श्रद्धेय श्री,
भगवान महावीर स्वामी के 2600 वां जन्म कल्याणक महोत्सव एवं तारीख 05.10.2001, यही वह मांगलिक दिन था, जब जीवदया प्रेमी - शासनरत्न श्रद्धेय श्री कुमारपाल भाई वी. शाह, कलिकुण्ड - धोलका, अहमदाबाद (गुजरात) की सद्प्रेरणा एवं सरस्वती पुत्र श्रद्धेय संत श्री कमलकिशोर जी नागर, मालवा (मध्यप्रदेश) के कृपा आर्शीवाद से सेवाभावी - जीवदया प्रेमी माननीय श्री प्रमोद जी भाया, उपाध्यक्ष राजस्थान प्रदे
श काॅग्रेस कमेटी एवं पूर्व मंत्री राजस्थान सरकार के मार्गदर्शन में ‘श्री महावीर गौशाला कल्याण संस्थान’ की स्थापना की गई।
इसके अन्तर्गत जीवदया सेवा विभाग तथा पीडि़त मानव सेवा विभाग के संचालन की अवधारणा बनाकर कार्य प्रारंभ किया गया, जिसमें सर्वप्रथम लाचार, बेसहारा एवं दुर्घटनाग्रस्त जीवों, खासकर गौवंश के प्रति लोगों में संवेदना जागृत कर जीवदया हितार्थ व कल्याणार्थ पांच पांजरापोल का संचालन की योजना बनी, जबकि पीडि़त मानव समाज की सर्वांगिण सेवार्थ बारां तथा कोटा के सरकारी अस्पतालों में रोगी सेवा केन्द्र खोलने सहित अन्य गतिविधियों को चलाने के लिए बहुद्देश्शीय सेवा केन्द्र स्थापित करने का निर्णय हुआ।
जीवदया कार्य निमिŸा वर्ष 2002 के दौरान बारां से 10 कि.मी. की दूरी पर ग्राम जालेड़ा में प्रथम गौशाला विकसित की गई, जहां वर्तमान में 700 से ज्यादा गौवंश का पालन-पोषण हो रहा है। इसी तरह करीब एक वर्ष पूर्व बारां से 65 कि.मी. दूर ग्राम मामोनी में द्वितीय यूनिट स्थापित हुई, जहां 500 से ज्यादा गौवंश की सेवा की जा रही है।
तदुपरांत ग्राम बड़ां में श्री बालाजी धाम के सम्मुख तृतीय यूनिट का कार्य प्रारंभ हुआ, जो कि वर्तमान में निर्माणाधीन है। यहां अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त ‘बहुद्देश्शीय जीवदया चिकित्सालय एवं मोबाइल हेल्पलाइन अनुसंधान केन्द्र’ स्थापित कर संस्थान इस क्षेत्र में जीवदया कार्यों को एक नयी ऊंचाई प्रदान करना चाहता है, ताकि दुर्घटनाग्रस्त गौवंश सहित सभी तरह के जीवों को समय रहते उपचार प्रदान कर बचाया जा सके। इसके पश्चात ग्राम बोरेडी तथा ग्राम बमूलिया में संस्थान की दो अलग-अलग गौशालाएं और स्थापित की जानी हैं, जिससे कि बारां जिला मुख्यालय प्रत्येक छोर से जीवदया कार्य की सेवा डोर में बांधा जा सके।
दूसरी ओर इस संस्थान द्वारा पीडि़त मानव सेवा विभाग की औपचारिक शुरूआत की गई, जिसके अन्तर्गत तारीख 20.02.2006 को राजकीय चिकित्सालय, बारां में प्रथम रोगी सेवा केन्द्र खोला गया। इस केन्द्र से भर्ती रोगियों को प्रातःकाल दूध एवं सुबह-शाम का भोजन देने का कार्य शुरू हुआ। इसके बाद तो सेवा कार्यों की श्रृंखला बनती चली गयी, जिसमें मुख्यतः रोगी सेवादार सेवा, रोगी सहायता सेवा (चिकित्सालय से बाहर की जांच एवं दवा), गंभीर रोगी उपचार एवं आॅपरेशन सेवा, डेडबाॅडी एम्बूलेन्स सेवा, दोपहर विश्राम सेवा, रात्रि विश्राम सेवा, रोगी-परिजन आहार सेवा, एलकेजी से उच्च शिक्षा तक निर्धन विद्यार्थी शिक्षा सहायता सेवा, पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्द्धन सेवा, सर्वजातीय विवाह सम्मेलन सेवा, पीडि़त मानव सहायता सेवा, ग्रीष्मकालीन सार्वजनिक मिनरल वाॅटर सेवा एवं बारहमासी वाॅटर कूलर सेवा शामिल हैं।
इसी तरह संस्थान के मानव सेवा विभाग द्वारा द्वितीय यूनिट कोटा नयापुरा स्थित सांघी धर्मशाला परिसर में स्थापित की गई। इससे बारां एवं झालावाड़ सहित कोटा संभाग तथा आसपास से ईलाज के लिए एमबीएस चिकित्सालय पहुंचने वाले रोगियों-परिजनों को शुद्ध एवं सात्विक भोजन की निशुल्क सेवा उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसी तरह जयपुर स्थित एसएमएस चिकित्सालय के पास हाड़ौती से जाने वाले रोगियों की सेवार्थ अस्थायी रोगी सेवा केन्द्र खोलकर निशुल्क भोजन आदि की व्यवस्था संचालित की जा रही है।
खास बात यह है कि संस्थान के जीवदया एवं पीडि़त मानव सेवा विभाग की उक्त सभी सेवाएं ‘निशुल्क’ संचालित की जा रही हंै।
वस्तुतः जब इस संस्थान की स्थापना की जा रही थी, तब साथियों के मन में एक बड़ा सवाल यह उठा कि आखिर जीवदया एवं पीडि़त मानव सेवा विभाग की इन योजनाओं को संचालित करने के लिए आखिर पैसा कहां से जुटायेंगे ? लेकिन आज यह देखकर प्रसन्नता है कि सेवारूपी रथ आप जैसे दानदाताओं तथा कर्मनिष्ठ कार्यकर्ताओं के सक्रिय सहयोग से अनवरत बढ़ता चला जा रहा हैं।
असल में यह प्रयास और अधिक परिणाम-मूलक यानि सार्थक तभी बन सकेगा। जब उचित आर्थिक सहयोग एवं अमूल्य मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए आप खुद हमारे साथ जुड़ जावें।
मैं उम्मीद करता हूॅ, जीवदया एवं पीडि़त मानव सेवा विभाग की इन योजनाओं की सतत् क्रियान्विती में आपकी सहभागिता का कृपा आर्शीवाद अवश्य प्राप्त होगा।
सधन्यवाद एवं प्रणाम। आपका
(गौतम कुमार जैन)
अध्यक्ष