Gond Boys and Girl Youth Association

Gond Boys and Girl Youth Association We want to awaken our Gond society and bring it forward, and it is my duty to collect every Gond of India. http//:www.instagram.com/gondsamaj750

It is not my duty to one, we all have a responsibility, we will not understand it

बस्तर के जल, जंगल और जमीन की रक्षा करने वाले दादा "माड़वी हिडमा" को अंतिम सेवा जोहार 💐अंतिम जोहार दादा लाल सलाम कॉमरेड
22/11/2025

बस्तर के जल, जंगल और जमीन की रक्षा करने वाले दादा "माड़वी हिडमा" को अंतिम सेवा जोहार 💐

अंतिम जोहार दादा
लाल सलाम कॉमरेड

हमारे प्रिय आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर सभी को हार्दिक बधाई।जय जुहार 🙏
15/11/2025

हमारे प्रिय आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर सभी को हार्दिक बधाई।

जय जुहार 🙏

05/11/2025

ये जनाब है बालकृष्ण सबर जो खुद आदिवासी समाज से आते हैं लेकिन के दौरान आदिवासी समाज को नीच ओर घिनौना जैसे कि मेंढ़ापल बताया (भेड़िया) 🐑 आप स्वयं को आदिवासी समाज के वरिष्ठ कार्यकर्ता और भाजपा पार्टी के वरिष्ठ नेता के रूप में प्रस्तुत करते हैं। आपने आदिवासी समाज के लोगों को अपनी नज़र में मेंडापाल कहा है। आपने समस्त आदिवासियों के स्वाभिमान और सम्मान का अपमान किया है। आदिवासी समाज इसका करारा जवाब देगा।

आदिवासी युवक को नौकरी के लिए लात मारना — समाज के मुंह पर एक तमाचाआज भी जब हम “समानता” और “विकास” की बातें करते हैं, तब क...
27/10/2025

आदिवासी युवक को नौकरी के लिए लात मारना — समाज के मुंह पर एक तमाचा

आज भी जब हम “समानता” और “विकास” की बातें करते हैं, तब कहीं न कहीं ज़मीन पर हकीकत कुछ और ही नज़र आती है।
हाल ही में एक आदिवासी युवक को सिर्फ़ इसलिए लात मारकर अपमानित किया गया, क्योंकि वह नौकरी मांगने गया था। यह घटना न केवल उस युवक के आत्मसम्मान पर प्रहार है, बल्कि पूरे समाज के विवेक पर सवाल खड़ा करती है।

क्या मेहनत और अधिकार मांगना अपराध है?
आदिवासी समाज, जिसने हमेशा इस धरती की रक्षा की, जंगलों और संसाधनों को संभाला — आज वही अपने हक़ के लिए संघर्ष कर रहा है।

सरकारें “जनजातीय उत्थान” की बातें करती हैं, लेकिन जब एक युवक नौकरी के लिए दरवाज़ा खटखटाता है, तो उसे लात से जवाब मिलता है। यह केवल एक युवक का नहीं, पूरे आदिवासी समाज के आत्मसम्मान का मुद्दा है।

अब वक्त है कि हम चुप न रहें।
अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाना ही सच्चा “विकास” है।
नौकरी के लिए गया था — भीख नहीं मांगने गया था।

#जल #जंगल #जमीन

26/10/2025

मां सुनादेई। Maa Sunadei 🙏🙏
के अधिष्ठात्री आदिवासी के देवी मां सुनादेई की छतर यात्रा का छोटा सा वीडियो था इस साल 2025 ka ।अक्टूबर यानि Dussera महीना में होता है हर साल बिजया दशमी के ठीक ५ दिन के बाद मां का छतर निकलता है हर साल। मां के छतर यात्रा देखने केलिए पड़ोसी छत्तीसगढ़ राज्य ओर ओडिशा के संबलपुर जिले तक का श्रद्धालु जनसैलाब बनजाते है

#जल #जंगल ओर #जमीन की रखवाली Maa

मां सुनादेई 🙏मां सुनादेई ओडिशा के नुआपड़ा जिले के अंदर   जंगल में हे जो कि ओडिशा और पड़ोशी छत्तीसगढ़ राज्य से सीमा साझा क...
26/10/2025

मां सुनादेई 🙏

मां सुनादेई ओडिशा के नुआपड़ा जिले के अंदर जंगल में हे जो कि ओडिशा और पड़ोशी छत्तीसगढ़ राज्य से सीमा साझा करता हे। ये ओडिशा और पड़ोशी छत्तीसगढ़ सीमा में हमारे आदिवासी ही बसते हैं और अपनी आराध्य देवी मां को ही पूजा आराधना करते हैं बल्कि निजी रूप से नहीं सामाजिक रूप मैं पूजा होता है।

मां सुनादेई (Sunadei) — पूजा और महत्व

1. भुंजिया समुदाय और देवी का संबंध

Sunabeda वन्यजीव अभ्यारण्य के आसपास की जनसंख्या में भुंजिया जाति की जनजातियाँ (Tribe) रहती हैं।

एक एंथ्रोपोलॉजी अध्ययन बताता है कि भुंजिया समुदाय की लोककथाओं में उनकी “सर्वोच्च देवी” Sunadei है, जो उनके स्थानीय देवत्व (deity) का बहुत अहम हिस्सा है।

कहा जाता है कि भुंजिया जनजाति को Sunadei ने आदेश दिया था कि वे Sunabeda क्षेत्र में बसें और खेती करें।

इससे यह फर्क पड़ता है कि उनकी पूजा केवल वन-देवी (forest goddess) के रूप में ही नहीं, बल्कि जीवन, जमीन (भूमि), और उपजीविका (livelihood) से सीधे जुड़ी है।

2. पर्यटन और धार्मिक महत्व

एक शोध-लेख में उल्लेख है कि Sunabeda Sanctuary में माँ Sunadei का मंदिर है और यह पर्यटकों (eco-tourism) के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।

यह मंदिर जंगल और सांस्कृतिक पहचान के बीच एक सेतु (bridge) का काम करता है — स्थानीय जनजाति की आस्था और वन संरक्षण का एक संयोजन।

3. छत्तर यात्रा (Chhatar Yatra)

“Sunabeda Maa Sunadei Chhatar Yatra”का, जो दर्शाता है कि माँ Sunadei की श्रद्धा में स्थानीय लोग छत्तर यात्रा (धार्मिक जुलूस) निकालते हैं।

यह संकेत देता है कि पूजा महज पारिवारिक या गांव-स्तर पर नहीं है, बल्कि सार्वजनिक और सामुदायिक आयोजन के रूप में होती है।

4. संस्कृति और पारिस्थितिकी का मेल

Bhunjia समुदाय और अन्य स्थानीय जनजातियों के लिए माँ Sunadei सिर्फ एक देवी नहीं है, बल्कि उनकी पारिस्थितिक पहचान का हिस्सा है — उनकी भूमि, जंगल और संसाधन (जैसे जंगल की जगह, पेड़, जमीन) उन्हें देवी से मिले उपहार के रूप में देखी जाती है।

इस दृष्टिकोण से, उनके पूजा-रिवाज प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से भी जुड़े हो सकते हैं: देवी के प्रति श्रद्धा प्रकृति के संरक्षण को बढ़ावा देती हो।



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