13/07/2025
जीवन सीखने की पाठशाला है और इसे हर मानवजाति को जीवन के अंतिम पड़ाव तक हमे सीखना चाहिए परंतु वर्तमान परिदृश्य मे अधिकांश हम ये पाते है कि हम सिर्फ़ स्वयं को सर्वश्रेष्ठ मानकर
लोगो को सिखाने में व्यस्त है, जबकि गौर करने पर जो सिखा रहा है उसे भी सीखने की आवश्यकता होती है,इंसान अपने आस पास के माहौल अपने संगत अपने लोग अपने समुदाय से भी बहुत सी बातो को सीख सकता है ज्ञान प्राप्त कर सकता है,यदि हमे अपना सर्वांगीण विकास करना है तो ,हमे छोटी छोटी बातो से हमको सीखना होगा, सीखने की कोई उम्र नहीं होती और अपने बौद्धिक विकास और अपनी बुद्धि लब्धि बढ़ाने के लिए सीखने के हर आयाम का सदुपयोग करना होगा और यह भी सोचना होगा कि सिर्फ़ हम ही बुद्धिमान नहीं है बल्कि हमे बहुत सी चीज का ज्ञान नहीं है और ये हमे लोगो से ,किताबों से, अलग अलग माध्यम से सीखने की आवश्यकता है,अपनी दक्षता को बढ़ाने और अपनी कार्य कुशलता को बेबाक़ी से समझाने के लिए आपको भी अपने आप मे सीखने की आवश्यकता है ताकि आप जो कह रहे है इंसान वही बात समझे न की वो बात जिससे अलग सोच का दायरा बन रहा हो, सोच सकारात्मक हो तो ही वो आपके बौद्धिक स्तर को दिशा दे पाती है।
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