02/07/2026
*मुख्यमंत्री जी, कल मेरी पत्नी बिना गुड बाय कहे चली गई...*
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*आदरणीय श्री मोहन यादव जी,*
*" मैं संजय सिन्हा हूं। पेशे से पत्रकार हूं। रोज हजारों खबरें देखता हूं। बहुत सी घटनाएं आती हैं और चली जाती हैं। लेकिन कुछ घटनाएं खबर नहीं बनतीं, दिल में रह जाती हैं।*
*कल ऐसी ही एक घटना हुई।*
मेरी पत्नी को शाम की फ्लाइट से दिल्ली जाना था। मैं उसे छोड़ने जबलपुर एयरपोर्ट गया था। हर बार एयरपोर्ट पर उतरकर उसे गले लगाकर विदा करता हूं। वह हमेशा कहती है, "संजू, अपना ख्याल रखना।" लेकिन कल ऐसा नहीं हो पाया। एयरपोर्ट पर हमें इतनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा कि हम यह छोटी सी औपचारिकता भी पूरी नहीं कर सके।
*आप पूछेंगे, क्यों?*
सर, मैं एयरपोर्ट पहुंचा तो वहां भारी अफरा-तफरी थी। बताया गया कि गाड़ी इधर नहीं ले जा सकते, उधर नहीं ले जा सकते, क्योंकि मुख्यमंत्री जी आ रहे हैं।
सर, एयरपोर्ट के प्रस्थान द्वार के सामने कम से कम सौ सरकारी गाड़ियां खड़ी थीं। एसपी की गाड़ी, कलेक्टर की गाड़ी, अतिरिक्त एसपी, अतिरिक्त कलेक्टर, सांसद, विधायक, पार्षद, नगर निगम, एंबुलेंस, पुलिस की दर्जनों गाड़ियां और न जाने कितने वाहन।
सर, मैंने बड़ी मुश्किल से एक तस्वीर ली है, जिससे आप अंदाजा लगा सकेंगे कि प्रस्थान द्वार तक जाने वाली पूरी सड़क पुलिस बैरिकेड लगाकर बंद कर दी गई थी। पुलिस वाले यात्रियों से कह रहे थे कि दूर गाड़ी रोकिए, सामान उतारिए और तुरंत वापस लौट जाइए।
सर, आम दिनों में जिस रास्ते पर उल्टी दिशा में गाड़ी ले जाना अपराध माना जाता है, कल वही व्यवस्था का नियम बन गया। कल मुझे पहली बार महसूस हुआ कि हमारे लोकतंत्र में जनता और जनप्रतिनिधि के बीच की दूरी कितनी बढ़ गई है,सर, मेरी पत्नी को दो भारी सूटकेस खींचते हुए अकेले प्रस्थान द्वार तक जाना पड़ा। मैं कार से उतर नहीं सकता था। गाड़ी रोक नहीं सकता था। पुलिस वाले गाड़ी रोकने नहीं दे रहे थे, इसलिए कल मैं उसे गले लगाकर गुड बाय भी नहीं कह पाया।
सर, कल मुझे लगा जैसे मैं किसी लोकतांत्रिक देश में नहीं, बल्कि किसी रियासत में खड़ा हूं। जैसे कोई राजा आने वाला हो और प्रजा को रास्ते से हटा दिया गया हो।
सर, मैं सोचता रहा कि आखिर यह सब किसलिए? आप तो जनता के नेता हैं। जनता के बीच से निकले हैं। फिर जनता को हटाकर जनता के नेता का स्वागत क्यों? सर, एयरपोर्ट का नियम है कि जिसके पास टिकट हो, वही भीतर जाए। लेकिन कल टिकट वाले यात्री बाहर परेशान हो रहे थे और बिना टिकट वाले लोग फूलों के गुलदस्ते लेकर स्वागत के लिए भीतर मौजूद थे।
सर, भा