Maitreyi Vedanusandhan Educational Services Institute, Delhi.

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Maitreyi Vedanusandhan Educational Services Institute, Delhi. Veda learning (1) Mani Prakash Pandey Uttar Pradesh, National President. (2) Madhav Prasad Tiwari
New Delhi, National General Secretary. General Assembly Member.

Maitreyi Vedanusandhan Educational Services Institute National Society,
Address ..... Plot Number G 115 B Khasra Number 448 Floor 1 Street No. 8 Bhagat Singh Park Village Sirspur City Delhi Pin Code 110042 ........ All the officers and members of the court. (3) Nitesh Tiwari
Madhya Pradesh, National Treasurer. (4) Sudhanshu Tripathi Nagpur
Maharashtra, National Secretary. (5) Moolraj Sharma
Jam

mu and Kashmir, Executive Member. (6) Jai Kumar Sharma
Himalayan Region, Executive Member. (7) Manish Sharma, Rajasthan
Executive Member

(8) Pawan Dubey, Siwan Bihar, Executive Member. (9) Suresh Kumar Shukla, Delhi, Executive Member. (10) Ranganath Tripathi, Gorakhpur Uttar Pradesh, Executive Member. (11) Praveen Kumar Pandey, Basti Uttar Pradesh, Executive Member. (12) Premnarayan Tripathi, Gorakhpur Uttar Pradesh, Executive Member. (1) Narayan Dutt Mishra, Chitrakoot Uttar Pradesh, Member. (2) Ravi Sharma, Jammu and Kashmir, Member. (3) Suraj Tiwari, Ludhiana, Member. (4) Arun Tiwari, Jharkhand, Member. (5) Shubham Sharma, Madhya Pradesh. (6) Vishnu Kaushik, Hingoli Maharashtra, Member. (7) Rajasekhar ,,,
, Andhra Pradesh,member

25/05/2026

#जप, #होम आदि (धार्मिक #अनुष्ठानों) के समय बिना किसी कारण के दूसरे #मनुष्य का #स्पर्श नहीं करना चाहिए। यदि अनजाने में (भूलवश) किसी का #स्पर्श हो जाए, तो #जल का स्पर्श ( #आचमन) करना चाहिए। किन्तु यदि #जानबूझकर किसी सवर्ण का स्पर्श किया जाए, तो तीन बार प्राणायाम करना चाहिए......

#जपहोमादिषु नरमन्यं नाकारणात्स्पृशेत्।
#अबुद्धिपूर्वसंस्पर्शश्चेत्तदा वार्युपस्पृशेत् । #बुद्धिपूर्वकसंस्पर्शे प्राणायामत्रयं #चरेत्।।

परन्तु यदि जिसका #स्पर्श हो गया वह व्रात्य शाखारण्ड हिनक्रिय पतित आदि हैं अथवा तो वो स्वयं निमित्तस्नानार्थी है तो #सचैल स्नान ही करना चाहिए ........

 #संतान दाता स्तोत्र......==================================🔸कुछ दिन पहले हमारे एक मित्र के फैमिली में एक लोगों की संतान...
23/05/2026

#संतान दाता स्तोत्र......
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🔸कुछ दिन पहले हमारे एक मित्र के फैमिली में एक लोगों की संतान बार बार नष्ट हो रही थी तब हमने उन्हें यह पाठ करने के लिए कहा और प्रभु कृपा से उनको पुत्र रत्न की प्राप्ति भी हुई ।
🔸अगर किसी भी स्त्री को बार बार मृत सन्तान की प्राप्ति हो रही है या गर्भ पात हो रहा है तो इस उपाय के माध्यम से आप अपनी समस्या सुलझा सकते हैं ।
♦️ #संतानदाता गणपति स्तोत्र♦️
नमोऽस्तु गणनाथाय सिद्धी बुद्धि युताय च।
सर्वप्रदाय देवाय पुत्र वृद्धि प्रदाय च।।
गुरु दराय गुरवे गोप्त्रे गुह्यासिताय ते।
गोप्याय गोपिताशेष भुवनाय चिदात्मनें।।
विश्व मूलाय भव्याय विश्वसृष्टि करायते।
नमो नमस्ते सत्याय सत्य पूर्णाय शुण्डिनें।।
एकदन्ताय शुद्धाय सुमुखाय नमो नम:।
प्रपन्न जन पालाय प्रणतार्ति विनाशिने।।
शरणं भव देवेश सन्तति सुदृढ़ां कुरु।
भविष्यन्ति च ये पुत्रा मत्कुले गण नायक।।
ते सर्वे तव पूजार्थ विरता: स्यु: वरो मत:।
पुत्रप्रदमिदं स्तोत्रं सर्व सिद्धि प्रदायकम्
❗सम्पूर्णम्❗
‼️गणेशार्पणमस्तु‼️
♦️ #नियम♦️
🔸इस स्तोत्र का नित्य 11-11 पाठ सुबह और शाम शुद्ध वस्त्र उपवस्त्र धारण करके करें ।
एक शुद्ध आसन पर बैठ जाएं फिर पंचोपचार पूजन करें साथ में पाठ करते समय देशी घी का दीपक अवश्य जलाये ।
🔸जप 11 पाठ पूर्ण हो जाये तो स्तोत्र समर्पित करके आसन के नीचे जल छोड़कर माथे पर लगाएं ।
🔸इस विधि से इस स्तोत्र के प्रभाव से आप यशस्वी सन्तान प्राप्त कर सकते है ।
🔸स्तोत्र का पाठ करने से पूर्व अपनी कुंडली का भी किसी योग्य ज्योतिषी से विश्लेषण अवश्य कराएं और स्तोत्र सम्बंधित सम्पूर्ण विधि जान लेवें ।
🙇 #जयश्रीसीताराम🙇

