Jai Hanuman Trust

Jai Hanuman Trust Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Jai Hanuman Trust, Non-Governmental Organization (NGO), Kaithawali, Bansdih.

नमस्कार सभी को,
ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य:
हम शुरुआत में 3 महीने मंदिर निर्माण पर फोकस करेंगे। अगर यह सफल होता है, तो आगे भी Trust समाज कल्याण के कार्यों में योगदान देगा।
क्या आपका दिल आज भी गाँव से जुड़ा हुआ है? आइए, मिलकर हम सब इस गाँव की पहचान बनाएं। नमस्कार और जय हनुमान!

आप सभी का इस ट्रस्ट में स्वागत है।

हमारा इरादा और वादा:

इस ट्रस्ट का मूल उद्देश्य:
गांव और समाज का कल्याण करना, एकता को ब

ढ़ावा देना, और भविष्य की पीढ़ियों क े लिए एक मजबूत
नींव तैयार करना।
हम शुरुआत में 3 महीने मंदिर निर्माण पर फोकस करेंगे। यदि यह प्रयास सफल हुआ, तो हम इसे जारी
रखेंगे।

आपक े योगदान का महत्व:
हम आपसे कोई बड़ा त्याग नहीं चाहते। जैसा आप अभी अपना काम कर रहे हैं, वैसा ही करते रहें।
क े वल थोड़ा सा समय, जो आप मुफ्त में निकाल सक ें , गांव क े कल्याण में लगाएं।

हमारे नियम:
हम ऐसा कोई काम नहीं करेंगे, जिससे किसी दूसरे को नुकसान पहुंचे।
नशे के खिलाफ हम सख्त हैं, लेकिन जब तक यह किसी को हानि नहीं पहुंचा रहा, इसे रोकने की जरूरत नहीं।

हमारी कोशिशें:
हम कड़ी मेहनत करेंगे ताकि हमारी संस्कृति और सभ्यता को बचाए रखा जा सके।
हम कोशिश करेंगे अपने गांव को एक टूरिस्ट अट्रैक्शन बनाने की, ताकि देश और दुनिया की नजर हमारे गांव पर पड़े।
हम हमेशा एकजुट होकर काम करेंगे, बिना अपने परिवार का साथ छोड़े, ताकि ट्रस्ट और समाज के कल्याण के लिए काम किया जा सके।
हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारे गांव का कोई भी भाई, माता, बहन, पिता, चाचा, चाची या ताऊ भूखा न सोए।
हम कोशिश करेंगे कि हमारे गांव की कोई भी बेटी बिना ब्याही न रहे।
हम रोजगार के ऐसे साधन लाने की कोशिश करेंगे, जिससे हम 40 के बाद वित्तीय स्वतंत्रता हासिल कर सकें और बुढ़ापे को एक साथ अपने गांव में बिताया जा सके।

# # # हमारा मिशन

1. कौशल-आधारित शिक्षा: नई पीढ़ी को कौशल-आधारित शिक्षा प्रदान करना, जिससे वे नौकरी पर निर्भर होने के बजाय व्यवसायिक सोच विकसित कर सकें।
2. जीवन मार्गदर्शन: लोगों को जीवन का सही अर्थ समझाने और उसे सार्थक ढंग से जीने की शिक्षा देना।
3. संस्कृति संरक्षण: हर वर्ष हमारी संस्कृति, परंपराओं और रीति-रिवाजों को संरक्षित करने और उन्हें निभाने की जिम्मेदारी लेना।
4. समग्र सहायता: जरूरतमंदों को आर्थिक, शारीरिक और कानूनी सहायता प्रदान करना।
5. पर्यटन विकास: सुरहाताल झील की क्षमता का उपयोग करके गांव को एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना और स्थानीय समुदाय को लाभ पहुंचाना।
6. स्वच्छ और अनुशासित समाज: एक सामंजस्यपूर्ण और स्वस्थ जीवन के लिए स्वच्छता और अनुशासन को बढ़ावा देना।
7. स्वरोजगार के अवसर: आधुनिक कौशल सिखाकर उत्पादन और मूल्य सृजन को बढ़ावा देकर स्वरोजगार को प्रोत्साहित करना।
8. धरोहर पुनर्निर्माण: हमारी विरासत और पूर्वजों की संपत्तियों को पुनर्स्थापित और संरक्षित करना।
9. गौशाला: पशुओं के कल्याण के लिए गांव में एक गौशाला की स्थापना करना।
10. वृद्धाश्रम: बुजुर्गों की देखभाल और समर्थन के लिए एक वृद्धाश्रम का निर्माण करना, जिससे वे सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर सकें।

क्या आपका दिल आज भी गाँव से जुड़ा हुआ है? आइए, मिलकर हम सब इस गाँव की पहचान बनाएं।

