
#भारतविभाजन #विभाजन1947 #सेवा #इतिहास

13/08/2026

अखंड भारत संकल्प दिवस की पूर्व संध्या पर विभाजन के समय श्री गुरु जी के जीवन की यह प्रेरणादायक घटना सभी स्वयंसेवकों को जरूर देखनी चाहिए।

#विभाजन #भारतीय

13/08/2026

भारत विभाजन के समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका
1947 का भारत विभाजन केवल सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि लाखों परिवारों के विस्थापन, पीड़ा और अनिश्चितता का दौर था। ऐसे कठिन समय में पंजाब सहायता समिति के माध्यम से स्वयंसेवकों ने सेवा, साहस और मानवता का परिचय दिया। 87 स्वयंसेवकों ने सेवा कार्य करते हुए अपने जीवन की आहुति दी, जबकि 120 स्वयंसेवकों ने लाहौर के शाही किले में अनेकों यातनाएँ झेलीं।
#भारतविभाजन #विभाजन1947 #सेवा #इतिहास #स्वयंसेवक

13/08/2026

"राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ" पैरामिलिट्री ऑर्गेनाइजेशन नहीं है।

संघ के स्वयंसेवक बिना सरकार की सहायता लेते हुए समाज के सहयोग से, जहां आवश्यक है वहां अपना पैसा लगाकर, चमड़ी घिसकर सेवा कार्य करते हैं।

-श्री मोहन भागवत जी

#समाज #कर्तव्य #मानवता #संघ #सेवा

12/08/2026

ये गीत नहीं चरित्र निर्माण की पहली सीढ़ी है ...

राष्ट्र सेविका समिति (पांचेड़)

#समिति #सेविका #चरित्र #सेवा #संघ_शताब्दी

12/08/2026

पानी ने मुश्किलें बढ़ाई, सेवाभारती ने
बढ़ाए मदद के हाथ
#सेवा

यात्रा के साथ चलित शौचालय लेकर साथ चलते हैं स्वयंसेवकआस्था और श्रद्धा का अद्भुत स्वरूप है पंढरपुर की वारी यात्रा जहाँ ला...
10/08/2026

यात्रा के साथ चलित शौचालय लेकर साथ चलते हैं स्वयंसेवक

आस्था और श्रद्धा का अद्भुत स्वरूप है पंढरपुर की वारी यात्रा जहाँ लाखो की संख्या में भक्त भगवान विट्ठल तथा देवी रुक्मिणी के दर्शन करने देहु तथा आळंदी से लगभग २० दिनों की लंम्बी यात्रा के बाद पहुंचते हैं। किन्तु ये यात्रा अपने पीछे कितनी गंदगी छोड़ जाती हैं कि रास्ते में आने वाले अनेक गांव एक महीने तक गंदगी और मलमूत्र की गंध के चलते रहने योग्य नहीं रहते थे। परेशानी इतनी की ऐसा लग रहा था कि कहीं इस यात्रा के आयोजन पर ही रोक लगने का संकट डगमगा रहा था। ऐसे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक और कुछ सेवाभावी संस्थाओं ने इस जिम्मेदारी को उठाने का निर्णय लिया। पिछले 10 वर्षों से सैकड़ो स्वयंसेवक समाज के सहयोग से पोर्टेबल शौचालय लेकर इस पूरी यात्रा के दौरान चलते हैं तथा वारकरी बंधू और भगिनियों को कोई असुविधा ना हो इसकी चिंता करते। जमा हुए मलमूत्र को सुरक्षित विसर्जित किया जाता है।
#वारकरी #पंढरपूर #निर्मल #वारी #सेवा #संघ_शताब्दी

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Sewagatha, , Anand Dham, Shivaji Nagar, , Opposite Nootan College
Bhopal
462016

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