12/08/2026
भगवान ऋग्वेदपुरूष कहते है कि माता रुद्राणां दुहिता वसूनां स्वसादित्यानाममृतस्य नाभिः।
अर्थात पूज्या वेदलक्षणा गोमाता ग्यारह
रुद्रदेवता की माता आठ वसु देवताओ की पुत्री बारह आदित्य देवताओ की बहिन और दिव्य गोघृतामृत की टकसाल है अतः मानव जाति को अपने सर्वोदय के लिए पूज्या गोमाता की सेवा पुर्वक उनकी शरण का आश्रय लेना चाहिए
।। जयश्री कामधेनु कृष्ण ।।