नमस्कार कैथवली और जय हनुमान जैसे जैसे मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का दिन नज़दीक आ रहा वैसे वैसे मौसम में गर्मी के साथ साथ माहौ...
16/02/2025

नमस्कार कैथवली और जय हनुमान

जैसे जैसे मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का दिन नज़दीक आ रहा वैसे वैसे मौसम में गर्मी के साथ साथ माहौल भी गरमाया हुआ है ।
ये हिंदू समाज मंदिर के नाम पर कट मीट मारेगा । मैं सोच रहा था अभी हमारा गाव ५० साल पीछे है लेकिन नहीं हम सब अभी १०० साल पीछे है । हम आज़ाद नहीं हुए है है अभी भी । अभी भी हम ग़ुलाम है अपनी नाकारापन, पिछड़ी सोच और चंद लालच के चक्कर में । कोई मंदिर का काम नहीं कर सकता यहां तो कोई हिंदू मुस्लिम नहीं है तो गंदी राजनीति को साइड रख के काम क्यों नहीं कर सकता हम

आओ तुम्हें समझता हूँ तुम्हारा हमारा हम सब का वजूद क्या है । और पैदा ही क्यों हुए थे तुम ? कभी सवाल पूछा है ख़ुद से नहीं पूछा तो ख़ुद से पूछो ।

तीन तत्वों को नित्य कहा गया है- ईश्वर , आत्मा (पुरुष) तथा प्रकृति । ईश्वर नियामक है- आत्मा तथा प्रकृति के संयोग से सृष्टि होती है | पुरुष की चेतना के कारण चित, इन्द्रिय आदि चेतन्वत समस्त कार्यो का संबपादन करने लगते है । जब मृत्यु के समय आत्मा चेतना का साथ शरीर से छूट जाता है तो वह शरीर जो समस्त क्रिया कलाप का आधार था , निष्क्रिय होकर नष्ट हो जाता है । फ़र्क़ नहीं पड़ता की आप ४ फूटिये हो या ६futiye, गंजेड़ी हो या सात्विक , गुंडा हो या साधु । शरीर, मन , बुद्धि, अहंकार, इन्द्रिय आदि सब उसी चेतना से चेतन है और सब में एक जैसा है ।

आज के वैज्ञानिक युग में मानव आत्मत्व तथा ईश्वर दोनों ही तत्वों को नकार रहा है । वह स्वयंभू होकर अपने हाथ में सब कुछ कर लेना चाहता है । केवल उसी की सत्ता स्थापित हो जाए- इसके लिए अहनिश्र प्रयतनशील है । यही महती प्रभुतत्वाकांक्षा उसे चैन से रहने नहीं देती । अपनी यथार्थ सत्ता को पहचानने में बाधक बन गई है । इसी कारण अपने बनाये जाल में स्वयं ही आबद्ध होकर वह अधिकाधिक लिपटता जाता है । जब वह स्वयं को सबकुछ करने में असमर्थ पाता है तो तनाव, चिंता, निराशा, कुंठा, अवसाद जैसे मानसिक रोगों से ग्रस्त हो जाता है । जिससे शारीरिक व्याधियों से भी पीड़ित होकर शेष जीवन को दूभर बना लेता है । इसी रोग से ग्रस्त होकर दूसरो के हक का म|रना , अपने मुंह मिया मिथू करना और अपने से कमजोर बड़े बुजुर्गों पर अपनी मर्दांगनी दिखता है । यही उसकी नासमझी न्ही तो क्या है ?

भगवद गीता – अध्याय 2, श्लोक 62 एवं 63

इन श्लोकों में बताया गया है कि कैसे इच्छाएँ मनुष्य के विनाश का कारण बनती हैं। यहां इसका विस्तार से वर्णन किया गया है:

भगवद गीता – अध्याय 2, श्लोक 62

ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।
सङ्गात् संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥ २.६२॥

अर्थ:
जब कोई व्यक्ति इंद्रियों के विषयों (भौतिक सुखों) का चिंतन करता रहता है, तो उनमें आसक्ति उत्पन्न होती है। आसक्ति से इच्छा (काम) जन्म लेती है और इच्छा पूरी न होने पर क्रोध उत्पन्न होता है।

व्याख्या:• जब हम बार-बार इंद्रिय सुखों (वस्तुएँ, लोभौतिक वस्तुएँ) के बारे में सोचते हैं, तो उनमें आसक्ति हो जाती है।
• यह आसक्ति इच्छा (काम) में बदल जाती है, जिससे व्यक्ति उन्हें पाने की लालसा करने लगता है।
• यदि यह इच्छा पूरी नहीं होती, तो क्रोध (क्रोध) उत्पन्न होता है।

