18/06/2025
तत्वज्ञान के प्रति आश्चर्य व्यक्त करना कोई आश्चर्य नहीं क्योंकि यह तो आश्चर्य में का परम आश्चर्यमय विधान है। भगवान तो जहाँ कही भी रहेगा, उसमें सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड सूक्ष्मतम् रूप में समाहित रहेगा ही। जिस प्रकार भगवान में सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड सदा-सर्वदा ही समाहित रहता,है ठीक उसी प्रकार सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की आश्चर्य से भी आश्चर्यमयी रहस्यात्मक जानकारी भी सदा-सर्वदा तत्त्वज्ञान में समाहित होती या रहती हे । जिसमें से जब, जैसी, जितनी आवश्यकता पड़ती है, प्रकट होती या हो जाया करता है। अर्थात् जब, जैसा, जितना और जिसकी आवश्यकता पड़ी कि तब, तैसा और उतना ही विषय-वस्तु, व्यक्ति-वस्तु, शरीर-सम्पत्ति, सिद्ध-शक्ति-सत्ता भगवान् से सदा-सर्वदा प्रकट या उपलब्ध होता रहता है इसकी वैसी और उतनी ही जानकारी भी तत्त्वज्ञान से सदा-सर्वदा प्रकट होता रहता और जानने-देखने को मिलता है।
🌷 परमपूज्य सन्त ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द जी परमहंस 🌷
🚩🌺 कल्कि अवतार भगवान सदानन्द जी 🌺🚩