23/04/2026
बाड़मेर 22 अप्रैल !
असंतुलित रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से जहां एक ओर खेत की उर्वरा शक्ति कमजोर हो रही है तो दूसरी तरफ इनका आयात करने से देश पर आर्थिक दबाव भी बढ़ता है, उक्त विचार कृषि विज्ञान केंद्र [श्योर], दांता के प्रभारी डॉक्टर विनय कुमार ने आज दरूडा उच्च माध्यमिक विद्यालय में केन्द्र द्वारा आयोजित "उर्वरकों का संतुलित प्रयोग" कार्यक्रम में उपस्थित छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किये I
कुमार ने कहा कि परंपरागत देसी खादो से हम दूर होकर अधिक उत्पादन हेतु खेत में पोषक तत्वों की कमी की पूर्ति हेतु रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग असंतुलित रूप से करते जा रहे हैं जिससे हमारे खेत की उर्वरा शक्ति कमजोर होती जा रही है अतः हमें अपने खेत की मिट्टी व पानी की जांच करवा कर अनुशंसा के अनुसार ही इन रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए ताकि खेत की उर्वरक क्षमता बनी रहे!
केंद्र के शस्य वैज्ञानिक श्याम दास ने मिट्टी व पानी के नमूने लेने में रखी जाने वाली सावधानियों पर चर्चा करते हुए कहा कि इन जांचों की सुविधा, केंद्र पर उपलब्ध है अतः जांच के आधार पर दी गई मात्रा के अनुसार ही रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करें ताकि खेतों में लागत की कमी के साथ खेत की लंबे समय ओर उर्वरकता बनी रहेl
केंद्र के बागवानी विशेषज्ञ बुधाराम मोरवाल ने रासायनिक उर्वरको की निर्भरता कम करने व देसी तरीकों से तैयार जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत आदि तैयार करने व प्रयोग की विधि बताई!
केंद्र के पशुपालन विशेषज्ञ जगपाल जोगी ने कहा कि बाड़मेर जिले की खेती पशुपालन आधारित है अतः पशुपालन से प्राप्त गोबर व मूत्र आदि से कंपोस्ट, गोबर खाद ,वर्मी कंपोस्ट,मिंगनि की खाद, हरी खाद आदि तैयार कर इन रासायनिक उर्वरको पर निर्भरता कम की जा सकती है!
विद्यालय के प्रिंसिपल मूलाराम ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि आज पृथ्वी दिवस के उपलक्ष में हम सभी को पृथ्वी को स्वस्थ एवं प्रदूषण रहित बनाने के लिए अधिक से अधिक मात्रा में पेड़ लगाकर उन्हें बड़े होने तक अपने बच्चों की तरह पालने का संकल्प लेना होगा, साथ ही प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग करना सीखना होगा जिससे संपूर्ण भारतवर्ष में आने वाली पीढ़ियां प्रदूषण के प्रभाव से सुरक्षित रह सकेl कार्यक्रम सहायक सुनील राखेचा ने बताया कि कार्यक्रम में कुल 118 छात्र- छात्राओं ने भाग लिया I