भगवद गीता – अध्याय 2, श्लोक 63

क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः।
स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥ २.६३॥

अर्थ:
क्रोध से मोह उत्पन्न होता है। मोह से स्मृति का नाश होता है। जब स्मृति नष्ट हो जाती है, तो बुद्धि का विनाश होता है, और जब बुद्धि नष्ट हो जाती है, तो मनुष्य का पतन हो जाता है।

व्याख्या:
• क्रोध (Krodha) बुद्धि को भ्रमित कर देता है और मोह (Sammoha) उत्पन्न करता है, जिससे व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति कमजोर हो जाती है।
• मोह के कारण व्यक्ति अपनी स्मृति (Smriti Vibhrama) खो देता है और अपने मूलभूत जीवन मूल्यों एवं पूर्व में सीखे गए सबक भूल जाता है।
• जब स्मृति का नाश हो जाता है, तो बुद्धि (Buddhi) का नाश हो जाता है, जिससे व्यक्ति गलत निर्णय लेने लगता है।
• जब बुद्धि नष्ट हो जाती है, तो व्यक्ति का आत्मिक, नैतिक और भौतिक रूप से पतन (Pranashyati) हो जाता है।

इन दोनों श्लोकों का सारांश:
1. बार-बार भौतिक सुखों का चिंतन करने से आसक्ति पैदा होती है।
2. आसक्ति से इच्छा (काम) उत्पन्न होती है
3.इच्छा पूरी न होने पर क्रोध उत्पन्न होता है।
4. क्रोध से मोह उत्पन्न होता है, जिससे व्यक्ति सही और गलत में अंतर नहीं कर पाता।
5. मोह के कारण स्मृति और विवेक का नाश हो जाता है, जिससे व्यक्ति का पतन हो जाता है।
इन श्लोकों में यह बताया गया है कि कैसे अनियंत्रित इच्छाएँ और भावनाएँ मनुष्य को विनाश की ओर ले जाती हैं। भगवान श्रीकृष्ण विरक्ति (detachment) और आत्म-नियंत्रण (self-control) अपनाने की सलाह देतेहैं ताकि इस पतन के चक्र से बचा |
यहाँ कृष्ण इमोशनल स्पाइरल की बात कर रहे जिससे रिलेटेड कुछ पिक्चर्स मैं पोस्ट के साथ एड कर रहा हूँ ताकि पोस्ट का मतलब समझ आए आप सबको । खैर फ़र्ज़ी १० के सर्टिकफ़िकेट बनवा कर नौकरी पकड़ने वाले लोगो के समझ से परे की बात है तो पिछले कुछ दिनों में जो हुआ उससे एक्सपीरियंस लेते हुए unse कोई उम्मीद भी न्ही है क्यों की किसी सज्जन पुरुष ने मुझसे कहा था कभी

“you can only change yourself not others ! So don’t make any permanent stupidity when you are temporary emotional damaged. “

मानव को इन कष्टों से मुक्ति के लिए निज स्वरूप को जानने की अवश्यकता है । जीवन जीने के लिए सर्वशक्तिमान परमेश्वर की सत्ता में विश्वास तथा मानवोचित आचरण की नितांत आवश्यकता है । इसके लिए मानवीय चेतना के विकास की आवश्यकता होगी । आईसीयू में भर्ती होके केवल ये शरीर ठीक हो पाएगा कितना होगा परमेश्वर जाने ।

आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, “तुम पैदा ही क्यों हुए?” इस प्रश्न का उत्तर अलग-अलग परंपराओं और दर्शनशास्त्रों में भिन्न हो सकता है। लेकिन कुछ मुख्य आध्यात्मिक उत्तर इस प्रकार हैं:

1. कर्म और पुनर्जन्म (Hinduism, Buddhism, Jainism)
• तुम्हारा जन्म तुम्हारे पिछले जन्मों के कर्मों का परिणाम है।
• तुम्हें अपने अधूरे कर्मों को पूरा करने और आध्यात्मिक उन्नति के लिए यह जीवन मिला है।
• यह संसार एक विद्यालय है, जहाँ आत्मा को सीखना और अपने दोषों को सुधारना है।

2. मोक्ष या आत्म-साक्षात्कार (Vedanta, Upanishads)
• आत्मा परमात्मा (ब्रह्म) का ही अंश है, लेकिन अज्ञान के कारण यह संसार में बंधी हुई है।
• जीवन का उद्देश्य माया (भ्रम) से मुक्त होकर आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करना है।
• जब तुम स्वयं को “शरीर” या “मन” से अलग आत्मा के रूप में पहचानोगे, तो मोक्ष की ओर बढ़ोगे।

