BHAI Welfare Society

BHAI Welfare Society A movement for the injustice of Anti Dowry Act 498A, DV, Crpc 125 and all family-biased Laws.

Bhopal welfare society की सप्ताहिक मीटिंग प्रत्येक रविवार 4 pm से 6 pm तक।
Chinar Park Link Rd 1, Near Vyapam Square, Bhim Nagar Slums, Shivaji Nagar, Bhopal, M P 462011
पुरूष हेल्पलाइन नंबर 8882498498 तथा www.saveindianfamily.in है। आप SIF-ONE अप्पलीक्शन को गूगल स्टोर से भी डाउनलोड कर सकते है। SIF किसी से कॉउंसललिंग और मेम्बरशिप के लिए पैसे की लेन देन नही करता है।

10/09/2026
इंदौर व्यक्तिगत प्रवास के दौरान इंदौर के साथियो के साथ सागर गेरे इंदौर में सौजन्य भेट भाई वेलफेयर सोसाइटी की इंदौर टीम क...
29/08/2026

इंदौर व्यक्तिगत प्रवास के दौरान इंदौर के साथियो के साथ सागर गेरे इंदौर में सौजन्य भेट भाई वेलफेयर सोसाइटी की इंदौर टीम के साथ यादगार समय गुज़रा 🌹

30 अगस्त 2026 रविवार को चिनार पार्क में भाई वेलफेयर सोसाइटी का आयोजन भाई भाई को राखी बांध कर एक दूसरे की रक्षा का वचन दे...
28/08/2026

30 अगस्त 2026 रविवार को चिनार पार्क में भाई वेलफेयर सोसाइटी का आयोजन भाई भाई को राखी बांध कर एक दूसरे की रक्षा का वचन देगा सभी भाई भोपाल टीम के साथी आमंत्रित है 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

भाई वेलफेयर सोसाइटी का वादा भाइयो की रक्षा का 🌹
28/08/2026

भाई वेलफेयर सोसाइटी का वादा भाइयो की रक्षा का 🌹

18/08/2026

*​अपील*

​प्रिय साथियों और जुझारू भाइयों,

*​विगत दो दिनों से आप सभी के जो निरंतर कॉल और मैसेज आ रहे हैं, उनमें छिपी आपकी चिंता, पीड़ा और जिज्ञासा को मैं भली-भांति महसूस कर पा रहा हूँ। सेव इंडियन फैमिली (SIF) से मेरी सदस्यता समाप्त होने को लेकर मन में उठ रहे सभी सवालों पर स्थिति स्पष्ट करना मैं अपना नैतिक कर्तव्य समझता हूँ*

*​SIF का नियम, हमारा अनुशासन और सच*

*वर्ष 2013-14 में जब हमने भोपाल में SIF के बैनर तले काम शुरू किया था, तब लक्ष्य केवल एक था—पीड़ित पुरुषों को संबल देना। 2016 में हमने 'भाई वेलफेयर सोसाइटी' को एक पंजीकृत NGO के रूप में स्थापित किया। SIF के दो मूल सिद्धांत हमेशा से रहे हैं: कोई भी किसी पीड़ित से पैसा नहीं लेगा, और कोई भी प्रैक्टिसिंग एडवोकेट SIF का सदस्य नहीं रहेगा। हम सभी ने हमेशा इन नियमों का अक्षरांश: पालन किया है*

*​हाल ही में, विधि की पढ़ाई पूरी करने और AIBE परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद, जुलाई 2026 में मुझे बार काउंसिल की सदस्यता प्राप्त हुई और मैं एक प्रैक्टिसिंग एडवोकेट बन गया। SIF के सिद्धांतों और अनुशासन का सम्मान करते हुए, नियम अनुसार मैंने नेशनल मीट के दौरान SIF की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है*

​*भाई वेलफेयर सोसाइटी का भविष्य और व्यवस्था*

*मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि भाई वेलफेयर सोसाइटी समाप्त नहीं हो रही है। यह संगठन हम सबने मिलकर खड़ा किया है, और यह पूर्ववत मजबूती से कार्य करता रहेगा*

