07/01/2026
हम भी वही कह रहे हैं, बदलाव लोगों से ही होगा।
आज एक नगरसेवक को चुनाव नहीं लड़ने केलिए १२ से १५ लाख दिए जा रहे हैं। ऐसे में अगर ६ लोगों को भी दिया गया तो ७० ८० लाख ऐसे ही हो गए। बहुत से नगरसेवक के उम्मीदवार ३००० से ४००० प्रति वोट घर पहुंचा रहे हैं और सुबह शाम का खाना। ऐसे में लगभग २ करोड़ खर्च कर रहे हैं। यह जो २ करोड़ खर्च कर रहा है क्या वो समाज के लिए है, नहीं।
अब हम तो ३ से ५००० में बिक गए। उसका परिणाम देखिए:
पानी साफ नहीं, हैजा आदि बीमारी से डॉक्टर पर १५००० तक हर साल खर्च हो गए।
रस्ते में खड़े इतने हैं कि बाइक का मेंटिनेंस २००० से बढ़कर १५००० हो गया, शरीर पर जो असर हुआ जिंदगी भर दवाई के लिए हजारों खर्च करने पड़े।
हमने कुछ पाया?
कुछ नहीं।
यदि इसकी जगह
नागरिक ईमानदारी से टैक्स भरे
नगरसेवक से पूछे की उसने ५ साल क्या किया
हमारे वार्ड को समस्या क्या है
उसे कैसे सुलझाएगा
किसी पार्टी, किसी में।हिम्मत नहीं होगी सबको काम करना पड़ेगा।
देवेंद्र फडणवीस जी (),
आज आप भिवंडी आए थे। बड़ी-बड़ी बातें हुईं - 50 हजार करोड़ का अमृत शहर प्लान, विकास के वादे, स्मार्ट सिटी का सपना। पर कहीं आपने यह सवाल पूछा कि भिवंडी के नागरिकों को तीसरे दर्जे का अनुभव क्यों होता है?
हमारी सड़कें खड़ों से भरी हैं। हर दिन दुर्घटनाएं होती हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों को ट्रैफिक में घंटों फंसना पड़ता है। पानी, सीवर, बिजली - सब में समस्या है। शहर का प्रशासन ढह चुका है।
टैक्स हम पहली क्लास का देते हैं, लेकिन सुविधाएं तीसरे दर्जे की मिलती हैं। यही भिवंडी की हकीकत है।
⚠️ अब तो लोकतंत्र की भी बेइज्जती हो गई:
आपके ही दल के 6 उम्मीदवार बिना चुनाव जीते। जो लोग खड़े होना चाहते थे, उन्हें दबाव दिया गया। पैसा दिया गया। यह कोई लोकतंत्र है?
💰 सबसे बड़ा धोखा - भिवंडी में वोट का कारोबार:
हर उम्मीदवार, चाहे किसी भी पार्टी का हो, 3000-4000 रुपये देकर वोट खरीद रहे हैं। 10-15 दिन तक घर पर राशन, खाना पहुंच रहा है। यह सब क्या है?
जीतने के बाद ये सब अपना खर्चा निकालेंगे। पांच साल हमारी जेब काटेंगे। भ्रष्टाचार करेंगे। यह लोकतंत्र नहीं, सौदेबाजी है।
📢 भिवंडी की जनता को समझना जरूरी है:
अगर आज आप पैसा लेकर वोट बेच देते हो, तो कल आपके बच्चों के लिए भी यही खड़ी सड़क, यही गंदा पानी, यही भ्रष्टाचार रहेगा।
✊ अब बदलाव का वक्त है:
- सवाल पूछो, डर मत दिखाओ
- जो पैसा बाँटता है, उससे कहो - 'हमें नोट नहीं, सड़क चाहिए'
- निर्विरोध जीतने वालों से पूछो - आप किसके प्रतिनिधि हो?
भिवंडी को सिर्फ वादे नहीं, असली बदलाव चाहिए। लोकतंत्र असली होना चाहिए।