22/08/2022
#धर्म___
#श्रुतिविहित_स्वधर्म_पालन_ही_सर्वोच्च_धर्म_है!!
1. #धर्म_किसे_कहते_हैं ?
भगवान की आज्ञानुसार आचरण को धर्म कहते हैं । जिन कर्मों के करने से उन्नति हो और सच्चा सुख मिले उन कर्मों के आचरण को धर्म कहते हैं ।
2. #धर्म_का_पालन_करना_क्यों_आवश्यक_है?
धर्म का पालन करने से ही मनुष्य उन्नति कर सकता है और सच्चा सुख पा सकता है, अगले जन्मों में क्रमशः उन्नति करते हुए मुक्ति को प्राप्त करता है। इसलिए धर्म का पालन करना आवश्यक है।
3. #धर्म_का_पालन_नहीं_करने_से_क्या_हानि_है ?
धर्म का पालन नहीं करने से मनुष्य दिन पर दिन पतित होता जाता है, उसका जीवन दुखी हो जाता है और अगले जन्मों में पशु या कीड़े मकोडों का जन्म पाता है । धर्म का पालन नहीं करने से यही हानि है।
4. #धर्म_के_क्या_लक्षण_हैं ?
धर्म के दस लक्षण मनु महाराज ने बताए हैं -धृति,क्षमा,दम,अस्तेय,शौच, इन्द्रिय निग्रह ,धी,विद्या, सत्य और अक्रोध ।
5. #धृति_किसे_कह्ते_हैं ?
कष्ट आने पर नहीं घबड़ाना, धीरज रखना , शांत मन से अपने कार्य करते जाना धृति कहलाता है।
6. #क्षमा_किसे_कहते_हैं ?
किसी से अनजाने में अपराध हो जाय तो बुरा न मानना, क्रोध न करना, उससे बदले की भावना न रखना क्षमा कहलाता है।
7. िसे_कहते_हैं ?
सुख-दुख में अपने मन को वश में रखना दम कहलाता है।
8. #अस्तेय_किसे_कहते_हैं ?
दूसरे की चीज बिना उसकी जानकारी के नहीं लेना अस्तेय कहलाता है।चोरी न करना अस्तेय कहलाता है।
9. #शौच_किसे_कहते_हैं ?
घर-बाहर,शरीर,मन और वाणी को साफ रखना शौच कहलाता है।
10. #इन्द्रिय_निग्रह_किसे_कहते_हैं ?
अपनी इन्द्रियों को वश में रखने को इन्द्रिय-निग्रह कहते हैं ।
11. #धी_किसे_कहते_हैं ?
धी का अर्थ होता है-बुद्धि ।अपनी बुद्धि का विकास करना चाहिए। बुद्धि से अच्छी बातें ही सोचनी चाहिए।
12. #विद्या_किसे_कहते_हैं ?
विद्या कहते है ज्ञान को। मनुष्य को सत्य ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। असत्य ज्ञान को छोड़ देना चाहिए।
13. #सत्य_किसे_कहते_हैं ?
सच्चिदानंद श्रीकृष्ण ही पूर्ण-पुरुषोत्तम भगवान हें
सत्य-हरि का नाम सत्य
चेतन-आत्मा के रूप में
शरीर को जीवित
आनन्द- सुखदाता हें ।
उमा कहुँ मेँ अनुभव अपना
सत्य श्रीहरि जगत सब सपना ।।
14. #अक्रोध_का_क्या_अर्थ_होता_है ?
क्रोध नहीं करने को अक्रोध कहते हैं । किसी भी कारण से मन मे क्षोभ नहीं उत्पन्न होने देना चाहिए।
15. #धर्म_का_बोध_किस_प्रकार_होगा?
धर्म का बोध प्रमाणिक धर्म ग्रन्थों एवं सद् संतों की शरणागति से होगा।
नोट:-धर्म सभी मनुष्यों के लिए लाभकारी एवं उपयोगी होता है जबकि मज़हब कुछ मनुष्यों के समूह के लिये उपयोगी और अन्य के लिये अनुपयोगी एवं अहितकारी होता है। और जो वेदों में वर्णित है और जो गीता, भागवत, रामायण और वेदानुकूल आचरण है वही धर्म है।।
Arun Shastri जबलपुर
#प्रश्न_नही_स्वाध्याय_करें!!