*​संशोधन: हम अपने NGO के नियमों में एक व्यावहारिक संशोधन कर रहे हैं। यदि कोई सदस्य अपने केस से लड़ते-लड़ते कानून की पढ़ाई पूरी कर एडवोकेट बनता है, तो वह हमारी सोसाइटी का सदस्य व पदाधिकारी रह सकता है—बशर्ते वह ग्रुप के किसी पीड़ित का केस स्वयं न लड़े, बल्कि उन्हें नि:शुल्क कानूनी सलाह व सहयोग दे*

*​अध्यक्षता: मैं 'भाई वेलफेयर सोसाइटी' के अध्यक्ष के रूप में अपनी ज़िम्मेदारी निभाता रहूँगा और आप सभी के लिए हमेशा उपलब्ध रहूँगा*

*​SIF से संबंध: भाई वेलफेयर सोसाइटी के सभी साथी SIF के सदस्य बने रहेंगे और उनके हर आंदोलन का हिस्सा रहेंगे। SIF का हेल्पलाइन नंबर जिन साथियों के पास है (जो वकील नहीं हैं), वे सेवा देते रहेंगे*

*​पहचान व लेटरहेड: चूँकि अब हम SIF के आधिकारिक सहयोगी संगठन के रूप में दर्ज नहीं रहेंगे, इसलिए हमारे लेटरहेड से हेल्पलाइन नंबर और 'SIF सहयोगी' का टैग हट जाएगा, लेकिन हमारी निष्ठा वही रहेगी*

*​एक भावनात्मक सत्य-
हमें और हमारे इस प्रयास को पहचान SIF से ही मिली है। SIF का साथ छोड़ना केवल और केवल परिस्थितियों व नियमों के कारण हो रहा है। हम किसी अन्य संगठन में जाने का सोच भी नहीं सकते। SIF का यह नियम कठोर ज़रूर लग सकता है, पर अनुशासन ही किसी आंदोलन की रीढ़ होता है.

*​हम भले ही दस्तावेज़ों या शारीरिक रूप से SIF से पृथक दिखें, पर मन, विचार और सिद्धांतों से हम सदैव SIF के साथ हैं। प्रतिस्पर्धा या विरोध का तो प्रश्न ही नहीं उठता, क्योंकि SIF हमारा मार्गदर्शक रहा है*

*​हमारा संकल्प और आगे का मार्ग*

*आप सभी भाई वेलफेयर सोसाइटी के साथ कल भी थे, आज भी हैं और कल भी रहेंगे। साथ ही, SIF के हर आह्वान पर आप एक सच्चे कार्यकर्ता की तरह उनके साथ खड़े रहेंगे*

*​हमारा लक्ष्य सेवा भाव था और सेवा भाव ही रहेगा। नितिन तलवार जी के नेतृत्व में हम सब कंधे से कंधा मिलाकर काम करते रहेंगे*

*​आशा है आप मेरी परिस्थितियों और इन भावनाओं को समझेंगे। आइए, बिना किसी संशय के, अपने मूल लक्ष्य—पीड़ित पुरुषों को न्याय और सहारा देने के कार्य में पुनः पूरे समर्पण से जुट जाएँ*

*​हम साथ थे, साथ हैं, और हमेशा साथ रहेंगे*

[ज़की अहमद ]

*अध्यक्ष, भाई वेलफेयर सोसाइटी, भोपाल*🙏

नेशनल सेमिनार viazag विशाखापत्तनम 14-16 अगस्त 2026 भाई भोपाल की भागीदारी
14/08/2026

नेशनल सेमिनार viazag विशाखापत्तनम 14-16 अगस्त 2026 भाई भोपाल की भागीदारी

भोपाल तीन vizag नेशनल सेमिनार हेतुआंध्रा प्रदेश एक्सप्रेस से सुबह 4.30 पर रवाना होंगी 14-16 विषखापट्नम में 16 th नेशनल स...
12/08/2026

भोपाल तीन vizag नेशनल सेमिनार हेतुआंध्रा प्रदेश एक्सप्रेस से सुबह 4.30 पर रवाना होंगी 14-16 विषखापट्नम में 16 th नेशनल सेमिनार आयोजित हो रहा है🌹