3. सेवा और प्रेम (Bhakti Yoga, Sufism, Christianity)
• तुम्हारा जन्म ईश्वर की सेवा और प्रेम के लिए हुआ है।
• भगवान ने तुम्हें भेजा ताकि तुम उनके भक्त बनो और संसार में प्रेम, करुणा और अच्छाई फैलाओ।
• जैसे श्रीकृष्ण ने कहा: “सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।” – सब कुछ छोड़कर मेरी शरण में आओ।

4. अनुभव और विस्तार (Modern Spirituality, New Age Thinking)
• आत्मा नए अनुभवों को प्राप्त करने के लिए जन्म लेती है।
• तुम अपनी आत्मा की यात्रा का हिस्सा हो, जिसमें सीखना, अनुभव करना और बढ़ना शामिल है।
• यह जीवन खुद को खोजने, अपने डर से लड़ने और अपने सत्य को पहचानने का अवसर है।

5. कोई उद्देश्य नहीं – बस अस्तित्व ही सब कुछ है (Advaita, Zen Buddhism)
• कोई पूर्व-निर्धारित उद्देश्य नहीं है।
• तुम हो, इसलिए हो। बस इस क्षण में जीना ही जीवन का सार है।
• “तत्त्वमसि” – तुम स्वयं ब्रह्म हो, तुम्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं, कुछ बनने की जरूरत नहीं।

निष्कर्ष

तुम्हारा जन्म संयोग नहीं, बल्कि एक यात्रा है – कुछ सीखने, अनुभव करने और आत्मा के स्तर पर आगे बढ़ने के लिए।
अब सवाल यह है – तुम अपने जीवन को किस दिशा में ले जाना चाहते हो?

ट्रस्ट को कोई क्रेडिट गेम न्ही चाहिए इसलिए नाम भी उजागर न्ही किया है । trust एक शुरुवात थी की सब भाई मिलकर चीज़ो को आगे तक लेकर जाये लेकिन जब तुम्हे मंजूर न्ही तो तुम ही करो । हदसबादी में सबसे पैसा इक्कठा करना तुम्हारा डर दिखा रहा है ट्रस्ट को चंदे के पैसे का लालच नहीं है ट्रस्ट के लोग खुद काम करेंगे खुद पैसा बनाएंगे और समाज कल्याण में लगाएंगे ये एक सोच है जो तुमने अपना समय केवल दिखावा के लिए किया जिसका कोई लाभ गाव के लोगो को नहीं मिला उल्टा नुक्सान अलग हुआ लेकिन कमजोर या बुजदिल समझ के बेवक़ूफ़ मत बनाओ।

गाव की शांति बनाये रखने के लिए ट्रस्ट अपना हाथ मंदिर के काम से खीच सकता है और ट्रस्ट अपना समय और पैसा बृद्ध आश्रम बनवाने में शिफ्ट कर सकता है बसरते डिसिशन जानता का हो ना की चंद लोगो के सुझाव का .क्युकी जो चंद लोग सुझाव लेकर aarhe hai हमे रोकने के लिए उन्हें इतना समझ होना चाहिए की एक बार मंदिर की taraf देख के पूछे की जो १० लाख १० लाख का माला जपा जा रहा है की मैंने लगाया मैंने लगाया उतने का काम हुआ भी है अभी तक ?? �आज तक जब मंदिर का काम शुरू न्ही हुआ था और जब शुरू किया तो अड़ंगा लगाना और पोल्टिक्स लेकर आगये । इंडिविजुअल मेरे परिवार का क्या कंट्रीब्यूशिन है वो जो ऑनलाइन है वो तो रिकॉर्डेड है जो कैश घर से भाई बन कर ले गए थे उसको मैं दान समझ कर तुम्हें कर दिया और उसका जिकर भी कभी किसी के सामने नहीं किया ना करूँगा । ५ लाख का ५०lakh बनाने का औक़ात और प्रतिभा पर भरोसा है मुझे ख़ुद पर । लेकिन जो १० लाख तुमने लगाए उसका कोई हिसाब है या बस मुँह से बोल देना है , और मंदिर केवल तुम बनवा रहे हो तो थोड़ा ठंडे दिमाग से लोग सोचे कि जब पेंट कोई और करा रहा है ..ग्रिल कोई और लगवा रहा है, टाइल्स कोई और लगवा रहा है, मूर्ति और प्राणप्रतिष्ठा कोई और देख रहा है ..निर्माण में भी सीमेंट, छड, बालू आधा पैसे से आया आधा लोगो ने मंदिर के नाम पर दिया ,ऊपर से मिस्त्री बोल रहा वो अपना मजदूर नहीं ले रहा..तो 10 लाख लग रहा है भाईसाहब? कहा बोल रहे हो सब सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड है तो कहो तो पब्लिक करवा दु । पुलिस थाने में भी यही रट लगाये थे ना ?��

