Society to Uplift Rural Economy- SURE, Barmer

Society to Uplift Rural Economy- SURE, Barmer SURE is the acronym of Society to Uplift Rural Economy, as the name suggested SURE is empowering the rural economy of border district Barmer.

The journey started in the year 1990 when Padmashree Magraj Jain along with a dedicated & devoted team of youths

On 15 May 2026 - Organized Balance use of fertilizer Campaign cm Kharif Kisan gosthi at Rohidi, Gadra road along with t...
15/05/2026

On 15 May 2026 - Organized Balance use of fertilizer Campaign cm Kharif Kisan gosthi at Rohidi, Gadra road along with total 86 participants with the co-operation of SMS - Horti., SMS - H.Sc. & SMS -AH.

On 04 may 2026 - Organized Balance use of fertilizer Campaign cm Kharif Kisan gosthi at Konra village alongwith total 6...
04/05/2026

On 04 may 2026 - Organized Balance use of fertilizer Campaign cm Kharif Kisan gosthi at Konra village alongwith total 61 men participants with the cooperation of SS&H, SMS (H.Sc.) and P. A. (A.v. aids).

Awareness program on balanced use of fertilizer Total 31 participants
30/04/2026

Awareness program on balanced use of fertilizer
Total 31 participants

Awareness on balance use of fertilizer at Marudi Barmer
30/04/2026

Awareness on balance use of fertilizer at Marudi Barmer

29/04/2026
29/04/2026
बाड़मेर 22 अप्रैल !असंतुलित रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से जहां एक ओर खेत की उर्वरा शक्ति कमजोर हो रही है तो  दूसरी तरफ ...
23/04/2026

बाड़मेर 22 अप्रैल !
असंतुलित रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से जहां एक ओर खेत की उर्वरा शक्ति कमजोर हो रही है तो दूसरी तरफ इनका आयात करने से देश पर आर्थिक दबाव भी बढ़ता है, उक्त विचार कृषि विज्ञान केंद्र [श्योर], दांता के प्रभारी डॉक्टर विनय कुमार ने आज दरूडा उच्च माध्यमिक विद्यालय में केन्द्र द्वारा आयोजित "उर्वरकों का संतुलित प्रयोग" कार्यक्रम में उपस्थित छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किये I
कुमार ने कहा कि परंपरागत देसी खादो से हम दूर होकर अधिक उत्पादन हेतु खेत में पोषक तत्वों की कमी की पूर्ति हेतु रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग असंतुलित रूप से करते जा रहे हैं जिससे हमारे खेत की उर्वरा शक्ति कमजोर होती जा रही है अतः हमें अपने खेत की मिट्टी व पानी की जांच करवा कर अनुशंसा के अनुसार ही इन रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए ताकि खेत की उर्वरक क्षमता बनी रहे!
केंद्र के शस्य वैज्ञानिक श्याम दास ने मिट्टी व पानी के नमूने लेने में रखी जाने वाली सावधानियों पर चर्चा करते हुए कहा कि इन जांचों की सुविधा, केंद्र पर उपलब्ध है अतः जांच के आधार पर दी गई मात्रा के अनुसार ही रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करें ताकि खेतों में लागत की कमी के साथ खेत की लंबे समय ओर उर्वरकता बनी रहेl
केंद्र के बागवानी विशेषज्ञ बुधाराम मोरवाल ने रासायनिक उर्वरको की निर्भरता कम करने व देसी तरीकों से तैयार जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत आदि तैयार करने व प्रयोग की विधि बताई!
केंद्र के पशुपालन विशेषज्ञ जगपाल जोगी ने कहा कि बाड़मेर जिले की खेती पशुपालन आधारित है अतः पशुपालन से प्राप्त गोबर व मूत्र आदि से कंपोस्ट, गोबर खाद ,वर्मी कंपोस्ट,मिंगनि की खाद, हरी खाद आदि तैयार कर इन रासायनिक उर्वरको पर निर्भरता कम की जा सकती है!
विद्यालय के प्रिंसिपल मूलाराम ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि आज पृथ्वी दिवस के उपलक्ष में हम सभी को पृथ्वी को स्वस्थ एवं प्रदूषण रहित बनाने के लिए अधिक से अधिक मात्रा में पेड़ लगाकर उन्हें बड़े होने तक अपने बच्चों की तरह पालने का संकल्प लेना होगा, साथ ही प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग करना सीखना होगा जिससे संपूर्ण भारतवर्ष में आने वाली पीढ़ियां प्रदूषण के प्रभाव से सुरक्षित रह सकेl कार्यक्रम सहायक सुनील राखेचा ने बताया कि कार्यक्रम में कुल 118 छात्र- छात्राओं ने भाग लिया I