05/08/2026

_*कामयाबी कभी बड़ी नहीं होती....*_

_*उसे पाने वाले बड़े होते है....*_

_*दरार कभी बड़ी नहीं होती....*_

_*उसे भरने वाले हमेशा बड़े होते है....*_

_*सम्बध कभी बड़े नहीं होते....*_

_*उसे निभाने वाले हमेशा बड़े होते है....*_

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

*4 साल का लंबा संघर्ष, एक भयानक डर और अंततः 'सत्यमेव जयते' का शंखनाद*

​फैसले की रात कैसी होती है, इसका अंदाज़ा वही लगा सकता है जिसने झूठे मुकदमों का दंश झेला हो। 3 तारीख की पूरी रात पति और बुजुर्ग सास-ससुर की आंखों में नींद का एक कतरा तक नहीं था। डर, घबराहट और एक अनजाना दबाव इस कदर हावी था कि पति से दोपहर का खाना तक नहीं निगला गया। शादी के महज़ 1 साल बाद, 15 साल पहले ब्याही जा चुकी ननद समेत पूरे परिवार पर धारा 498A का झूठा जाल बिछा दिया गया था। 4 लंबे सालों तक कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटते-काटते परिवार अंदर से टूट चुका था।

​4 तारीख (कल) को निर्णय का दिन था। हमारी टीम और एडवोकेट साहब के साथ हम दोपहर 1 बजे कोर्ट पहुँचे। जज साहब ने शाम 5:30 बजे का समय दिया। पत्नी अपने पिता और वकील के साथ सुबह से ही वहां मौजूद थी। हमारे एडवोकेट की सूझबूझ से हमने कोर्ट रूम में अपनी उपस्थिति बनाए रखी, ताकि अंतिम क्षणों में सुलह-सफाई के नाम पर फैसले को टालने या गुमराह करने का कोई पैंतरा न चला जा सके।
​शाम के 6:30 बज चुके थे। धड़कनें तेज थीं, सांसें थमी हुई थीं। माननीय जज साहब ने आरोपियों को कटघरे में खड़ा किया, नाम पूछे और वो ऐतिहासिक शब्द कहे जिसका इंतज़ार 1,460 दिनों से था—

​"*आपको दोषमुक्त किया जाता है!"*

​इन चार शब्दों ने 4 साल के कलंक, अपमान और मानसिक प्रताड़ना को एक पल में धो दिया। कटघरे के सामने खड़े पत्नी और उसके पिता का चेहरा देखने लायक था—झूठ का किला ढह चुका था।

​कोर्ट रूम से बाहर आते ही 4 साल का रुका हुआ दर्द आंसुओं के रूप में बह निकला। पिता और पुत्र एक-दूसरे से लिपटकर फूट-फूट कर रो पड़े। वह केवल खुशी के आंसू नहीं थे, वह 4 साल की ज़िल्लत से मिली आज़ादी के आंसू थे। उस भावुक पल में पिता-पुत्र ने एडवोकेट साहब और मेरे पैर छूकर गले से लगा लिया। उनकी वह सीलन भरी आंखें और कंपकंपाते हाथों से व्यक्त किया गया आभार ही हमारी संस्था और 'मेंस राइट्स मूवमेंट' की असली कमाई है।

​शाम 7:00 बजे कोर्ट परिसर में जीत की तस्वीरें ली गईं। सुबह से डटे उज्जैन टीम के जांबाज़ साथियों का दिल से आभार व्यक्त किया गया। रात 7:30 बजे हम भोपाल के लिए रवाना हुए और रास्ते में भोजन करते हुए रात 11:00 बजे भोपाल पहुंचे।

​निर्णय का दिन वास्तव में कितना कठिन होता है, इसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। सब कुछ सही होने के बाद भी एक अनजाना डर मन में बना रहता है। लेकिन यह जीत इस बात की गवाह है कि अगर धैर्य, सही सलाह और संगठन का साथ हो, तो झूठे मुकदमों के अंधेरे को चीरकर न्याय का सूरज ज़रूर उगता है।

​भाई वेलफेयर सोसाइटी हर उस भाई और परिवार के साथ चट्टान की तरह खड़ी है जो अन्याय से लड़ रहा है।

​सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं! ✊🇮🇳
​
*ज़की अहमद*
भाई वेलफेयर सोसाइटी

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Bhopal
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