लेकिन फिर भी आप बड़े बुजुर्गों के विचार को ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट एक फैसला करता है और अपना योगदान मंदिर के काम से बंद करने के लिए रेडी है क्युकी वही पैसे बृद्ध आश्रम में लगायेगा ट्रस्ट | मंदिर एक आस्था है लेकिन लोगो की ज़रूरत कुछ और है । लेकिन ट्रस्ट रुकेगा न्ही । मुझे मेरा काम करना है तो मैं करूँगा । तुम्हारी जो इमेज है समाज में वैसा इमेज लेकर तो nahi मरना पसंद करूँगा मैं एटलीस्ट । ये नई पीढ़ी बातों के साथ साथ लातो के देवता को भी मानना जानती है । बसरते डिसिशन गांव के लोगो का हो । क्युकी ये मंदिर या ग्रामसमाज का कोई भी काम किसी एक व्यक्ति या परिवार
की जागीर न्ही हो सकता और हमारे पुराने पंच प्रमुख पंचायत के अपनी बेसिक बुद्धि भी लगाने के काबिल न्ही है जो सो कॉल्ड प्रतिनिधि को बैठा कर ये सवाल जबाब कर सके की ये ट्रस्ट के लोग कहाँ ग़लत है जिसका हिस्सा हमने इनको भी समझा था ।

या तो पेपर पर ग़लत साबित करो या फिर शांत बैठो गीदड़ धमकी से न्ही डरता । जिस तरीक़े से आओगे सम्भाल लिए जाओगे । तुम पीठ पीछे कायराना हरकत करोगे मैं सबके सामने तुम्हें खुल के आने को बोलूँगा बाक़ी डिसाइड करने दो गाव की जानता को ।

आप सभी से अनुरोध है पोल में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले । चुकी ये फेसबुक ग्लोबल लेवल पर पोस्ट दिखता है तो केवल कैथवाली के लोगो और उनके रिस्तेदारो का वोट काउंट किया जाएगा

📢 पोल प्रश्न:
“क्या मंदिर के काम से Jai Hanuman Trust को अपना योगदान हटा लेना चाहिए और ट्रस्ट का हिस्सा वृद्धाश्रम को देना चाहिए?”

🗳️ विकल्प:
1️⃣ हां, योगदान वृद्धाश्रम को जाना चाहिए।
2️⃣ नहीं, मंदिर के कार्य में ही लगा रहना चाहिए।
3️⃣ दोनों कार्यों में संतुलित रूप से योगदान देना चाहिए। पहले एक ख़त्म हो फिर दूसरा शुरू होम चाहिए ।

📢 दूसरा पोल प्रश्न:
“जब बजट गलत तरीके से बताया जाए और जितने का काम न हो, तब हिसाब मांगना गलत है?”

🗳️ विकल्प:
1️⃣ नहीं, पारदर्शिता ज़रूरी है, हिसाब मांगना सही है।
2️⃣ हां, बिना सवाल किए देना चाहिए।
3️⃣ यह स्थिति पर निर्भर करता है।

📢 तीसरा पोल प्रश्न:
“अगर 5 लाख रुपये तक कैश दिए गए हों, तो उसकी रसीद मांगना गलत है?”

🗳️ विकल्प:
1️⃣ नहीं, रसीद मांगना पूरी तरह सही है।
2️⃣ हां, भरोसे के आधार पर रसीद की ज़रूरत नहीं।
3️⃣ यह देने वाले और लेने वाले की आपसी सहमति पर निर्भर करता है।jab वो दोनों भाई हो ।

➡️ अपने विचार कमेंट में साझा करें!

आप इसे फेसबुक पर पोस्ट कर सकते हैं और चर्चा को आगे बढ़ा सकते हैं।

धन्यवाद,
दुबारा मुलाक़ात होगी
जय हनुमान ट्रस्ट का एक सदस्य

नमस्कार कैथवली और जय हनुमान!आशा करता हूँ कि आपके जीवन में भी सब कुछ कुशल-मंगल हो।जब हाथ की पाँचों उंगलियाँ एक साथ खुली ह...
03/02/2025

नमस्कार कैथवली और जय हनुमान!
आशा करता हूँ कि आपके जीवन में भी सब कुछ कुशल-मंगल हो।

जब हाथ की पाँचों उंगलियाँ एक साथ खुली हों, तो वे एक मजबूत मुट्ठी बना सकती हैं।
लेकिन अगर उन्हीं उंगलियों में से किसी एक में घाव हो जाए और लाख इलाज के बाद भी ठीक न हो, तो उसे काट देना ही बेहतर होता है ताकि बाकी हाथ स्वस्थ रह सके।

