26/06/2025
# # # छत्रपति शिवाजी महाराज का विविधतापूर्ण प्रशासनिक ढांचा
मराठा साम्राज्य, जिसे छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्थापित किया था, एक ऐसा राजनीतिक और प्रशासनिक मॉडल पेश करता है जिसमें विविधता को बढ़ावा दिया गया। शिवाजी महाराज के काल में प्रशासनिक और सैनिक दोनों ही क्षेत्रों में सभी जातियों और धर्मों को समान अवसर दिए गए। इस दृष्टिकोण ने साम्राज्य को न केवल मजबूत किया, बल्कि साम्राज्य के भीतर एकजुटता और अखंडता को भी बढ़ावा दिया।
# # # # विविधता की स्वीकृति
शिवाजी महाराज ने विभिन्न जातियों और धर्मों के लोगों को अपनी सेना और प्रशासन में शामिल किया। उदाहरण स्वरूप, किलों की देखरेख करने वाले किल्लेदार दलित थे, जबकि सेनापति और अंगरक्षक मुसलमान थे। यह न केवल शोचनीय था, बल्कि उदाहरण भी था कि कैसे महाराज ने सभी को समानता दी। इसके विपरीत, पेशवाओं के शासनकाल में यह विविधता समाप्त होने लगी। उन्होंने प्रशासन में अपने ही जाति के लोगों को प्राथमिकता देना शुरू किया और इससे समाज में असंतोष फैला।
# # # # पेशवाओं का वर्चस्व
19वीं सदी में कोल्हापुर रियासत की स्थिति इस परिवर्तन को प्रदर्शित करती है। उस समय के प्रशासनिक सेवाओं में 71 उच्च पदों में से 60 पदों पर ब्राह्मणों का कब्जा था। इसी तरह, 500 क्लर्कों में से 490 ब्राह्मण जाति के थे। यह स्थिति समग्र सामाजिक और राजनीतिक ढांचे में एकरसता को दर्शाती है। पेशवाओं ने इस मामले में ऐसी प्रणाली स्थापित की जिससे विभिन्नता को खत्म किया गया और सामाजिक समीकरणों को बिगाड़ा गया।
# # # # छत्रपति शाहूजी महाराज का कदम
इस अव्यवस्था और जातीय भेदभाव को समाप्त करने के लिए छत्रपति शाहूजी महाराज ने 1902 में एक क्रांतिकारी कदम उठाया। उन्होंने पिछड़े वर्ग के लिए 50% आरक्षण लागू किया। यह पहल न केवल सामाजिक न्याय के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था, बल्कि इसने विभिन्न जातियों के बीच के असमानता को खत्म करने का प्रयास किया। उनके इस निर्णय ने तमाम अगड़ी जातियों के वर्चस्व को चुनौती दी और उन्हें यह समझाया कि प्रशासनिक विभाग में केवल एक ही जाति का वर्चस्व नहीं होना चाहिए।
# # # # डॉ. आंबेडकर की प्रेरणा
डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर ने छत्रपति शाहूजी महाराज की इस नीतियों को एक प्रेरणा के रूप में लिया। उन्होंने समझा कि समाज में समानता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिनिधित्व की व्यवस्था आवश्यक है। उनका विचार था कि हमारे समाज का विकास तभी संभव है जब हर वर्ग और जाति को सशक्त बनाया जाए और उन्हें उनके अधिकार प्रदान किए जाएं।
# # # निष्कर्ष
छत्रपति शाहूजी महाराज की जयंती के अवसर पर हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि उनका दृष्टिकोण और कार्य एक आदर्श समुदाय के निर्माण के लिए मार्गदर्शक रहा है। उन्होंने न केवल शासन में विविधता को स्वीकार किया, बल्कि सामाजिक न्याय की नींव भी रखी। इसलिए, आइए हम महान राजा को दंडवत प्रणाम करते हुए उनके विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लें, ताकि हम एक समान और समृद्ध समाज की ओर बढ़ सकें।