क्षत्रिय करणी सेना, बरेली टीम, ठाकुरों का गढ़ आंवला

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क्षत्रिय करणी सेना, बरेली
टीम, ठाकुरों का गढ़ आंवला छत्रिय करणी सेना, बरेली – युवा शक्ति का एकता सूत्र। विरासत का गर्व और सर्व समाज के हितों के लिए निष्ठ

21/09/2025

रावण, कुंभकर्ण, अहिरावण, सुबाहु, मारीच, अक्षयकुमार, लवणासुर, मधु, केटु, बाणासुर, तारकासुर, शम्बरासुर, विद्युज्जीव, मयासुर, इल्वल, वातापी, शंखचूड़, वज्रनाभ, नरकासुर, कालनेमि, सोमादत्त, बृहद्रथ, शुक्राचार्य के अत्याचारी शिष्य और अनेक अन्य ब्राह्मण वंशज राक्षस तथा राजा जो धर्म का विनाश कर आतंक फैलाते थे, उन सबको हमारे पराक्रमी क्षत्रिय वीरों जैसे भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, श्रीकृष्ण, शत्रुघ्न, अर्जुन, भीम, पराक्रमी पांडवों और अन्य धर्मरक्षक नरेशों ने युद्ध में परास्त कर पृथ्वी को उनके आतंक से मुक्त कराया और धर्म की पुनर्स्थापना की

21/09/2025

हैहय वंश में जन्मा कर्तवीर्य अर्जुन, जिसे सहस्रबाहु अर्जुन कहा जाता था, एक महान क्षत्रिय राजा था। हैहय वंश चंद्रवंश की शाखा था और कर्तवीर्य अर्जुन इस वंश का सबसे पराक्रमी राजा माना जाता था। भगवान दत्तात्रेय की घोर तपस्या करके उसने सहस्र भुजाओं का वरदान प्राप्त किया था, साथ ही अपार बल, तेज और युद्ध कौशल भी। उसका साम्राज्य नर्मदा तट से लेकर अनेक जनपदों तक फैला हुआ था और उसकी वीरता के किस्से पूरे आर्यावर्त में प्रसिद्ध थे। एक समय ऐसा भी आया जब यह राजा ऋषि जमदग्नि के आश्रम में पहुँचा और वहाँ की कामधेनु से मोहित होकर उसे बलपूर्वक ले जाने लगा। इस घटना के बाद परशुराम और कर्तवीर्य अर्जुन के बीच भयंकर युद्ध हुआ। प्रारम्भ में सहस्रबाहु अर्जुन की अपार शक्ति और सहस्र भुजाओं के कारण परशुराम को भी युद्ध में संघर्ष करना पड़ा और कई क्षणों तक वे दबाव में आ गए, परन्तु अंततः उन्हें अपनी दिव्य शक्ति का प्रयोग करना पड़ा और तभी वे कर्तवीर्य अर्जुन को परास्त कर सके। अब सोचिए जब एक क्षत्रिय राजा, जो भगवान श्रीराम की चरण-धूलि के बराबर भी नहीं था, वह परशुराम जैसे महायोद्धा को इस हद तक चुनौती दे सकता है कि परशुराम को अपनी दिव्य शक्ति का सहारा लेना पड़े, तो हमारे भगवान श्रीराम जो स्वयं भगवान विष्णु के अवतार थे, यदि चाहते तो परशुराम का वध करने में उन्हें एक क्षण भी नहीं लगता। परन्तु हमारे क्षत्रिय धर्म में ब्राह्मणों को गुरु माना गया है, सम्मान और आदर दिया गया है। भगवान श्रीराम ने भी परशुराम को गुरु मानकर उनका सम्मान किया, उन्हें क्रोध से रोका और अपनी ब्रह्म मुस्कान और मर्यादा से उनका हृदय जीत लिया। यही कारण है कि परशुराम ने भी श्रीराम के तेज और दिव्य स्वरूप को पहचानकर अपने शस्त्र त्याग दिए और उन्हें भगवान के रूप में स्वीकार किया। यह स्पष्ट प्रमाण है कि परशुराम द्वारा पृथ्वी को इक्कीस बार क्षत्रियविहीन करने की कथाओं का कोई ठोस आधार नहीं है, क्योंकि स्वयं हैहय वंश का एक राजा उन्हें युद्ध में इस हद तक चुनौती दे चुका था और भगवान श्रीराम जैसे पराक्रमी अवतार के सामने तो उनका टिक पाना असंभव ही था

20/09/2025

मैं कृष्णा गोपाल सिंह उर्फ बब्बू ठाकुर, युवा जिलाअध्यक्ष क्षत्रिय करणी सेना, बरेली, अपने छोटे भाई शिवा सिंह उर्फ शिवाय ठाकुर, विशाल सिंह उर्फ बिल्ला ठाकुर तथा अपनी पूरी क्षत्रिय करणी सेना टीम की ओर से आप सभी क्षत्रिय राजपूत समाज के भाइयों और समस्त समाज के सभी लोगों को हार्दिक चरणवंदन करता हूँ। हमारा यह संदेश केवल अपने समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि समस्त समाज के हितों, सुरक्षा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए समर्पित है। हम चाहते हैं कि युवा शक्ति एकजुट होकर समाज में एकता, अनुशासन और परंपराओं के सम्मान को बनाए रखे। हमारा मार्गदर्शन महान वीर महाराणा प्रताप के आदर्शों से प्रेरित है, जिन्होंने अपने जीवन में केवल अपने समाज के लिए नहीं, बल्कि सभी प्रजा के सम्मान और सुरक्षा के लिए संघर्ष किया। उसी सिद्धांत के साथ हम भी समाज के सभी लोगों के हितों और सुरक्षा के लिए निष्ठापूर्वक कार्यरत हैं और इस संगठन के माध्यम से समाज पर हो रहे अन्याय और अन्यायपूर्ण गतिविधियों के खिलाफ भी अपनी आवाज उठाएंगे। आइए, हम सब मिलकर समाज के कल्याण, संस्कृति और विरासत के संरक्षण के लिए एक सक्रिय और मजबूत समुदाय का निर्माण करें।

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