18/02/2026
#भागलपुर के स्लम क्षेत्रों के वंचित बच्चों के लिए एक नई उम्मीद — “चौपाल पाठशाला”
भागलपुर की गलियों में, टिन की छतों के नीचे,
कई ऐसे बच्चे रहते हैं जिनके सपने…
कभी काग़ज़ पर उतर ही नहीं पाते।
ऐसे घरों की माँ—
जो खुद पढ़ नहीं पाईं,
लेकिन जानती हैं कि शिक्षा ही गरीबी की जंजीर तोड़ सकती है,
दिन-भर दूसरों के घरों में झाड़ू–बर्तन करती हैं।
उनके हाथ थक जाते हैं,
पर आँखों में अपने बच्चों के लिए उम्मीद अब भी ज़िंदा है।
जब किसी बच्चे के हाथ में किताब नहीं होती,
तो सिर्फ़ खाली हाथ नहीं होते—
वहाँ डर होता है,
भटकाव होता है,
और वो रास्ते होते हैं…
जो एक मासूम जीवन को गलत दिशा में ले जा सकते हैं।
“चौपाल पाठशाला” उसी मोड़ पर खड़ी है।
जहाँ किताबें फिर से बच्चों के हाथों में पहुँचें,
जहाँ सीखना डर नहीं, उत्सव बने,
जहाँ सपने सिर्फ़ देखे नहीं जाएँ—
बल्कि संभव बनाए जाएँ।
हमारा उद्देश्य बहुत सरल है—कोई भी बच्चा, सिर्फ़ आर्थिक तंगी या परिस्थितियों के कारण,अपने सपनों से वंचित न रहे।
आपका छोटा सा सहयोग—
किसी बच्चे के हाथ में किताब बन सकता है
किसी माँ की आँखों में भरोसा बन सकता है
और किसी परिवार के लिए भविष्य की नींव बन सकता है
🙏
आज आप जो देंगे, वह सिर्फ़ दान नहीं होगा—
वह किसी बच्चे का कल होगा।
आइए,
हम सब मिलकर चौपाल पाठशाला को सिर्फ़ एक पहल नहीं,
बल्कि सैकड़ों बच्चों के जीवन की दिशा बनाएं।
आज ही आगे आएँ।
आज ही किसी सपने का हाथ थाम लें।