12/09/2025
“भारतीय लोकतंत्र को नई दिशा दिखाने वाले प्रोफेसर जगदीप छोकर अब हमारे बीच नहीं रहे । आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व प्रोफेसर और ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR)’ के सह-संस्थापक के रूप में प्रोफेसर जगदीप छोकर 20 सालों से चुनावी और राजनीतिक सुधारों पर काम कर रहे थे ।
भारतीय चुनाव व्यवस्था में 2 बड़े बदलाव प्रोफ़ेसर जगदीप छोकर और उनकी संस्था ADR की देन है जिनमें से एक 2002 में उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि हर उम्मीदवार को अपनी आपराधिक, आर्थिक और शैक्षणिक जानकारी सार्वजनिक करनी होंगी ।
दूसरा बड़ा बदलाव उनकी याचिका पर फरवरी 2024 में आया। 2017 में इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम शुरू की गई थी जिसमें कोई भी व्यक्ति या कंपनी बॉन्ड खरीदकर किसी भी राजनीतिक दल को गुप्त तरीके से डोनेट कर सकता था। जिसके विरोध में प्रोफेसर जगदीप छोकर और उनके साथियों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई ।
प्रोफेसर साहब ने इसे भारतीय मतदाताओं के साथ धोखा बताया जिससे आम नागरिकों को पता नहीं चल पाएगा कि राजनीतिक दलों को चंदा कौन दे रहा है और भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में कॉरपोरेट और राजनीतिक पार्टियों के बीच दलाली को बढ़ावा मिलेगा।
फरवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को असंवैधानिक बताया गया और SBI को आदेश दिया कि बॉन्ड खरीदने और भुनाने वालों की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
तस्वीर 2016 में कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित हमारे एक कार्यक्रम "Gurjar Entrepreneurs Meet" (Organised by Gurjar Pariwar) की है जहां हमने उन्हें मुख्य अतिथि और वक्ता के तौर पर बुलाया था । वहां उन्होंने अपने वक्तव्य में बिरादरी के युवाओं से उद्यमिता के साथ साथ देश के प्रति जिम्मेदारी को लेकर प्रमुखता से बात की । भारतीय चुनावी राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही की नई परंपरा स्थापित करने वाले लोकतंत्र के इस महान योद्धा को विनम्र श्रद्धांजलि
- सुनील नागर