बाड़मेर 22 अप्रैल !संतुलित रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से जहां एक ओर खेत की उर्वरा शक्ति कमजोर हो रही है तो  दूसरी तरफ इ...
22/04/2026

बाड़मेर 22 अप्रैल !
संतुलित रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से जहां एक ओर खेत की उर्वरा शक्ति कमजोर हो रही है तो दूसरी तरफ इनका आयात करने से देश पर आर्थिक दबाव भी बढ़ता है, उक्त विचार कृषि विज्ञान केंद्र [श्योर], दांता के प्रभारी डॉक्टर विनय कुमार ने आज दरूडा उच्च माध्यमिक विद्यालय में केन्द्र द्वारा आयोजित "उर्वरकों का संतुलित प्रयोग" कार्यक्रम में उपस्थित छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किये I
कुमार ने कहा कि परंपरागत देसी खादो से हम दूर होकर अधिक उत्पादन हेतु खेत में पोषक तत्वों की कमी की पूर्ति हेतु रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग असंतुलित रूप से करते जा रहे हैं जिससे हमारे खेत की उर्वरा शक्ति कमजोर होती जा रही है अतः हमें अपने खेत की मिट्टी व पानी की जांच करवा कर अनुशंसा के अनुसार ही इन रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए ताकि खेत की उर्वरक क्षमता बनी रहे!
केंद्र के शस्य वैज्ञानिक श्याम दास ने मिट्टी व पानी के नमूने लेने में रखी जाने वाली सावधानियों पर चर्चा करते हुए कहा कि इन जांचों की सुविधा, केंद्र पर उपलब्ध है अतः जांच के आधार पर दी गई मात्रा के अनुसार ही रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करें ताकि खेतों में लागत की कमी के साथ खेत की लंबे समय ओर उर्वरकता बनी रहेl
केंद्र के बागवानी विशेषज्ञ बुधाराम मोरवाल ने रासायनिक उर्वरको की निर्भरता कम करने व देसी तरीकों से तैयार जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत आदि तैयार करने व प्रयोग की विधि बताई!
केंद्र के पशुपालन विशेषज्ञ जगपाल जोगी ने कहा कि बाड़मेर जिले की खेती पशुपालन आधारित है अतः पशुपालन से प्राप्त गोबर व मूत्र आदि से कंपोस्ट, गोबर खाद ,वर्मी कंपोस्ट,मिंगनि की खाद, हरी खाद आदि तैयार कर इन रासायनिक उर्वरको पर निर्भरता कम की जा सकती है!
विद्यालय के प्रिंसिपल मूलाराम ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि आज पृथ्वी दिवस के उपलक्ष में हम सभी को पृथ्वी को स्वस्थ एवं प्रदूषण रहित बनाने के लिए अधिक से अधिक मात्रा में पेड़ लगाकर उन्हें बड़े होने तक अपने बच्चों की तरह पालने का संकल्प लेना होगा, साथ ही प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग करना सीखना होगा जिससे संपूर्ण भारतवर्ष में आने वाली पीढ़ियां प्रदूषण के प्रभाव से सुरक्षित रह सकेl कार्यक्रम सहायक सुनील राखेचा ने बताया कि कार्यक्रम में कुल 118 छात्र- छात्राओं ने भाग लिया I

सुउदय परियोजना के तहत स्कूल हेडमास्टरों की एक दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यशाला विशाला में संपन्नबाड़मेर 18 अप्रैल 2026 सोसायटी...
19/04/2026

सुउदय परियोजना के तहत स्कूल हेडमास्टरों की एक दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यशाला विशाला में संपन्न