परिवार के कुछ मामलों में भी यही दृष्टिकोण अपनाना पड़ता है।

हाल ही में मंदिर के निर्माण कार्य में कुछ रुकावटें आईं। हालांकि सभी ने मिलकर काम को फिर से शुरू करवाया, लेकिन कुछ लोगों को यह बात खटक गई।
क्यों?
क्योंकि मैंने सीसीटीवी कैमरा लगवा दिया है, अब इससे जो गड़बड़ ये करने वाले थे, कम से कम वो तो पता चल रही है। इनकी मंशा यही थी कि इस काम को खींच-तान कर आगे बढ़ाया जाए ताकि प्रधानni में अपनी छवि बनाई जा सके।
क्या मैंने कुछ गलत किया?
अगर किसी ने मेरी बातों को गलत साबित किया होता, तो मैं जरूर विचार करता। लेकिन जब उद्देश्य अच्छा हो, तो रुकावटें भी एक परीक्षा बन जाती हैं। इसलिए हमने काम जारी रखा।

कद छोटा होना कोई समस्या नहीं है, पर सोच का छोटापन जरूर है।
खैर, 4 फुट के आदमी से क्या ही उम्मीद करना, लेकिन जब वो बड़ा हुआ तो मैंने थोड़ी गंभीरता से लिया। बात करने पर समझ आया कि ये तो बेवकूफ है। जब सब भाई मिलकर काम कर रहे हैं, तो ये अकेला ही अलग होकर भाग रहा है।
क्यों? क्योंकि ये तो क्रेडिट का खेल चल रहा है। मैंने तो कहा था कि तुम्हारी मूर्ति बनवा दी जाएगी, क्योंकि हमें क्रेडिट नहीं, काम चाहिए। तुम्हारी नीयत में ही खोट है।अगर तुम सच में काम करते, तो तुम्हारा नाम होता। लेकिन तुमने तो काम किया, बस नाम डुबोने के लिए।

कुछ लोग, जिनकी योग्यता पर सवाल उठते हैं, दूसरों के प्रयासों को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं। पर सत्य को छुपाया नहीं जा सकता।

अगर सब कुछ ठीक होता, तो परिवार के पुराने मामलों में भी विवाद न होते। जमीन के मामलों में हुए अनियमितताओं को, कैसे ज़मीन के मामले में जेल में ठुसे गए थे, वो सबको अच्छी तरह याद है, गाँव जानता है, पर कुछ लोगों को शर्म महसूस नहीं होती।

अब जैसे बाप वैसे बच्चे... चीटिंगबाजी, धूर्तता बच्चों में बाप के जीन से आई है, तो उनसे समझदारी की उम्मीद हमारी गलती थी। बच्चे भी उसी राह पर आ गए।

यह समस्या केवल व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि नीयत से जुड़ी है।
जब नीयत में खोट हो, तो भले ही मंदिर के आसपास ज़मीन खरीद ली जाए, काम का उद्देश्य केवल लाभ कमाना बन जाता है।
पर मेरा उद्देश्य केवल मंदिर निर्माण है और यह काम रुकना नहीं चाहिए।

परिवार में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मंदिर के काम को राजनीति या स्वार्थ से जोड़ना उचित नहीं है।
मैं सभी से निवेदन करता हूँ कि मंदिर को किसी भी प्रकार की सौदेबाज़ी से दूर रखें।
वोट काम के आधार पर मांगिए, मंदिर के नाम पर नहीं।

जवाबदेही जरूरी है:

जो भी चंदा एकत्रित हुआ है, उसका पूरा हिसाब देना होगा। यह कोई व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि पूरे गाँव और ट्रस्ट की जिम्मेदारी है।

कुछ लोग अपने अतीत की गलतियों से नहीं सीखते। पर अब समय बदल गया है।
नई पीढ़ी सवाल पूछेगी और जवाबदेही मांगेगी।और जिन भाइयों की बात हो रही थी, उनमें से एक उंगली को आज हम अलग कर रहे हैं और अपने परिवार, खानदान से बेदखल कर रहे हैं। इस परिवार के पीछे अब बाकी परिवार के लोग खड़े नहीं होंगे। तो जिसे जो करना है कर लो, बस मंदिर का काम रुकना नहीं चाहिए, क्योंकि यह परिवार का नहीं, पूरे गाँव का मामला है।

अंत में, मेरा अनुरोध है:
मंदिर का कार्य रुकना नहीं चाहिए। यह केवल एक परिवार या व्यक्ति का काम नहीं है, बल्कि पूरे गाँव की आस्था और विश्वास का प्रतीक है। और जब तक ये हिसाब नहीं देता, तब तक पैसों की चिंता मत करना, ट्रस्ट इसकी पूरी जिम्मेदारी ले रहा है।

