Hanumant Aashram Foundation

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Hanumant Aashram Foundation At Hanumant Aashram Foundation, we believe that every act of charity, no matter how big or small, has the power to bring about positive change.

15/08/2026

चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ।
चाह नहीं, प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ॥

चाह नहीं, सम्राटों के शव पर, हे हरि, डाला जाऊँ।
चाह नहीं, देवों के सिर पर चढूँ, भाग्य पर इठलाऊँ॥

मुझे तोड़ लेना वनमाली!
उस पथ में देना तुम फेंक॥

मातृ-भूमि पर शीश चढ़ाने।
जिस पथ जावें वीर अनेक॥

जय हिन्द 🇮🇳 🇮🇳 🇮🇳

ॐ नमः शिवाय! 🙏सभी धर्मप्रेमियों को यह बताते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि हनुमंत आश्रम मंदिर में भगवान शिव के पवित्र शिवल...
28/07/2026

ॐ नमः शिवाय! 🙏

सभी धर्मप्रेमियों को यह बताते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि हनुमंत आश्रम मंदिर में भगवान शिव के पवित्र शिवलिंग की स्थापना का शुभ कार्य दिनांक 27 जुलाई 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है।

आप सभी शिव भक्तों से सविनय निवेदन है कि अधिक से अधिक संख्या में हनुमंत आश्रम पधारें और नव-स्थापित शिवलिंग पर जल अर्पण कर महादेव का आशीर्वाद एवं यह परम सौभाग्य प्राप्त करें।

भगवान भोलेनाथ की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे। हर हर महादेव! 🔱

📍 स्थान: हनुमंत आश्रम पंचमुखी हनुमान जी मंदिर, हनुमंत आश्रम रोड, कोंडरी गोपालपुर, फतेहपुर, बाराबंकी - उत्तर प्रदेश (225306)

🚩 जय श्री राम | जय बजरंगबली 🚩आज हनुमंत आश्रम मंदिर (कोंडरी गोपालपुर, फतेहपुर, बाराबंकी) में बड़े मंडल में भव्य भंडारे का...
23/06/2026

🚩 जय श्री राम | जय बजरंगबली 🚩

आज हनुमंत आश्रम मंदिर (कोंडरी गोपालपुर, फतेहपुर, बाराबंकी) में बड़े मंडल में भव्य भंडारे का आयोजन संपन्न हुआ।

इस पावन सेवा के लिए कोंडरी निवासी भक्त श्री राजाराम वर्मा जी का बहुत-बहुत साधुवाद। 🙏

​प्रभु हनुमान जी महाराज हमेशा अपनी कृपा बनाए रखें! 🚩

26/01/2026

Feeling so proud and patriotic today! 🇮🇳 It's Republic Day, and I'm celebrating the spirit of our incredible nation. Let's remember the sacrifices and embrace the values that make us strong. Soaking in all the good vibes and feeling grateful for this beautiful country we call home. Happy Republic Day, everyone! ❤️

जय श्री रामजय बजरंग बली 🚩
08/01/2026

जय श्री राम
जय बजरंग बली 🚩

19/12/2025
मेरी चौखट पे चल के आज,चारो धाम आये हैं,बजाओ ढोल स्वागत में,मेरे घर राम आये हैं।कथा शबरी की जैसे,जुड़ गयी मेरी कहानी से,ना...
20/10/2025

मेरी चौखट पे चल के आज,
चारो धाम आये हैं,
बजाओ ढोल स्वागत में,
मेरे घर राम आये हैं।
कथा शबरी की जैसे,
जुड़ गयी मेरी कहानी से,
ना रोको आज धोने दो चरण,
आँखों के पानी से,
बहोत खुश हैं मेरे आंसू,
के प्रभु के काम आये हैं।
बजाओ ढोल स्वागत में,
मेरे घर राम आये है।

: संजीवनी बूटी ले जाते समय हनुमान जी को लगा था तीर, अयोध्या में गिरे थे इस जगह पर, जानिए फिर क्या हुआ संजीवनी बूटी ले जा...
09/09/2025

: संजीवनी बूटी ले जाते समय हनुमान जी को लगा था तीर, अयोध्या में गिरे थे इस जगह पर, जानिए फिर क्या हुआ
संजीवनी बूटी ले जाते समय हनुमान जी को लगा था तीर, अयोध्या में गिरे थे इस जगह पर, जानिए फिर क्या हुआ
हनुमान जी श्रीराम के परम सेवक और दूत हैं। वह उनकी सेवा में निरंतर लगे रहते हैं। जब लक्ष्मण जी के प्राण संकट में थे। तब बजरंगबली द्रोणागिरी पर्वत समेत संजीवनी बूटी लेकर अयोध्या नगरी के ऊपर से वापस लौट रहे थे। उसी समय उनको बाण लगा और वह नीचे मूर्छित होकर गिर पड़े। आइए जानते हैं उसके बाद क्या हुआ।

: यह तो आप सभी जानते हैं कि हनुमान जी प्रभु राम के परम दूत हैं और सदैव उनकी सेवा में तत्पर रहते हैं। रामायण में मेघनाथ से युद्ध के दौरान जब लक्ष्मण जी को शक्ति बाण लगा था। तो वह मूर्छित होकर गिर पड़े थे और उनके प्राण संकट में आ गए थे।