बाड़मेर 18 अप्रैल 2026 सोसायटी टू अपलिफ्ट रूरल इकोनामी (शयोर ) द्वारा ‘सुजलॉन फाउंडेशन के सौजन्य से संचालित सुउदय परियोजना के तहत परियोजना क्षेत्र के 25 गांवो ब्लॉक बाड़मेर एवं शिव क्षेत्र के सरकारी प्राथमिक उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापको की एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन सामुदायिक सभा भवन सेजूओ की ढाणी (विशाला ) मैं आयोजित हुई | कार्यशाला में 28 संभागियों ने भाग लिया | कार्यक्रम प्रबंधक हनुमान राम चौधरी ने बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों एवं स्वैच्छिक संगठनों के बीच आपसी बेहतर समन्वयंन सहयोग, संसाधन साझाकरण बरसाती पानी का संग्रहण और छात्र कल्याण के साथ बालिका शिक्षा एवं गुणात्मक शिक्षा विद्यालय से वंचित बालक बालिकाओ को अनिवार्य रूप से शिक्षा से जोड़ना बागवानी एवं विद्यालय परिसर में फलदार फूलदार एवं छायादार पेड़ लगाकर पर्यावरण को बढ़ावा देना है |कार्यशाला के प्रारंभ में ईश वंदना के साथ कार्यक्रम प्रबंधक हनुमान राम चौधरी ने उपस्थित संस्था प्रधानों का स्वागत करते हुए एवं कार्यशाला के उद्देश्य एवं परियोजना कार्यों की कार्यप्रगति की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि संस्था पिछले एक वर्ष से सूउदय परियोजना के तहत ग्रामीण विकास के साथ सरकारी विद्यालयों में किचन गार्डन वृक्षारोपण बरसाती पानी का संग्रहण दिवस कार्यक्रमों का आयोजन किशोरी बालिकाओं के जीवन कौशल प्रशिक्षण के साथ घोसला वितरण इत्यादि कार्य आयोजित किए गए हैं | जिसमें विद्यालय प्रशासन एवं स्टाफ का पूर्ण सहयोग मिला है और भविष्य में भी संस्था द्वारा विद्यालयों के विकास हेतु उनकी मांग अनुसार आवश्यकता अनुसार यथा संभव सहयोग किया जाएगा |कार्यशाला में सुजलॉन फाउंडेशन के सीनियर मैनेजर किशन लाल जाखड़ ने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु गुरुजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है अतः गुरु जन पूर्ण निष्ठा लगन मेहनत के साथ विद्यालय के छात्र-छात्राओं के उत्कृष्ट कल्याण हेतु सराहनीय प्रयास कर रहे हैं वह तारीफें काबिल है | उन्होंने सुजलॉन फाउंडेशन द्वारा सामाजिक सरोकार के तहत किये जा रहे प्रयासों की जानकारी प्रदान की | विद्यालयों के विकास हेतु शयोर संस्था एवं सुजलॉन फाउंडेशन से यथा संभव सहयोग करने का भरोसा दिलाया | कार्यशाला में चार समूहों का विभाजन कर महत्वपूर्ण विषयों पर ग्रुप चर्चा कर उनका प्रस्तुतीकरण करवाया गया जो काफी उपयोगी एवं सार्थक रहा | कार्यशाला में जामन सिंह गिरधर सिंह जोगाराम डूंगर दान नगाराम चुतराराम मोहित दवे मोनिका शर्मा भाग्यश्री अलका पहाड़िया इत्यादि ने अपने अनुभव साझा किये | कार्यशाला में भाग लेने वाले सभी संस्था प्रधानों को स्मृति चिन्ह वार्षिक कैलेंडर एवं मिट्टी के घोंसले भेंट कर उनका सम्मान किया गया | कार्यशाला में दिनेश कुमार अंकिता पांडे सुरेंद्र कुमार त्रिपाठी चेनाराम इत्यादि का सक्रिय सहयोग रहा | कार्यशाला की समाप्ति पर सहायक परियोजना समन्वयक महबूब सिद्धर ने धन्यवाद किया |कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम प्रबंधक हनुमान राम चौधरी द्वारा किया गया |

Address

Gurudwara Road, Near Jhulelal Mandir
Barmer
344001

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