21/05/2026

प्रश्न: मंत्र के प्रारंभ में ‘हरि: ओम्’ क्यों?
उत्तर: वेद पाठ के प्रारंभ में मंत्रोच्चारण से पूर्व ‘हरि:ओऽम्’ का उच्चारण करना वैदिक परंपरा है। वेद के अशुद्ध उच्चारण में ‘महापातक’ नामक दोष लगता है। इस संभावित दोष की निवृत्ति हेतु आदि और अंत में ‘हरि: ओऽम्’ शब्द का उच्चारण करना अनिवार्य है।
श्री मद्भागवत में भी लिखा है कि -
‘‘सर्वं करोति निश्छिद्रं नाम संकीर्तनं हरेः।’
मंत्रोच्चार, विधि-विधान, देशकाल और वस्तु की कमी के कारण धर्मानुष्ठान में जो भी कमी हो, हरि नाम का संकीर्तन करने से वे सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।

20/05/2026

विवाहश्च विवादश्च तुल्यशीलैर्नृपेश्यते।। ( विष्णुपुराण ३/१२/२२) विवाह और विवाद सदा समान व्यक्तियों से ही होना चाहिए।

20/05/2026

आचारहीनं न पुनन्ति वेदा यदप्यधीताः सह षड्भिरंगैः ।
छान्दांस्येन मृत्युकाले त्यजन्ति नीडं शकुन्ता इव जातपक्षाः। ।

शिक्षा, कल्प , निरूक्त , छन्द , व्याकरण , और ज्योतिष - इन छहों अंगों सहित अध्ययन किये हुऐ वेद भी आचारहीन पुरूष को पवित्र नहीं करते ...,पंख पैदा होने पर जैसे पक्षी अपने घौंसले को छोड देता है .. ऐसे ही मृत्यु समय में आचारहीन पुरूष को वेद छोड देते हैं ।।

17/05/2026

जिस व्यक्ति को लगता है उसके अंदर आत्मविश्वास की कमी है हर बात भूल जाने की बीमारी हो, हमेशा ही अनजाना भय रहता हो कहीं पर भी जाता हो और लोगों को देखकर डरता हो सामान्य शब्दों में बोले तो लोगों की भीड़ में वह चुप सा हो जाता हो तो ऐसे जातक को तीन मुखी रुद्राक्ष हरिहरात्मक रुप से अभिमंत्रित करके धारण करे।।

14/05/2026

#दक्षिण-पूर्व में #किचन का अर्थ भोजन से नहीं बल्कि #धन या #लक्ष्मी से है ! जिस तरह से #उत्तर दिशा धन के अवसरों या बिज़नेस, #नौकरी की तथा जल की है ठीक उसी तरह दक्षिण-पूर्व #कैश धन की और #अग्नि की है ! तो दक्षिण-पूर्व में #आग जलती रहे इसीलिये वहाँ पर किचन का चूल्हा रखने का #कांसेप्ट है ! इसीलिये दक्षिण-पूर्व में किचन ना होने की स्थिति में #लाल बल्ब जलाने का कॉन्सेट है ! पहले दक्षिण-पूर्व में #यज्ञ होते थे ! मैं आज भी दक्षिण-पूर्व में #हवन किया करता हूँ !

09/05/2026

ज़्यादा टेंसन और रुकावट या विपरीत समय हो तो 108 पाठ राम रक्षा स्तोत्र, 108 माला आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसंपदाम्.. जप करो सब बदल जाएगा 108 दिन ...

29/04/2026

अपि संपूर्णता युक्तैः कर्तृव्या सुहृदो बुधैः।
नदीशः परिपूर्णोऽपि चन्द्रोदयमपेक्षते।।
भावार्थ--
जिस प्रकार समुद्र को अथाह जल राशि के होते हुए भी ज्वार उत्पन्न करने के लिए चन्द्रमा की आवश्यकता पडती है। उसी तरह सर्वगुण संपन्न विद्वान् व्यक्ति को भी किसी विशेष कार्य को संपन्न करने के लिये अपने मित्रों की सहायता की आवश्यकता पड़ती है|

कर्मकाण्ड प्रयोग विधि
28/04/2026

कर्मकाण्ड प्रयोग विधि

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