चलो आज तो हम बाहर हैं तो तुम धमाका सकते हो अपने दरवाजे पर बुला कर मेरे पिताजी को धूर्तता से बुला कर..दम है तो मेरे दरवाजे पर चढ़ कर करो, मैं भी तो देखु और दुनिया को दिखाओ कैसे मिर्ची लग रही तुम्हें नहीं तो टिकट करा देता हूं आजाओ मेरे से फ़रिया लो क्योंकि तुम जैसे बेवकूफ़ के चक्कर में यहां से तो आऊंगा नहीं...हां अप्रैल में आ रहा हूं तो सामने से बैठ जाना पूरे गांव के सामने.. या तो गलत साबित करो मुझे या अपना 4 फुट की ऊंचाई में से 100 ग्राम का दिमाग लेकर अपनी इज्जत बचाओ क्योंकि अब मैं नीलम करूंगा तुम्हारी हरकते..करतूत और तुम्हारी नियत.

जय हनुमान!

नमस्कार कैथवली और जय हनुमान! आप सभी का इस ट्रस्ट में स्वागत है।अभी कुछ दिनों से गांव ,हाँ वही, बांसडीह बेरुआरबारी रोड पर...
20/01/2025

नमस्कार कैथवली और जय हनुमान!
आप सभी का इस ट्रस्ट में स्वागत है।

अभी कुछ दिनों से गांव ,हाँ वही, बांसडीह बेरुआरबारी रोड पर बसा हुआ कैथवली, में आप सभी ने एक पोस्टर देखा होगा और यह चर्चा का मुख्य विषय भी बना हुआ होगा।
सब लोग सोच रहे होंगे कि अचानक से हनुमान ट्रस्ट कैसे आ गया? ये कौन हैं? कुछ लोग बिना पढ़े, बिना समझे बातों का बतंगड़ बनाने में लग गए हैं।
इसीलिए कहा जाता है:

"लइकन के पढ़ावा ना त शहर में बसावा..."

जिस किसी छोटे,बड़े,बूढ़े हमारे सम्मानजनक शिशु, मित्र या अभिभावक को ये लग रहा है कि बिना किसी स्किल सीखे तुम्हें मौका मिलेगा, तो, वो सिर्फ लेबर कैटेगरी का काम होगा। चाहे बाहर जाकर करो या मेरे पास आकर कर लो।

लेकिन हमने पोस्टर में साफ-साफ लिखा है:

"रोज़गार लाने की कोशिश करेंगे।"

इसका मतलब है कि पहले तुम्हें सिखाया जाएगा, फिर रोज़गार मिलेगा।
अगर तुम्हें सीखने में दिलचस्पी नहीं है, तो वही करो जो अब तक कर रहे हो।

गाय 🐄 ना बाछा, नींद पड़े आछा |

बाकी, आगे बढ़ो और कुछ नया सोचो!

अब कुछ भी शुरू करने से पहले, मैं तुम्हें यह बताना चाहूंगा कि Trust/NGO क्या होता है…

एनजीओ (गैर-सरकारी संगठन) ऐसी संस्थाएं होती हैं जो आमतौर पर किसी विशेष उद्देश्य या लक्षित समुदाय के कल्याण के लिए कार्य करती हैं। क्योंकि ये गैर-लाभकारी क्षेत्र में काम करती हैं, इसलिए इनके उद्देश्य और कार्य करने का तरीका प्रॉफिट आधारित संगठनों से थोड़ा अलग होता है। अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए, एनजीओ को शुरुआत से ही एक वास्तविक और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। इसके अलावा, भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित नियम और कानूनों का पालन करना अनिवार्य है।

यहां आपके अपने एनजीओ को शुरू करने के लिए एक संक्षिप्त चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका दी गई है।

1.अपने एनजीओ के उद्देश्यों और मिशन-विज़न को स्पष्ट करें।
2.एनजीओ पंजीकरण से पहले प्रमोटर्स बॉडी का गठन करें, जो प्रारंभिक संचालन और निर्णय लेने के लिए जिम्मेदार होगी।
3.ट्रस्ट डीड/मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन/नियम एवं विनियम तैयार करें, जिसमें एनजीओ का नाम, पता, मिशन और प्रशासन से जुड़ी जानकारी हो।
4.भारत में एनजीओ को निम्नलिखित अधिनियमों के तहत पंजीकृत किया जा सकता है:
सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट
सोसाइटीज़ रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860
कंपनीज एक्ट, 2013 (गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में)

5.फंड जुटाने के लिए सदस्यता शुल्क, दान, बिक्री, सरकारी अनुदान, निजी या विदेशी स्रोतों से सहायता का उपयोग करें। विदेशी फंड के लिए एफसीआरए 2010 का पालन करें।
6.अन्य एनजीओ, सरकारी एजेंसियों, मीडिया और कॉर्पोरेट जगत के साथ पेशेवर नेटवर्क बनाएं। साझेदारी ही एनजीओ की सफलता का आधार है।

