26/10/2025
मां सुनादेई 🙏
मां सुनादेई ओडिशा के नुआपड़ा जिले के अंदर जंगल में हे जो कि ओडिशा और पड़ोशी छत्तीसगढ़ राज्य से सीमा साझा करता हे। ये ओडिशा और पड़ोशी छत्तीसगढ़ सीमा में हमारे आदिवासी ही बसते हैं और अपनी आराध्य देवी मां को ही पूजा आराधना करते हैं बल्कि निजी रूप से नहीं सामाजिक रूप मैं पूजा होता है।
मां सुनादेई (Sunadei) — पूजा और महत्व
1. भुंजिया समुदाय और देवी का संबंध
Sunabeda वन्यजीव अभ्यारण्य के आसपास की जनसंख्या में भुंजिया जाति की जनजातियाँ (Tribe) रहती हैं।
एक एंथ्रोपोलॉजी अध्ययन बताता है कि भुंजिया समुदाय की लोककथाओं में उनकी “सर्वोच्च देवी” Sunadei है, जो उनके स्थानीय देवत्व (deity) का बहुत अहम हिस्सा है।
कहा जाता है कि भुंजिया जनजाति को Sunadei ने आदेश दिया था कि वे Sunabeda क्षेत्र में बसें और खेती करें।
इससे यह फर्क पड़ता है कि उनकी पूजा केवल वन-देवी (forest goddess) के रूप में ही नहीं, बल्कि जीवन, जमीन (भूमि), और उपजीविका (livelihood) से सीधे जुड़ी है।
2. पर्यटन और धार्मिक महत्व
एक शोध-लेख में उल्लेख है कि Sunabeda Sanctuary में माँ Sunadei का मंदिर है और यह पर्यटकों (eco-tourism) के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।
यह मंदिर जंगल और सांस्कृतिक पहचान के बीच एक सेतु (bridge) का काम करता है — स्थानीय जनजाति की आस्था और वन संरक्षण का एक संयोजन।
3. छत्तर यात्रा (Chhatar Yatra)
“Sunabeda Maa Sunadei Chhatar Yatra”का, जो दर्शाता है कि माँ Sunadei की श्रद्धा में स्थानीय लोग छत्तर यात्रा (धार्मिक जुलूस) निकालते हैं।
यह संकेत देता है कि पूजा महज पारिवारिक या गांव-स्तर पर नहीं है, बल्कि सार्वजनिक और सामुदायिक आयोजन के रूप में होती है।
4. संस्कृति और पारिस्थितिकी का मेल
Bhunjia समुदाय और अन्य स्थानीय जनजातियों के लिए माँ Sunadei सिर्फ एक देवी नहीं है, बल्कि उनकी पारिस्थितिक पहचान का हिस्सा है — उनकी भूमि, जंगल और संसाधन (जैसे जंगल की जगह, पेड़, जमीन) उन्हें देवी से मिले उपहार के रूप में देखी जाती है।
इस दृष्टिकोण से, उनके पूजा-रिवाज प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से भी जुड़े हो सकते हैं: देवी के प्रति श्रद्धा प्रकृति के संरक्षण को बढ़ावा देती हो।
©Chitaranjan Majhi