तब हनुमान जी सुषेण वेद्य द्वारा बताई गई संजीवनी बूटी लेने गए थे। बजरंगबली जब संजीवनी बूटी लेकर लौट रहे थे तब वह अयोध्या के ऊपर आकाश मार्ग से उड़ते हुए जा रहे थे। तभी उनके ऊपर पर बाण से प्रहार हुआ और वो वहीं गिर पड़े। यह बाण उनको क्यों लगा और किसने चलाया था। इस बात का वर्णन रामचरितमान में तुलसीदास जी ने किया है।

अयोध्या में बाण लगते ही गिरे थे हनुमान
देखा भरत बिसाल अति निसिचर मन अनुमानि।
बिनु फर सायक मारेउ चाप श्रवन लगि तानि॥

अयोध्या से भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास जाने के बाद उनके भाई भरत ने अयोध्या का राजपाट श्री राम की अनुमति से संचालित किए रखा था। भगवान राम के वनवास काल के दौरान अयोध्या का राज भरत जी ने 14 वर्षों तक नंदीग्राम से एक तपस्वी की भाती संचालित किया था। बजरंगबली जब लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी बूटी लेकर वापस लौट रहे थे तो वह अयोध्या के ऊपर से उड़ते हुए जा रहे थे। भरत उस दौरान नंदीग्राम में अपनी तपस्या में लीन थे। रात का समय होने के कारण दूर से वह स्पष्ट देख न सके और हनुमान जी को राक्षस समझ बैठे। उन्हें संदेह हुआ कि यह कोई राक्षस है। जो अयोध्या पर आक्रमण करने की योजना बना रहा है। उन्होंने तुरंत धनुष बाण चला दिया और वह हनुमान जी को जा लगा। इस बात का वर्णन तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में किया है।

परेउ मुरुछि महि लागत सायक। सुमिरत राम राम रघुनायक।
सुनि प्रिय बचन भरत तब धाए। कपि समीप अति आतुर आए॥

लक्ष्मण जी के बाण लगते ही हनुमान जी अयोध्या स्थित नंदीग्राम में मूर्छित होकर गिर पड़े। जैसे ही वह गिरे उन्होंने अपने आराध्या श्री राम का नाम लेना शुरू कर दिया। राम का नाम सुनेत ही भरत जी को लगा यह राक्षस नहीं बल्कि कोई राम सेवक है। वह हनुमान जी के पास दौड़े चले आए।

बिकल बिलोकि कीस उर लावा। जागत नहिं बहु भांति जगावा।
मुख मलीन मन भए दुखारी। कहत बचन भरि लोचन बारी॥

भरत जी में तप से बहुत तेज उत्पन्न हो गया था और बाण का प्रहार इतना था कि हनुमान जी को कई बार जगाने पर भी वह नहीं जागे। तब भरत जी ने कहा यदि राम के प्रति मेरी आस्था निष्कपट है और उनकी कृपा मुझ पर है। तो मूर्छित पड़े हुए इस राम सेवक की पीड़ा शीघ्र ही दूर हो जाए। तब हनुमान जी तुरंत उठ बैठे।

उठने के बाद पहुंचे संजीवनी बूटी लेकर
हनुमान जी ने भरत जी को सारा वृतांत बताया। तब भरत जी को यह जानकर ग्लानी हुए और उन्होंने हनुमान जी से क्षमा मांगी। इसके बाद भरत जी पवन पुत्र से कहते हैं, आप कहें तो मैं इसी बाण से आपको अभी लक्ष्मण जी तक भेज सकता हूं। हनुमान जी ने भरत जी की सहायता न लेते हुए उन्हें प्रणाम किया और उनकी अनुमति लेकर वहां से लक्ष्मण जी के पास संजीवनी बूटी का पहाड़ लेकर चल दिए।

भरत कुंड (नंदीग्राम), अयोध्या में यहीं हुआ था भरत मिलाप
अयोध्या के लिए जो भक्त दर्शन करने आते हैं। वह भरत कुंड नंदीग्राम अवश्य जाते हैं। नंदीग्राम अयोध्या से लगभग 15 से 20 किलोमीटर की दूरी पर है। यह वही जगह है जहां से भरत जी ने भगवान राम के 14 वर्ष वनवास काल के दौरान अयोध्या का राजपाट उनकी खड़ाऊ को सिंहासन पर रख कर चलाया था। भगवान राम जब वनवास से लौटे थे तो सबसे पहले भरत जी से यहीं मिले थे। यही है भरत मिलाप स्थान। यहां भरत जी की एक प्राचीन गुफा है और भगवान राम और मां जानकी का मंदिर भी है। यहां जो भी भक्त सच्चे मन से दर्शन करने आते हैं। उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। लोक मान्यता के अनुसार यहां भरत जी ने निरंतर 14 वर्षों तक राम वियोग में तप किया थी। यहां का वातावरण आज भी बहुत सकारात्मक है। यहीं पर हनुमान जी का एक मंदिर भी है जहां वह मूर्छित हो कर भरत जी के बाण से गिरे थे। इसके अलावा यहां एक कुआं भी है जिसमें भरत जी ने 27 तीर्थों का पवित्र जल डाला था। जिसे यहां आने वाले भक्त प्रसाद रूप में ग्रहण करते हैं।

15/08/2025

आज़ादी के रंग में भक्ति की सुगंध।

हनुमंत आश्रम में स्वतंत्रता दिवस उत्सव।

Holi — where colors speak louder than words. #2025
14/03/2025

Holi — where colors speak louder than words.

#2025

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Hanumant Aashram, Hanumant Aashram Road, Kondri Gopalpur, Fatehpur
Barabanki
225306

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