इस मंदिर और ट्रस्ट का संबंध

आप सभी जानते हैं कि यह मंदिर कई पीढ़ियों से अधूरा पड़ा था। कई बुजुर्गों ने इसे पूरा करने की कोशिश की, लेकिन किसी न किसी कारण से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया और अगर कभी शुरू हुआ भी, तो किसी कारणवश बीच में ही रुक गया।
अब बारी हमारी आई। धीरे-धीरे सभी अपने-अपने कामों में व्यस्त हो गए, लेकिन जब परिवार के सभी सदस्य एकत्र हुए तो बातचीत के दौरान मंदिर के निर्माण की शुरुआत हुई। जैसे ही पहला कदम बढ़ा, गांव के और भी लोग साथ आ गए और मंदिर का काम शुरू हो गया। सभी ने अपनी-अपनी जिम्मेदारियां संभालीं और निर्माण में जुट गए।
इसी बीच परिवार के एक बुजुर्ग सदस्य की तबीयत बिगड़ गई। समाज कल्याण से पहले परिवार का ध्यान रखना आवश्यक था, इसलिए जो ग्राउंड लेवल पर देखरेख कर रहे थे, उन्हें न चाहते हुए भी अपना ध्यान दूसरी ओर लगाना पड़ा। इस वजह से मंदिर का काम रुक गया। हमने यह तय किया था कि काम तभी शुरू करेंगे जब उसे पूरा करने की पूरी क्षमता होगी।
हमें ज़रूरत थी कि ग्राउंड लेवल पर और भी लोग जिम्मेदारी के साथ मिलकर काम करें, ताकि काम तेज़ी से आगे बढ़ सके। क्योंकि हम अपने तय कार्यक्रम से पीछे चल रहे थे।
जब परिवार में या आपस में बातचीत होती है तो सबकी सोच स्पष्ट होती है। मैंने देखा कि जब सभी इतने सक्रिय हैं, तो क्यों न इसे एक समूह का नाम दिया जाए और इसे एक संगठन की तरह आगे बढ़ाया जाए। कल करने से आज करो, आज करने से अब।—सिर्फ कहने से कुछ नहीं होता। हमने कर दिखाया।

Trust की शुरुआत और योजना

सभी भाई एक-दूसरे से जुड़े, हमने एक ग्रुप बनाया।
हर किसी ने अपनी सोच और प्रस्ताव रखा कि कौन क्या करना चाहता है या किसकी क्या राय है। जैसा कि मैंने आपको ऊपर समझाया, हर ट्रस्ट को शुरू करने के लिए समस्याओं को नोट करना बहुत जरूरी है, और समस्याओं के साथ-साथ मिशन का होना भी जरूरी है। और अधिकांश मत के साथ हमने अपना पहला मिशन तय किया, पहले रुकावटों को ठीक करने का लक्ष्य रखा और फिर हम बाजार में उतर गए।

मैं आप सभी को हमारे उद्देश्य और लक्ष्य के बारे में स्पष्ट कर देना चाहता हूं, ताकि किसी को कोई गलतफहमी न रहे।

हमारा इरादा और वादा:

1.इस ट्रस्ट का मूल उद्देश्य:
गांव और समाज का कल्याण करना, एकता को बढ़ावा देना, और भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक मजबूत नींव तैयार करना।
2.हम शुरुआत में 3 महीने मंदिर निर्माण पर फोकस करेंगे। यदि यह प्रयास सफल हुआ, तो हम इसे जारी रखेंगे।
3.बजट की स्पष्टता, और कलेक्शन जिन्होंने नाम लिखवाकर भी भुगतान नहीं किया है
4.हर योगदानकर्ता को साप्ताहिक अपडेट देना।
5.प्राण प्रतिष्ठा की योजना और निष्पादन।
6.डिजाइन और कार्य प्रबंधन|

खाली टाई बेल्ट देने से ना होगा" वाली आपकी शिकायत को गंभीरता से लेकर अब केवल टाई बेल्ट ना देकर पूरी जिम्मेदारी और लक्षित तारीख के साथ मंदिर का निर्माण हम दुबारा शुरू कर रहे हैं।
जो छपवाया है वही लोग बनवा रहे हैं, तो शायद आपको जवाब मिल गया होगा और अब आप यह नहीं कहेंगे "जे चिपवाइलेबा उहे कहे नाइखे बनवा देते…

कृपया करके अफवाहों से दूर रहें और हमें थोड़ा वक्त दें। समय के साथ-साथ सोच और काम आपको दिखने लगेगा।
जय हनुमान ट्रस्ट का एक सदस्य।

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