07/01/2024
मन किस ढंग से कार्य करता है, यह जानना बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि शिक्षा का कार्य कुछ परीक्षाएं पास कर हमें नौकरी योग्य बनाना ही नहीं है, बल्कि यह समझने में हमारी मदद करना भी है कि मन किस प्रकार से काम करता है। क्योंकि मन के कार्य करने का तरीका ही अनेक उपद्रवों का कारण है, यही अनेक युद्धों को जन्म देता है। हालांकि हमारे पास पर्याप्त वैज्ञानिक जानकारी है जिससे कि मनुष्य की सारी जरूरतें पूरी की जा सकती हैं और वह शारीरिक मानसिक रूप से स्वास्थ्य पूर्वक जी सकता है, परंतु फिर भी ऐसा जीवन असंभव बना हुआ है क्योंकि मनुष्य का संस्कारित मन - ईसाई, हिंदू, भारतीय, पाकिस्तानी, कम्युनिस्ट, सोशलिस्ट, आस्तिक, नास्तिक आदि - ऐसा नहीं होने देता। अतः हममें से हरएक के लिए मन को समझना क्या बहुत जरूरी नहीं है? शंकर , बुद्ध अथवा मार्क्स के अनुसार नहीं, बल्कि अपनी स्वयं की रोशनी में समझना कि हमारा मन किस तरह से कार्य करता है। यदि हम यह समझ सकें तो यह सबसे बड़ी क्रांति होगी और उस क्रांति से कार्यों, गतिविधियों का एक नया सिलसिला आरंभ हो सकेगा।..... ....आप जानते हैं कि मन के कार्य चेतन और अवचेतन तलों पर होते हैं और हमारे अधिकांश क्रियाकलाप चेतन तल पर होते हैं, अपने मन की अवचेतन प्रक्रिया के बारे में हम कुछ नहीं जानते। हमें रोजी - रोटी कमानी होती है, हम पूजा करते हैं या किसी का अनुसरण करते हैं - येसब हम सतही मन से किया करते हैं। क्या यह जरूरी नहीं है कि अवचेतन मन को समझा जाए क्योंकि वही तो हमें दिशा निर्देश देता है। अचेतन मन को समझने के लिए यह जरूरी है कि चेतन मन शांत हो जाए, और यह तब ही संभव होता है जब स्वयं को समझते हुए, रोजमर्रा के क्रियाकलापों के दौरान मन को समझते हुए, मैं अपने मन की संपूर्ण प्रक्रिया को अपने सामने ले आता हूं - जब मैं अपने प्रयोग किए जाने वाले शब्दों , अपनी आदतों, अपने बातचीत करने के ढंग, परंपराओं और रीति रिवाजों आदि उन सारी चीजों के प्रति सजग रहता हूं जिन्हें मैं केवल दूसरों के साथ किए जाने वाले अपने व्यवहार में ही देख सकता हूं।
-